20180927

2018-09-27 14:06:27
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अनिलः दोस्तो, आज के प्रोग्राम में आप सुनेंगे रोचक जानकारी, साथ ही श्रोताओं की टिप्पणी और जोक्स। इसके अलावा पेश की जाएगी हाल में हुए हिंदी दिवस के मौके पर चीन में हिंदी के प्रोफेसर के साथ चर्चा।

पहले शुरू करते हैं जानकारी ....चीन की दीवार पूरी दुनिया में मशहूर है। उसे दुनिया के अजूबों में गिना जाता है। मगर, चीन में एक और महान दीवार है, जिसके बारे में शायद आप ने सुना ही न हो। तो, चलिए सैर कराते हैं चीन की एक और मशहूर ऐतिहासिक दीवार की। ये दीवार, चीन के नानजिंग शहर में है। करीब 600 साल पुरानी ये दीवार शहर को अपने आगोश में समेटे हुए है। ये दीवार 35 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है। चीन के नानजिंग की इस दीवार को बनाने में 35 करोड़ से भी ज्यादा ईंटों का इस्तेमाल हुआ है। मजे की बात ये है कि बहुत सी ईंटों में उन्हें बनाने वाले का नाम लिखा है। 90 साल की ची झिरू नानजिंग की रहने वाली हैं। उन्होंने इस दीवार को बचाने की कोशिश में बहुत योगदान दिया है।

....अब सुनते हैं बातचीत। 

शंघाई में हिंदी के प्रोफेसर नवीन लोहनी के साथ चर्चा।

आपको यह बातचीत कैसी लगी, हमें जरूर बताइएगा। 

नीलमः पढ़ाई के मामले में हर बच्चा अलग होता है. कोई तेज़ होता है, तो किसी को समझने में वक़्त लगता है। मजे की बात ये है कि स्कूल में कौन सा बच्चा तेज होगा और कौन औसत से कम होगा, ये बात बच्चों के जीन पर निर्भर करती है। जीन के आधार पर ये भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कोई बच्चा प्राइमरी स्कूल में कैसा परफॉर्म करेगा, किस विषय में उसकी दिलचस्पी ज्यादा होगी। लेकिन, ये बात बहुत कम ही लोगों को पता है कि हमारे जीन्स की बनावट और माहौल का असर बच्चे की आगे के बर्ताव और पढ़ाई में वो कैसा रहेगा इस बात पर पड़ता है।

इसके लिए ब्रिटेन के छह हजार जोड़ी जुड़वां बच्चों की पढ़ाई पर रिसर्च की गई। पढ़ाई में उनके स्तर पर गहरी निगाह रखी गई। देखा गया कि जो बच्चे प्राइमरी स्कूल में अच्छा करते हैं, वो आगे की पढ़ाई में भी बेहतर होते हैं। ये रिसर्च जुड़वां बच्चों पर इसलिए की गई क्योंकि बच्चों की पढ़ाई पर जेनेटिक्स के असर को गहराई से मापा जा सके। एक जैसे दिखने वाले जुड़वां बच्चों के 100 फीसद जीन्स एक जैसे होते हैं।

अनिलः कैंसर जैसी घातक बीमारी का पता लगाने के लिए जहां केवल टेस्ट कराने के लिए ही लोग हजारों रुपए खर्च कर देते हैं वहीं अब एक ऐसा कारगर कैप्सूल तैयार किया गया है जो चुटकियों में इस बात का पता लगाएगा। सबसे खास बात यह है कि ये कैप्सूल प्रारंभिक कैंसर कोशिकाओं को खोजने के सबसे क्रांतिकारी तरीका है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि इसकी मदद से कैंसर को शुरू में ही पकड़ा जा सकता है।

बता दें इसका एक वीडियो भी सामने आया है जिसे फेसबुक पर ताबड़तोड़ तरीके से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो को लोगों ने खूब पसंद किया है। अभी तक वीडियो को 21 हजार बार शेयर किया जा चुका है। तमाम लोग इस वीडियो पर कमेंट कर इसके बारे में जानने की कोशिश में जुटे हैं। वीडियो को फेसबुक के गिनीज क्लब नामक पेज पर शेयर किया गया है, जहां ये भी बताया गया है कि इस कैप्सूल को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में इजाद किया गया है। 

नीलमः अब समय हो गया है अगली जानकारी का। इंटरनेट दुनिया की दिग्गज सर्च इंजन कंपनी गूगल ने सोमवार को अपने फीचर में कुछ बदलावों की घोषणा की जिनका लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा तस्वीरों के इस्तेमाल से इस हद तक उन्हें समझना होगा कि आपके सवाल पूछने से पहले ही जवाब बता दे. सैन फ्रांसिस्को में आयोजित एक कार्यक्रम में गूगल के उपाध्यक्ष बेन गोम्स ने बताया कि कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और मशीन लर्निंग गूगल की उस कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं जो उसके 20 साल के मिशन को दुनिया की सूचनाओं को एक जगह एकत्र करने और उसे समाज के हर तबके तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ाएगी.

