20190306

2019-03-06 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है खंडवा मध्य प्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे और उनके परिवारजनों ने। लिखते हैं कि आपका पत्र मिला कार्यक्रम हमें बेहद लाजवाब लगता है। कार्यक्रम में श्रोता बंधुओं की प्रतिक्रिया सुनकर हमारा दिल खुश हो जाता है। आज भी मैं हमारे निमाड़ क्षेत्र के प्रसिद्ध लोकनाट्य गम्मत और रासलीला लोकनाट्य के बारे में जानकारी देना चाहता हूं जो कि इस प्रकार है :-

(1) गम्मत :- गम्मत निमाड़ी जनजीवन का सबसे अहम साधन माना जाता है। गम्मत व्यंग्य का जीवंत रूप है। समाज की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बुराइयों और विद्रूप पर चोट करना गम्मत का एक खास काम है। बुंदेली में स्वांग, छत्तीसगढ़ में नाचा, महाराष्ट्र में नाचा, महाराष्ट्र में तमाशे का जो स्थान है, वही गम्मत का निमाड़ में है। गम्मत निमाड़ का एक लोकरंग है, विशेषकर नवरात्रि में गांव गांव में गम्मतें की जाती है। गम्मत का मंच चारों ओर खुला होता है। बीच में एक खंभा गाड़कर उसके चारों ओर कपड़े का चँदोवा तान दिया जाता है। इसी के नीचे गम्मत की जाती है। गम्मत में एक विदूषक होता है। गणेश और सरस्वती वंदना के बाद नर्तकी का नाच और बाद में प्रमुख गम्मत शुरू होती है। गम्मत शुध्द मनोरंजन के साथ समसामयिक घटनाओं की व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति होता है। हास्य और व्यंग्य गम्मत की खासियत है। गम्मत में मृदंग और झाँझ प्रमुख वाद्य होते हैं।

(2) रासलीला :- भादो में कृष्ण जन्माष्टमी के आसपास निमाड़ के गांवों में रासलीला का आयोजन किया जाता है। कृष्ण लीला की विभिन्न प्रसंगों की प्रस्तुति रासलीला में की जाती है। मुख्य रूप से कृष्ण जन्म, माखन चोरी, कंस वध आदि प्रसंग रासलीला में किये जाते हैं। प्रसंगों की प्रस्तुति परंपरागत होती है। गीत, नृत्य और संगीत का समन्वय रासलीला में प्रमुख तौर पर होता है। रासलीला में विदूषक और अन्य पात्र अपने अभिनय से गांव के दर्शकों को बाँधे रखते हैं।

एक बार पुनः कार्यक्रम आपका पत्र मिला कार्यक्रम की एक सरस और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको कोटि-कोटि धन्यवाद और हमारी ओर से चाइना रेडियो इंटरनेशनल हिंदी सेवा की पूरी टीम और सभी श्रोता बंधुओं को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाये और अनंत बधाईयां।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि पिछले टी-टाइम प्रोग्राम में सूर्य की किरणों से रेडिएशन, मोबाइल से होने वाले खतरों आदि के बारे में जानकारी हासिल हुई। इसके साथ ही जोक्स और श्रोताओं की टिप्पणी भी अच्छी लगी। वहीं बाल महिला स्पेशल कार्यक्रम भी बहुत अच्छा लगा। बिल्कुल सही कहा कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती। अल्जाइमर बीमारी के बारे में चर्चा अच्छी लगी।

इसके साथ ही आपकी पसंद प्रोग्राम में लता मंगेशकर जी के गाए हुए गाने सुनकर अच्छा लगा। इसके अलावा लावारिस और गोरा और काला फिल्म के गानों ने खूब मनोरंजन किया।

