20190110

2019-01-10 19:48:01
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अनिलः दोस्तो, कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं। आज के कार्यक्रम में रोचक जानकारी के साथ-साथ आप सुनेंगे एक आईटी कंपनी में प्रबंध निदेशक विश्वराज शेट्टी के साथ चर्चा। जो कि लंबे समय से चीन में रह रहे हैं। शेट्टी इससे पहले दुनिया की प्रमुख आईटी कंपनी इंफोसिस में भी काम कर चुके हैं। दोस्तो, यह चर्चा चीन में सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ के संदर्भ में की गयी है। आपकी टिप्पणी का इंतजार रहेगा।

चलिए सबसे पहले सुनते हैं यह जानकारी। दोस्तों, अगर हम आपसे कहें कि दुनिया में एक ऐसा शहर भी है, जहां दो महीने तक बिल्कुल अंधेरा रहता है तो क्या आप यकीन करेंगे? लेकिन ऐसा हकीकत में होता है।

इस शहर का नाम है नोरिल्स्क, जो रूस के साइबेरिया में पड़ता है। इस शहर को दुनिया का सबसे ठंडा शहर माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठंड के दिनों में यहां का न्यूनतम तापमान -61 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, जबकि यहां का औसत तापमान भी माइनस 10 डिग्री सेल्सियस रहता है।

नोरिल्स्क में पड़ने वाली जबरदस्त ठंड का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि यहां साल के 9 महीने तक बर्फ ही जमी रहती है। कहा जाता है कि यहां हर तीसरे दिन लोगों को बर्फीले तूफान का सामना करना पड़ता है। यहां रहने वाले लोग तो दो महीने तक (दिसंबर से जनवरी) सूर्योदय ही नहीं देख पाते हैं, क्योंकि ठंड की वजह से यहां लगातार बर्फ ही गिर रही होती है और सूर्य न निकलने के कारण इन दो महीनों तक यहां अंधेरा ही छाया रहता है।

अब सुनते हैं चर्चा, आईटी कंपनी के प्रमुख विश्वराज के साथ चर्चा।

बातचीत...

दोस्तो, यह चर्चा आपको कैसी लगी, हमें जरूर बताइएगा।

चर्चा के बाद सुनते हैं एक और जानकारी।

अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए पहले से तय सभी देशों का कोटा खत्म होने से अमेरिकी श्रम बाजार में मौजूदा भेदभाव खत्म होगा, लेकिन साथ ही अमेरिकी नागरिकता पाने के लिए भारतीयों और चीनियों की संख्या में भी इजाफा होगा। अमेरिकी संसद की हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। ग्रीन कार्ड अप्रवासी नागरिकों को स्थायी रूप से अमेरिका में रहने और वहां काम करने की अनुमति देता है।

मौजूदा आव्रजन नीति के तहत ग्रीन कार्ड आवंटन में सात प्रतिशत कोटे से सबसे ज्यादा नुकसान अत्यधिक कुशल पेशेवर भारतीयों को होता है और उन्हें एच-1 बी वीजा पर अमेरिका में काम करना होता है।

दोस्तो, कहते हैं ना, ऊपर वाला जब भी देता... देता छप्पर फाड़ के...। लेकिन स्विट्जरलैंड में एक शख्स के साथ ऐसा कुछ हुआ कि वह पल भर में करोड़पति तो बन गया लेकिन उसे कंगाल होने में भी ज्यादा देर नहीं लगी। जरा सोचिये, अगर किसी को करोड़ों रूपए मिल जाएं और अगले ही पल उससे ले लिए जाएं तो तो उसको कैसा लगेगा। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

यहां एक लाइव टीवी शो के दौरान लॉटरी में एक शख्स को करोड़पति घोषित कर दिया गया था और बाद में आयोजकों ने उससे पुरस्कार राशि वापस ले ली क्योंकि बताया जा रहा है कि लॉटरी का ड्रा गलत हो गया है।

प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है।

अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का।

दोस्तो, अब शामिल करते हैं श्रोताओं के पत्र। पहला पत्र हमें भेजा है, सऊदी अरब से सादिक आजमी ने। लिखते हैं पिछले कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत दुखद रही जब आपके माध्यम से ज्ञात हुआ कि अभिनेता, लेखकर और प्रोफेसर क़ादर खान साहब अब इस दुनियां में नहीं रहे। 81 वर्षीय क़ादर खान साहब ने अपने अभिनय का लोहा मनवाते हुए बॉलीवुड को ऊँचा मुक़ाम दिया। अभिनय उस बादशाह का स्थान लेना अत्यंत कठिन होगा, अफगानिस्तान की गलियों में जन्मे उस कलाकार की जीवनी ही कठिनाइयों भरी रही। पर बुलंद हौसलों के बल पर उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किये। विस्तार में जाएँ तो पत्र लम्बा हो जायेगा। आपके माध्यम से उनको श्र्द्धांजलि।

चीन में सुधर और खुलेपन की नीति पर जितनी चर्चा की जाये कम है क्योंकि हर पल इसके समीकरण में बदलाव होते रहते हैं और व्यापार के नए अवसरों का जन्म होता है।

वहीं दिल्ली के लोधी गार्डन में पेड़ों से सूचना एकत्रित करने वाली खबर नव युग के आधुनिकीकरण की ओर बढ़ते क़दम का ठोस सुबूत है। इस रोचक खबर को साझा करने हेतु धन्यवाद।

श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को सम्मानस्वरूप कार्यक्रम का हिस्सा बनाकर आपने नए वर्ष में फिर हमारा दिल जीत लिया। इस प्रेम की वर्षा को जारी रखें, ताकि हमारा प्रोत्साहन होता रहे। धन्यवाद।

सादिक जी हमें पत्र भेजने के लिए धन्यवाद।

दोस्तो, अब बारी है अगले पत्र की, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं, टी-टाइम प्रोग्राम हर बार की तरह बहुत अच्छा लगा। प्रोग्राम में चीन के सुधार व खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ पर आनंद जी से की गयी वार्ता अच्छी लगी।

इसके साथ ही कार्यक्रम में पेश अन्य जानकारियां भी अच्छी लगी। धन्यवाद।

दोस्तो, अब समय हो गया है अगले पत्र का। जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं पिछले प्रोग्राम में अभिनेता कादर खान के निधन के बारे में समाचार सुनकर दुःख हुआ। इसके अलावा दिल्ली के लोदी गार्डन में पेड़ों में क्यू आर कोड लगाने संबंधी समाचार सुनकर खुशी हुई। एक शानदार प्रोग्राम पेश करने के लिए शुक्रिया।

धन्यवाद।

अब पेश है, खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा का पत्र। लिखते हैं वैसे तो सीआरआई से प्रसारित सभी कार्यक्रम पसंद आते हैं, लेकिन टी टाइम कार्यक्रम विशेष रूप से प्रिय है । यह कार्यक्रम मनोरंजन के साथ साथ जानकारियों से भी सजा होता है। कार्यक्रम टी टाइम 3 जनवरी को भाई अनिल पांडेय जी और बहन नीलम जी की प्रस्तुति में सुना और पसंद आया। चीनी सुधार और खुले पन की 40 वी वर्ष गाठ पर चर्चा सुनी और पसंद आयी। श्री आनंद बोगा जी ने इस कार्यक्रम में खुल कर अपने विचार साझा किये। दिल्ली में पौधों पर क्यूँ आर कोड वाला समाचार आप के केंद्र से ही सुनने को मिला। कार्यक्रम में फिल्मी कलाकार कादर खान के निधन का समाचार सुनकर बहुत दुख हुआ। हम कादर खान के निधन पर अशु पूरण श्रद्धाजलि प्रकट करते है। कार्यक्रम में श्रोताओ की प्रतिकिर्या और चुटकले जानदार लगे। मनोरंजक और जानकारी से भरपूर कार्यक्रम टी टाइम सुनवाने के लिये दिल से शुक्रिया प्रकट करते है और हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते है।

तिलक जी हमें पत्र भेजने के लिए आपका धन्यवाद।

अंत में पेश करते हैं केसिंगा, उड़ीसा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल का पत्र। लिखते हैं कार्यक्रम "टी टाइम" की शुरुआत में मशहूर हास्य अभिनेता कादर खान के निधन का समाचार सुन मन द्रवित हो उठा। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व की चर्चा करना सूर्य को दीया दिखाने के समान होगा। हम तो बस, सीआरआई के माध्यम से उनके प्रति विनम्र श्रध्दंजलि अर्पित कर स्वयं को कृतकृत्य समझ सकते हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शान्ति प्रदान करें। कार्यक्रम में आगे चीन में रहने वाले श्री आनंद बोगा के साथ पूर्वप्रसारित भेंटवार्ता सुनवाये जाने का शुक्रिया। उनके साथ की गयी यह बातचीत सुन कर एकबार फिर यह आभास हुआ कि चीन में विदेशियों के लिये व्यापार करना कितना आसान है। मेरी राय में चीन में सुधार और खुलेपन की नीति की चालीसवीं वर्षगाँठ के मौक़े पर इस बातचीत का दोहराया जाना अच्छी बात है। फ़र्क इतना है कि पहले आप पूर्वप्रसारित बातचीत सुनवाने से पहले उसका उल्लेख नहीं करते थे।

वहीं कार्यक्रम में दी गयी यह जानकारी भी रोचक लगी कि नए साल में दिल्ली के प्रसिद्ध लोधी गार्डन में लोग वहां लगे कई पेड़ों की जानकारी अपने स्मार्ट फोन के जरिये हासिल कर सकेंगे। वास्तव में, इन पेड़ों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन कर करीब 90 एकड़ विशाल क्षेत्र में फैले पेड़ों के बारे में तमाम वांछित जानकारी हासिल की जा सकेगी। यह भी जाना कि लोधी गार्डन में एक राष्ट्रीय बोनसाई पार्क, जड़ी-बूटी उद्यान, बांस का बाग, तितलियों का इलाका, कमल तालाब, कुमुदिनी तालाब, मोर प्रजनन केन्द्र और 35.5 मीटर लम्बा ‘बुद्ध कोकोनट' के नाम से मशहूर दिल्ली का सबसे लम्बा पेड़ भी विद्यमान है। इस जानकारी से मेरी जिज्ञासा इतनी बढ़ गई है कि दिल्ली जाना हुआ तो लोदी गार्डन का अवलोकन अवश्य करना चाहूँगा।

आज के अंक में जानकारियों की संख्या कुछ कम ही रही, फिर भी कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को समुचित स्थान दिये जाने तथा रसीले जोक्स ने वह कमी पूरी कर दी। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

धन्यवाद।

अब समय हो गया है जोक्स का

पहला जोक

एक बार विज्ञान की शिक्षिका ने पप्पू से पूछा, “पप्पू बताओ चांद पर पहला कदम किसने रखा था?”

पप्पू- नील आर्मस्ट्रांग

शिक्षिका- शाबाश, और दूसरा?

पप्पू- दूसरा भी उसी ने रखा होगा मैडम, लंगड़ा थोड़े ना था वो

दूसरा जोक..

टीचर:- एक तरफ पैसा, दुसरी तरफ अक्कल, क्या चुनोगे ?

विद्यार्थीः पैसा.

टीचर:- गलत, मै अक्कल चुनती

विद्यार्थीः- आप सही कह रही हो मेडम,

जिसके पास जिस चीज की कमी होती है वो वही चुनता है

तीसरा जोक

पुलिस (चोर से): तुम एक ही दुकान में तीन बार चोरी करने क्यों गए?

चोर: सर, चोरी तो मैंने पहली बार में ही अपनी पत्नी के लिए ड्रेस चुराकर कर ली थी। बाकी दो बार तो मुझे सिर्फ उसे बदलने के लिए जाना पड़ा।

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