सर्च इंजन गूगल का ध्यान अब मुख्य रूप से मोबाइल पर केंद्रित होगा और ऐसा प्रतीत होता है कि फेसबुक की तरह ही अब गूगल भी यूजर्स को फोटो और वीडियो के जरिए ही विभिन्न विषयों पर रुचिपूर्ण चीजें देखने और पढ़ने का मौका देगा. 

गोम्स ने कहा, 'गूगल सर्च पूर्णत: दोषहीन नहीं है. हमें इसको लेकर कोई भ्रम नहीं है. लेकिन आपको हम आश्वस्त करते हैं कि हम इसे रोजाना और बेहतर करेंगे.'

अनिलः प्रोग्राम में जानकारी देने का सिलसिला यहीं संपन्न होता है। अब समय हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का। पहला पत्र भेजा है, केसिंगा उड़ीसा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कार्यक्रम "टी टाइम" के अन्तर्गत भारत में प्रतिवर्ष 14 सितम्बर को मनाये जाने वाले हिंदी दिवस तथा 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस पर विभिन्न विद्वानों के विचारों से अवगत कराया जाना अच्छा लगा। वास्तव में, इस तरह के आयोजन एक रस्म-अदायगी जैसे होते हैं और यह हिंदी की दशा और दिशा तय नहीं करते। मेरी राय में हिंदी को बढ़ावा देने में ऐसे आयोजनों से ज़्यादा योगदान तो हिंदी सिनेमा और टीवी चैनलों का रहा है। वैसे हिंदी एक सशक्त भाषा है और इसके अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है। यह बात अलग है कि भारत का अभिजात वर्ग हिंदी को हेय दृष्टि से देखता है, परन्तु हिंदी के बिना गुज़ारा उसका भी नहीं होता। वैश्वीकरण के दौर में हिंदी का महत्व और बढ़ा है। कार्यक्रम में आगे हिंदी दिवस के अवसर पर भारतीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो. बलदेव भाई शर्मा से की गई विस्तृत बातचीत काफी सार्थक लगी। मुझे उनका यह कहना बिलकुल सही जान पड़ा कि हिंदी को लेकर जब तक हम आत्महीनता से ग्रसित रहेंगे, हिंदी का भला नहीं हो सकता। हमें हिंदी को अपने स्वाभिमान और सम्मान से जोड़ना होगा।

  जानकारियों के क्रम में अपने वीज़ा नियमों में बदलाव एवं सख़्ती के वावज़ूद  अमेरिका के दिल में भारतीयों के प्रति नरमी की बात वैसे तो समझ से परे है, परन्तु मुझे लगता है कि भारतीय अपनी योग्यता एवं प्रतिभा के बल पर वहां अपने कदम जमाने में सफल रहे हैं।

लंबी यात्रा के बाद पोलैंड पहुंची भारतीय मुक्केबाज एमसी मैरीकोम द्वारा प्रतियोगिता में भाग लेने हेतु चार घंटे में अपना दो किलो वज़न कम कर स्वर्ण पदक जीतने का किस्सा असम्भव को सम्भव बनाने जैसा लगा।

वहीं अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रदेश में स्थित इडिलविल्ड शहर के लोगों द्वारा गोल्डन रिट्रीवर प्रजाति के कुत्ते को मेयर की कुर्सी सौंपा जाना वाक़ई दिलचस्प लगा। 

सुरेश जी हमें पत्र भेजने के लिए धन्यवाद।  

नीलमः अगला पत्र भेजा है खुर्जा यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं, 20 सितंबर का टी टाइम प्रोग्राम सुना और पसंद आया। हिंदी के विकास के लिए अनिल जी ने नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन श्री बलदेव भाई शर्मा जी से जो वार्ता विस्तारपूर्वक सुनवायी, जानकारीपूर्ण लगी। जानकारी के क्रम में मैरी कॉम का दो घंटे में दो किलो वजन कम करना, अमेरिका के एक शहर में कुत्ते का मेयर बनना रोचक पूरण लगा। तीनो जोक्स सुनकर हँसते हँसते लोट पोट हो गये। श्रोताओं के पत्र सुने और पसंद आये। प्रोग्राम में हमारा पत्र भी शामिल किया। बेहतरीन प्रस्तुति और हमारा पत्र शामिल करने के लिए सी आर आई का दिल से शुक्रिया और हार्दिक शुभकामनाएं। अरोड़ा जी हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया। 

अनिलः अब पेश है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह द्वारा भेजा गया पत्र। लिखते हैं, पिछला प्रोग्राम बहुत अच्छा लगा। प्रोग्राम में जानकारी देने के अलावा, हिंदी दिवस पर विस्तार से जानकारी और चर्चा सुनवाई गयी। साथ ही प्रोग्राम में पेश तीनों जोक्स मजेदार लगे। गुरमीत जी हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया। 

नीलमः अब समय हो गया है अगले पत्र का। जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं, श्रोताओं के चहेते साप्ताहिक कार्यक्रम "टी टाईम" में हिंदी दिवस के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी। वहीं नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चेयरमेन प्रोफेसर बलदेव भाई शर्मा ने भेंटवार्ता में अनिल भाई द्वारा पूछे गये सभी प्रश्नों का सटीक उत्तर दिया गया । वास्तव में गांधी जी ने सच हीं कहा था कि देश के विभिन्न क्षेत्रों और भागों को एक सूत्र में बांधने वाली भाषा हिन्दी हीं है । किन्तु भारत की बिडम्बना है कि न्यायालयों में भी अधिकांश कार्य अंग्रेजी में होता है । यही कारण है कि अंग्रेजी के महत्त्व के नीचे मातृभाषा दम तोड़ रही है। 

इसके साथ ही बताया गया कि अमेरिका में नागरिकता पाने वाले भारतीयों में प्रत्येक वर्ष वृद्धि होती जा रही है। सर्वाधिक नागरिकता पाने वालों में मैक्सिको का पहला और भारतीयों का दूसरा स्थान है।   धन्यवाद एक शानदार प्रस्तुति के लिए। शंभू जी हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

अनिलः वहीं पश्चिम बंगाल से धीरेन बसाक लिखते हैं कि टी टाइम कार्यक्रम में हिन्दी दिवस के बारे में जानकारी और बातचीत अच्छी लगी। कार्यक्रम में पेश तीनों जोक्स भी अच्छे लगे। 

धीरेन बसाक जी, हमें पत्र भेजने के लिए धन्यवाद। 

वहीं बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल लिखते हैं कि टी-टाइम कार्यक्रम में हिंदी दिवस मनाए जाने के बारे में खबर और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष के साथ चर्चा की गयी। साथ ही यह भी बताया गया कि अमेरिका में पिछले साल पचास हजार से ज्यादा भारतीयों को अमेरिका की नागरिकता हासिल की। धन्यवाद।

प्रियंजीत जी आपका भी धन्यवाद।  

इसी के साथ श्रोताओं की टिप्पणी यहीं संपन्न होती है। 

अब वक्त हो गया है जोक्स का

पहला जोक. वैसे आपने अनूप जलोटा प्रकरण तो सुना ही होगा। 

जलोटा प्रकरण से ये फायदा हुआ..

बीवी-कहां जा रहे हो।

पति-वो अनूप जलोटा की भजन संध्या है, सुनने जा रहा हूं।

बीवी-चुपचाप दोस्तों के साथ दारू पीने बार में जाओ। खबरदार जो किसी भजन संध्या में जाने का नाम भी लिया तो। 

दूसरा जोक..

हिन्दी टाइपिंग में शुरु से ही कमजोर था । पर आज तो मुझसे ज्यादा गड़बड़ हो गयी बीवी को message भेज रहा था, प्रियतमा की जगह प्रेतात्मा टाइप कर सेन्ड कर दिया सुबह से भूखा हुँ चाय भी नहीं मिली पीने को

तीसरा जोक

सांता नया कलर टी.वी. लाया, और पानी में डूबोने लगा.. बंता ने देखा तो पूछा - "ये तूम क्या कर रहे हो?" सांता - चेक कर रहा था, कि कहीं रंग तो नहीं निकल रहा है न, क्योंकि अभी गारंटी में है... देखा.... बचपन से स्मार्ट हुँ, पर कभी घमंड नहीं किया...

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