जबकि संडे की मस्ती प्रोग्राम में हाल में चीन में रिलीज हुई भारतीय फिल्म हिचकी के प्रोमो के बारे में चर्चा सुनी। जबकि तमिलनाडु में एक बंदर की वजह से लोगों को परेशानी होने का समाचार भी सुना। धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अब हम पेश कर रहे हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने, जो हमारे पुराने श्रोता हैं और लगातार हमारे कार्यक्रमों के बारे में टिप्पणी भेजते रहते हैं। लिखते हैं कि कार्यक्रम टी टाइम के आरम्भ में दिल दहला देने वाली खबर सुनकर मोबाइल फ़ोन को छूने से भी भय लगने लगा है। इस में कोई संदेह नहीं कि आजकल अधिकांश लोग मोबाइल पर बहुत अधिक समय बिताते हैं और हालत यहां तक पहुँच चुकी है कि भले ही आटा एक वक़्त का न हो डाटा जरूर होना चाहिए।

चीन में विजिटिंग साइंटिस्ट के तौर पर काम कर रहे डॉ. कृपा राम के साथ बातचीत सुनवाकर आपने हमको रोचक जानकारी उपलब्ध कराई। उन्होंने अपने 9 महीने के आगामी चीन यात्रा की योजनाओं का खुल कर वर्णन किया। ग्लोबल वार्मिंग की बढ़ती समस्या के निवारण में उनकी कार्य परियोजना सफलता के द्वार चूमे यही कामना करता हूँ। समय को ध्यान में रखते हुए यहाँ कहना गलत न होगा कि वार्ता कुछ अधिक लम्बी थी जिसके कारण अन्य जानकारी की उपलब्धता में कठिनाई हुई। आशा है कि आगामी अंक में इसका ख्याल रखा जाएगा।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम विश्व का आईना में भारत और चीन के बारे में बहुत सी जानकारियां सुनने को मिली।

आप का पत्र मिला प्रोग्राम में सभी श्रोताओं के विचार सीआरआई के बारे में सुनकर दिल खुश होता है। श्रोताओं की सीआरआई के प्रति इतना प्यार देख कर अच्छा लगता है। कार्यक्रम में हमारे पत्र को भी शामिल किया गया। लगन और प्यार से भरपूर कार्यक्रम आप का पत्र मिला सुनवाने के लिये आपका दिल से आभार।

कार्यक्रम टी टाइम में थाईवान की एक लड़की मोबाइल पर ब्राइटनेस को फुल करके काम करती थी। इसके चलते उसकी आँखों के कोर्निया में 500 छेद हो गए, यह जानकर दुख हुआ। कार्यक्रम में फिल्मी गीत, जोक्स और श्रोताओं की प्रतिक्रिया चार चाँद लगा रही थी।

अनिलः दोस्तों अगला पत्र भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि अमेरिकी विज्ञान संवर्द्धन संघ विश्व में सबसे बड़ा चतुर्मुखी विज्ञान संगठन है और साइंस मैगजीन का आयोजक भी। वर्ष 1923 में स्थापित न्यूकोम्ब क्लेवलैंड पुरस्कार इस संघ का सबसे पुराना पुरस्कार है, जो हर साल साइंस मैगजीन में प्रकाशित तमाम अध्ययन पेपरों में से एक को चुन कर दिया जाता है। अमेरिकी विज्ञान संवर्द्धन संघ की साल 2019 वार्षिक महासभा पर साइंस मैगजीन के प्रमुख संपादक और न्यूकोम्ब क्लेवलैंड पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष जेरेमी बर्ग ने चीनी मोत्सी नंबर क्वांटम वैज्ञानिक परीक्षात्मक उपग्रह की टीम को इस संगठन का साल 2018 न्यूकोम्ब क्लेवेलैंड पुरस्कार देने का एलान किया। चीनी वैज्ञानिकों के साथ ही सम्पूर्ण चीनी नागरिकों को हम लोग बहुत सारी बधाईयां देते हैं।

"नमस्कार चाइना" कार्यक्रम में चीन में बुज़ुर्गों के जीवन पर प्रकाश डाला गया। बताया जाता है कि चीन में बुजुर्ग लोग किस तरह अपने आप को फिट रखते हैं और उनका जीवन कैसा रहता है। हमारे भारतीय संस्कृति की तरह ही चीन में भी बच्चों को यह सीख दी जाती है कि 'बड़ों को आदर करो, बुजुर्गों का सम्मान करो' चीनी बुज़ुर्ग लोग अक्सर सेहतमन्द और चुस्त-दुरुस्त रहते हैं। हमें यह भी पता चला कि चीनी लोग फैशन के मामले में बिल्कुल अपडेट रहते हैं। दादी-नानी अपने नाती-पोतों को पालन-पोषण करने में रुचि रखते हैं। चीनी बुजुर्ग अपने बाल भी स्टाइलिश तौर पर बनाते हैं। चीन में बुज़ुर्गों की सुरक्षा के लिये विशेष क़ानून लागू किया गया है जिसके तहत माँ-बाप की देखभाल के लिये बच्चों पर बनाया जाता है। यह भी पता चला कि चीन में महिला और पुरुष में असमानताएँ नहीं पाई जाती है। किसी अन्य देशों की तुलना में चीनी बुजुर्ग ज्यादा फुर्तीले होते हैं।

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि 24 वर्षीय पेइचिंग की युवती यांग चिना ने व्यायाम को अपने जीवन में अनिवार्य हिस्सा मान लिया है। अब फ़िट रहने के लिए लड़कियां बड़ा ध्यान देती हैं। दक्षिण चीन के चच्यांग विश्वविद्यालय के सार्वजनिक खेल व कला विभाग के प्रधान वू येहाई के अनुसार ज्यादा से ज्यादा परिवारों ने वसंत त्योहार की छुट्टियों में व्यायाम करने लगा है। उन के विचार में व्यायाम न सिर्फ स्वास्थ्य के लिए मददगार है, बल्कि लोगों के सत्य-संकल्प को मजबूत कर सकता है। और तो और वह परिजनों के बीच भावना को भी घनिष्ठ बना सकता है। लोगों के बीच आदान प्रदान और ज्यादा हो सकता है। नव वर्ष मनाने के साथ व्यायाम करना एक नया फ़ैशन बन गया है। व्यायाम वास्तव में स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि "टी टाइम" प्रोग्राम में सुना कि इन दिनों रोज़ाना घंटों तक मोबाइल का इस्तेमाल देखने मिलता हैं। थाईवान में 25 साल की युवा प्रोफेशन सेक्रेटरी एक लड़की, जिसने अपने मोबाइल की ब्राइटनेस फुल करके रखी थी। उसके दिन-रात फोन के साथ वक्त बिताने के कारण उसकी आंखों के कोर्निया में 500 छेद हो गए। इस लिए कभी भी फोन का ज्यादा इस्तेमाल न किया जाए और ब्राइटनेस कम कर सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।

हेल्थ संबंधी जानकारी से पता चला कि लोग अक्सर भूल जाते हैं या किसी भी बात को याद नहीं रख पाते हैं तो हो सकता है कि भूलने की बीमारी अल्जाइमर के लक्षण बताएं। ऐसे में नियमित तौर पर व्यायाम करने से स्मरण शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। वहीं अमेरिका में रश विश्वविद्यालय के एरोन एस बुचमैन ने व्यायाम करने वाले की शोध से पता लगाया है कि लोगों की मौत से औसतन दो साल पहले और फिर मौत के बाद दान दिए गए उनके मस्तिष्क के ऊतकों का अध्ययन कर पाया गया कि सक्रिय जीवनशैली से मस्तिष्क पर रक्षात्मक असर पड़ सकता है। यह नई जानकारी बहुत अच्छी लगी।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" में सूर्य की ओर अभीयान में "हान" जाति की लोक-कथा "आइने में प्रेमिकाएं" सुनी। एक दिव्य आत्मा ज्योति पुञ्ज द्वारा दी गई आइना के सहारे बुढ़िया का बड़ा बेटा दिव्या आत्मा के बताये मार्ग पर आगे बढ़ते हुए शादी के लिए उस स्थान पर जाकर संकट में फंस चुका है, और छोटा भाई बड़ा भाई की खोज पर निकल पड़ा है। अब देखते हैं कि आगे क्या होता।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में उत्तर-पूर्वी चीन स्थित चीलिन प्रांत के चाइना हुनछुन युवा आर्केस्ट्रा द्वारा म्यांमार के दाई ची कस्बे में स्थित वाईजीडब्लू अनाथ स्कूल में गत 14 फ़रवरी को स्थानीय बच्चों के समक्ष दी गयी एक रंगारंग प्रस्तुति पर पेश रिपोर्ट सुनी, अच्छी लगी। दोनों देशों की भाषा और संस्कृति भिन्न-भिन्न होते हुए भी बच्चों द्वारा उसका ख़ूब लुत्फ़ उठाया गया। तभी तो कहते हैं कि संगीत की कोई भाषा नहीं होती और वह सीधे दिलों में उतर जाता है। इसीलिए तो यह दिलों को जोड़ने का काम भी करता है।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" की आज की प्रस्तुति भी लाज़वाब रही। भुवनेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रेड़ियो मेले में मुझ द्वारा श्रोता-मित्रों से की गयी बातचीत की सराहना करने वाले मित्रों का तहेदिल से शुक्रिया। कार्यक्रम में जोरहाट, असम के भाई पृथ्वीराज पुरकायस्थ की टिप्पणी और सुझाव भी उम्दा लगे। भाई तिलक राज अरोड़ा, मेरे समकक्ष शंकर प्रसाद शम्भू, भाई सादिक़ आज़मी सहित उन तमाम मित्रों का भी हृदयतल से आभार, जिन्होंने मेरी हौसलाअफ़ज़ाई की।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में स्थित प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत सुन्दर मेडोक काउंटी पर पेश रिपोर्ट सुन कर जाना कि यहां यातायात की सुविधा न होने के कारण लोग लम्बे समय से गरीबी में जीवन बसर कर रहे थे। लेकिन स्थानीय सरकार काउंटी के लोगों को समृद्ध बनाने के लिए प्रयासरत है। बताया जाता है कि मेडोक चीन में राजमार्ग प्रशस्त करने की अंतिम काउन्टी है और अपेक्षतया कम ऊंचाई पर होने के साथ-साथ जलवायु भी अनुकूल है और यहां वर्षा भी पर्याप्त मात्रा में होती है। इस क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण का अच्छी तरह संरक्षण किया गया है। कार्यक्रम सुन कर जाना कि साल 1959 में स्थापित इस काउंटी के तहत वर्तमान सात टाउनशिप और एक कस्बा आता है। यह भी बताया गया कि वर्ष 2013 में मेडोक से बोमे काउंटी तक राजमार्ग का विस्तार कर इसे तिब्बत के दूसरे क्षेत्रों के साथ जोड़ा गया है। राजमार्ग से जुड़ने के बाद मेडोक में उत्पादित मूल्यवान जड़ी-बूटी और अन्य उत्पादों को देश के भीतरी इलाकों में पहुंचाया गया और स्थानीय सरकार के इन प्रयासों से लोगों के जीवन में तेज़ी से समृद्धि आने लगी।

साप्ताहिक "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में साल 2019 में भारत-चीन के बीच आदान-प्रदान और सहयोग पर चर्चा सुनने को मिली। यह कहना बिलकुल सही लगा कि चीन और भारत दोनों के अपने घरेलू बाज़ार इतने बड़े हैं कि विश्व आर्थिक मंदी का भी उन पर कोई ख़ास असर नहीं होता।

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं के पसंदीदा फ़िल्म 'आशा', 'छोटी सी मुलाक़ात', 'अर्पण', 'गोरा और काला', 'फिर तेरी कहानी याद आयी' और 'लावारिस' के छह गाने सुनवाने के साथ कार्यक्रम में दी गयी तमाम जानकारी भी रोचक, ज्ञानवर्ध्दक और आश्चर्यजनक लगी। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories