20181129

2018-11-29 13:30:27
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अनिलः दोस्तो, प्रोग्राम शुरू करते हैं।

क्या आपने कभी कल्पना की है कि आप जिस तरह के बच्चे की इच्छा करें, वैसे बच्चे को जन्म दे सकें. जैसे कि आप चाहें कि आपकी भूरे रंग के बालों वाली बेटी हो या फिर गोरे रंग का बेटा हो! अब शायद यह कोरी कल्पना नहीं रही, अब जेनेटिकली मॉडिफाइड बच्चे का जन्म भी संभव हो गया है.

चीन के एक शोधकर्ता ने दुनिया में पहली बार जेनेटिकली मॉडिफाइड यानी डिजाइनर बेबी के जन्म लेने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि इस महीने जन्मी जुड़वा बच्चियों के डीएनए में बदलाव के लिए क्रिस्पर तकनीक का इस्तेमाल किया गया. दावा ये भी किया जा रहा है कि डिजाइनर बेबी एचआईवी, एड्स से पीड़ित नहीं होगी. अगर ये दावा सही तो भविष्य में ऐसे बच्चों को जन्म दिया जा सकेगा जिसकी आंख, बाल, त्वचा और अन्य खूबियों का चयन खुद उसके माता-पिता कर सकेंगे.

इस शोध से विज्ञान जगत में हलचल मची है. चीन के एक शोधकर्ता का दावा है कि उसने दुनिया की पहली जेनेटिकली मॉडिफाइड (genetically modified) बच्चियां बनाने में मदद की. यह दो जुड़वां बहनों के डीएनए में एक नए औज़ार के ज़रिए फेरबदल करके किया गया.

साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी ऑफ चाइना के शोधकर्ता हे जियानकुई का कहना है कि "मुझे जिम्मेदारी का एहसास है कि सिर्फ पहला ही नहीं बनूं बल्कि एक मिसाल कायम करूं कि इस तरह की चीज़ें कैसे की जाएं. इसमें समाज की नैतिकता और लोगों पर पड़ने वाले असर का भी ध्यान रखा गया है."

शोधकर्ता का दावा है कि उसने गर्भ धारण करने की चाह में इलाज करवा रहे सात जोड़ों के भ्रूणों में बदलाव किए और अब तक सिर्फ एक कामयाब गर्भ धारण हुआ. जीन एडिटिंग CRISPR - CAS9 के जरिए की गई. इसमें DNA को काटकर एक ख़ास जीन को नकारा बना दिया जाता है.


नीलमः अब समय हो गया है अगली जानकारी का।

बॉलीवुड एक्ट्रेस व मॉडल यामी गौतम अपना 30वां जन्मदिन मना रही हैं. उनका जन्म 28 नवंबर 1988 को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में हुआ था. यामी ने हिंदी फिल्मों के अलावा कन्नड़, तेलुगू, पंजाबी, मलयालम और तमिल फिल्मों में भी काम किया है. इसके अलावा यामी गौतम बड़े ब्रांड्स व प्रोडक्ट्स के लिए ऐड वर्क करती हैं. साल 2012 में यामी गौतम ने बॉलीवुड में आयुष्मान खुराना के साथ 'विक्की डोनर' फिल्म से डेब्यू किया था. इस फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस और बॉलीवुड इंडस्ट्री में पॉजिटिव रिस्पॉन्स आए थे, जिसकी वजह से वह कई अवॉर्ड शो के लिए नॉमिनेट भी हुई थीं. इसके बाद यामी गौतम ने 2014 में 'एक्शन जैक्सन' (Action Jackson), 2015 में 'बदलापुर' (Badlapur), 2016 में 'सनम रे' (Sanam Re) और 2017 में 'काबिल' (Kaabil) में नजर आईं.

चंडीगढ़ में यामी गौतम लॉ विषय की छात्रा थीं. लेकिन भाग्य ने उनके लिए कुछ और ही निश्चित किया हुआ था और जीवन ने उन्हें एक्टिंग का मौका दे दिया. इसके बाद यामी को एक्टिंग जारी रखने के लिए कानून को बीच में छोड़ना पड़ा.

कुछ महीने पहले उन्होंने हिमाचल के अपने घर में खुद का ग्रीनहाउस और ऑर्गेनिक गार्डन स्थापित किया था. इसके अलावा वह पर्यावरण और जानवरों के हित से जुड़े किसी भी अभियान में हमेशा आगे रहती हैं.

अनिलः व्हट्सएप के चीफ बिजनेस ऑफिसर ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है। इसकी जानकारी नीरज अरोड़ा ने खुद अपने फेसबुक वॉल पर दी है। अरोड़ा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ' अब आगे बढ़ने का समय आ गया है। मुझे उम्मीद है कि व्हाट्सऐप अपनी सिक्योरिटी, इस्तेमाल करने में सरल और एक विश्वसनीय संचार ऐप के रूप में सदा बना रहेगा। व्हाट्सऐप की टीम के साथ काम करने मेरे लिए गर्व की बात है।'

अरोड़ा ने व्हाट्सऐप ज्वाइन करने से पहले गूगल में काम कर चुके हैं। बता दें कि अरोड़ा को लेकर पिछले कई महीनों से खबरें चल रही हैं कि वे व्हाट्सऐप के सीईओ बन सकते हैं, हालांकि इन सब रिपोर्ट पर विराम लगाते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। आपको याद दिला दें कि नीरज अरोड़ा ने साल 2011 में व्हाट्सऐप में ज्वाइन किया था। इनकी देखरेख में ही फेसबुक ने व्हाट्सऐप को 19 अरब डॉलर में खरीदा था। अरोड़ा ने आईआईटी दिल्ली से अपनी पढ़ाई की है।

वहीं जापान में दादी और नानी की उम्र की महिलाएं जब काले रंग के वेटसूट में नजर आती हैं तो बेहद ऊर्जावान लगती हैं। इन महिलाओं की उम्र 60 से 80 के बीच है और प्रशांत महासागर में गोता लगाकर मछली पकड़ना इनका पेशा है। यहां इन्हें ‘अमा’ के नाम से जाना जाता है यानी ‘समुद्र की मां’।

जापान में 60-80 की उम्र की इन पेशेवर मछुआरन महिलाओं को ‘अमा’ के नाम से जाना जाता है

तटवर्ती शहर टोबा में मछुआरन का काम करने वाली हिदेको कोगुची कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि मैं मछलियों के बीच जलपरी हूं और यह अनुभूति बेहद शानदार है।’ कोगुची पिछले तीस सालों से समुद्र में गोता लगा रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि अगले 20 साल तक वह यह काम करती रहेंगी।

नीलमः अब समय हो गया है हेल्थ संबंधी जानकारी का। दोस्तो, कई बीमारियां ऐसी होती हैं जिनका हमारी जीवनशैली से सीधा संबंध नहीं होता है। ये बीमारियां पूर्वजों से हमें मिली होती हैं। लेकिन क्रिस्पर कास-9 तकनीक ने आनुवंशिक बीमारियों के खिलाफ उम्मीद की रोशनी दिखाई है..

हमारी जीवनशैली से हमारे जींस यानी डीएनए यह तय करते हैं कि अगली पीढ़ी में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां देनी हैं। जब हम खराब जीवनशैली अपनाते हैं तो हमारे डीएनए में स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां भी प्रभावित होती हैं। यह गड़बड़ी म्युटेशन कहलाती है। म्युटेशन की वजह से जींस में आने वाले बदलाव आनुवंशिक रोगों की सबसे बड़ी वजहें बनते हैं।


अनिलः हालांकि, कई बीमारियां ऐसी होती हैं, जिनका हमारी जीवनशैली से सीधा संबंध नहीं होता है और हमारे पूर्वजों से हमें मिली होती हैं। आने वाले दिनों में करीब 1800 ज्ञात मोनोजेनिक आनुवंशिक बीमारियों का इलाज सहज संभव हो सकेगा। क्रिस्पर कास-9 तकनीक ने आनुवंशिक बीमारियों के खिलाफ उम्मीद की रोशनी दिखाई है। अभी-तक ज्यादातर आनुवंशिक बीमारियों का या तो कोई स्थायी इलाज नहीं है या फिर इलाज बेहद महंगा है और सहज उपलब्ध भी नहीं है। लेकिन क्रिस्पर कास-9 (क्लस्टर्ड रेग्युलरली इंटरस्पेस्ड शॉर्ट पैलिन्ड्रोमिक रिपीट्स) बेहद सटीक, सस्ती और सहज उपलब्ध हो सकने वाली तकनीक है। इस तकनीक के जरिए इंसान में उनके पूर्वजों से आने वाली गंभीर आनुवंशिक बीमारियों को दूर किया जा सकेगा। साथ ही जीन एडिटिंग की मदद से भ्रूण में ही ब्लड सेल को एनीमिया और इम्यून सेल को कैंसर से सुरक्षा देना संभव होगा। इस तकनीक के जरिए न केवल पीड़ित व्यक्ति को इलाज मिल सकता है, बल्कि इससे नवजातों को किसी भी तरह के आनुवांशिक दोषों से बचाया जा सकता है।


दोस्तो, इसी के साथ आज के प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है, अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का।

नीलमः पहला पत्र हमें भेजा है, खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा और चंदन अरोड़ा आदि ने। लिखते हैं सादर प्रणाम। चायना रेडियो हम परिवार सहित सुनते हैं और यहां से प्रसारित सभी कार्यक्रम बेहद पसंद आते हैं। 22 नवम्बर का कार्यक्रम टी टाइम अच्छा लगा। इस अंक में इस बार जो जानकारियां कार्यक्रम में दी गयी विशेष रूप से पसंद आयी। भारत में मलेरिया में गिरावट, फेसबुक के सीईओ जुकरबर्ग के बारे में, और सलमान की फिल्म भारत के बारे में भी पता चला। धन्यवाद। अरोड़ा जी हमें पत्र भेजने के लिए आपका धन्यवाद।

अनिलः दोस्तो, अब पेश करते हैं, अगला पत्र। जिसे भेजा है, जुबैल सऊदी अरब से सादिक आजमी ने। लिखते हैं, लगातार मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन करवाने हेतु अनिल जी और नीलम जी को सर्वप्रथम धन्यवाद प्रेषित करता हूँ। टी टाइम एक और वर्ष पूरा करने के कगार पर है। मन में प्रश्न उभर रहे हैं आगामी वर्ष में प्रसारण जारी रहेगा या नहीं क्या कुछ बदलाव देखने को मिलेगा। समय में वृद्धि होगी आदि आदि

उत्तर की प्रतीक्षा है। देखिए अभी बदलाव की संभावना नहीं है, अगर कुछ बदलाव होगा तो आपको जरूर अवगत कराएंगे।

आगे लिखते हैं इस बार का प्रोग्राम, विश्व पुरुष दिवस की रोचक जानकारी के साथ हुआ। जो इसके इतिहास और मूल उद्देश्य को उजागर कर रहा था। इसमें कोई सन्देह नहीं, जब से इस धरती की उत्पत्ति हुई है, तब से पुरुषों का योगदान सर्वोपरि रहा है। जानकारी देने हेतु धन्यवाद।

आशीष बाधवानी जी के साथ वार्ता लम्बी तो ज़रूर थी। मगर व्यापार के अवसरों की सही विवेचना कर रही थी। भारत चीन व्यापार में बढ़ोतरी को लेकर चर्चा विश्व स्तर पर की जा रही है। यहाँ तक कि अमेरिका के माथे पर बल साफ़ दिख रहा है। जिस पर समीक्षा अगले पत्र में करना उचित समझता हूँ।

नीलम जी ने उत्साहित करने वाली खबर सुनाई कि भारत में मलेरिया जैसी घातक बीमारी की रोकथाम में सफलता अर्जित हुई है। उम्मीद करता हूँ आने वाले समय में इसे पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया जायेगा।

फेसबुक के सर्वेसर्वा को ही निशाने पर लेने की घटना सुनकर विश्वास हो चला है कि पेड़ लगाने वाला फल के स्वाद की आशा न करे। उत्तराखंड में महिलाओं को राहत देती खबर सुनकर दिल को थोड़ा सुकून हुआ। इस योजना का लाभ समूचे भारत की महिलाओं को मिले यही दुआ है।

सलमान खान की फिल्म भारत की शूटिंग में झंडे को लेकर विवाद अचरज में डालता है जबकि यह सिर्फ महज फिल्म का हिस्सा था। पूर्व की कई ऐसी फिल्में मौजूद हैं जिसमें रूस,अमेरिका और इंग्लैंड के झंडे दिखाए जा चुके हैं। जबकि दूसरे अन्य कारणों से झंडा फहराने का मैं भी विरोध करता हूँ।

धन्यवाद। सादिक जी हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।


नीलमः अगला पत्र हमें भेजा है, सांईराम रेडियो श्रोता संघ, खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे, कुमारी भावना, बिंदु, गोलू, कुसुमबाई, राधेश्याम नागनपुरे और सूरज कुमार ढाकसे आदि ने। लिखते हैं पिछले कार्यक्रम में भारतीय बिजनेसमैन आशीष बाधवानी जी के साथ जो चर्चा हमें बहुत अच्छी लगी। अनिल पांडेय जी ने श्रोताओ से कहा कि आपने महिला दिवस, बाल दिवस और भी कई दिवसों के बारे मे सुना होगा, लेकिन हम आपको मर्द या पुरुषों के दिवस के बारे मे जानकारी दे रहे हैं। अनिल जी हम आपसे यह कहना चाहेंगे कि आपका टी टाइम कार्यक्रम विभिन्न प्रकार की रोचक जानकारियों , जोक्स एवं श्रोताओं की टिप्पणियों से भरा होता है। जिसे सुनकर हमारा बहुत ज्ञानवर्धन और भरपूर मनोरंजन होता है। इसी क्रम में बहन नीलम जी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार बताया कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां मलेरिया के मामलों में गिरावट दर्ज की गयी है । इस रिपोर्ट मे दुनिया मे मलेरिया से सर्वाधिक पीङित 11 देश शामिल हैं, रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में दुनियाभर के मलेरिया के मामलों में 4 फीसद भारत में थे । अब भारत ने इस प्रतिशत को कम करने के मामले में अच्छी प्रगति हासिल की है । इसी क्रम में नीलम जी ने सबसे बङे सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की इस्तीफे की खबर का विस्तार से वर्णन किया। कार्यक्रम में तमाम जानकारियो के अलावा बद्रीप्रसाद वर्मा जी द्वारा भेजे गये तीन जोक्स भी बेहद शानदार लगे। धन्यवाद।


अनिलः अगला पत्र भेजा है, दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं 19 नवंबर का दिन लगभग 60 से अधिक देशों में 'इंटरनेशनल मेन्स डे' यानि 'विश्व पुरुष दिवस' के रूप में मनाया जाता है। हमलोगों के लिए यह बिल्कुल नई जानकारी थी, क्योंकि स्वतंत्रता दिवस, बाल दिवस, शिक्षक दिवस, महिला दिवस, प्रेम दिवस इत्यादि तो सुनता रहा था यह 'विश्व पुरुष दिवस' सचमुच पहली बार सुना।

वहीं भारतीय व्यापारी आशीष बाधवानी के साथ भेंटवार्ता में बाधवानी जी ने सभी प्रश्नों का सटीक जवाब दिया ।

अगली जानकारी में बताया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जहाँ मलेरिया के मामलों में गिरावट आई है। इस रिपोर्ट को सुनकर हम लोगों को काफी खुशी मिली है। इसी तरह और क्षेत्रों में भी भारत को प्रगति करने की आवश्यकता है। वहीं उत्तराखंड को देहरादून में गर्भवती महिलाओं की गंभीर स्थिति में अब शहर के पांच निजी अस्पतालों में भी प्रसव की निशुल्क सुविधा मिलेगी। जिसका खर्च का भुगतान स्वास्थ्य विभाग करेगा । इस सुविधा से स्थानीय महिलाओं को लाभ मिलेगा। शानदार प्रोग्राम पेश करने के लिए धन्यवाद।


नीलमः अब पेश है केसिंगा उड़ीसा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजा गया पत्र। लिखते हैं, टी टाइम" का आगाज़ 'अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस 2018' की दिलचस्प जानकारी से किया जाना हमारे सामान्य-ज्ञान में बढ़ोतरी कर गया। ज्ञात हुआ कि 19 नवंबर का दिन करीब 60 से ज्यादा देशों में इंटरनेशनल मेन्स डे के रूप में मनाया जाता है और इसकी शुरुआत 1998 में त्रिनिदाद और टोबैगो में हुई थी। पुरुष दिवस के बारे में यह तथ्य रोचक लगा कि इसके लिये डॉ. जीरोम तिलकसिंह द्वारा जीवन में पुरुषों के योगदान को एक नाम देने का बीड़ा उठाया गया था और यह उनके पिता के बर्थडे के दिन विश्व पुरुष दिवस के रूप में मनाया जाता है। वैसे सच कहा जाये, तो आज तरह-तरह के इतने दिवस हो गये हैं कि दिवसों का शीर्षक भी ढ़ंग का नहीं होता। लगता है कि इसका चलन एक भेड़-चाल की तरह हो गया है। इस जानकारी के बाद बिजनेसमैन आशीष बाधवानी के साथ की गयी बातचीत भी काफी महत्वपूर्ण लगी। यद्यपि, बातचीत के दौरान रिसैप्शन में आयी गड़बड़ी के चलते सुनना काफी मुश्किल हुआ, फिर भी मुझे उनका यह कहना बिलकुल सही लगा कि मेक इन इण्डिया के तहत वर्तमान में जो चीनी कम्पनियां भारत में अपना निवेश एवं उत्पादन शुरू कर रही हैं, उससे आने वाले कुछ वर्षों में उत्पादन के क्षेत्र में भारत की स्थिति भी चीन जैसी हो जायेगी।

जानकारियों के क्रम में आगे विश्व स्वास्थ्य संगठन की उस रिपोर्ट के बारे में जान कर खुशी हुई, जिसमें कहा गया है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने मलेरिया के मामलों में गिरावट दर्ज की है। इस रिपोर्ट में दुनिया के सर्वाधिक मलेरिया पीड़ित 11 देश शामिल हैं।

वहीं सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग पर जिन परिस्थितियों में इस्तीफे की खबर आई है, वह दुःखद है। वैसे न्यूयॉर्क टाइम्स की जांच के बाद सामने आये खुलासे की बात यदि सही है, तो ऐसा दबाव पड़ना स्वाभाविक ही है।

जानकारियों के क्रम में उत्तराखंड के देहरादून में गर्भवती महिलाओं के लिए गंभीर स्थिति में उन्हें अब शहर के पांच निजी अस्पतालों में भी प्रसव की निशुल्क सुविधा मिलने का समाचार वाक़ई राहत प्रदान करने वाला लगा। दुर्भाग्य की बात है कि जो चीज़ महिलाओं के मूलभूत अधिकार क्षेत्र में आनी चाहिये, उसे खैरात की तरह दिया जा रहा है। इस पर भी कितना ईमानदारी से अमल होगा, यह देखने वाली बात है।

वहीं बॉलीवुड के भाईजान सलमान खान द्वारा अपनी फिल्म 'भारत' की शूटिंग बीच में छोड़ पंजाब से अचानक मुंबई लौट जाने के समाचार से कोई हैरानी नहीं हुई। क्यों कि फ़िल्मकारों का मक़सद महज़ पैसा कमाना है। इन तमाम बातों के अलावा आज के अंक में पेश श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं एवं ज़ोक्स भी कार्यक्रम में रोचकता पैदा कर गये। धन्यवाद फिर एक सरस प्रस्तुति के लिये।

सुरेश जी हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद।

अनिलः श्रोताओं की टिप्पणी यहीं संपन्न होती है, अब समय हो गया है जोक्स यानी हंसगुल्लों का।

पहला जोक.

एक व्यक्ति चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहा था,

उसे सिर्फ तीन वोट मिले..

अब उसने सरकार से जेड प्लस सुरक्षा की मांग की।

जिले के डीएम ने समझाते हुए कहा कि आपको सिर्फ तीन वोट मिले हैं, आपको जेड प्लस कैसे सिक्योरिटी कैसे दे सकते हैं।

इस पर वो आदमी बोला...जिस शहर में इतने लोग मेरे खिलाफ़ हों तो मुझे सुरक्षा मिलनी ही चाहिए।


दूसरा जोक..

पिता : बेटा, एक जमाना था जब मैं 10 रुपए लेकर बाजार जाता था और किराना, सब्जी, दूध सब ले आता था।

बेटा : पिताजी अब जमाना बदल गया है। आजकल हर दुकान पर सीसीटीवी कैमरे लगे रहते हैं।


तीसरा जोक

पत्नी : तुम कोई भी काम ढंग से नहीं करते हो ?

पति : अब क्या हुआ ? क्या कर दिया ऐसा मैंने ?

पत्नी : तुमने जो कल cylinder लगाया था

पति : हाँ लगाया था

पत्नी : पता नहीं कैसे लगाया कल से दो बार दूध उबला दोनों बार ही दूध फट गया

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