20180628

2018-06-29 13:40:35
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अनिलः अगर कोई महिला प्रेग्‍नेंट हो तो लोग अपने-अपने तरह से उसकी मदद कर देते हैं. लेकिन एक ऐसा भी ऑटो ड्राइवर है जो गर्भवती महिलाओं को फ्री में बैठाकर उनकी मदद करता है. जी हां, यहां बात हो रही है मुनेस मानगुली की, जो कर्नाटक के रहने वाले हैं.

मुनेस प्रेग्‍नेंट महिलाओं के अलावा नई मांओं, शारीरिक रूप से अपंग व्‍यक्तियों और सैनिकों को भी मुफ्त में ऑटो में बैठाकर उनके गंतव्‍य तक छोड़ते हैं. 42 साल के मुनेस बीए पास हैं और पिछले 11 सालों से ऑटो चला रहे हैं. आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि मुनेस इतने सक्षम नहीं है कि वे अपना ऑटो खरीद सकें. इसलिए वे किराए का ऑटो चलाते हैं और उसके मालिक को रोजाना 250 रुपये का किराया देते हैं.

 

अब आप खुद अंदाजा लगा लीजिए कि इन सबके बावजूद मुनेस वक्‍त-बेवक्‍त जरूरतमंद लोगों की मदद करने से गुरेज नहीं करते. द हिन्‍दू से बात करते हुए उन्‍होंने कहा, 'मैंने साफ-साफ लिखा है कि मैं किन लोगों को फ्री राइड देता हूं. वे मुझे फोन कर सकते हैं. कई लोगों के पास मेरे नंबर हैं. अगर मैं किसी हॉस्पिटल से आ रहा हूं तो मैं ऐसे लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से उनके घर या रेलवे स्‍टेशन पर छोड़ देता हूं.'

 

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर मुनेस किस बात से प्रेरित होकर लोगों की इस तरह मदद कर रहे हैं? दरअसल, 1992 में मुनेस की आंखों के सामने एक प्रेग्‍नेंट महिला की मौत सिर्फ इसलिए  हो गई थी क्‍योंकि उसे अस्‍पताल ले जाने के कले लिए उस वक्‍त वहां कोई गाड़ी मौजूद नहीं थी. तो जब उन्‍होंने घर का खर्च चलाने के लिए ऑटो चलाना शुरू किया तब उन्‍होंने फैसला लिया कि वे ऐसे लोगों की मदद करेंगे.

 

मुनेस साल 2015 से ही जरूरतमंद लोगों को फ्री में सेवा दे रहे हैं. यही नहीं बकायदा उनके पास लॉग बुक भी है, जिसमें ऐसे लोगों के नाम दर्ज है जिन्‍हें उन्‍होंने फ्री राइड दी है. उनकी किताब के मुताबिक अब तक वे दो हजार से भी ज्‍यादा लोगों की मदद कर चुके हैं.

 

 

नीलमः

सुनने और देखने में भी यह बेहद बहादुरी का काम लगता है, लेकिन किसी सांप या अजगर के साथ सेल्फी खिंचवाना अच्छा आइडिया नहीं होता, भले ही आप ट्रेंड प्रोफेशनल क्यों न हों... यह कड़वा सबक पश्चिम बंगाल के एक फॉरेस्ट रेंजर को रविवार को सीखने को मिला. कोलकाता से लगभग 600 किलोमीटर दूर जलपाईगुड़ी के साहिबबारी गांव के निवासियों ने एक बकरी को मारकर खा जाने वाले रॉक पायथन (अजगर) को पकड़ने की गुहार की, जिसके जवाब में फॉरेस्ट रेंजर तथा उनके सहयोगी वहां पहुंचे, और 18-फुट लम्बे और लगभग 40 किलोग्राम वज़न वाले अजगर को धर दबोचा.


ऐसे मामलों में आमतौर पर पकड़े गए सांप को तुरंत ही थैले में भर दिया जाता है, और घटनास्थल से दूर ले जाते हैं, ताकि उसे बाद में जंगल में छुड़वा दिया जाए, लेकिन शायद फॉरेस्ट रेंजर पर सेल्फी का चस्का हावी हो गया, और उन्होंने दाएं हाथ से अजगर की गरदन को पकड़ा और उसे अपनी गरदन में लपेट लिया... बस, फिर क्या था, कैमरों के फ्लैशबल्ब चमकने लगे, और फॉरेस्ट ऑफिसर की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी, लेकिन ऐसा ज़्यादा देर तक नहीं चल पाया. दरअसल, कुछ ही सेकंड बाद शायद अजगर पकड़े जाने के सदमे से उबर गया, और उसने हिलना-डुलना शुरू कर दिया, और जल्द ही वह फॉरेस्ट रेंजर की गरदन को लपेटने की कोशिश करने लगा. हालात को काबू से बाहर जाते देखकर फॉरेस्ट रेंजर की हिम्मत भी जवाब देने लगी, और उन्होंने वहां एकत्र भीड़ से अलग दिशा में चलना शुरू कर दिया, और फिर वह चीखने लगे, क्योंकि अजगर ने उनकी गरदन को एक बार पूरी तरह जकड़ लिया.

 

 

अनिलः दरअसल, जिसने भी अजगर की दुम पकड़ रखी थी, उसके हाथ से दुम छूट चुकी थी, और ऐसा लगने लगा कि फॉरेस्ट रेंजर और अजगर के बीच जारी 'संघर्ष' में सरीसृप की जीत कुछ ही पल दूर है... लेकिन तभी नीली कमीज़ पहने एक शख्स, संभवतः वन विभाग का एक कर्मचारी, भागकर वहां पहुंचता है, और फॉरेस्ट रेंजर की जान बचाने की कोशिश में जुट जाता है. इस हंगामे के दौरान शायद कैमरा थामे शख्स के हाथ-पांव भी फूल गए थे, क्योंकि कुछ पल के कैमरे का फोकस पूरी तरह अजगर और फॉरेस्ट रेंजर से हट गया था. बहरहाल, आखिरकार फॉरेस्ट रेंजर को बचा लिया गया, लेकिन उससे पहले रेंजर अपने सहायक से डरी हुई आवाज़ में कहते सुनाई देते हैं - दुम को पकड़ो, दुम को पकड़ो... और फिर कहते हैं - अब ठीक है.

 

इस रॉक पायथन को साहिबबारी गांव के निकट ही स्थित बैकंठपुर वन में छोड़ा जाएगा. बहुत-से चश्मदीदों का कहना था कि अजगर की हरकत देखकर उनका कलेजा मुंह को आ गया था, और वे मान बैठे थे कि अब फॉरेस्ट रेंजर का बचना मुमकिन नहीं रह गया है... कुछ लोग उन्हें बेवकूफ की संज्ञा दे रहे हैं, जबकि कुछ के मुताबिक फॉरेस्ट रेंजर बेहद बहादुर शख्स हैं. एक ग्रामीण ने तारीफी शब्दों में कहा कि फॉरेस्ट रेंजर ने इस मुश्किल घड़ी में भी एक पल के लिए भी अजगर की गरदन को हाथ से छूटने नहीं दिया, लेकिन शायद राज्य सरकार फॉरेस्ट रेंजर की बहादुरी से ज़्यादा प्रभावित नहीं हुई है, और वन मंत्री ने घटना की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.

 

 नीलमः उधर अमेजन (Amazon) के संस्थापक और सीईओ जेफ बेजोस (Jeff Bezos) 141.9 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ दुनिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं. फोर्ब्स ने सोमवार विश्व के अरबपतियों की एक लिस्‍ट जारी की थी, जिसमें इस बात का खुलासा हुआ कि जेफ बेजोस इस दुनिया के सबसे अमीर इंसान हैं.

 

बेजोस ने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को हराकर पहला स्थान हासिल किया है. एक जून से बेजोस की संपत्ति में पांच अरब डालर से ज्‍यादा की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, बिल गेट्स की संपत्ति 92.9 अरब डॉलर है. वहीं, वॉरेन बफेट 82.2 अरब डॉलर की कुल संपत्ति के साथ तीसरे पायदान पर हैं.

 

बेजोस आधिकारिक तौर पर इस साल की शुरुआत में दुनिया के सबसे अमीर शख्स बन गए थे और उनकी ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी एप्पल के बाद दूसरी सर्वाधिक मुनाफा कमाने वाली कंपनी है.

 

 गौरतलब है कि इससे पहले 27 जुलाई को भी अमेजन के शेयर्स बढ़ने के बाद, बेजोस की संपत्ति बिल गेट्स से ज्यादा हो गई थी. लेकिन दिन खत्म होते-होते अमेजन के शेयर्स का प्राइस गिर गया. इसके चलते बेजोस फिर नंबर दो पर आ गए थे. 

