20170826

2017-09-11 09:53:28
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पंकज -  नमस्कार मित्रों आपके पसंदीदा कार्यक्रम आपकी पसंद में मैं पंकज श्रीवास्तव आप सभी का स्वागत करता हूं, आज के कार्यक्रम में भी हम आपको देने जा रहे हैं कुछ रोचक आश्चर्यजनक और ज्ञानवर्धक जानकारियां, तो आज के आपकी पसंद कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं। 

अंजली श्रोताओं को अंजली का भी प्यार भरा नमस्कार, श्रोताओं हम आपसे हर सप्ताह मिलते हैं आपसे बातें करते हैं आपको ढेर सारी जानकारियां देते हैं साथ ही हम आपको सुनवाते हैं आपके मन पसंद फिल्मी गाने तो आज का कार्यक्रम शुरु करते हैं और सुनवाते हैं आपको ये गाना जिसके लिये हमें फरमाईशी पत्र लिख भेजा है कुरसेला तिनधरिया से ललन कुमार सिंह, श्रीमती प्रभा देवी, कुमार केतु, मनीष कुमार मोनू, गौतम कुमार, स्नेहलता कुमारी, मीरा कुमारी और एल के सिंह ने आप सभी ने सुनना चाहा है फिल्म ब्रह्मचारी (1968) फिल्म का गाना जिसे गाया है मोहम्मद रफ़ी ने गीतकार हैं शैलेन्द्र संगीत दिया है शंकर जयकिशन और गीत के बोल हैं -----

 

सांग नंबर 1.  चक्के में चक्का चक्के में गाड़ी .... 

पंकज -   वैज्ञानिक का दावा, कुत्ते जितना ही सूंघ सकती है इंसान की नाक

अब तक यह माना जाता रहा है कि इंसान के सूंघने की शक्ति जानवरों के मुकाबले काफी कम होती है। लेकिन अमेरिका के न्यू जर्जी की रतगर्स यूनिवर्सिटी के एक वैज्ञानिक का कहना है कि इंसान की सूंघने की शक्ति कुत्ते, चूहे व अन्य जानवरों से कम नहीं होती। गुरुवार को प्रकाशित हुए एक रिव्यू में न्यूरोसायंटिस्ट जॉन पी मैकगैन ने बताया कि उन्होंने कैसे इस मिथक को तोड़ा कि इंसान कुत्ते या अन्य जानवरों जितना नहीं सूंघ सकता। जॉन ने बताया, 'सच यह है कि इंसान सूंघने में काफी अच्छे होते हैं।

 

अंजली – अब वक्त हो चला है हमारे अगले श्रोता का पत्र उठाने का ये पत्र हमारे पास आया है शनिवार पेठ, बीड शहर महाराष्ट्र से पोपट कुलथे, हनुमंत कुलथे, समर्थ कुलथे, पी बी कुलथे और समस्त कुलथे परिवार इनके साथ ही हमें पत्र लिखा है नारेगांव औरंगाबाद, महाराष्ट्र से दीपक आडाणे, श्याम आडाणे और उनके साथियों ने आप सभी ने सुनना चाहा है फिल्म जस्टिस चौधरी (1983) का गाना जिसे गाया है किशोर कुमार और आशा भोंसले ने संगीत दिया है बप्पी लाहिरी ने और गीत के बोल हैं -----

 

सांग नंबर  - 2. मैंने तुझे छुआ ....

 

पंकज -  ' जॉन ने कहा, 'हमें जितना बताया गया इंसान उससे ज्यादा सूंघ सकता है।'इस मिथक की शुरुआतल 19वीं सदी में एक फ्रेन्च फिजिशन पॉल ब्रोका ने की। पॉल इंसानी दिमाग पर शोध करते थे और बताते थे कि वह जानवरों से कैसे अलग है।

 

अंजली – मित्रों हमारे पास अगला पत्र आया है धनौरी, तेलीवाला, हरिद्वार, उत्तराखंड से निसार सलमानी, समीना नाज़, सुहैल बाबू, आयान सलमानी और इनके मित्रों का, आप सभी ने सुनना चाहा है फिल्म दिल चाहता है (2001) का गाना जिसे गाया है श्रीनिवास ने गीतकार हैं जावेद अख्तर संगीत दिया है शंकर एहसान लॉय ने और गीत के बोल हैं ----

 

सांग नंबर 3. कैसी है ये रुत ......

 

पंकज -   उन्होंने तर्क दिया कि जानवरों के दिमाग में मौजूद बड़े ऑलफैक्टरी बल्ब (दिमाग़ में बल्ब के आकार का एक हिस्सा) उन्हें दूर तक और ज्यादा सूंघने में मदद करते है, जबकि इंसानों के दिमाग का आगे का बड़ा हिस्सा (फ्रंटल लोब) उन्हें हर तरह की गंध से दूर रखने में मदद करता है। दूसरे वैज्ञानिकों ने जानवरों की सूंघने की योग्यता से टेस्ट किए बिना ही उनकी थ्योरी को और सरल कर दिया। इसके बाद 1924 में एक महत्वपूर्ण टेक्स्टबुक में बताया गया कि इंसान के विचार करने की क्रांति के चलते उनके दिमाग के ऑलफैक्टरी बल्ब सिकुड़ गए और लगभग बेकार हो गए।

अंजली – ये पत्र हमारे पास आया है देशप्रेमी रेडियो श्रोता संघ से जिसे लिखा है राम कुमार रावत, गीता रावत, अमित रावत, ललित रावत, दीपक रावत, मनीष रावत और इनका पूरा परिवार आपने हमें पत्र लिखा है ग्राम आशापुर, पोस्ट दर्शन नगर, फ़ैज़ाबाद, उत्तर प्रदेश से, आपने सुनना चाहा है फिल्म लहु के दो रंग (1979) का गाना जिसे गाया है किशोर कुमार और सुलक्ष्णा पंडित ने गीतकार हैं फ़ारुख कैसर और संगीत दिया है बप्पी लाहिरी ने गीत के बोल हैं ----

सांग नंबर 4. मुस्कुराता हुआ मेरा यार ....

 

पंकज -   अब डॉ. मैकगैन का कहना है कि 'अलग-अलग पर्यावरण में जानवरों के लिए अलग-अलग समस्याएं होती हैं जिनके मुताबिक उन्हें ढलना होता है।' उनका कहना है कि हम अपनी नाक से काफी कुछ कर सकते हैं। कुत्तों की तरह हम भी खुशबू (या गंध) को फॉलो करते हुए निशान तक पहुंच सकते हैं। कुछ वैज्ञानिक तो यह भी कहते हैं कि अगर किसी इंसान को दूसरों को सूंघने की बीमारी हो तो वह पसीना, खून या पेशाब के जरिए अपना जीवनसाथी भी ढूंढ सकता है। किसी का डर या दबाव भी जान सकता है। हालांकि इसके पुख्ता सबूत नहीं हैं। 

अंजली – हमारे अगले श्रोता राजस्थान से हैं ये हमारे पुराने श्रोता हैं लेकिन हमें कभी कभी पत्र लिखते हैं हम आपसे कहना चाहते हैं कि थोड़ा समय निकालकर हमें पत्र लिखा करिये हमें बहुत अच्छा लगता है जब हम आपकी पसंद के फिल्मी गाने आपके सबसे चहेते कार्यक्रम में सुनवाते हैं। क्लासिक रेडियो श्रोता संघ के अध्यक्ष राजेश मेहरा और इनके परिजनों ने हमें पत्र लिखा है ग्राम बांका ए खुर्द, झालावाड़, राजस्थान से और सुनना चाहा है फिल्म खलनायक (1993) का गाना जिसे गाया है अलका याग्निक ने संगीत दिया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने और गीत के बोल हैं ----- 

सांग नंबर 5. आजा सजन आजा .... 

पंकज -  वायु प्रदूषण के खिलाफ आईएमए की मुहिम 

नई दिल्ली
दिल्ली में बढ़ते एयर पल्यूशन को को ध्यान में रखते हुए इंडियन मेडिकल असोसिएशन (IMA) ने 'कहीं आपके क्षेत्र में प्रदूषण तो नहीं' नाम से एक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत आईएमए की सभी राज्य स्तरीय और स्थानीय शाखाओं में काम करने वाले डॉक्टरों से अपील की गई है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें। 
आईएमए के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने कहा कि एयर पल्यूशन केवल पर्यावरण के लिए ही खतरा नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा है। इससे हार्ट संबंधी रोगों, स्ट्रोक, फेफड़ों के कैंसर और सांस की बीमारी होने का खतरा रहता है। किसी भी समय पीएम 2.5 का स्तर 80 मानक से कम रहना चाहिए और साउंड का लेवल 80 डेसिबल से कम होना चाहिए। हमें उम्मीद है कि सभी डॉक्टर अपने मरीजों को वायु प्रदूषण के खतरों के बारे में शिक्षित करेंगे। व्यक्तिगत स्तर पर कुछ उपायों का पालन करने की भी जरूरत है, क्योंकि हर छोटा योगदान एक बड़ा बदलाव ला सकता है। 

अंजली – अगला पत्र हमारे पास आया है बाबू रेडियो श्रोता संघ, आबगिला, गया, बिहार से मोहम्मद जावेद खान, ज़रीना खानम, मोहम्मद जमील खान, रज़िया खानम, शाहिना परवीन, खाकशान जाबीन, बाबू टिंकू, जे के खान, बाबू, लड्डू, तौफीक उमर खान, इनके साथ हमें पत्र लिखा है के पी रोड गया से मोहम्मद जावेद खान मिस्त्री, शाबिना खातून, तूफानी साहेब, मोकिमान खातून, मोहम्मद सैफुल खान, ज़रीना खातून आप सभी ने सुनना चाहा है फिल्म दिल (1990) का गाना जिसे गाया है उदित नारायण और अनुराधा पौडवाल ने गीतकार हैं समीर और संगीत दिया है आनंद मिलिंद ने, गीत के बोल हैं ----- 

सांग नंबर 6. हम प्यार करने वाले .... जष्य में  वाली घटना

 

पंकज तो मित्रों इसी के साथ हमें आज का कार्यक्रम समाप्त करने की आज्ञा दीजिये अगले सप्ताह आज ही के दिन और समय पर हम एक बार फिर आपके सामने लेकर आएंगे कुछ नई और रोचक जानकारियां साथ में आपको सुनवाएँगे आपकी पसंद के फिल्मी गीत तबतक के लिये नमस्कार।

अंजली - नमस्कार।  

 

 

 

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