चीन-भारत आर्थिक-व्यापारिक सहयोग का भविष्य उज्ज्वल है - अजित राणाडे

2018-04-27 18:56:32
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चीन-भारत आर्थिक-व्यापारिक सहयोग का भविष्य उज्ज्वल है - अजित राणाडे

वू हान में शी चिनफिंग और मोदी की मुलाकात

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 28 अप्रैल तक मध्य चीन के हूपेई प्रांत की राजधानी वूहान की यात्रा कर रहे हैं। चीनी और भारतीय नेताओं के बीच घनिष्ठ संपर्क किया जा रहा है। उनकी मुलाकात पर दोनों देशों का ध्यान लगातार केंद्रित है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात से चीन-भारत संबंधों के विकास में लाभदायक होगी। भारतीय आदित्य बिड़ला ग्रुप के मुख्य अर्थशास्त्री अजित राणाडे का मानना है कि चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का भविष्य और विस्तृत होगा।  

हाल के वर्षों में चीन और भारत के बीच आर्थिक-व्यापारिक आवाजाही दिन प्रति दिन घनिष्ठ हो रही है और संबंधित सहयोग क्षेत्र में भी अधिकाधिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार 84.4 अरब अमेरिकी डॉलर तक जा पहुंचा है,  जो साल 2016 की तुलना में 20.3 फीसदी अधिक रहा और इतिहास में एक रिकॉर्ड बन चुका है। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। चीन में भारत से आयात की राशि 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, द्विपक्षीय व्यापार और संतुलित हो रहा है। इसके साथ ही, चीन और भारत के बीच निवेश का सहयोग भी लगातार उन्नत होता जा रहा है। अभी तक चीनी उद्यमों ने भारत में कुल 8 अरब डॉलर का निवेश किया है। वहीं, पिछले 3 वर्षों में भारतीय उद्यमों के चीन में निवेश में सालाना 18.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। गत मार्च 2018 में, चीनी वाणिज्य मंत्री चोंग शान ने भारत की यात्रा की। दोनों देशों के उद्यमों ने 101 व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनकी कुल राशि 2.3 अरब अमेरिकी डॉलर है। अजित राणाडे के विचार में यह चीन और भारत के बीच सहयोग के उज्जवल भविष्य का प्रतीक है।

चीन-भारत आर्थिक-व्यापारिक सहयोग का भविष्य उज्ज्वल है - अजित राणाडे

भारतीय अर्थशात्री अजित राणाडे

पिछले कुछ वर्षों में चीन और भारत में तेज़ आर्थिक वृद्धि बनी रही है। दोनों देशों ने सिलसिलेवार विकास योजना और रणनीति बनाई। चीन ने“मेड इन चाइना 2025”और“बेल्ट एंड रोड”प्रस्ताव पेश किए, जबकि भारत ने“मेक इन इंडिया”और“डिजिटल इंडिया”जैसी विकास की रणनीति बनाई। विश्व में सबसे बड़े दो विकासशील देश होने के नाते चीन और भारत की राष्ट्रीय स्थिति मिलती जुलती है। दोनों देशों के हाथ मिलाकर सहयोग करना आम रुझान है।

अजित राणाडे के विचार में वर्तमान में चीन विकास के पुर्नसंतुलन पर महत्व दे रहा है। विदेशों में निर्यात की तुलना में चीन ने घरेलू उपभोग का अनुपात बढ़ाया और हरित विकास पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। वहीं भारत ने हरित विकास रणनीति अपनायी।“मेक इन इंडिया”की रणनीति में उत्पादन, उपभोग और निर्यात जैसे पहलुओं पर महत्व दिया जा रहा है। इस तरह, चाहे“मेड इन चाइना”हो, या“मेक इन इंडिया”, चीन और भारत एक दूसरे से सीख सकते हैं।

भारत के पास पुरानी सभ्यता और रंगबिरंगी संस्कृति है। भारत का पर्यटन संसाधन प्रचुर है। आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2017 में 13 करोड़ से अधिक चीनी नागरिकों ने विदेशों की यात्रा की, जिन्होंने 1 खरब 15 अरब 29 करोड़ डॉलर खर्च किया। जो साल 2016 की तुलना में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। चीन लगातार कई वर्षों तक विश्व में पर्यटकों का सबसे बड़ा स्रोत देश बन गया है। लेकिन भारत की यात्रा करने वाले चीनी पर्यटकों की संख्या फिर भी कम है। अजित राणाडे को आशा है कि अधिक से अधिक चीनी पर्यटक भारत का दौरा करेंगे, यात्रा से भारत के समाज और संस्कृति के प्रति चीनी लोगों की समझ बढ़ेगी, और दोनों देशों की जनता के बीच मित्रता भी मजबूत होगी।

अजित राणाडे के विचार में पर्यटन के अलावा, फिल्म और मनोरंजन जैसे क्षेत्रों में चीन और भारत सहयोग को मज़बूत कर सकेंगे। वर्तमान में आमिर खान की फिल्म दंगल समेत कुछ भारतीय फिल्मों ने चीन में श्रेष्ठ प्रदर्शन किया है, चीनी बाज़ार में उन्हें बड़ा लाभ मिला है। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानविकी आवाजाही को आगे बढ़ाना दोनों देशों की जनता के लिए फायदेमंद होगा।

अजित राणाडे के विचार में वर्तमान भूमंडलीकरण पृष्ठभूमि में आर्थिक वैश्विकरण का विकास अपरिहार्य रुझान है। बहु-पक्षीय व्यापार की प्रणाली में विश्व के विभिन्न देशों को आपस में सहयोग मज़बूत करना चाहिए। इस व्यवस्था के समर्थक के रूप में भारत और चीन को हाथ मिलाकर सहयोग करने की बड़ी आवश्यकता है। इससे दोनों देश विश्व आर्थिक समृद्धि और विकास के लिए और बड़ा योगदान कर सकेंगे।  

अजित राणाडे ने कई बार चीन की यात्रा की है। उन्हें लगता है कि हर बार चीन की यात्रा के दौरान कुछ नया सीखने को मिलता है। उनके विचार में पड़ोसी देश होने के नाते भारत बहुत नज़दीक से चीन की विकास प्रक्रिया को देखता है, और चीन से अनुभव सिख सकता है।

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