 

अनिलः वहीं दुनिया के हर माता-पिता अपने बच्चों को वीडियो गेम ना खेलने की नसीहत देते रहते हैं लेकिन बच्चे जिद करके यह बात नहीं मानते। घर के बाहर खेलने से बच्चों का शारीरिक विकास होता है लेकिन जब से उन खेलों की जगह वीडियो गेम ने ली है तब से बच्चों के संपूर्ण विकास पर इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।

अकसर माता-पिता के ऐसा कहने पर बच्चे कह देते हैं कि इससे कोई नुकसान नहीं होता और वापिस गेम खेलना शुरू कर देते हैं लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ)  की ये रिपोर्ट ने इसे जानलेवा बताया है । दरअसल, डब्लूएचओ ने गेमिंग डिसऑर्डर को मानसिक स्वास्थ्य विकार के रूप में घोषित कर दिया है।

 

डब्लूएचओ ने गेमिंग डिसऑर्डर यानि इंटरनेट गेम से उत्पन्न विकार को मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर अवस्था के रूप में अपने इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ डिजीज (आईसीडी) में शामिल कर लिया है। आईसीडी डब्लूएचओ द्वारा प्रकाशित होने वाली एक नियमावली है जिसे पिछले 10 वर्षों से अपडेट किया जा रहा है। इसमें जख्मों, बीमारियों और मौत के कारणों के करीब 55,000 यूनिक कोड हैं।

 

नीलमः अब पेश करते हैं एक और खास जानकारी।

दुनिया के सात अजूबों में शामिल है फ्रांस का एफिल टावर। लोहे से बना यह टावर पेरिस की सीन नदी के तट पर कैंप दी मार्स पर स्थित है। यह फ्रांस का दूसरा बड़ा ढांचा है। इसकी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए इसे बुलेटप्रूफ शीशे की दीवार और स्टील फेसिंग से ढंका जा रहा है। यह काम जुलाई तक पूरा हो जाएगा। इसपर लगभग 300 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। आतंकी हमले रोकने के लिए पेरिस के प्रमुख स्थलों को सुरक्षित बनाने का काम किया जा रहा है। अब इसका दीदार करने के लिए आने वाले लोगों को तीन स्तरीय जांच के बाद ही एंट्री मिलेगी। बता दें कि 2015 से पेरिस में हुए आतंकी हमलों में 240 लोगों की मौत हो गई थी।

टावर के दोनों तरफ मेटल के बैरियर लगाए जा रहे हैं जिनकी ऊंचाई लगभग 3.24 मीटर है। इससे आतंकी यदि ट्रक के जरिए भी आते हैं तो वह इसकी दीवार को नहीं भेद पाएंगे।

 

अब वक्त हो गया है श्रोताओं की टिप्पणी का। पहला पत्र भेजा है जुबैल सऊदी अरब से सादिक आजमी ने। लिखते हैं कि 21 जून का " टी टाइम" सुनने के बाद आपकी सेवा में उपस्थित हूं, आशा है उत्साहवर्धन करेंगे, आगाज़ योग दिवस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली ख्याति से हुआ जो अच्छा लगा। सच है, योग की लोकप्रियता सिर्फ भारत में ही नहीं अपितु दुनिया के अधिकांश देशों में बढ़ी है, और चीन के नागरिकों में जुनून की हद तक इसका विस्तार हुआ है, और इस पर मोहन भण्डारी जी के विचारों और अनुभवों को सुनवाया जाना अच्छा लगा, मेरे विचार से चीन भारत के मिलती सांस्कृतिक विचार धारा इसका मुख्य कारण है, ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो चिकित्सा के क्षेत्र में भी दोनों में समानताएं हैं, और भविष्य में इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी इसमें कोई संदेह नहीं है।

 विस्तार से चर्चा कर आपने श्रोताओं की मंशा पूरी की। लेकिन गीत की जगह दूसरी ज्ञानवर्धक सामग्री पेश किया जाता तो बेहतर होता, गीत तो आपकी पसंद में सुन लिया करते हैं

मगर रोचक बातों को जानने की जिज्ञासा मन में सदैव रहती है, ताओं की प्रतिक्रियाओं को स्थान दिया जाना उम्दा लगा, और आज के जोक्स गुदगुदी करने में सफल रहे। धन्यवाद।

सादिक आजमी जी हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 

अब बारी अगले पत्र की, जो हमें भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं, सीआरआई की पूरी टीम को मेरा नमस्कार। कहते हैं कि मीडियम वेव पर आपके प्रोग्राम न आने की वजह से मैं पिछले दो कार्यक्रमों में खत नहीं भेज सका। लेकिन अब जाकर पता चला कि सीआरआई हिंदी के प्रोग्राम शॉर्ट वेव पर भी आते हैं। इसके बाद मैंने टी-टाइम प्रोग्राम सुना। इसमें योग दिवस के बारे में बेहतरीन जानकारी दी गयी। योग को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाने का श्रेय भारत को ही जाता है। इस बात पर हमें गर्व है।

वैसे आजकल की तनाव भरी ज़िंदग़ी में योग का बहुत महत्व है। हम सभी को योग करना चाहीए।

कयोंकि योग का किसी धर्म से कोई सबंध नहीं है। वहीं प्रोग्राम में योग शिक्षक आशीष जी से बातचीत बहुत अच्छी लगी। धन्यवाद।

 

लीजिए दोस्तो, अब पेश है अगला पत्र। जो हमें भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर आपने हमें बहुत जानकारी प्रदान की। प्रोग्राम में योग गुरु मोहन भंडारी और आशीष जी के विचार सुनने को मिले। प्रोग्राम में पेश जानकारी और जोक्स भी बहुत अच्छे थे। धन्यवाद।

 

अब समय हो गया है अगला पत्र शामिल करने का। इसे भेजने वाले हैं मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल से शिवेंदु पॉल। लिखते हैं 21 जून का आपका कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा। इसमें आपने योग दिवस और योग से स्वास्थ्य को होने वाले फायदों के बारे में बताया। मैं तो यही कहना चाहूंगा कि सभी को योग करना चाहिए। क्योंकि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है। बेहतरीन प्रोग्राम पेश करने के लिए धन्यवाद।

शिवेंदु पॉल जी हम तक टिप्पणी पहुंचाने के लिए शुक्रिया। 

दोस्तो, आखिर में पेश है, केसिंगा उड़ीसा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजा गया पत्र। उन्होंने लिखा है, कार्यक्रम "टी टाइम" के अन्तर्गत 21 जून  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर दो मशहूर योग शिक्षकों चीन स्थित योगी योग संस्थान के संचालक मोहन भण्डारी तथा वी योग संस्थान संचालक आशीष बहुगुणा के साथ लिये गये साक्षात्कार से कार्यक्रम का आगाज़ किया जाना महत्वपूर्ण लगा।  

वास्तव में, भारत देश में योग दिवस का एक अपना ही महत्व है। यह एक प्रकार का शारीरिक व्यायाम ही नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से पूर्णतया मिलन है। योग शरीर को तो स्वस्थ्य रखता ही है इसके साथ-साथ तन मन और दिमाग को एकाग्र रखने में भी सक्षम है।

मुझे भण्डारी जी का अन्य बातों के अलावा यह कहना कि -भारत में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत तो प्रभावी ढंग से हुई है, परन्तु शुरुआत के बाद सरकारों द्वारा उसे ठीक से फ़ॉलो नहीं किया जाता, बिलकुल सही प्रतीत हुआ। वहीं बहुगुणाजी द्वारा चीन में योग की बढ़ती लोकप्रियता एवं योग-शिक्षकों एवं भारत के प्रति आदर की भावना सम्बन्धी बातें सुन कर सर गर्व से ऊँचा हो गया। आज के अंक में अन्य जानकारियां नहीं थीं, फिर कार्यक्रम की रोचकता में कोई कमी नज़र नहीं आयी। कार्यक्रम में समाहित श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं एवं ज़ोक्स भी क़ाबिल-ए-ताऱीफ लगे। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये। सुरेश जी, हमारा उत्साह बढ़ाने और हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 

अब पेश करते हैं जोक्स

 

पहला जोक...

 

एक आदमी अपनी बीवी को दफना के घर जा रहा था

कि अचानक बिजली चमकी बादल गरजे जोर की तूफानी

बारिश शुरू हुई !

 

माहौल अफरातफरी वाला हो गया

 

दुखी आदमी आसमान की तरफ देखते हुए बोला

 

 

लगता हैं पहुंच गई.... 

 

दूसरा जोक

पहला दोस्त : ओये सुन! 2nd year का रिजल्ट आ गया क्या?

दूसरा दोस्त : हां आ गया और अब तमीज से बात कर...

पहला दोस्त : क्यों?

दूसरा दोस्त : क्योंकि अब मैं तेरा सीनियर हूं...

 

तीसरा जोक

 

सोनू- मां मेरा एक दोस्त घर आ रहा है। मैं अपनी सारी टी-शर्ट छुपा देता हूं।

मां- क्यों? तुम्हारा दोस्त चोर है क्या, जो तुम्हारी टी-शर्ट चुरा लेगा।

सोनू- नहीं, वह अपनी पहचान लेगा।

 

 

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