20190410

2019-04-10 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है छत्तीसगढ़, भिलाई, दुर्ग से आनंद मोहन बैन ने। लिखते हैं कि विश्व का आइना कार्यक्रम सुना, जिसमें चीनी विवाह परंपरा, रीति और पालकी आदि पर चर्चा अच्छी लगी। मुझे बचपन की याद आ गई, उस ज़माने में दुल्हन पालकी में सवार होकर आती थी। विवाह में शरारत एक पुरानी परंपरा है। पूजा विवाह का अभिन्य अंग होती है। चीनी समाज में जादू टोना कितना महत्वपूर्ण है, उस पर भी एक कार्यक्रम बनाने का प्रयास कीजिए। वहीं चीन में बौद्ध धर्म के आगमन और भारत से जुड़ाव पर चर्चा भी अच्छी लगी।

आप का पत्र मिला कार्यक्रम में मेरे पत्र को शामिल करने के लिए धन्यवाद। सादिक भाई ने मेरे और सुरेश जी के पत्र पर अपने विचार रखे। सुरेश जी एक पत्रकार हैं, फेसबुक के माध्यम से उनके लेख पढ़ने को मिलते हैं। आज के समय में पत्रकार बढ़ रहे हैं, रोज एक नया टीवी चैनल आ रहा है, लेकिन सुरेश जी जितना ईमानदारी से लिखते हैं। ऐसे लोग मिलना मुश्किल है।

टी टाइम कार्यक्रम में सुना कि नीदरलैंड में गायों के लिए शौचालय बनाए जा रहे हैं, ताकि देश में अमोनिया से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। यह जानकारी काफी महत्यपूर्ण है। अमोनिया से पर्यावरण दूषित होता है, इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। शौचालय एक अच्छा और नया प्रयास है, मूंगफली से एलर्जी होती है यह जानकारी भी अच्छी लगी।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है जोरहट असम से पृथ्वीराज पुरकायस्थ ने। लिखते हैं कि 6 अप्रैल को चीन और पाकिस्तान के बीच निर्मित राजमार्ग के बारे में रिपोर्ट सुनी। यह जान कर दुख हुआ कि इस राजमार्ग का निर्माण करते हुए 700 से भी अधिक पाकिस्तानी और चीनी तकनीकी लोगों ने अपनी जान की बलिदान दिया। आपकी पसंद कार्यक्रम भी अच्छा लगा।

अनिलः दोस्तों अब पेश कर रहे हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है दिल्ली से वीरेंद्र मेहता ने। लिखते हैं कि कभी-कभी जब मैं अंदर से ही अंदर टूट जाता हूं और हौसला डगमगाने लगता है तो ऐसे में सचमुच आपका कार्यक्रम बहुत हौसला देता है और उसमें खास कर श्रोताओं को इतना महत्व दिया जाता है कि वह नकारात्मक सोच से बाहर निकल कर एक नई सोच के साथ एक नई दिशा काम करने लगता है। इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद।

आज के विश्व का आईना प्रोग्राम में बताया गया कि विवाह जीवन की महत्वपूर्ण घटना है, बहुत ही रोचक थी, जिसमें दूल्हा दुल्हन के साथ कुछ नोकझोंक व शरारती घटनाएं होती हैं। वहीं बौद्ध धर्म के बारे में दी गई जानकारी भी ज्ञानवर्धक थी।

आपका पत्र मिला प्रोग्राम में सभी श्रोता बंधुओं के पत्र सुने बहुत अच्छे लगे। आज मैं आपको अपने शहर अल्मोड़ा जो कि उत्तराखंड में है के बारे में कुछ बताऊंगा। हालांकि यह तो सभी जानते हैं कि उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है।

यहां पर एक विशाल कल्पवृक्ष का पेड़ है जिसकी उम्र करीब 5000 साल से भी ज्यादा बताई जाती है। शायद इसका जिक्र आपको इंटरनेट पर नहीं मिलेगा। यह हरा भरा विशाल पेड़ यहां जंगल में स्थित है यहां जाने का रास्ता भी थोड़ा दुर्गम है पर इतना मुश्किल भी नहीं है। मान्यता यह है कि जो इसके नीचे बैठकर अपनी इच्छाएं मांगता है वह पूरी होती हैं। 2016 में मैं भी अपने पिताजी के साथ मकर संक्रांति के अवसर पर यहां पहुंचा जो कि हमारे गांव से कुछ ही लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है। यह रास्ता हमने पूरी तरह पैदल पूरा किया। इस दौरान मेरे मन में भी अनेक इच्छाएं उमड़ रही थी। पर मन में कहीं ना कहीं यह विचार भी आता क्या यह सचमुच में होता होगा?

