20180423

2018-04-23 08:56:48
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अगले 20 वर्षों में एशिया फिर विश्व में सबसे तेज़ आर्थिक वृद्धि वाला क्षेत्र होगा

बोआओ एशिया मंच का वर्ष 2018 सम्मेलन हाल ही में चीन के हाएनान प्रांत में आयोजित हुआ। अनेक देसी विदेशी विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के 20 वर्षों में एशिया फिर भी विश्व में सबसे तेज़ आर्थिक वृद्धि वाला क्षेत्र बना रहेगा। लोगों ने वर्तमान वार्षिक सम्मेलन में चीन द्वारा जारी किए गए खुलेपन के नए कदमों की प्रशंसा की।

बोआओ एशिया मंच के एशियाई आर्थिक अनुमान की शाखा पर चीनी केंद्रीय बैंक के पूर्व महानिदेशक दाई श्यांग लोंग ने कहा कि कम से कम भविष्य के 20 वर्षों में यहां तक कि इस शताब्दी के मध्य तक एशिया फिर भी विश्व में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि वाला क्षेत्र बनेगा। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में एशिया की वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही। इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है चीन का विकास तेज़ और बहुत मज़बूत है, भारत की गति भी और तेज़ होगी। चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और आसियान के 10 सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा। "एक पट्टी एक मार्ग" के विकास से एशिया को नया मौका मिलेगा।

चीन के अर्थतंत्र की भविष्य की चर्चा करते हुए दाई श्यांग लोंग ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में चीन की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी हुई है, लेकिन यह आर्थिक मंदी का प्रदर्शन नहीं है। यह स्वतंत्र और प्रभावी रूप से आर्थिक विकास रणनीति बदलने की चीन की नीति है। उनका विचार है कि भविष्य में चीन के आर्थिक विकास के दौरान गुणवत्ता पर बड़ा ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सबसे पहले आपूर्ति पक्ष में सुधार किया जाएगा, उत्पाद की आपूर्ति में सुधार आएगा, पिछड़ रही अवैध और अनियमित उत्पादन क्षमता को निकाला जाएगा। इसके साथ उच्च तकनीकी उत्पादन क्षमता बनाई जाएगी। दूसरा, पूंजी की आपूर्ति में सुधार किया जाएगा, सामाजिक पूंजी की आपूर्ति क्षमता उन्नत की जाएगी। इसके साथ आवास की आपूर्ति में सुधार किया जाएगा और रियल एस्टेट बुलबुले को रोका जाएगा। उनके विचार है कि इस कदमों से चीन के अर्थतंत्र का स्थिर विकास किया जाएगा।

इस बार के मंच के दौरान चीन द्वारा जारी किए गए सुधार और खुलेपन के नए कदमों की लोगों ने बहुत प्रशंसा की। भारतीय वाणिज्य सदन महासंघ के महा सचिव संजय बारू ने कहा कि विकास की दृष्टि से देखा जाए तो चीन के खपत उन्नयन और निवासियों की आय में वृद्धि के साथ चीन विकासशील देशों समेत अन्य देशों से आयात का विस्तार करने की और बड़ी क्षमता है। अगर चीन आयात और विदेशों में निवेश का विस्तार करने में और महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, तो चीन और विकासशील देशों के लिए यह एक अच्छी बात है।

मंच पर उपस्थितों ने कहा कि एशिया की आर्थिक वृद्धि में कई अनिश्चितताएं मौजूद हैं, जिनमें चीन और अमेरिका के बीच व्यापार टकराव शामिल है। चीन राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष फान कांग का विश्लेषण है कि लोगों की नज़र में चीन अमेरिका में इतनी च्यादा चीजों का निर्यात करता है, लेकिन चीन के निर्यात में एशिया के विभिन्न देशों से आयात भी शामिल है, जिनमें दक्षिण एशिया से आयातित प्रोजेक्शन पैनल, जापान और मलेशिया से आयातित घटक, दक्षिण-पूर्वी एशिया से आयातित कुछ संसाधन उत्पाद शामिल हैं। चीन में इन उत्पादों को एसेंबल किया जाता है। इस के बाद अमेरिका को निर्यात किया जाता है। चीन और अमेरिका के बीच व्यापार टकराव से पूरी व्यापार श्रृंखला पर प्रभाव पड़ेगा।

(वनिता)

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