सहयोग और उभय जीत चीनी और भारतीय फिल्म उद्योग के विकास का रुझान

2018-04-26 14:26:20
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn
1/14
​“सीक्रेट सुपरस्टार”का पोस्टर

इधर के वर्षों में भारतीय फिल्म चीनी लोगों के दिलों पर राज करने लगी हैं और चीनी बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करने लगी हैं। पेइचिंग में आयोजित 8वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान कई भारतीय फिल्म निर्माताओं और निर्देशकों ने इसमें भाग लिया। उनके विचार में चीनी और भारतीय फिल्म उद्योग के विकास का रुझान अधिकाधिक भारतीय फिल्मों को चीन के बाजार में लाना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग को मज़बूत और समान विकास करना ही है। इसके अलावा, फिल्मों के माध्यम से द्विपक्षीय समझ और मित्रता को आगे बढ़ाना है।

“सीक्रेट सुपरस्टार”और“बजरंगी भाईजान”के बाद अप्रैल माह में भारतीय फिल्म“हिंदी मीडियम”साल 2018 में चीनी फिल्म बाज़ार में एक और ऐसी फिल्म बन गई, जिसकी बॉक्स ऑफिस आय 10 करोड़ युआन से अधिक रही। यहां बता दें कि साल 2017 में“दंगल”ने चीन में 1 अरब 29 करोड़ 50 लाख युआन की कमाई की, जो हॉलिवुड फिल्मों के अलावा विदेशी फिल्मों के चीनी बाज़ार में एक रिकोर्ड बन गया।

4 मई को फिल्म“बाहुबली-2”चीन में रिलीज़ हुई और पूरी उम्मीद है कि यह फिल्म भी कामयाबी के झंडे गाढ़ेगी। लगता है कि इस फिल्म से चीन में“भारत की लहर”एक बार फिर बहने लगी है।

भारतीय फिल्मों की सफलता की चर्चा करते हुए“सीक्रेट सुपरस्टार”के निर्देशक अद्वैत चंदन ने कहा कि छोटी-छोटी चीज़ों से बड़ी-बड़ी बातों का वर्णन करना और गहरी भावना के माध्यम से कहानी सुनाना, यह भारतीय फिल्मों की खासियत है। इस वजह से भारतीय फिल्में दर्शकों के बीच अपनी लोकप्रियता हासिल कर लेती हैं। उन्होंने कहा:“हालांकि हमारे बीच अलग तरह की संस्कृति, अलग तरह के कपड़े, अलग तरह के चेहरे हैं, लेकिन भावना के प्रति हमारी समझ एक ही है। ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में मां और बेटी के बीच प्यार की कहानी सुनाई गई है। वहीं, अगर चीनी फिल्म ‘यूथ’ (Youth) भारत में रिलीज़ होगी, तो मुझे विश्वास है कि भारतीय दर्शक इस फिल्म को बहुत पसंद करेंगे।”

भारतीय फिल्म निर्देशक अद्वैत चंदन की चर्चा में चीनी फिल्म“यूथ”दिसम्बर 2017 में चीन और उत्तर अमेरिका के क्षेत्र में रिलीज़ हुई थी। इस फिल्म ने मार्च 2018 में 12वें एशिया फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार हासिल किया। फिल्म की कहानी गत शताब्दी के 70 से 80 वाले दशक तक के काल की है, जिसमें सैन्य सांस्कृतिक कलात्मक प्रदर्शन मंडली में कई युवा-युवतियों की कहानी सुनाई गई हैं। युवावस्था में उनके प्रेम और जीवन में आने वाले परिवर्तन का वर्णन किया गया है। मुख्य पात्र ल्यू फ़ंग नामक एक युवक है, वह सीधा-सादा और दयालु किस्म का व्यक्ति है, जो सदैव दूसरों की सहायता करता है। मंडली में ह श्याओफिंग नामक एक लड़की दाखिल होती है, जो गांव के परिवेश से आती है। मंडली के अन्य सदस्य उसके साथ भेदभाव करते हैं। संयोग से दोनों युवक और युवती सांस्कृतिक कलात्मक प्रदर्शन मंडली से भागकर युद्ध में भाग ले लेते हैं। युद्ध मैदान में वे अपने युवावस्था का फूल भी खिलाते हैं। इस फिल्म में युवाओं के सामूहिक जीवन में दर्द, प्रेम, बिछड़ाव और पुनः मिलन, युगात्मक परिवर्तन में मानव की कमज़ोरी आदि दिखाई गई है।

चीनी कंपनी पीकॉक माउंटेन मीडिया संस्कृति लिमिडेट “दंगल”, “सीक्रेट सुपरस्टार”और“बजरंगी भाईजान”आदि भारतीय फिल्मों को चीन के बाजार में लेकर आई है। इस कंपनी की उप महानिदेशक फिल्म निर्माता कू वानछङ के विचार में भारतीय फिल्मों की सफलता का श्रेय परिपक्व तरीके से कहानी सूनाने को जाता है। उन्होंने कहा:“भारतीय फिल्म उद्योग का इतिहास अधिक पुराना ही नहीं, फिल्म प्रणाली भी परिपक्व है। गत शताब्दी के 50 के दशक में भारत ने कई क्लासिक फिल्में बनाईं। बॉलीवुड की फिल्म व्यवस्था परिपक्व है, भारतीय फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं को मालूम है कि किस तरीके से अच्छी फिल्म बनायी जाती है। मसलन् ‘दंगल’ और ‘3 इडियट्स’ आदि फिल्में परिपक्व तरीके से कहानी सुनाती हैं।”

जानकारी के अनुसार साल 2014 में चीन और भारत की सरकारों ने चीनी फिल्म और टीवी कार्यक्रमों और फिल्म रिलीज के बारे में सहयोग संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसने फिल्म जगत में द्विपक्षीय सहयोग की मज़बूती और आवाजाही के विस्तार को लिए मार्गदर्शन किया। आज से पहले चीन में एक साल में केवल एक या दो भारतीय फिल्मों का ही आयात किया जाता था। लेकिन साल 2018 में अभी तक 4 भारतीय फिल्में चीनी बाज़ार में आयातित हो चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार अब अच्छी गुणवत्ता वाली भारतीय फिल्म के चीनी बाज़ार में आयात की कीमत लाख से लाखों तक बढ़ गयी हैं।

प्रसाद शेट्टी फिल्म“सीक्रेट सुपरस्टार”के संयुक्त निर्माता हैं, वे पीकॉक माउंटेन मीडिया संस्कृति लिमिडेट कंपनी के सहयोगी भी हैं। पिछले 7 सालों में वे श्रेष्ठ भारतीय फिल्मों को चीन में पहुचाने में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने“3 इडियट्स”, “पी.के”, “दंगल”और“सीक्रेट सुपरस्टार”और“बजरंगी भाईजान”को चीन में प्रवेश करवाने में भाग लिया था। शेट्टी के विचार में चीनी दर्शक विविध फिल्में पसंद करते हैं। घरेलू फिल्मों के अलावा वे अमेरिका, फ्रांस और दूसरे अन्य देशों की अच्छी फिल्म स्वीकार करते हैं। चीनी लोगों के इस प्रकार के खुले मन से भारतीय फिल्मों के चीन में आने की नींव डाली गई है।

फिल्म निर्देशक नील मधहब पांडा की फिल्म“डार्क विंड”यानी“कड़वी हवा”8वें पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित की गई और“थ्येन थान”यानी स्वर्ग मंदिर नामक पुरस्कार के नामांकन फिल्मों में से एक थी। हालांकि“डार्क विंड”को“थ्येन थान”पुरस्कार तो नहीं मिला, लेकिन इसके प्रदर्शन के दौरान अधिक चीनी दर्शकों की वाहवाही मिली और शानदार सफलता हासिल की। नील मधहब पांडा ने कहा कि अब भारत ने चीन में अपनी फिल्मों के रिलीज करने का तरीका हासिल किया और सफलता भी मिली है। अब चीनी फिल्मों के भारतीय बाज़ार में पहुंचाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा:“हम भारत और चीन भाई-भाई हैं। यह भावना आज तक जारी है। इधर के सालों में ‘3 इडियट्स’ और ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ जैसी अच्छी फिल्मों ने चीन में बड़ी कामयाबियां हासिल कीं। हमें लगता है कि यह सिर्फ़ भारत-चीन संबंध की शुरुआत है। चीन की तरह भारत में बड़ा फिल्म बाज़ार है। चीनी फिल्मों को हमारे यहां प्रवेश करने पर विचार करना चाहिए। फिल्म और मनोरंजन उद्योग से दोनों देशों के बीच मित्रता आगे बढ़ेगी। दोनों पक्षों को लाभ मिलेगा।”

फिल्म निर्देशक नील मधब पांडा ने चीनी फिल्म की गुणवत्ता का सक्रिय आकलन किया। उन्होंने माना कि भारत के बाज़ार में चीनी फिल्मों के प्रवेश के दौरान इनका प्रसार सबसे बड़ी बाधा है। उनका कहना है:“मेरे विचार में भारतीय बाज़ार में चीनी फिल्मों में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि चीनी फिल्में अच्छी हैं। आप लोगों को सिर्फ़ भारत में कारगर प्रसार का तरीका ढ़ूढ़ना है। जैसा कि फिल्म निर्देशक वांग च्यावेई की फिल्में, हमें बेहद अच्छी लगती है। भारत के फिल्म कॉलेजों में उनकी फिल्मों को मिसाल देकर छात्रों को सीखाया जाता है। मुझे लगता है कि उनकी फिल्मों को भारत में जरूर स्वागत मिलेगा।”

नील मधब पांडा ने यह भी कहा कि भारत में 500 से 600 तक टीवी चैनल उपलब्ध हैं, चीनी टीवी धारावाहिकों को भारत में प्रदर्शित होने का प्रयास करना चाहिए।

भारतीय फिल्म निर्देशक अद्वैत चंदन और फिल्म निर्माता प्रसाद शेट्टी दोनों के विचार में चीन और भारत फिल्म क्षेत्र में एक दूसरे से सीख सकते हैं। दोनों देशों के बीच फिल्म सहयोग का दायरा भी विशाल है। अद्वैत चंदन ने कहा:“मुझे लगता है कि हमें कई क्षेत्रों में चीनी फिल्म निर्माताओं से सीखना चाहिए। मसलन् फिल्म ‘यूथ’ में युद्ध मैदान वाले दृश्य बनाने के दौरान कई लंबे शॉट का अच्छा प्रयोग किया गया। पिछली बार चीन की यात्रा के दौरान मैंने इसके फोटोग्राफर से संपर्क करने की कोशिश की। मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि उन्होंने इतनी सुन्दर चित्र कैसी बनायी।”   

वहीं प्रसाद शेट्टी ने कहा:“भारत को चीन से कई क्षेत्रों में सीखना चाहिए। भारतीय फिल्म का आधारभूत संस्थापन कमज़ोर है, लेकिन चीन में बहुत ज्यादा सुविधाजनक सिनेमा घर हैं, जहां बंदोबस्त बहुत संपूर्ण ही नहीं, आरामदेह भी है। लेकिन भारत में मानक वाले सिनेमा घर कम हैं। हमें चीन से सीखना चाहिए कि आधारभूत संस्थापनों का कैसे उन्नत किया जाए, उच्च गुणवत्ता वाले सिनेमा घरों और थिएटरों का कैसे निर्माण किया जाए। अवश्य ही चीन को भी भारत से सीखना चाहिए। क्योंकि भारतीय फिल्म उद्योग बहुत विविधतापूर्ण है। बॉलीवुड केवल इस औद्योगिक चेन का एक बहुत छोटा-सा भाग है। भारत के हर क्षेत्रों में खुद का फिल्म उद्योग है। मुझे लगता है कि चीन भारत के साथ अधिक सहयोग की खोज कर सकता है या भारत से फिल्म शूटिंग के बारे में कुछ सीख सकता है।”

प्रसाद शेट्टी ने बल देते हुए यह भी कहा कि चीन और भारत के पास विश्व में सबसे बड़ा फिल्म बाज़ार है। दोनों देशों के फिल्म उद्योग को एक दूसरे का पूरक होना चाहिए, ताकि समान विकास को बखूबी अंजाम दिया जा सके। उनका कहना है:“हमें उम्मीद है कि चीनी फिल्म उद्योग के बीच सहयोग मज़बूत किया जाएगा। मुझे लगता है कि यह दोनों देशों के फिल्म उद्योग के विकास का रुझान भी है। इस प्रकार का रुझान अधिक भारतीय फिल्मों के चीन में निर्यात किए जाने के बजाए ज्यादा सहयोग और समान विकास ही है।”

 

शेयर