20190320

2019-03-20 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में सबसे पहले हम श्रोताओं को होली की ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं। उम्मीद करते हैं कि रंगों का यह त्यौहार आप के जीवन में खुशियां लेकर आए। चलिए अब कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं। आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है दिल्ली से वीरेंद्र मेहता ने। लिखते हैं कि उम्मीद है आप सभी अच्छे होंगे। मैं यह पत्र लंबे समय बाद भेज रहा हूं, इसके लिए माफी चाहता हूं। लेकिन अब मैं लगातार पत्र भेजा करूंगा। आजकल मैं दिल्ली में रहता हूं। आपके प्रोग्राम न केवल ज्ञान से भरपूर होते हैं, बल्कि मनोरंजक भी। धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना कार्यक्रम में सभी जानकारियां पसंद आयी, विशेषकर 99 साल की एक महिला की जो लव स्टोरी सुनवायी गयी, दिल को छू गयी।

कार्यक्रम आप का पत्र मिला में सभी श्रोताओं के पत्र और उत्तर बहुत ज्यादा सम्मान से दिए गये। कार्यक्रम में अपना पन लग रहा था जैसे हम परिवार के लोग बैठ कर बातें कर रहे हैं। कार्यक्रम में हमारा पत्र शामिल किया गया, बहुत खुशी हुई अपना पत्र कार्यक्रम में सुनकर।

टी टाइम कार्यक्रम में अमित पाठक जी से जो चर्चा सुनवायी गयी, प्रशंसा योग्य है। नींद पूरी न होने से शरीर में बहुत सी बीमारियां पैदा होने और उनके लक्षण के बारे में जानकारी पसंद आयी। सुंदर कार्यक्रम बेहतरीन प्रस्तुति के साथ सुनवाने के लिये दिल से शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों अब पेश कर रहे हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि प्रतिदिन आप के कार्यक्रमों को सुनने के उपरांत आपकी वेबसाइट पर विजिट कर देश दुनिया की दशा और दिन-प्रतिदिन हो रही आर्थिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक हर प्रकार की गतिविधियों से अवगत होते रहते हैं। और लगातार इन सभी विषयों पर आप की ओर से समाचार और लेख पढ़ने को मिलते रहते हैं। लेकिन इन दिनों भारत में फैली बर्ड फ्लू को लेकर विस्तृत समीक्षा न तो आपके प्रोग्राम में सुनने को मिली और ना ही इस पर कोई लेख देखने को मिला है। मेरे विचार से यह क्षण हम श्रोताओं के लिए दुखदाई है। आप की ओर से लोकसभा चुनाव के ऐलान पर विस्तृत लेख को प्राथमिकता देते हुए देखा गया है। मगर वर्तमान में बर्ड फ्लू से मरने वालों की संख्या 605 पहुंच चुकी है, जिस पर रिपोर्टिंग नदारद है। अतः हमारा पूरा ध्यान आप के समाचारों और लेखों पर केंद्रित रहता है। क्योंकि सोशल मीडिया के इस भड़काऊ दौर में अन्य स्रोतों से निष्पक्ष खबरें नहीं मिलती। अंत में भगवान से प्रार्थना करता हूं कि जो लोग इस से ग्रस्त हैं जल्द ही स्वस्थ हो जाएं।

आगे लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला इस बार भी समय पर सुनने का अवसर मिला। सबसे पहले आभार व्यक्त करता हूं कि आपने तमाम दोस्तों के साथ इस नाचीज जी के पत्र को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया और अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। धन्यवाद।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम अतुल्य चीन में सुनाया गया कि चीनी सिक्योरिटी नियमावली आयोग विज्ञान और टेक्नोलॉजी बोर्ड ने पहली बार शेयर जारी करने के लिए पंजीकरण नियमावली जारी की है। चीन में निवेशक शेयर बाजार में पूंजी लगाएंगे, जिसके लिए विज्ञान और टेक्नोलॉजी बोर्ड प्रस्तुत किए गए हैं।

वहीं विश्व में चीनी अर्थव्यवस्था एक सरगर्म मुद्दा है। विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का अनुपात 15 प्रतिशत से अधिक है। सुधार और खुलेपन के विस्तार के जरिए आर्थिक खतरों को कम किया जा सकता है। यह कार्यक्रम भी अच्छा लगा।

आर्थिक जगत कार्यक्रम में चीन में एनपीसी और सीपीपीसीसी का वार्षिक सम्मेलन को लेकर जानकारी दी गयी। चीन ने आर्थिक और सामाजिक विकास का मुख्य लक्ष्य साकार किया है और खुशहाल समाज के निर्माण में भारी प्रगतियां हासिल की गयी हैं। लोगों को नये रोजगार मिल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब नागरिकों की आय में क्रमशः वृद्धि हो रही है। रोजगार प्राथमिकता को पहली बार सरकारी मैक्रो नीति में रखा गया है। वैदेशिक खुलेपन बढ़ाकर खुले क्षेत्रों का विस्तार कर रहा है और उच्च स्तरीय खुलेपन से सुधार को गहरा किया गया। चीन विदेशी निवेश को और अधिक तौर पर आकर्षित करेगा, साथ ही साथ अपने बाजारों को और अधिक तौर पर खोलेगा।

अनिलः माधव चन्द्र सागौर जी ने आगे लिखा है कि स्वर्णिम चीन के रंग कार्यक्रम में छी मुचि द्वारा लिखि गई रेशम मार्ग के अंतर्गत अब और तब शीर्षक में "ग्रीष्मकालीन चरवाहों की छवि" के बारे में पता चला।

वहीं नमस्कार चाईना के तहत एक सुन्दर सा चीनी गीत सुना जो मधुर और कर्णप्रिय लगा। चीन में कई दशक से विकास हो रहा है और चीन नवाचार का केंद्र बन चुका है। वर्तमान में टेक्नोलॉजी के मामले में भी सबसे आगे है। मोबाइल एप ने लोगों की जीवन शैली को बदल दिया है और एक दूसरे के साथ जुड़ना आसान और किफायती हो गया है। कार्यक्रम से यह भी पता चला कि चीन 5G लाने की तैयारी में जुटा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल चीन में हो रहा है। आज चीन साइंस और तकनीक में बहुत विकसित हो चुका है। वहीं माइक्रो ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज़ मुम्बई महाराष्ट्र के चेयरमैन आदित्य शेखरजी के साथ बातचीत अच्छी लगी।

वहीं कार्यक्रम चीनी कहानी के अंतर्गत सूर्य की ओर अभियान में हान जाति के द्वारा लिखी गई आज की कड़ी में "लाल चश्मा" सुना। इस कहानी में लाल चश्मा कैसे बना और उस लाल चेहरे वाले दानव का रहस्य बताया गया। कहानी में आगे क्या होगा यह सुनने का इंतजार है।

ललिताः दोस्तों अगला पत्र भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि आपकी पसंद कार्यक्रम में आशा भौंसले और मोहम्मद रफी की आवाज में गाना सुना, बहुत अच्छा लगा। वहीं भारत, जापान आदि देशों में बुढ़ापे के बारे में चर्चा अच्छी लगी।

जबकि टी-टाइम प्रोग्राम में ब्रिटिश एजेंट रही भारतीय महिला नूर के बारे में चर्चा सुनी। जबकि चीन में पीएचडी कर रहे अमित जी के साथ बातचीत सुनवाई गयी, अच्छी लगी। वहीं नमस्कार चाइना कार्यक्रम भी अच्छा लगा। धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि विश्व अर्थव्यवस्था में चीन का अनुपात 15 प्रतिशत से अधिक है और विश्व आर्थिक वृद्धि में भी चीन का योगदान लगभग 30 फीसदी है। चीनी अर्थव्यवस्था आम तौर पर स्थिर रहने के साथ ही आगे बढ़ रही है और सामाजिक स्थिरता भी बनी हुई है। चीनी अर्थव्यवस्था का आकार 900 खरब युआन यानि लगभग 130 खरब 60 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है, जो स्थिरता में विश्व के दूसरे स्थान पर मौजूद है।

कार्यक्रम के अन्तिम चरण में एक बैठक में जारी रिपोर्ट की चर्चा की गई, जिसमें बताया गया कि वर्ष 2018 में तिब्बत स्वायत प्रदेश की वायु समस्या की हल औसत 98.1 प्रतिशत रही जो साल 2017 के तुलना में 6.5 प्रतिशत अधिक थी। कुछ वर्षों से तिब्बत की वायु गुणवत्ता में सुधार बहुत तेजी से हो रहा है। तिब्बत के पार्यावरण संरक्षण कार्य को भी नई प्रगति मिली है।

वहीं साप्ताहिक कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि चीन के सछ्वान प्रांत के एक युवक वेई शिच्ये ने दुबई में अपना व्यापार शुरू किया, जो एक कूरियर कंपनी का जनरल मैनेजर हैं। यह रिपोर्ट भी पसन्द आयी। दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि वैश्विक शैक्षणिक प्लेटफार्म स्टडी पोर्टल्स और ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक कमेटी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाले डिग्री प्रमाण पत्र देते हैं और विदेशी छात्रों को रोजगार का उज्जवल भविष्य भी प्रदान किया जाता है। इसके साथ ही हमें पता चला कि ऑस्ट्रेलिया में जो शिक्षा का स्तर है, वह बहुत अच्छा है। वहीं चीन के अलावा भारत, श्रीलंका, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के छात्रों की ऑस्ट्रेलिया के अंडरग्रेजुएट कोर्स के प्रति भी रुचि बढ़ रही है।

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम के अगले भाग में 99 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला की प्रेम कहानी की चर्चा हुई जिसकी प्रेम कहानी द्वितीय विश्व युद्ध के समय शुरू हुई थी। दोनों एक दूसरे के साथ शादी करना चाहते थे, किन्तु 1941 में जहाज डूबने से उनके मंगेत्तर बिल बोकर की मौत हो गई, जिन्होंने भारत के सेना थे। अपने मंगेतर को अपने हाथ से लिखा पत्र 77 वर्षों के बाद मिला। यह पत्र अभी अप्पू संग्रहालय में संरक्षित है।

इस कार्यक्रम के अंतिम भाग में सुना कि हंगरी के प्रधानमंत्री ने विदेशी अप्रवासी निर्भरता घटाते हुए जनसंख्या बढ़ाने के लिए घोषणा की है कि जिस महिला को 4 या अधिक बच्चे होंगे उसे आयकर में जीवन भर छूट देंगे और कर्ज भी माफ किया जाएगा। यह सुनकर आश्चर्य हुआ कि हंगरी में जनसंख्या नियंत्रण नहीं बल्कि जनसंख्या वृद्धि की आवश्यकता है।

कार्यक्रम "टी टाईम" में बताया गया कि ब्ल्यू प्लाक योजना ब्रिटिश विरासत सम्मान द्वारा चलाई जाती है। यह सम्मान उन विख्यात लोगों को दिया जाता है, जो लंदन में या तो किसी खास इमारत में रहे हों या उसमें काम किया हो। भारतीय मूल की नूर इनायत खान के 4 टेविटन स्ट्रीट स्थित पूर्व आवास को ब्ल्यू प्लाक दिया जाएगा, जहां वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जासूस के तौर पर रही थी। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः दोस्तों अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। हालांकि यह पत्र पिछले हफ्ते भेजा गया था, जिसे हम किसी कारणवश शामिल नहीं कर पाए थे और आज इसे प्रस्तुत कर रहे हैं। वे लिखते हैं कि 6 मार्च बुधवार का आपका पत्र मिला कार्यक्रम बेहद लाजवाब लगा। कार्यक्रम में श्रोता बंधुओं की प्रतिक्रियाएं सुनकर हमारा दिल खुश हो जाता है। आज भी मैं आपको हमारे निमाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध नृत्य फेफारिया नाच और मांडला नाच के बारे में जानकारी देना चाहता हूं जो इस प्रकार है।

(1) फेफारिया नाच :- फेफारिया पारंपरिक समूह नाच है। स्त्री और पुरुष जोड़ी बनाकर गोल घेरे में नाचते हैं। फेफारिया वाद्य के कारण इस नाच का नाम फेफारिया नाच पड़ा। इसकी आवाज शहनाई से मिलती जुलती है। फेफारिया का स्वर लहरी के साथ ढांक और थाल की अनुगूंज पर स्त्री पुरुष नर्तक हाथ पैरो और कमर की विभिन्न मुद्राओं के साथ नृत्य को क्रमशः गति देते चलते हैं। नृत्य चरम पर पहुंचकर थम जाता है और यह नाच विवाह के अवसर पर किया जाता है।

वहीं मांडल्या नाच की बात करें तो यह ढोल पर किया जाता है। मांडल्या एक पारंपरिक सामूहिक नृत्य होता है। पुरूष ढोल बजाता है। कांसे की थाली का तीव्र स्वर नृत्य को अधिक उत्तेजक बनाता है। मांडल्या नाच केवल महिला परक होता है और महिलाएं ढोल की थाप पर गति बदलती हैं, हाथ और पैरों की विभिन्न मुद्राओं को प्रदर्शित करती हैं। ज्यों ज्यों ढोल की गति बढ़ती जाती है नृत्य चलता रहता है। विवाह या पर्व त्यौहार पर मांडल्या नाच खुले आंगन में किया जाता है। एक बार पुनः कार्यक्रम आपका पत्र मिला की सफल और सरस प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।

ललिताः अब बारी केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजे गए पत्र को शामिल करने की। लिखते हैं कि श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" के आज के अंक में अन्य तमाम बातों के अलावा जुबैल सऊदी अरब से भाई सादिक़ आज़मी द्वारा दी गयी यह जानकारी कि वहाँ एक भी नदी नहीं है और पीने का पानी पेट्रोल से भी महंगा है, महत्वपूर्ण लगी। अच्छी बात यह लगी कि इसके बावज़ूद वहां पानी की कभी कमी महसूस नहीं होती। इसे कहते हैं मौलिक जानकारी। यह जानकारी साझा करने आपका और सादिक़ का हृदयतल से आभार।

साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत पेइचिंग में आयोजित एनपीसी और सीपीपीसीसी में पधारीं तमाम महिला प्रतिनिधि और महिला सदस्यों की सक्रिय भूमिका पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि चीन के इन दो महत्वपूर्ण सम्मेलनों में महिलाओं ने एक सुन्दर दृश्य उपस्थित किया। यह आंकड़ा भी अहम लगा कि 13वीं एनपीसी में पधारे कोई 2900 प्रतिनिधियों में महिला प्रतिनिधियों की संख्या सात सौ से अधिक रही। इसी प्रकार 13वीं सीपीपीसीसी के कोई 2100 सदस्यों में महिला सदस्यों की संख्या 440 तक जा पहुंची। इस प्रकार दोनों सम्मेलनों में महिलाओं का अनुपात कुल प्रतिनिधियों और सदस्यों का क्रमशः चौथा और पांचवां भाग बनता है।

कार्यक्रम में बतलाया गया कि वर्ष 2018 के अंत तक चीन में 60 वर्ष से अधिक की आयु वाले बुजुर्गों की संख्या 25 करोड़ हो गयी, जो कि यहां की कुल आबादी का 17.9 प्रतिशत है। ज़ाहिर है कि बूढ़ा होता समाज चीन में एक बड़ी समस्या बन गया है। खास तौर पर असक्षम बुजुर्गों के जीवन-यापन एवं उनकी देखभाल पर आने वाला खर्च अपेक्षतया अधिक होने के कारण समस्या अधिक बड़ी लगती है। यह भी जाना कि ऐसे खर्च को चिकित्सा-बीमा के दायरे में नहीं लाया गया है। यह भी पता चला कि पेइचिंग में तो असक्षम बुजुर्गों को एक हजार युआन भत्ते के तौर पर दिये जाते हैं, परन्तु अन्य प्रांतों और शहरों में यह प्रावधान नहीं है। एक असक्षम बुजुर्ग की देखभाल पर औसत मासिक ख़र्च छह हजार युआन आता है।

अनिलः सुरेश अग्रवाल आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में तिब्बत के उत्तरी पठार का जनहीन होने और समुद्रतल से जिसकी औसत ऊंचाई 5000 मीटर होने के कारण उस क्षेत्र में बहुत से दुर्लभ जंगली जानवरों के पाये जाने पर दी गयी जानकारी सूचनाप्रद लगी। यह भी जाना कि तिब्बती पठार के उत्तरी भाग को छ्यांगथांग भी कहा जाता है। यहां चीन का सबसे बड़ा प्रकृति संरक्षण क्षेत्र स्थापित है, जिसका क्षेत्रफल लगभग तीन लाख वर्ग किलोमीटर है। उत्तरी तिब्बत के घास के मैदानों में जंगली गधा, तिब्बती मृग, तिब्बती गैज़ेली और जंगली याक जैसे जानवर रहते हैं और केंद्र सरकार द्वारा साल 1993 में इस क्षेत्र में छ्यांगथांग प्राकृतिक वातावरण संरक्षण क्षेत्र स्थापित किया गया, जो कि विश्व का सबसे बड़ा स्थलीय प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र बताया जाता है। कार्यक्रम में तिब्बत में जंगली जानवरों के संरक्षण में सोनाम दोग्ये की कहानी सुन कर मन भावविह्वल और आँखें हो आयीं कि कैसे जनवरी 1994 में अवैध शिकारियों के साथ संघर्ष करते हुये उन्होंने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिए।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में मशहूर फ़िल्म निर्माता प्रह्लाद निहलानी से की गयी बातचीत सूचनाप्रद लगी। बातचीत सुन कर प्रह्लादजी ने कैसे 1963 से फ़िल्मों में पदार्पण किया और पहली फ़िल्म 'हत्यारा' बनाई गयी, एक फ़िल्म बनाने में किन-किन मुश्किलात का सामना करना पड़ता है, आदि तमाम बातों पर जानकारी हासिल करने का मौका मिला। यह भी जाना कि गोविन्दा और चंकी पाण्डे को फ़िल्मों में ब्रेक कैसे मिला। निहलानीजी ने यह भी बतलाया कि कैसे पहले प्रोड्यूसर और निर्देशक की कमाण्ड चलती थी और आज के दौर में कलाकार उन पर भारी पड़ते हैं। उन्होंने बिकाऊ मीडिया और पत्रकारिता पर भी सही बात उठायी। निर्माता, निर्देशक, वित्तपोषक और सर्वोपरि कलाकारों के बीच की धड़ेबाजी पर भी उन्होंने खुल कर अपनी बात कही। इस सार्थक बातचीत को सुनवाने के लिए धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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