सूचना:चाइना मीडिया ग्रुप में भर्ती

26 मार्च 2020

2020-03-25 23:27:30
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दुनियाभर में अब तक कोरोना वायरस से करीब 16 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लाखों लोग संक्रमित हैं। इस वैश्विक महामारी से निपटने के लिए भारत सहित कई देशों में लॉकडाउन किया गया है, ताकि लोग घरों से बाहर न निकलें और उनमें संक्रमण न फैले। घरों में कैद लोगों को भी बार-बार साबुन से हाथ धोने की सलाह दी जा रही है। साथ ही हैंड सैनिटाइजर भी इस वायरस से बचाने में अहम भूमिक निभा रहा है। आज हैंड सैनिटाइजर भले ही आम बन चुका है, लेकिन शायद ही आप ये बात जानते होंगे कि इसका इस्तेमाल पिछले 54 सालों से होता आ रहा है।

क्या आप जानते हैं कि हैंड सैनिटाइजर सबसे पहले किसने बनाया था और उसके इस्तेमाल का तरीका दुनिया को बताया था? एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले इसे बनाने का आइडिया साल 1966 में अमेरिकी राज्य कैलिफोर्निया के बेकर्सफील्ड शहर में रहने वाली एक महिला को आया था, जिसका नाम ल्यूप हर्नान्डिज था।

ल्यूप नर्सिंग की एक छात्रा थीं। एक दिन अचानक उनके दिमाग में आया कि किसी मरीज के पास जाने से पहले या उसके पास से आने के बाद हाथ साफ करने के लिए साबुन और पानी न हो तो क्या होगा। इसके बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा बनाया जाए, जो साबुन से कुछ अलग हो और बिना पानी के भी काम चल जाए, साथ ही उसके इस्तेमाल से कीटाणु भी मर जाएं। ऐसे में उन्होंने एक अल्कोहल युक्त जेल बनाया और उसे अपने हाथों पर रगड़ कर यह चेक किया कि उससे क्या फायदा होता है।

ल्यूप का अल्कोहल युक्त जेल काम कर गया। उससे कीटाणुओं का भी सफाया हो गया और पानी की तरह उसे सुखाने की भी जरूरत नहीं पड़ी। इस तरह ल्यूप का यह 'आविष्कार' धीरे-धीरे पूरी दुनिया में फैल गया और बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल होने लगा। आज ल्यूप को बहुत कम ही लोग जानते हैं। उनकी निजी जिंदगी के बारे में तो किसी को भी नहीं पता और न ही कोई ये जानता है कि वो अभी जिंदा भी हैं या नहीं। लेकिन उनका ये 'आविष्कार' पूरी दुनिया को फायदा जरूर पहुंचा रहा है।

हाल के दिनों में हैंड सैनिटाइजर की 'आविष्कारक' के रूप में ल्यूप हर्नान्डिज का नाम सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। दुनियाभर के लोग उनका शुक्रिया अदा कर रहे हैं, जिनकी खोज की वजह से ही आज लाखों लोगों की जिंदगी बच गई है और आगे भी बचती रहेगी।


वहीं

राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री या अन्य नेताओं की सुरक्षा में पुलिस या अन्य सुरक्षा बल तैनात हों, यह तो समझ में आता है, लेकिन किसी पेड़ को 24 घंटे सुरक्षा दी जाए, यह सुनने में थोड़ा अजीब लगता है। लेकिन यह बिल्कुल सच है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और विदिशा के बीच सलामतपुर की पहाड़ी पर एक ऐसा पेड़ है, जिसे किसी वीआईपी नेता की तरह सुरक्षा दी जाती है। इस पेड़ की सुरक्षा में पुलिस के चार या पांच जवान तैनात हैं, जो 24 घंटे इसकी निगरानी करते हैं। इसके अलावा इसकी सिंचाई के लिए सांची नगरपालिका की ओर से अलग से एक पानी का टैंकर आता है। वहीं, कृषि विभाग के अधिकारी भी पेड़ की जांच के लिए यहां हर हफ्ते आते हैं। माना जाता है कि इस पेड़ के रखरखाव पर हर साल 12-15 लाख रुपये खर्च होते हैं।

दरअसल, यह एक पीपल का पेड़ है, जिसे बोधि वृक्ष के नाम से जाना जाता है। साल 2012 में जब श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने भारत का दौरा किया था, उसी दौरान उन्होंने यह पेड़ लगाया था। आपको बता दें कि ईसा से 531 वर्ष पहले बोधि वृक्ष के नीचे ही भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। बौद्ध धर्म में इस वृक्ष का बेहद ही खास महत्व है।

माना जाता है कि ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को बोधि वृक्ष की एक टहनी देकर बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए श्रीलंका भेजा था। उन्होंने वह बोधि वृक्ष श्रीलंका के अनुराधापुरा में लगाया था, जो आज भी मौजूद है।

जिस बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, असल में वह पेड़ बिहार के गया जिले में है। इस पेड़ को कई बार नष्ट करने का भी प्रयास किया गया था, लेकिन यह चमत्कार ही था कि हर बार एक नया वृक्ष उग आता था। हालांकि साल 1876 में यह पेड़ प्राकृतिक आपदा के चलते भी नष्ट हो गया था, जिसके बाद 1880 में अंग्रेज अफसर लॉर्ड कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधिवृक्ष की शाखा मंगवा कर उसे बोधगया में फिर से स्थापित कराया था। तब से वह वृक्ष आज भी वहां मौजूद है।

उधर.. दुनिया में एक से बढ़कर एक खूबसूरत देश हैं, जो अपनी खूबसूरती और दिलकश नजारों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे भी देश हैं, जो अलग ही वजहों से जाने जाते हैं। वैसे तो ये हर देश की चाहत होती है कि उनके यहां कोई न कोई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (हवाईअड्डा) हो, जिससे उस देश की यात्रा करने वाले पर्यटकों को कठिनाईयों का सामना न करना पड़े, आज हम हम आपको कुछ ऐसे देशों के बारे में बताएंगे।

अंडोरा

यूरोप का छठा सबसे छोटा और दुनिया का 16वां सबसे छोटा देश है अंडोरा, जो करीब 468 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इस देश की जनसंख्या 85,000 के आसपास है। इस देश में एक भी एयरपोर्ट नहीं हैं, लेकिन इनके पास तीन प्राइवेट हैलीपैड जरूर हैं। यहां से सबसे करीबी एयरपोर्ट स्पेन में है, जो इस देश से लगभग 12 किलोमीटर दूर है। हालांकि इसके बावजूद यहां हर साल लाखों की संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं।


वहीं लिस्टेंस्टीन

यह भी यूरोप का ही एक देश है, जो ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड के बीच में स्थित है। महज 160 वर्ग किलोमीटर में फैले इस देश में ज्यादातर लोग जर्मन भाषा बोलते हैं। लिस्टेंस्टीन को एक प्राचीन देश के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि यहां पाषाण युग से लोगों के निवास करने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा यह देश इसलिए भी जाना जाता है, क्योंकि यहां एक भी एयरपोर्ट नहीं है, लेकिन यहां पर एक हेलीपोर्ट जरूर है। यहां से नजदीकी एयरपोर्ट स्विट्जरलैंड का ज्यूरिख हवाईअड्डा है।


मोनाको

यह पश्चिमी यूरोप का एक छोटा सा देश है, जिसे दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश माना जाता है। यह फ्रांस और इटली के बीच स्थित है। आपको जानकर हैरानी होगी यहां दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा प्रतिव्यक्ति करोड़पति हैं, लेकिन इसके बावजूद यह भी हैरान करने वाली बात है कि इस देश में एक भी एयरपोर्ट नहीं है। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट फ्रांस में है।


सैन मैरिनो

यह भी यूरोप में ही स्थित एक देश है। इसे यूरोप का सबसे पुराना गणराज्य भी माना जाता है। साथ ही यह दुनिया के सबसे छोटे देशों में से एक है। इस देश में भी फिलहाल कोई एयरपोर्ट मौजूद नहीं है, लेकिन यहां एक हेलीपोर्ट और एक छोटा सा एयरफील्ड जरूर है। यहां से नजदीकी एयरपोर्ट इटली में है।


आज के प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है।

अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का। पहला पत्र हमें भेजा है खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं,

सर्वप्रथम हमारी ओर से सीआरआई हिंदी सेवा की पूरी टीम और सभी श्रोता बंधुओ को हिन्दू नववर्ष और भगवान् झूलेलाल जयंती की हार्दिक शुभकामनायें। लिखते हैं टी टाइम कार्यक्रम बेहद लाजवाब लगा । कार्यक्रम के प्रारंभ में आपके द्वारा कुछ आविष्कारकों और उनके द्वारा निर्मित अविष्कारों के बारे में दी गई जानकारी बेहद ही आश्चर्यजनक लगी । साथ ही एक खतरनाक युद्ध के बारे में दी गई विस्तृत जानकारी बहुत रोचक थी । साथ ही वहीं कुछ रोचक बातों के क्रम में शतरंज , शुतुरमुर्ग , डाल्फिन , कछुए और टाइप राइटर इत्यादि के बारे में जानकर अच्छा लगा । धन्यवाद फिर एक सरस और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए।

आज भी जोक्स भेज रहा हूं। जोक्स शामिल किए जा रहे हैं।

आगे लिखते हैं मैं आपको निमाङ और मालवा क्षेत्र में मनाये जाने वाले गणगौर के बारे में एक छोटी सी जानकारी देना चाहता हूं :-

गणगौर पर्व :- मालवा-निमाड़ की शान ।

गणगौर मालवा और निमाड़ का गौरवमय पर्व है। चैत्र माह की तीज को मनाया जाने वाला यह महापर्व एक महोत्सव रूप में संपूर्ण मध्यप्रदेश निमाड़-मालवांचल में अपनी अनूठी छटा बिखेरता है। इसके साथ ही चैत्र माह में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में महाकाली, महागौरी एवं महासरस्वती अलग-अलग रूपों में नवरात्रि में पूजी जाती हैं।

पारिवारिक व सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है गणगौर का त्योहार। चैत्र गणगौर पर्व गणगौर दशमी से अथवा एकादशी से प्रारंभ होता है, जहां माता की बाड़ी यानी जवारे बोए जाने वाला स्थान पर नित्य आठ दिनों तक गीत गाए जाते हैं। यह गीत कन्याओं, महिलाओं, पुरुषों, बालकों के लिए शिक्षाप्रद होते हैं।

धन्यवाद।


अब शामिल करते हैं, दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू का पत्र। लिखते हैं

कार्यक्रम "टी टाईम" ध्यानपूर्वक सुना, जिसमें सबसे पहले बताया गया कि रेडियम और पोलोनियम नामक दो तत्वों की खोज करने वाली प्रसिद्ध भौतिकविद और रसायनशास्त्री 'मैरी क्यूरी' की मृत्यु वर्ष 1934 में इसी खोज के कारण हो गई थी। दूसरी ओर अमेरिका की समर काउंटी में जन्मे 'हॉरेस लॉसन हन्ली' ने हाथ से चलने वाली पनडुब्बी का आविष्कार किया था, जिसके परीक्षण के क्रम में उनकी पनडुब्बी समुद्र में डूब गई थी और उस दुर्घटना में उनकी भी मृत्यु हो गई थी।

इन जानकारियों से हमें ज्ञात हुआ कि आविष्कारकों के द्वारा किया गये आविष्कार तो बहुत उपयोगी साबित हुए, किन्तु दुर्भाग्य की बात है कि उनके अपने ही आविष्कार उनकी मृत्यु का कारण बन गये।

अगली जानकारी में सुना कि वर्ष 1325 ई० में इटली के दो राज्यों बोलोग्ना और मोडेना के बीच बेशकीमती बाल्टी के लिए युद्ध हो गया।

वहीं रोचक बातें बताते हुए कहा गया कि दिमागी कसरत कराने वाला खेल शतरंज का आविष्कार भारत में ही हुआ था।

कार्यक्रम से हमें यह भी पता चला कि विश्व का सबसे बड़ा पक्षी शुतुरमुर्ग है, जिसकी आँखें उनके दिमाग से अधिक बड़ी होती हैं।

रोचक जानकारियों के क्रम में आगे बताया गया कि धरती पर सर्वाधिक दिन तक जीवित रहने वाले जीव कछुआ 200 से 250 वर्षों तक जिंदा रहता है, जिसकी 300 से भी अधिक प्रजातियां हैं और कछुओं के दाँत नहीं होते हैं। सभी बातें अच्छी लगी। धन्यवाद।


अब पेश है पंतनगार, उत्तराखंड से वीरेंद्र मेहता का पत्र। लिखते हैं, नमस्कार (नी हाउ)

आज टी टाइम प्रोग्राम के नए अंक में सभी खबरें और जानकारी अच्छी लगी । जिसमें आपने वैज्ञानिकों के आविष्कार व उनके क्षेत्र में उनके अविश्वसनीय योगदान के बारे में संक्षिप्त में बताया । वैज्ञानिक मैरी क्यूरी का योगदान फिजिक्स व केमिस्ट्री दोनों क्षेत्रों में रहा , व उन्होंने दोनों ही क्षेत्रों में नोबेल प्राइज भी हासिल किया । वही आपने तमाम अन्य वैज्ञानिकों का जिक्र किया, जिसमें जिसमें हॉरेस लॉसन हन्ली , फ्रांज रीचेल्ट , विलियम बुलोक आदि के नाम शामिल हैं । पर अफसोस इन सभी वैज्ञानिकों के आविष्कार ने ही इन्हीं की जान ले ली , आज इन्हीं वैज्ञानिकों की बदौलत उनके आविष्कार की वजह से हम अपना कार्य बहुत ही आसानी से बहुत ही कम समय में लेते हैं। इन सभी वैज्ञानिकों को शत्-शत् नमन । और वही रोचक बातों में जाना कि शतरंज का आविष्कार भारत में ही हुआ था, जिसको खेलने से बौद्धिक क्षमता में विस्तार होता है जो कि अब एक प्रोफेशनल कैरियर भी बन चुका है । वहीं नोवेल कोरोनावायरस का भी प्रकोप भारत में बढ़ता जा रहा है । यहां की भी अर्थव्यवस्था थोड़ी ढीली पड़ ही गई है ,आजकल यहां पर भी लगभग कुछ हफ्तों के लिए फैक्ट्री , कंपनियां आदि बंद हो चुकी है जिससे वायरस पर लगायी जा सकती है । मैं आपके माध्यम से ही जनता के लिए यह संदेश देना चाहता हूं - यह वायरस कम से कम फैले इसके लिए अभिवादन में नमस्कार वह सैनिटाइजर का यूज किया जाए। इसको लेकर कुछ लोग अपने मन से ही या सोशल मीडिया में फैली अफवाहों को बढ़ावा दे रहे हैं। जिसका कोई भी साइंटिफिक प्रमाण नहीं है। इस वायरस को लेकर कृपया ऐसा ना करें। ऐसी स्थिति में सरकार पूरा समर्थन कर रही है ,और नियमों का पालन करें । धन्यवाद !!


अब बारी है केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल के पत्र की। लिखते हैं, कार्यक्रम "खेल जगत" के तहत अनिल पाण्डेय द्वारा आज भी सीमित पाँच मिनट की अवधि में तमाम महत्वपूर्ण खेल गतिविधियों से अवगत कराया गया। कोरोना वायरस महामारी के चलते लुसाने स्थित अंतर्राष्ट्रीय ओलम्पिक समिति के कार्यालय पर ताला लगने का समाचार निराशाजनक लगा, परन्तु अच्छी बात है कि अभी तक 24 जुलाई से शुरू होने वाले तोक्यो ओलम्पिक की तैयारियां बदस्तूर ज़ारी हैं। वहीं डेनमार्क के खिलाड़ी द्वारा ऑल इंग्लैंड ख़िताब पर कब्ज़ा किया जाना तथा भारत के शरत कमल द्वारा भी पुर्तगाली खिलाड़ी को हरा ख़िताब जीतने का समाचार उत्साहवर्ध्दक लगा। रोजानी की रिपोर्ट का पॉजिटिव निकलना भी निराशा की बात है। कोरोना के भय से एथेंस से निकलने वाली ओलम्पिक मशाल के समय भी सन्नाटा छाया रहेगा, यह जान कर घोर निराशा हुई। बहरहाल, खेल की खट्टी-मीठी तमाम ख़बरों से रूबरू कराने के लिए शुक्रिया।

आगे लिखते हैं, कार्यक्रम "टी टाइम" के अंतर्गत अनिलजी द्वारा आज कुछ ऐसे महत्वपूर्ण अविष्कारों के बारे में जानकारी प्रदान की गयी कि जिन आविष्कारों के कारण उनके आविष्कर्ताओं को मौत को गले लगाना पड़ा। जी हाँ, ऐसे वैज्ञानिकों में भौतिकविद मैरी क्यूरी का नाम सबसे पहले आता है, जिन्होंने रेडियम और पोलोनियम नामक दो तत्वों की खोज की, और इसी खोज़ के कारण सन 1934 में उनकी मृत्यु हो गई थी।

हमने यह भी जाना कि हाथ से चलने वाली पनडुब्बी के आविष्कर्ता और दिसम्बर 1823 में अमेरिका की समर काउंटी में जन्मे हॉरेस लॉसन हन्ली की भी परीक्षण के दौरान ही उनकी पनडुब्बी के समुद्र में डूब जाने के कारण मौत हुई थी।

आधुनिक विंगसूट के आविष्कारक ऑस्ट्रिया के फ्रांज रीचेल्ट के बारे में यह जान कर तो और भी हैरानी हुई कि टेस्टिंग के लिए पेरिस के एफिल टावर से कूदने के दौरान महज़ 33 साल की उम्र में उनकी मौत हो गयी थी।

प्रिंटिंग उद्योग में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले अमेरिका के ग्रीनविले में जन्मे विलियम बुलोक की दुःखद मृत्यु अपनी ही प्रिंटिंग मशीन को ठीक करते समय उसमें फंस जाने के कारण हुई, यह जानकारी भी दिल दहला देने वाली थी।

वहीं आज से 695 साल पहले सन 1325 में इटली के बोलोग्ना और मोडेना के बीच एक बाल्टी (भले ही वह हीरे जवाहरात से भरी हुई थी) के लिए हुये भीषण युद्ध में 2000 से ज्यादा लोगों की जानें जाने की कहानी भी शरीर में सिहरन पैदा कर गयी। आख़िरकार, यह सब इन्सान की विस्तारवादी नीति अथवा अपना प्रभुत्व कायम करने की मंशा के कारण ही तो हुआ।

वहीं दिमागी कसरत कराने वाले खेल शतरंज का आविष्कार भारत में हुआ था; दुनिया का सबसे बड़ा पक्षी शुतुरमुर्ग है, जिसकी आंखें उसके दिमाग से ज्यादा बड़ी होती हैं; भारत की राष्ट्रीय मछली के तौर पर जानी जाने वाली डॉल्फिन पांच से आठ मिनट तक अपनी सांस रोक कर रख सकती है।

कछुए 200-250 साल तक जिंदा रहते हैं, इस वक्त धरती पर कछुओं की 300 से भी ज्यादा प्रजातियां मौजूद हैं, कछुओं के दांत नहीं होते और हर साल 23 मई को विश्व कछुआ दिवस मनाया जाता है।

मनुष्यों सम्बन्धी जानकारी में -एक स्वस्थ इंसान सालभर में कोई चार महीने सोता है, इंसान अपनी आंखें खुली रख कर कभी छींक नहीं सकता, जहां एक सामान्य व्यक्ति का दिल एक मिनट में 72 बार धड़कता है, वहीं एक छिपकली का दिल एक मिनट में 1000 बार धड़कता है, यह जानकारी बेहद हैरान करने वाली लगी।

वहीं यह जानकारी भी सामान्य-ज्ञान में वृध्दि करने वाली लगी कि -टाइपराइटर अंग्रेजी का एक ऐसा शब्द है, जो कंप्यूटर कीबोर्ड पर एक ही लाइन में टाइप होता है और -अनकॉपीराइटेबल इकलौता पन्द्रह अक्षरों वाला शब्द है, जिसमें कोई भी अक्षर दोबारा नहीं आता।

आज के कार्यक्रम में जानकारियों का अनुपात कुछ अधिक ही रहा। बहरहाल, तमाम जानकारियों के साथ कार्यक्रम में पेश श्रोता-मित्रों की प्रतिक्रियाओं एवं जोक्स को समुचित स्थान दिया जाना अच्छा लगा। आशा है कि चीन में अब धीरे-धीरे कोरोना के बादल छटने लगे हैं और उम्मीद की जानी चाहिये कि सीआरआई के तमाम प्रसारण पूर्वोपरि सामान्य हो जायेंगे। धन्यवाद विपरीत परिस्थितियों में भी इतनी श्रमसाध्य प्रस्तुति के लिये।

सुरेश जी पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।


जोक्स दुर्गेश नागनपुरे द्वारा भेजे गए हैं।

मजेदार हिन्दी जोक्स :-

पहला जोक

पार्टी में मॉर्डन लड़की से हंस-हंस कर

बातें कर रहे पति के पास पत्नी आई और बोली…..

चलिए, घर चल कर मैं आपकी चोट पर मरहम लगा दूंगी।

पति : पर मुझे चोट कहां लगी है??

पत्नी: अभी हम घर भी कहां पहुंचे हैं????


दूसरा जोक

एक पार्टी में बहुत भीड़ ज्यादा थी।

पप्पू ने एक खूबसूरत महिला से कहा:

मैं कुछ देर आपसे बातें करना चाहता हूं…

महिला : क्यों?

पप्पू: दरअसल मेरी पत्नी खो गई है

वह मुझे आपसे बातें करते हुए देखेंगी तो

बदूंक से निकली गोली की तरह यहां पहुंच जाएगी!


तीसरा जोक

1st Lady :- अरे देख ना वो लड़की कब से तेरे

पति को घूर रही है।

2nd Lady:- मुझे पता है, पर मै तो ये देख रहीं

हूँ कि मेरा पति कितनी देर अपनी

तोंद को अंदर खींच के खड़े रह सकता है।

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