20190313

2019-03-13 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आप का पत्र मिला सुना और पसंद आया। कार्यक्रम में सभी श्रोताओं के पत्र और उत्तर बहुत ही सम्मान से देते हुए बताए गए। कार्यक्रम में हमारा पत्र भी शामिल किया गया।

टी टाइम कार्यक्रम में अंग्रेजी के अध्यापक प्रवीण कुमार जी से जो वार्ता सुनवायी गयी, पसंद आयी। उन्होंने खाने पीने, परिवार, परेशानी और तमाम जो बातें बतायी बहुत अच्छी लगी। जानकारियों में अमेरिका के एक दंपति ने 13 बच्चों को जंजीरों से बांध कर कैद कर रखा है वाली जानकारी सुनकर रोंगटे खड़े हो गये। यह दंपति इंसान है या राक्षस, ऐसे भी माँ बाप इस दुनिया में होते हैं। कार्यक्रम में फिल्मी गीत, जोक्स और श्रोताओं की प्रतिक्रिया चार चाँद लगा रही थी। कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति के लिये दिल से आभार।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से धीरेन बसाक ने। लिखते हैं कि अतुल्य चीन कार्यक्रम में चीन की निजी ऑटो कम्पनी बीयादी, जो कि विश्व में नवीन ऊर्जा गाड़ियों की बिक्री में पहले स्थान पर है, पर पेश रिपोर्ट सुनी। 2000 से ज्यादा कर्मचारी कम्पनी में अनुसंधान का काम कर रहे हैं। वायु प्रदूषण कम करने में बीयादी ने अपना योगदान दिया है। यह रिपोर्ट अच्छी लगी।

अनिलः दोस्तों अब पेश कर रहे हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से हमारे श्रोता सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि अपने पसंदीदा कार्यक्रम आपका पत्र मिला सुना जिसमें हमेशा की भांति श्रोताओं की खट्टी मीठी प्रतिक्रियाओं का खुले मन से उत्तर दिया गया। एक बात जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया, वह थी अनिल जी का सौहार्दपूर्ण रवैया। उन्होंने अत्यंत ज़िम्मेदारी के साथ स्वीकार किया कि पिछले कार्यक्रम में वार्ता लम्बी थी। जिसके चलते दूसरी रिपोर्ट में बाधा पैदा हुई और इसका ख्याल रखने का वादा किया गया। उनके इस फैसले की सराहना करते हुए धन्यवाद प्रेषित करता हूँ। दुर्गेश जी ने इस बार भी अपने इलाके की सांस्कृतिक रुपरेखा और ऐतिहासिक प्रचलन से अवगत करवाया जिसके लिए उनका आभार। इसी क्रम में एक कड़ी जोड़ते हुए बताना चाहता हूँ कि यहाँ सऊदी अरब में एक भी नदी नहीं है जो शायद बहुत कम ही लोग जानते होंगे। यहाँ पीने को पानी सबसे अधिक मात्रा में फ़िल्टर किया जाता है। इसी लिया यहाँ पीने का पानी 1 रियाल में 600 एम् एल मिलता है जबकि महज़ 84 हलाला जो कि यहाँ का स्थानीय पैसा है में 600 एम् एल पेट्रोल मिलता है। अब आप खुद ही आंकलन कर लें कि पेट्रोल से पीने का पानी 16 पैसे मंहगा होता है। मगर सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि कभी भी यहाँ के लोगों को पानी की कमी का आभास नहीं होता क्यों कि सरकारी व्यवस्थाओं का कड़ाई से पालन किया जाता है और सुख सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाती है। और जगह जगह पर आपको ऐसे सार्वजनिक वाटर कूलर मिल जायेंगे जिसमें ताज़ा और ठंडा स्वच्छ पीने का पानी मिल जाएगा। इससे आम जनता या विदेशों से आये कामगार मज़दूर लाभान्वित होते हैं। आशा है मेरी इस छोटी सी जानकारी से लोगों को यहाँ के दैनिक जीवन में उपयोग की सुविधाओं को समझने में मदद मिलेगी।

वहीं दक्षिण एशिया फोकस कार्यक्रम में इस बार इलाहाबाद से सम्बन्ध रखने वाले आषीश जी के विचारों को सुनवाया जाना अच्छा लगा। मोशी नमक किरदार पर, सामाजिक मुद्दों को उजागर करने हेतु एक माध्यम के रूप में इस किरदार की उत्पत्ति पर उन्होंने विस्तार से बताया। चर्चा से उसके मूल उद्देश्य का पता चल गया। तकनीक के इस युग में भी उनकी यह पहल सराहनीय है और सोशल मीडिया के इस दौर में उसकी सफलता की गारंटी भी दी जा सकती है। हमारे भारतवासियों के सोये हुए ज़मीर को जगाने की आवश्यकता है क्यों कि अधिकांश जनता खुद अपने अधिकारों को ही नहीं जानती। किस चीज़ के प्रति जाकरूक होना चाहिए उनके मौलिक अधिकार क्या-क्या हैं, इस पर उनका ध्यान ही नहीं जाता। 5 साल में एक बार कोई नेता आता है और उनका वोट लेकर चला जाता है। दैनिक जीवन की समस्याओं में किनकी सहायता चाहिए सरकारी स्तर पर किस तरह की सहायता हमको मिल सकती है, उसके बारे में वह पूर्णरूप से अनजान रहता है। उस परिपेक्ष्य में आषीश जी की यह कोशिश लाजवाब है। आप ने इस विषय को गंभीरता से लिया और इस पर चर्चा की, इसके लिए आपका धन्यवाद।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि चीन में निजी ऑटो कंपनी बीयादी सुधार और सृजन के माध्यम से व्यवसाय की उन्नति के रास्ते पर निरंतर सफलता हासिल करते हुए कुंजीभूत तकनीक पर महारत हासिल करने वाला प्रशिद्ध नवीन ऊर्जा गाड़ी निर्माता बन गयी है। बताया जाता है कि पिछले साल 2018 में यह कंपनी कुल 2 लाख 47 हजार 811 नवीन ऊर्जा गाड़ियां बेची और गत 4 वर्षों से लगातार विश्व में नवीन ऊर्जा गाड़ियों की बिक्री में पहले स्थान पर बनी हुई है। नवीन ऊर्जा गाड़ी क्षेत्र में अग्रसर रहने के कारण बीयादी ने शहरों में वायु प्रदूषण कम करने, यातायात जाम समस्या का समाधान करने में अपना योगदान दिया है। वह वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान और विकास के ज़रिये एक पर्यावरण हितैषी उद्यम बन गया है।

दूसरी रिपोर्ट में सुना कि चीनी बैंकिंग और बीमा निगरानी आयोग ने वित्तीय सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए वित्तीय खतरे को नियंत्रित किया है। निगरानी नियमावली व्यवस्था में भी संशोधन किया गया।

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में सुना कि चीन में हिन्दी का अध्ययन करने वाले छात्रों और शिक्षकों को जनवरी माह में व्यस्तता और परीक्षा के चलते भारतीय दूतावास ने 10 जनवरी के बजाए 4 मार्च को 'विश्व हिन्दी दिवस' दूतावास में मनाया। भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री और पेइचिंग विश्वविद्यालय में हिन्दी विभाग के प्रमुख प्रो. ज्यांग जिंगकुई ने दीप प्रज्वलित कर समारोह की शुरूआत की। इस मौके पर एक मधुर गीत भी प्रस्तुत किया गया। हमें यह सुनकर प्रसन्नता हुई कि राजदूत ने अपने स्वागत सम्बोधन में कहा कि हिन्दी भाषा भारत में विविधताओं में एकता का एक प्रमुख चिह्न है। यह भारत की आधिकारिक भाषा ही नहीं, बल्कि प्रेम, मैत्री और संवाद की भाषा भी है, जिसने लोगों के भावनात्मक और वैचारिक स्वरूप को निरंतर संगठित और सशक्त बनाया है। यह सुनकर हम लोग प्रफुल्लित हुए कि भाषा सभ्यता की आत्मा और राष्ट्र की भावना होती है। हिन्दी एक भाषा ही नहीं बल्कि एक संस्कृति है। कहा गया कि विश्व हिन्दी दिवस एक महत्वपूर्ण दिवस है जिसका उद्देश्य दुनिया भर में हिन्दी का प्रचार-प्रसार करना है। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

ललिताः दोस्तों अगला पत्र भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" में पिछले 25 फ़रवरी को चीनी राज्य परिषद द्वारा चीन में पिछले दो वर्षों में दूर किये गये वित्तीय ख़तरे और निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त किये जाने के कारण बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में आये सुधार की चर्चा अच्छी लगी। इसके अलावा चीलिंग प्रान्त में कृषि और किसानों की खुशहाली के लिये उठाये गये कदमों पर भी जानकारी हासिल हुई।

वहीं साप्ताहिक "विश्व का आइना" में सुनाया गया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष द्वारा भारत द्वारा अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले अपने यात्रियों की चयन प्रक्रिया पर दी गयी जानकारी की चर्चा, विश्व भर में लोगों द्वारा मांसाहार में कमी के बावज़ूद उसके उत्पादन में हुई पांच गुना वृध्दि और अनाथ एलिन द्वारा अपनी 108 साल उम्र वाली माँ को ढूंढ निकालने का समाचार भी अच्छा लगा।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" की प्रस्तुति हर बार की तरह आज भी लाज़वाब रही। श्रोता-मित्रों की विविधतापूर्ण प्रतिक्रियाएं मेरे लिये किसी मार्गदर्शक की तरह होती हैं। श्रोताओं और उनके पत्रों का यह मंच हमेशा आबाद रहे, यही कामना है।

अनिलः सुरेश अग्रवाल आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में तत्पश्चात नेपाल में दक्षिण एशिया महिला मंच के साथ सहयोग पर आयोजित कार्यक्रम की जानकारी दी गयी। कार्यक्रम में आगे गत 12 फ़रवरी को 69वें बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म दिवस में प्रदर्शित टेनसेंट पिक्चर्स द्वारा निर्मित युवा फिल्म निदेशक वांग लीना की फ़िल्म 'पहली विदाई' की चर्चा सूचनाप्रद लगी। बताया जाता है कि फिल्म दिवस में इस फ़िल्म को नयी पीढ़ी श्रेणी में रखा गया। इससे पूर्व 31वें तोक्यो फिल्म दिवस में भी यह फ़िल्म 'एशिया भविष्य इकाई' की सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार हासिल कर चुकी है और 13 से 17 फ़रवरी के बीच बर्लिन फिल्म दिवस के दौरान फ़िल्म चार बार प्रदर्शित की गयी।

फिल्म के कथानक की चर्चा करते हुये बतलाया गया कि यह शिनच्यांग के शाया क्षेत्र में रहने वाले आईसा नामक एक लड़के की कहानी है और फिल्म के सभी कलाकार गैर-पेशेवर होने के कारण उनका काम करने का अनुभव भी बहुत कम है। वास्तव में, 'पहली विदाई' के साथ निदेशक वांग लीना की बचपन की यादें जुड़ी होने के कारण वह इसे इतना ख़ास मानती हैं। फ़िल्मांकन भी उनके जन्मस्थान पर होने की वजह से इस फ़िल्म से उनका बेहद लगाव है। सर्वोपरि फ़िल्म देखने के बाद उस पर जर्मन बच्चों की प्रतिक्रिया भी क़ाबिल-ए-तारीफ़ लगी। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि आर्थिक जगत प्रोग्राम में सुनाया गया कि चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू होने के चालीस वर्षों में चीनी ने प्रगति हासिल की है। रूढ़िवादी समाज खत्म हो चुका है खुलेपन और गरीबी उन्मूलन के जरिये। चीन में सुधार और खुलेपन से चीनी लोगों में स्पष्ट प्रभाव पड़ेगा। चीन की आर्थिक स्थिति दिन प्रति दिन अच्छी हो रही है। साथ ही साथ लोगों की भौतिक और आध्यात्मिक जीवन स्तर उन्नत किया गया।

चीन का तिब्बत कार्यक्रम में बताया गया कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की महिलाओं में प्रगति उल्लेखनीय है। साथ ही साथ आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लोकतांत्रिक रुपांतरण से वैधानिक तौर पर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की गयी है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्वकारी समाजवादी व्यवस्था में रहकर तिब्बती महिलाओं को आज का सुखमय जीवन और समान राजनीतिक व सामाजिक स्थान मिला है। तिब्बत में महिलाओं का स्थान भी निरंतर उन्नत किया जा रहा है।

अनिलः माधव चन्द्र सागौर आगे लिखते हैं कि स्वर्णिम चीन के रंग प्रोग्राम में प्राचीन शहर "हो" पर चर्चा की गई। प्राचीन कजाख चरवाहों के समारोह का आनंद उठाएं फॉर्म का दृश्य पेश किया गया। बताया गया कि फार्म के कमरे "उईगर" शैली से बने थे और भीतर से सजे होते थे। थेनचान पर्वतमाला उत्तरी तलहटी में भारी विकास की संभावना है। सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंड का एहसास यहां पर होता था। किलेदार क्षेत्रों में एक स्थिर वायुमंडल बना रहता है। यह ऐतिहासिक समृद्ध जानकारी बेहद अच्छी लगी।

वहीं कार्यक्रम चीनी कहानी के अंतर्गत सूर्य की ओर अभियान में कहानी "आइने में प्रेमिकाएं" का शेष भाग सुना, जिसमें छोटे भाई बड़े भाइयों को खोज में निकल पड़ते हैं। छोटे भाई और उनकी पत्नी ने दोनों मिलकर राक्षस नी को एक बोतल में बंधक बनाया और समुंद्र में फेंक दिया। इसी बुद्धिमत्ता से राक्षस नी के चुंगल से बड़े भाई को आजाद किया गया। दोनों भाई और उनकी दोनों पत्नियां एक साथ घर वापस आए और उसकी मां ने गर्मजोशी से स्वागत किया। घर में फिर से खुशियां लौट आईं।

जबकि दक्षिण एशिया फ़ोकस प्रोग्राम में दिल्ली के आशीष मान से टेलीफोन वार्ता सुनायी गयी, जोकि एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने कारपोरेट से सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में आने की जानकारी दी। उनके कार्टून चरित्र "मोशी" की कहानी भी अच्छी लगी। आभासी दुनिया में सक्रिय रहकर यथार्थ जीवन में परिवर्तन लाने की दिशा में ये कार्टून चरित्र बनाए हैं। एक अच्छी प्रस्तुति के लिए शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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