इस कल्पवृक्ष के आसपास कुछ महंत भी रहते हैं जो कि वहां पूजा किया करते हैं। हमने वहां कुछ समय व्यतीत किया और कुछ यादों को समेट लिया पर वापसी के बहुत देर बाद मैंने अपने बाबू (पापा) से प्रश्न किया जो कि मेरे दिमाग में बहुत पहले से ही चल रहा था।

बाबू क्या सच में जो हम मांगते हैं इस पेड़ के नीचे बैठ कर मिलता है?

उन्होंने बहुत ही जल्दी कुछ ही शब्दों में उत्तर दिया की विश्वास की जड़ें जितनी मजबूत होंगी या जितनी गहरी तक गई होंगी उसी के अनुसार उसका परिणाम होगा और मेरी विश्वास की जड़ें तो इस मामले में पहले से ही कमजोर थी। मेहनत तो सब ही करते हैं, शायद हमें भी अपनी जिंदगी में उतना ही हिस्सा मिल पाता है जितना कि हमारी विश्वास की जड़ें हमारे अंदर अपने लक्ष्य के प्रति गई हों। अर्थात मेहनत के साथ साथ हमें अपने विश्वास (अपने प्रति) की जड़ों को कम से कम इतनी गहराई तक तो ले जाना पड़ेगा जिससे कि यह लक्ष्य का वृक्ष डगमगा ना पाए। धन्यवाद।

अगली बार मैं कुछ साइंस की बातें या टॉपिक लेकर संक्षिप्त में उनकी रिकॉर्डिंग के माध्यम से बताने की कोशिश करूंगा। वीरेंद्र जी यह जानकर बहुत अच्छा लगा। वैसे मैं भी मूल रूप से अल्मोड़ा का ही रहने वाला हूं। हालांकि मुझे भी इस बारे में जानकारी नहीं थी। आशा है कि आने वाले समय में भी आप कुछ न कुछ रोचक जानकारी देते रहेंगे। श्रोताओं की जानकारी के लिए यह बता दूं कि अल्मोड़ा को बुद्धिजीवियों का शहर भी कहा जाता है, साथ ही यह सांस्कृतिक नगरी के तौर पर भी विख्यात है।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम टी टाइम में सभी जानकारियां चायना रेडियो से पहली बार सुनने को मिली। गायों के लिये शौचालय, विमानन कंपनी कोरियन हवाई यात्रा में मुंगफली नहीं परोसेगी, गुवाहटी में एक ट्रैफिक कांस्टेबल मूसला धार बारिश में भी भीग कर डयूटी निभाने वाली और अन्य जानकारियां सुनी और पसंद आई। कार्यक्रम में फिल्मी गीत कोई मिल गया, मिल ही गया का भरपूर आनंद लिया। सुंदर कार्यक्रम सुनवाने के लिये दिल से शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों अब शामिल करते हैं अगला ख़त, जिसे भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि मैं आज आपको हमारे निमाङ क्षेत्र में इन दिनों चल रहा निमाङ के पारंपरिक पर्व गणगौर पर्व के बारे में बताऊंगा। क्योंकि आजकल इसकी बड़ी धूम है और इस पर्व को हमारे निमाङ क्षेत्र के सभी लोग बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाते हैं।

गणगौर लोकनृत्य :- गणगौर नृत्य निमाङ अंचल का पारंपरिक आनुष्ठानिक नृत्य है। यह चैत्र माह में पङने वाले गणगौर पर्व में किया जाता है। गणगौर एक लोक देवी है, जो पार्वती का प्रतीक है। गणगौर के पति को ईश्वर, शिव, सूर्य, विष्णु और ब्रह्मा माना गया है। गणगौर और धणियर, ईश्वर की अलग-अलग मूर्तियां बनाकर घर-घर में पूजा करने की प्रथा है। गणगौर के गीत लोकगीति काव्य का सशक्त उदाहरण है। गणगौर गीतों के साथ नृत्य परंपरा भी जुड़ी है। गणगौर में दो तरह के नृत्य होते है एक झालरिया, दूसरा झेला। झालरिया नृत्य में स्त्रियाँ अलग समूह में और पुरुष अलग समूह में हिस्सा लेते हैं। स्त्रियाँ झालरिया गीत गाती है और आगे पीछे झुककर, खड़े होकर गोल घूमकर नृत्य करती है। गणगौर नृत्य के मुख्य वाद्य ढोल और थाली है। झेला नृत्य में गणगौर यानी रनुबाई, धनियर का रथ सिर पर रखकर नृत्य किया जाता है। झेला नृत्य दो शैलियो में प्रचलित है आङा और खङा नृत्य। झेला नृत्य ढोल और थाली की समवेत बढ़ती ताल के साथ तीव्र गति तक पहुंचता है, साथ में गीत के बोल भी चलते हैं। वर्तमान में श्री हीरालाल साद, श्री प्रभाकर दुबे, श्रीमती साधना उपाध्याय जी का गणगौर नृत्य दल गणगौर नृत्य दलों में श्रेष्ठ माना जा सकता है। हमारा पत्र शामिल करने का धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से धीरेन बसाक ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना कार्यक्रम में चीन के परंपरागत विवाह समारोह पर रिपोर्ट सुनी। चीन में सामाजिक विवाह बृद्धि और विवाह में कुछ नियम कानून आचार विषय जानकारी मिली, अच्छी लगी।

अनिलः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि अप्रैल महीने के पहले टी टाइम अंक का सदैव की भांति आनंद लिया। आरंभ भी रोचक जानकारी से हुआ जब जाना कि नीदरलैंड में गायों के लिए शौचालय बनाए जा रहे हैं ताकि देश में अमोनिया से होने वाले प्रदूषण को रोका जा सके। जिस प्रकार इसके परिणाम की आशा की गई है अगर वह परीक्षण सफल होता है तो वाकई स्वास्थ्य के साथ प्रदूषण से भी बचाव संभव होगा। जब भी किसी अनूठे प्रयोग की चर्चा होती है तो भविष्य के काल्पनिक होने का आभास होने लगता है। इसके सफल होने की कामना करते हुए आशा करते हैं। इंसान भी सीख लेते हुए खुले में शौच करने से परहेज़ करेंगे।

फेसबुक से जुड़ी हर प्रकार की खबरों को हर कोई ध्यानपूर्वक देखता और सुनता है, क्योंकि स्मार्ट फोन के आ जाने से सोशल मीडिया सामाजिक स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव का बिंदु बनकर उभरा है और फेसबुक की न्यूज़ टैब वाली पहल लाजवाब है।

एक रिपोर्ट मुझे मुख्य रूप से पसंद आई जिसके तहत मालूम हुआ कि कोरिया में अब फ्लाइट के अंदर यात्रियों को मूंगफली नहीं परोसी जाएगी। मुझे लगता है इससे सीख लेते हुए हमारे भारत में सबसे पहले ट्रेनों के अंदर इस पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि इसके कारण जो गंदगी रहती है उसे शब्दों में बयान करना कठिन है। धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं पिछले दक्षिण एशिया फोकस प्रोग्राम में भारत में आने वाली 5जी तकनीक के बारे में विस्तृत चर्चा अच्छी लगी। वहीं विश्व का आईना कार्यक्रम में विवाह के बारे में भी जानकारी हासिल हुई। वहीं बाल महिला स्पेशल में चीनी महिला जो कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख भी रह चुकी हैं, के विचार जाने। धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों कार्यक्रम आगे बढ़ाते हुए सुनते हैं पश्चिम बर्दवान, पश्चिम बंगाल से श्यामल कुमार बनर्जी का पत्र। लिखते हैं कि मैंने आपका प्रोग्राम सुना। कार्यक्रम की रिसेप्शन क्वालिटी अच्छी लगी। धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि चीनी उच्च स्तरीय मंच का वार्षिक सम्मेलन 25 मार्च को पेइचिंग में सम्पन्न हुआ, जिसमें चीनी सरकार के कई विभाग के प्रमुखों ने शामिल होकर बाहर के दुनिया को एक निश्चित और स्पष्ट संकेत दिया। इस तरह चीन दृढ़ता के साथ अधिक ऊँचे वाले खुलेपन को और आगे बढ़ाएगा। इसके साथ गुणवत्ता वाले विकास के काम को पूरा करेगा और विश्व के विभिन्न देशों को चीन के विशाल बाजार के अवसर बाँटने देगा।

कार्यक्रम "आर्थिक जगत" में सुना कि चीन में ज्यादा आबादी और कम जल संसाधन एक समस्या बन गई है। वहाँ जल संसाधन व्यवस्था मात्र 30 प्रतिशत ही है। इसलिए जल संसाधन को किफायत करने के साथ-साथ जल संरक्षण और प्रबंधन में सक्रिय प्रगति हासिल की गई है और जल संसाधन के खर्च को नियंत्रित किया गया है। तत्पश्चात '2019 बोआओ एशिया मंच आयोजित' नामक रिपोर्ट में सुना कि दक्षिण चीन के हाईनान प्रांत के बोआओ में बोआओ एशिया मंच का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय समान किस्मत, समान कदम, समान विकास पर चर्चा की गई। बताया जाता है कि इस वर्ष के मुख्य विषय पर केंद्रित रहकर मंच में खुली विश्व अर्थव्यवस्था समेत पाँच मुख्य मुद्दे शामिल हैं।

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में भारतीय खाने और स्वाद के बारे में बताया गया। जिससे पता चला कि यदि खाने के स्वाद की बात की जाय तो भारत के आगे कोई नहीं टिकता। भारतीय खाने के मामले में हमेशा चार कदम आगे तो हैं ही साथ ही खाने के स्वाद के मामले में भी हमेशा नए नए प्रयोग करके दूसरों से 10 कदम आगे रहते हैं। शायद हम भारतीयों के नए-नए प्रयोग करने की प्रवृत्ति के कारण चाइनीज, मैक्सिकन, कोरियन, जापानी, इटेलियन आदि देशों के व्यंजन भारत में खासी लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं।

वहीं कार्यक्रम "विश्व का आईना" में हमें पश्चिम चीन के सछ्वान प्रांत के छंगतू शहर में निर्मित ता छी मंदिर के दौरा पर आधारित जानकारी भी सुनने को मिली। जिससे पता चला कि ता छी मंदिर छंगतू शहर की पूर्वी ह्वा नामक सड़क पर स्थित है। यह महा मंदिर अनगिनत विश्वविख्यात भित्ति चित्रों की वजह से जाना जाता है। 17 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला यह मंदिर छंगतू शहर के प्रथम बड़े मंदिर के नाम से भी नामी रहा है और आज का छंगतू संग्रहालय भी इसी स्थान पर है। चीनी संस्कृति पर्यटन स्थल से जुड़ी आज की सारी जानकारियाँ पसन्द आई।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में पेश 'एक पट्टी एक मार्ग' के चिकित्सा क्षेत्र में सहयोग की प्रमोटर मार्गरेट छन फ़ुंग फ़ू चुन की कहानी सुनी, जो कि प्रेरक लगी। बताया जाता है कि जब सन 1978 में चीन में सुधार और खुलेपन का दौर शुरू हुआ, ठीक उसी समय मार्गरेट छन ने विश्वविद्यालय से स्नातक होकर हांगकांग स्वास्थ्य विभाग में काम करना शुरू किया। इसके अलावा उन्होंने जनवरी 2007 से जून 2017 तक संयुक्त राष्ट्र संघ में विश्व स्वास्थ्य संगठन का काम सँभाला और वह इस संगठन की पहली चीनी महानिदेशक बनीं। कार्यक्रम सुन कर जाना कि सुधार के इन चालीस वर्षों में चीन में आये अभूतपूर्व बदलावों से वह कितना प्रभावित और अभिभूत हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की महानिदेशक बनने के बाद मार्गरेट छन द्वारा स्वास्थ्य के क्ष्रेत्र में चीन में हुई उल्लेखनीय प्रगति पर व्यक्त विचार बिलकुल सही प्रतीत होते हैं। उनका यह कहना सत्य के क़रीब लगा कि वर्तमान में चीन व्यापक रूप से स्वस्थ चीन के निर्माण को बढ़ावा दे रहा है और उसने विगत एक दशक से भी कम समय में विश्व के एक ऐसे विशाल बुनियादी चिकित्सा गारंटी संजाल की स्थापना की, जो कि 1 अरब 30 करोड़ लोगों को सेवा मुहैया करा सकता है। निश्चित तौर पर इसके पीछे एक बड़ा संकल्प छुपा है।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" के हीरो आज भी सादिक़ आज़मी और आनन्द मोहन बैन रहे। उनकी बातों में मौलिकता का पुट झलकता है। अनिलजी आपने भी पत्रोत्तर को एक नया आयाम दिया है। टीम सीआरआई एवं अपने प्रयासों से सीआरआई हिन्दी को पुष्पित-पल्लवित करने वाले तमाम श्रोता मित्रों का तहेदिल से आभार।

वहीं साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत आज तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में हो रहे सामाजिक-आर्थिक विकास की स्थिति पर जानकारी प्रदान की गयी। बताया जाता है कि वर्ष 2018 में तिब्बत से निर्यात की कुल रक़म कोई चार अरब अस्सी करोड़ युआन रही। तिब्बत से नेपाल, भारत, बांग्लादेश और म्यांमार आदि देशों के साथ व्यापार को बढ़ावा देने सीमान्त क्षेत्र में तीन दशसमलव चार अरब युआन के व्यय से अनेक बन्दगाहों की स्थापना की गयी। तिब्बत-नेपाल सीमान्त क्षेत्र में स्थापित एक बन्दरगाह, जो कि काठमाण्डू से महज़ 131 किलोमीटर की दूरी पर है, जिसका नाम सुनाई नहीं पड़ा, काफी महत्वपूर्ण लगा। यह भी जाना कि 'एक पट्टी एक मार्ग' परियोजना से नेपाल के आर्थिक विकास को कितना बढ़ावा मिलेगा।

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में भारत में 5-जी तकनीक के पहुंचने की संभावना के साथ-साथ उसकी विशेषताओं पर सूक्ष्म जानकारी दिया जाना ज्ञानवर्ध्दक लगा। यह जान कर खुशी हुई कि निकट भविष्य में 5-जी तकनीक के ज़रिये न केवल दूर बैठे अपने तमाम घरेलू उपकरणों को नियंत्रित किया जा सकेगा, बल्कि तीन घण्टे की पूरी फिल्म महज़ एक सैकेण्ड में डाउनलोड करना सम्भव होगा। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः अब पेश है कार्यक्रम का अंतिम पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि चीनी कहानी कार्यक्रम में "मौर कुमारी" के तहत अनार के पेड़ के राजा की लोक कथा सुनाई गई, जिसमें राजा ने अपनी छोटी राजकुमारी के साथ ऐमोथाई का शादी की और भोज 40 दिन तक चला। एमोथाई ने एक दिन लोमड़ी से कहा कि मैं घर जाऊं तो कैसे जाऊं और क्या करूंगा। मेरे पास फूटी कौड़ी भी नहीं है। राजकुमारी को ले जा कर क्या करूंगा तो लोमड़ी ने कहा आप चुपचाप यहां ठहरिए और अपने बारे में कुछ ना बताएं। एक दिन राजा ने अपने अनुचरो को पनी लड़की और एमोथाई को विदा करने को कहा। लोमड़ी ने बताया कि मैं आपके काफिले के आगे आगे चलूंगा ताकि कोई मुसीबत ना आए। कहानी को शानदार ढंग से प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories