20181025

2018-10-25 14:09:10
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अनिलः प्रोग्राम की शुरुआत इस खबर के साथ...

भारत का पहला स्वदेशी क्रूज अंगरिया पिछले दिनों मुंबई से गोवा के लिए रवाना हुआ। क्रूज का नाम अंगरिया मराठा नौसेना के पहले एडमिरल कान्होजी अंग्रे के नाम पर रखा गया है. कान्होजी भारतीय समंदर के बेताज बादशाह थे. यह जहाज 6 मंजिला और 131 मीटर लंबा है. क्रूज के उद्घाटन समारोह में महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्‍नी अमृता भी पहुंची थीं. क्रूज के शुभारंभ के बाद अमृता फडणवीस (Amruta Fadnavis) ने कुछ ऐसा कर दिया, जिससे उनके साथ मौजूद अफसरों के हाथ-पांव फूलने लगे. दरअसल, मुख्यमंत्री फडणवीस की पत्नी का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि वह क्रूज के एकदम किनारे पर बैठकर सेल्फी ले रही हैं, जो जगह सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है.
 अमृता फडणवीस के पास पुलिस के थोड़ा पीछे पुलिस के अधिकारी भी हैं और वह उन्हें ऐसा नहीं करने को कह रहे हैं. अधिकारी उनके पास भी जाते हैं और बताते हैं कि वहां खतरा है. वह उनसे उठने की गुजारिश भी करते हैं, लेकिन अमृता किसी की सुनने को तैयार नहीं दिखती.

 

नीलमः अब समय हो गया है अगले पत्र का। भारत में पिछले चार साल में विभिन्न श्रेणियों के ऐसे करदाताओं की संख्या की संख्या 60 प्रतिशत बढ़कर 1.40 लाख हो गई है जो अपनी सालाना आय एक करोड़ रुपये से अधिक दिखाते हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने यह जानकारी दी है। आयकर विभाग के नीति बनाने वाले निकाय सीबीडीटी ने पिछले चार साल के महत्वपूर्ण आयकर और प्रत्यक्ष करों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. सीबीडीटी ने कहा कि एक करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं की संख्या पिछले चार साल में 68 प्रतिशत बढ़ी है. सीबीडीटी ने कहा ‘‘ एक करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय वाले कुल करदाताओं (कंपनियों, फर्में, हिंदू अविभाजित परिवार) की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है.'' 

 

अनिलः अब बॉलीवुड की ख़बर..

बड़े पर्दे पर इन दिनों आयुष्मान खुराना के जलवे बरकरार हैं। पहले अंधाधुन से सभी की वाहवाही लूटने वाले आयुष्मान की अब बधाई हो रिलीज हुई है। दशहरे के मौके पर आई इस फिल्म से काफी उम्मीदें थीं, जिस पर ये फिल्म खरी उतरती दिख रही है। फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन ही बजट से ज्यादा की कमाई कर ली।

अमित शर्मा के निर्देशन में बनी बधाई हो में मुख्य किरदार आयुष्मान खुराना, सान्या मल्होत्रा, नीना गुप्ता, गजराज राव, सान्या मल्होत्रा, शीबा चड्ढा और सुरेखा सिकरी ने निभाया है। फिल्म एक उम्रदराज महिला के गर्भवती होने की कहानी है। जिसे कॉमेडी-ड्रामा के अंदाज में पिरोया गया है। फिल्म का कुल बजट 25 करोड़ है।

 

नीलमः फिल्म के ट्रेलर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला था। जिसका फायदा फिल्म के कलेक्शन पर देखा जा सकता है। बॉक्स ऑफिस इंडिया के मुताबिक रिलीज के महज 4 दिन में बधाई हो ने 44.50 करोड़ की कमाई कर ली है। दशहरे की वजह से लॉन्ग वीकेंड का फायदा भी फिल्म को मिला। गुरुवार को इसका कलेक्शन 7.25 करोड़, शुक्रवार को 11.75 करोड़, शनिवार को 12.25 करोड़ वहीं रविवार को कुल कमाई 13.25 करोड़ रही।

 

 

अनिलः दोस्तो, क्या आपने सुना है कि ऑपरेशन चल रहा हो और एक आवारा कुत्ता आए और कुछ लेकर भाग जाए, वो भी ऑपरेशन टेबल से।

दरअसल, बिहार के बक्सर रेलवे स्टेशन पर आरा के रहने वाले रामनाथ मिश्रा श्रमीजीवी एक्सप्रेस पर चढ़ने ही जा रहे थे कि तभी उनका पैर फिसल गया और वह ट्रेन के नीचे चले गए। हादसे में उनका एक हाथ और एक पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। 

घायल को जीआरपी ने सदर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। सदर अस्पताल में चिकित्सकों को उनका पैर काटना पड़ा। इसी दौरान अस्पताल के अंदर एक आवारा कुत्ता पता नहीं कैसे आ गया और वह रामनाथ का कटा पैर लेकर भाग निकला। हालांकि बाद में उक्त घायल की इलाज के दौरान मौत हो गयी।

अब दूसरी जानकारी से रूबरू करवाते हैं। जो लोग नए-नए मां-बाप बनते हैं, उन्हें सबसे पहले अपनी नींद गंवाकर इस खुशी की कीमत चुकानी पड़ती है। धरती पर नई-नई अवतरित हुई जिंदगी की देख-भाल में नींद खराब होती है, क्योंकि बच्चा कभी भी उठ सकता है। कभी भी उसकी जरूरतें हो सकती हैं। मजबूत से मजबूत रिश्ते में इसकी वजह से दरार आ सकती है। ये मां-बाप की जिंदगी का सबसे बड़ा तनाव होता है। इससे उनकी सेहत पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है।

लेकिन अब एक ऐसी तकनीक के बारे में जानिए..जो ऐसा काम कर सकती है।

ये एक ऐसी चारपाई है, जो खुद से हिल सकती है। आपके बच्चे को सुला सकती है। तकनीकी तरक्की का ये एक फायदा है, जो किसी नवजात के मां-बाप को सुकून से सोने में मददगार बन सकता है। स्नू की खूबी ये है कि ये बच्चे को गर्भ में रहने वाला एहसास दे सकती है। ये चारपाई उसी तरह का सेन्सेशन, शोर और एक झिल्ली से घिरे होने का एहसास बच्चे को कराती है, जो बच्चे ने मां के गर्भ में महसूस की होती है।

लेकिन, सवाल ये भी है कि क्या ये चारपाई किसी इंसान के छूने का एहसास दे सकती है? जब इस चारपाई को बच्चे के रोने की आवाज 'सुनाई' पड़ती है, तो ये अपने डेटा में दर्ज सबसे शांत शोर और हिलाने-डुलाने के विकल्प को चुन कर बच्चे को शांत करती है। स्नू बनाने वालों का दावा है कि ये गर्भ के भीतर के एहसास को समेटे हुए उपकरण है। इससे बच्चे की नींद में एक घंटे या इससे भी ज्यादा का इजाफा हो जाता है।

स्नू बच्चे को तसल्ली भी देती है। इसमें सोने का एक अलग हिस्सा है, जो बिस्तर से जुड़ा हुआ है। वो बच्चे को हिलाता भी है और उन्हें पीठ के बल लिटाए भी रखता है, ताकि वो आराम से सो सकें। अमरीकन एकेडेमी ऑफ पेड्रियाटिक्स कहती है कि बच्चों को पीठ के बल ही सुलाना चाहिए। ब्रिटिश एनएचएस से जुड़ी संस्थाएं भी यही सलाह देती हैं। बच्चे अगर पेट के बल लेटते हैं तो उनकी अचानक से होने वाली मौत यानी सडेन इनफैंट डेथ सिंड्रोम के शिकार होने का खतरा रहता है।

 

 

नीलमः अब आपको बताते हेल्थ संबंधी जानकारी। दोस्तो, कोई चोट लगने के बाद अक्सर हम अपनी हड्डियों के टूटने को लेकर आशंकित हो जाते हैं। इसे लेकर कई गलतफहमियां हैं। आज हम आपकोे इन्ही गलतफहमियों के बारे में बताने जा रहे हैं। यकीनन इनके बारे में जानकर आपकी आंखें हैरानी से खुली की खुली रह जाएंगी। 

किसी भी चोट के बाद जो पहला खयाल आता है, वो यही आता है कि आप की हड्डी टूट गई है। दर्द से कराहते हुए आप लगातार यही सोचते रहते हैं कि अगर आप हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो कहीं आप की हड्डी टूट तो नहीं गई है। सच्चाई ये है कि कई बार आप टूटी हुई हड्डी को भी हिला सकते हैं। यानी अगर आप चोटिल हाथ या पैर नहीं हिला पा रहे हैं, तो इसका ये मतलब नहीं कि हड्डी टूट गई है।

हड्डी टूटने के तीन बड़े संकेत होते हैं-दर्द, चोट की जगह का फूलना और शरीर का कोई अंग टेढ़ा-मेढ़ा होना। अगर कोई हड्डी चमड़ी से उभरी हुई मालूम होती है, तो ये शुभ संकेत नहीं। हादसे के वक्त चटखने की आवाज आप ने अगर सुनी है, तो उसका मतलब भी होता है कि आप की हड्डी टूट गई है।

ऐसा हर बार मुमकिन नहीं कि हड्डी टूट गई है, तो आप को दर्द होगा ही। ऐसा नहीं है। बहुत से लोगों को तो बिल्कुल एहसास भी नहीं होता कि उनकी कोई हड्डी टूट गई है।  

 

अनिलः अब वक्त हो गया है खेल की ख़बरों का।

विदेशी कोच अनुबंधित करने के लिए जहां भारत सरकार समेत खेल संघ लाखों रुपये प्रति माह खर्च करने को तैयार हैं और खिलाड़ी भी उन्हीं के संरक्षण में तैयारियां अंजाम देना चाहते हैं। वहीं एक खिलाड़ी ऐसा भी है, जिसने विदेशी कोच रखने का प्रस्ताव ठुकराव दिया है। 

एशियाई खेलों के बाद यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले शूटर सौरभ चौधरी को विदेशी कोच के संरक्षण में तैयारियां करने के प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन 16 वर्षीय इस शूटर ने साफ कर दिया है कि उन्हें अपने कोच अमित श्योराण पर पूरा भरोसा है। वह उन्हें छोड़कर नेशनल कैंप के बाहर किसी अन्य कोच के साथ तैयारियां नहीं करना चाहते हैं। 

ब्यूनस आयर्स से गोल्ड जीतकर लौटे बागपत के सौरभ खुलासा करते हैं कि उन्हें कुछ कंपनियों की ओर से निजी विदेशी कोच रखने के लिए प्रस्ताव दिए गए थे। कंपनियों का मानना था कि इससे उनके खेल में और निखार आएगा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने मना कर दिया। 
सौरभ का कहना है कि जिस कोच के साथ तैयारियां कर एशियाई खेलों का स्वर्ण जीत सकते हैं तो आगे भी वही कोच उन्हें अन्य खेलों का पदक भी दिला सकता है। सौरभ का मानना है कि यूथ ओलंपिक से ज्यादा एशियाई खेलों का गोल्ड जीतना ज्यादा कठिन था। सौरभ का कहना है कि पालेमबांग में मुकाबला ब्यूनस आयर्स की अपेक्षा ज्यादा संघर्षपूर्ण था।  

 

 

नीलमः प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है, अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का।

पहला पत्र भेजा है, यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं, हम 18 अक्टूबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे क्योंकि इसी दिन हमारा पसंदीदा कार्यक्रम टी-टाइम पेश होना था। इंतजार समाप्त हुआ और अपना प्रोग्राम सुना और मजा आ गया। कार्यक्रम में जो जानकारियां सुनवायी बहुत पसंद आई। फिल्मी गीत ने कार्यक्रम को और रोचक बना दिया। बंगाली भजन वाला जोक, संता का इंटरव्यू, और पंडित और पत्नी वाला जोक सुनकर बहुत देर तक परिवार सहित हँसते रहे। कार्यक्रम कब शुरू हुआ और कब समाप्त हुआ पता ही नहीं चला। सुंदर कार्यक्रम सुनवाने के लिए सीआरआई का दिल से शुक्रिया और ढ़ेरों शुभकामनायें प्रेषित करते हैं।

अरोड़ा जी हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 

अनिलः अगला पत्र भेजा है, सऊदी अरब जुबैल से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं मौसम के बदलते मिज़ाज और सर्दी के आगमन पर चाय की चुस्की का मजा लेते हुए अपने पसंदीदा कार्यक्रम टी-

टाइम के नए अंक का खूब आनंद लिया। आरंभ में आयरलैंड की लेखिका ऐना जी को मिले बुकर पुरस्कार और उनकी लेखनी पर विस्तृत समीक्षा सुनने को मिली यकीनन उनको मिले इस सम्मान से समूचे आयरलैंड वासियों का मान बड़ा है। मिश्रित प्रतिक्रिया जानकर उस किताब को पढ़ने की जिज्ञासा मन में जगी। वहीं छह गेंदों में छह छक्के लगाने का नया कीर्तिमान अफगानिस्तान के एक खिलाड़ी ने कर दिखाया। जिसे सुनकर इस बात की पुष्टि होती है कीर्तिमान बनते ही हैं टूटने के लिए हैं।

वहीं मध्य प्रदेश के एक गांव में मात्र ₹20 के स्टांप पर लड़कियों को बेचने की घटना से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि भले ही हम चांद पर सूर्य पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन हकीकत में जमीनी स्तर पर हम आज भी पिछड़े हुए हैं। यह घटना न सिर्फ मध्य प्रदेश अपितु समस्त भारतवासियों को शर्मसार करती है। वहीं इस खबर को सुनकर हम अचरज में पड़ गए कि भला एक इंसान के दिमाग में नाखून कैसे पहुंच सकता है। आशा है कि आने वाले कार्यक्रमों में इससे संबंधित है खबर को जरूर सुनाया जाएगा।

सोशल मीडिया पर ठग्स आफ हिंदुस्तान के ट्रेलर से स्पष्ट होता है कि यह फिल्म काफी लोकप्रियता हासिल करेगी।

पूर्व की भांति इस बार भी कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को उचित स्थान दिया जाना उम्दा लगा। आशा है यह क्रम भविष्य में भी जारी रहेगा।

आज के तीनों जोक्स सुनकर हंस हंस के बुरा हाल हो गया। विशेषकर बंगाली वाला जोक। धन्यवाद।

 धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

 

नीलमः अगला पत्र भेजा है, दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं, इस प्रोग्राम में बताया गया कि 56 वर्षीय एना बर्न्स आइरिश लेखिका हैं। उन्हें 'मिल्कमैन' किताब के लिए प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार से सम्मनित किया गया। वह बधाई के पात्र हैं। जबकि क्रिकेट संबंधी ख़बर भी अच्छी लगी। इसके साथ ही मध्यप्रेदश के शिवपुरी गांव में लड़कियों की सौदेबाजी की खबर दुखद कही जाएगी। वहीं एक चीनी नागरिक के सिर में दर्द की बात सामने आयी, उनके सिर में नाखून का मिलना आश्चर्य में डालता है। इसके साथ ही प्रोग्राम में पेश अन्य जानकारी और जोक्स भी शानदार थे।  शंभू जी पत्र भेजने के लिए धन्यवाद।

अगला पत्र भेजा है, बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं टी-टाइम प्रोग्राम में आइरिश महिला को बुकर पुरस्कार मिलने की खबर अच्छी लगी। साथ ही अफ़गान क्रिकेटर द्वारा ताबड़तोड़ बैटिंग करना, बॉलीवुड संबंधी खबर और श्रोताओं की टिप्पणी और जोक्स सभी अच्छे लगे। बेहतरीन कार्यक्रम पेश करने के लिए शुक्रिया।

 प्रियंजीत जी, हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 दोस्तो, अब पेश करते हैं केसिंगा उड़ीसा से सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजा गया पत्र। जो कि हमारे मॉनिटर हैं और लगातार सक्रिय रूप से प्रोग्राम में टिप्पणी करते हैं। सुरेश लिखते हैं, आयरलैंड की लेखिका 56 वर्षीया एना बर्न्स को उनकी किताब 'मिल्कमैन' के लिए दिये प्रतिष्ठित मैन बुकर पुरस्कार से किया जाना सुखद लगा। ज्ञात हुआ कि उनके इस उपन्यास की कहानी 1970 के काल में उत्तरी आयरलैंड में रहने वाली एक 18 वर्षीय लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें लड़की एक रहस्यमयी और उम्र में उससे कहीं बड़े एक व्यक्ति से संबंध बनाने के लिए मजबूर होती है। कार्यक्रम में लेखिका के अन्य मशहूर उपन्यासों का ज़िक्र किये जाने का भी शुक्रिया।
    जानकारियों के क्रम में अफ़गानिस्तान प्रीमियर लीग में अफ़गान खिलाड़ी हज़रतुल्लाह जजाई द्वारा एक ओवर में छह छक्के जड़े जाने का समाचार वाक़ई हैरान करने वाला है। क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में ऐसा करिश्मा करने वाले विश्व के पहले क्रिकेटर वेस्टइंडीज के सर गैरी सोबर्स तथा भारत के रवि शास्त्री सहित चंद खिलाड़ियों के नाम ही आते हैं। वैसे भी क्रिकेट के खेल में अफ़गानिस्तान ने हाल ही में प्रवेश किया है।
अनिलः जबकि मध्यप्रेदश के शिवपुरी के एक इलाके में होने वाली लड़कियों की सौदेबाजी तथा महज़ बीस रुपये के स्टाम्प पेपर पर उन्हें बेच दिये जाने के समाचार ने मन-मस्तिष्क को हिला कर रख दिया। मेरी राय में 'धड़ीचा' नामक  कुप्रथा के नाम पर चलाये जाने वाले इस गोरखधंधे पर तुरन्त रोक लगायी जानी चाहिये। इस तरह का घृणित कार्य आज के सभ्य समाज के लिये सबसे बड़ा धब्बा है। 
 वहीं चीन में चिकित्सकीय जाँच के दौरान एक शख़्स की खोपड़ी के भीतर 48 एमएम का एक नाखून पाये जाने का क़िस्सा, शायद दुनिया का अब तक का एकमात्र क़िस्सा हो। हैरत की बात तो यह है कि नाख़ून दिमाग़ के भीतर गया तो कैसे ? धन्यवाद के पात्र हैं चीनी डॉक्टर, जिन्होंने इसका पता लगाया।
      स्वमूत्र पान करने सम्बन्धी जानकारी से हमें कोई हैरानी इसलिये नहीं हुई कि भारत में स्वमूत्र-चिकित्सा प्राचीन समय से चली आ रही है। और हाँ, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई स्वयं स्वमूत्र चिकित्सा को अपनाते थे। फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' की चर्चा के साथ उसका एक गाना 'वाशमल्ले' रिलीज़ होने का समाचार भी सुहावना लगा। इन तमाम बातों के अलावा कार्यक्रम में पेश ज़ोक्स एवं श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं भी प्रस्तुति को ख़ास बना गयीं। धन्यवाद।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 

अनिलः श्रोताओं की टिप्पणी यहीं संपन्न होती है, अब समय हो गया जोक्स  का।

 

पहला जोक

संता - यार कल रात घर देर से पहुँचा, बेल बजाई पर बीवी ने गुस्से में दरवाजा नहीं खोला पूरी रात सड़क पर गुजार दी बंता - फिर सुबह बीवी ने दरवाजा खोला की नहीं ? संता - नहीं यार, सबेरे दारू उतरी तो याद आया कि, अभी तो मेरी शादी ही नहीं हुई है और चाबी तो जेब में ही थी।

 

दूसरा जोक..

एक औरत का पति मर गया। कुछ दिनों के बाद वह अपने दूसरे प्रेमी से बोली। मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं।

प्रेमीः क्या तुम्हारा पति मर गया है।

औरत-हां, तभी तो मैं तुम्हारे साथ शादी करना चाहती हूं।

 

तीसरा जोक..

शराबी - अगर मेरे हाथ में सरकार होती तो, मैं देश की तकदीर  बदल देता । शराबी की पत्नी (गुस्से से) - अरे, पहले अपना पजामा तो बदल ले करम जले... सुबह से मेरी सलवार पहन कर घूम रहा है

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