20190227

2019-02-27 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है दरभंगा बिहार से हमारे नए श्रोता हरेराम ने। लिखते हैं कि मैं बिल्कुल नया श्रोता हूं। सिर्फ तीन दिन पहले ही लदहो चौक की एक चाय की दुकान पर एक व्यक्ति अपने मोबाइल से सीआरआई का कार्यक्रम सुनाते हुए वहाँ बैठे सभी लोगों को कह रहे थे कि आप लोग आवाज पहचानिए। आवाज पहचान लेने से सीआरआई का कार्यक्रम खोजने में आसानी होगी। उन्होंने हस्तलिखित दो चार कागज बाँटे, जिस पर चाइना रेडियो इंटरनेशनल हिन्दी सेवा के रेडियो फ्रीक्वेंसी, वाट्सएप नम्बर, वेबसाइट आदि की जानकारी लिखी हुई थी।

मैं स्थानीय रेडियो का कार्यक्रम तो बहुत पहले से सुन रहा हूं, लेकिन विदेशी रेडियो पहली बार इस सप्ताह बुधवार को सुनने को मिला। मुझे आश्चर्य हुआ कि विदेश से भी भारतीय लोगों की आवाज सुनाई देती है। विश्व रेडियो दिवस पर लिये गये श्रोताओं के इंटरव्यू सुनकर बहुत खुशी मिली। कल गुरुवार को टी टाईम में जानकारी और हिन्दी गीत अच्छा लगा और पत्नी वाला चुटकुला सुनकर बहुत हँसी आई।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि "आप का पत्र मिला" कार्यक्रम में भुवनेशवर में आयोजित रेडियो मेले में भाई सुरेश अग्रवाल जी ने विभिन्न श्रोताओं से सीआरआई के बारे में जो बातचीत सुनवायी, बहुत पसंद आयी। उसके बाद श्रोताओं के पत्र और उत्तर संतोषजनक दिए गये। कार्यक्रम की बेहतरीन प्रस्तुति और कार्यक्रम में हमारा पत्र शामिल करने के लिये आप का दिल से शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है जोरहट असम से पृथ्वीराज पुरकायस्थ ने। लिखते हैं कि "आप का पत्र मिला" कार्यक्रम में ओड़िसा के भुवनेशवर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रेडियो मेले से सीआरआई के मॉनिटर सुरेश अग्रवाल जी की सीआरआई श्रोताओं जैसे माधव चंद्र सागौर, आनंद मोहन बैन, रजनीश कुमार, आर विजय कुमार, प्रियनजीत कुमार घोषाल, जमशेदपुर के एस बी शर्मा जैसे पुराने श्रोताओं से बातचीत अच्छी लगी। विशेष कर शर्मा जी का अभियोग जैसे आजकल सीआरआई ने क्विज़ कॉम्पिटिशन आयोजन में कमी करती है और क्विज विजेताओं को चीन घूमने का अवसर ना मिल पाना और आपकी चारों सेवाओं में एक ही कार्यक्रम प्रसारित करने जैसी शिकायत शामिल है। आपको इस पर जरूर ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है कि वर्तमान विश्व भर में जहां बहुत सारे रेडियो स्टेशन शार्टवेव और मीडियम वेव प्रसारण बंद कर इंटरनेट में ही अपने आपको सिकोड़ कर बैठ गए हैं, ऐसे हालात में सीआरआई अपने विस्तृत और शक्तिशाली रेडियो नेटवर्क के जरिए और इन छोटी छोटी बातों पर ध्यान देकर अधिक से अधिक श्रोताओं को अपनी और आकर्षित कर सकता है। इधर मैंने भी विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर स्थानीय अखबार में लेख लिखा है उसमें सीआरआई रेडियो की इस शक्ति के बारे में उल्लेख किया गया है और पाठकों को सीआरआई समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय रेडियो सुनने का शौक आदि के बारे में बताया है।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुजफ्फरपुर बिहार से रजनीश कुमार ने। लिखते हैं कि हमने कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" लाजवाब लगा। कार्यक्रम में आदरणीय मॉनीटर सुरेश अग्रवाल जी द्वारा विश्व रेडियो दिवस 13 फरवरी के उपलक्ष्य में चाइना रेडियो इंटरनेशनल के हिंदी सेवा के पुराने श्रोता बंधुओं से की गई बातचीत की रिकॉर्डिंग प्रसारित की गई, जिसमें उनके विचार जानने को मिले। हम परिवार के सभी सदस्य आप के रात्रि के प्रसारण के बारे में यही कहना चाहते हैं कि आपके रात्रि में प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों का प्रसारण हमें एकदम साफ और स्पष्ट रूप से नहीं सुनाई देता। आपसे निवेदन है कि आप रात्रि प्रसारण को साफ और स्पष्ट रूप से प्रसारित करने का कष्ट करें।

अनिलः दोस्तों अगला पत्र भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि "आपका पत्र मिला" कार्यक्रम में श्रोताओं के द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाएं सुनकर हमें बहुत खुशी हुई। आदरणीय भाई अनिल पांडेय जी आज में भी आपको इस कार्यक्रम में हमारे निमाड़ क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण लोकनृत्य काठी नृत्य के अलावा मध्यप्रदेश के दो प्रसिद्ध शहरों के बारे में जानकारी देना चाहता हूं।

(1) काठी नृत्य :- यह एक विशेष ऋतु त्यौहार से जुड़ा हुआ लोकनृत्य है जिसमे शक्ति की आराधना की जाती है अंतः इसे धार्मिक आशय से परिपूर्ण ऋतु चक्र मूलक अनुष्ठान परक नृत्य भी कहा जा सकता है। निमाड़ का यह नृत्य-नाट्य देव प्रबोधिनी एकादशी से प्रारंभ होकर महाशिवरात्री तक चलता है। यह देवी या शक्ति की आराधना का नृत्यात्मक अनुष्ठान है। देवी को धारण करने वाले चार भगत और दो नर्तक धर्म, नीति, विचार, उपदेश और जटिल आध्यात्मिक अर्थों वाली चार कथाओं पर नृत्य करते हैं। काठी नृत्य करने वाले नर्तक निमाड़ मे मूलतः नीची जातियों के हैं। लेकिन पूरे लोक समाज मे उनका सम्मान होता है।

(2) गिन्नौरगढ़ :- भोपाल से 60 किमी. दूर है, जहां 390 मीटर ऊंची 50 मीटर चौड़ी पर एक किला बना है। इसका निर्माण 13वीं शताब्दी में महाराजा उदयवर्मन ने कराया था। इस दुर्ग की अंतिम गौड़ शासक कमलावती थीं। किले के निकट तोतों का क्षेत्र है। किला जिस पहाड़ी पर बना है उसे अशर्फी पहाड़ी भी कहा जाता है। इस दुर्ग के सभी महल विशेष दर्शनीय है और अनेक इमारतें ऐतिहासिक महत्व की हैं जो पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

(3) मुक्तागिरी :- जैनियों का पवित्र तीर्थ स्थल बैतूल जिले में स्थित है। यहां पर 52 मंदिर हैं। कुछ मंदिर चट्टानों के अंदर बने हैं। निर्जन और वनों से आच्छादित गुफाओं और पर्वत शिखरों पर निर्मित ये मंदिर बड़े आकर्षक दिखाई देते हैं। एक छोटा-सा जलप्रपात भी है, जो यहां के आकर्षण को और बढ़ा देता है।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से धीरेन बसाक ने। लिखते हैं कि "अतुल्य चीन" कार्यक्रम में चीन के परंपरागत वसन्त त्योहार उत्सव के विषय पर एक रिपोर्ट सुनवाई गई, जिसे सुनकर चीन के वसन्त त्योहार पर जानकारी मिली और अच्छी लगी।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" का इस बार का विशेष अंक सुनकर मन गद गद हो गया। सबसे पहले सुरेश अग्रवाल जी का आभारी हूँ जिन्होंने विगत 13 और 14 फरवरी को भुवनेश्वर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रेडियो मेले के परिपेक्ष में वहां शामिल विभिन्न प्रदेशों से आये वरिष्ठ श्रोतागढ़ के विचार सुनवाए। उनकी यह कोशिश सराहनीय कही जा सकती है। एक मॉनिटर की भूमिका निभाते हुए इस अतुलनीय प्रयास हेतु उनका फिर से आभार, धन्यवाद। एक और बात मुझे प्रभावित कर गई कि इस विस्तृत प्रतिक्रियाओं पर अनिल जी ने भी सी आर आई का पक्ष रखते हुए अपने विचार साझा किये और समय के अभाव के चलते कुछ पत्रों को कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया गया।

वहीं कार्यक्रम "टी टाइम" में एक दुखदाई खबर से आँखे नम हो गई जब बताया गया कि मशहूर साहित्यकार नामवर सिंह जी का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। आपके माध्यम से उनको श्रद्धांजलि प्रेषित करता हूँ और उनके साहित्य जगत पर संक्षिप्त जानकारी मुहैया करने हेतु धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि आपकी पसंद के पिछले अंक में किशोर कुमार, शैलेंद्र और लता मंगेशकर आदि के बेहतरीन गाने पेश किए गए, जो हमें बहुत अच्छे लगे। वहीं टी-टाइम प्रोग्राम भी बहुत अच्छा लगा, जिसमें जाने-माने साहित्यकार नामवर सिंह के निधन के बारे में बताया गया। वहीं अमेरिका के म्यूजियम से खोए हुए सामान को वापस लौटाने के बारे में भी सुना। जबकि गायक सोनू निगम की अचानक तबीयत खराब हो जाने का समाचार भी सुना। प्रोग्राम में पेश सभी तरह की जानकारी अच्छी लगी। वहीं संडे की मस्ती प्रोग्राम भी अच्छा लगा। धन्यवाद।

अनिलः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में वसंत त्योहार द्वारा विश्व के लिए चीन की संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिला। पेइचिंग के भवन संग्रहालय, थ्येन थान, नानल्वोकूशांग गली, मशहूर पर्यटन स्थलों में लाल लालटेन, पेइचिंग ऑपेरा में पात्रों के चेहरे के मेकअप के नमूने, लोक चित्र, चाइनीज परंपरागत त्योहार की वस्तुओं ने ध्यान खींचा। वसंत त्योहार एक बहुत ही महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है।

"आर्थिक जगत" में चीन में उपभोग बढ़ाने के लिए विदेश व्यापार के जरिए निवेश पर ज़ोर देना होगा। चीनी वाणिज्य मंत्री चुंग शान के मुताबिक विदेशी पूंजी निवेश पर ज़ोर दिया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय आयात मेले का आयोजन और मुक्त व्यापार द्वारा निर्माण को बढ़ाने में उच्च गुणवत्ता से विकास को बढ़ावा मिलेगा। वहीं सीमा-पार ई-कॉमर्स विकास को बढ़ावा मिलेगा। कराधान, वित्त में उद्यमों की बोझ को कम किया जाएगा और निजी उद्यमों के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में लालटेन उत्सव के बारे में बताया गया कि चीन का परम्परागत उत्सव लालटेन उत्सव है और यह चीनी चन्द्र पंचांग के अनुसार नव वर्ष के पहले महीने की पन्द्रहवीं तिथि को मनाया जाता है।

कार्यक्रम में आगे अखिल द्वारा लिखा 'गरीबी के आखिरी पायदान पर चीन' नाम का लेख पढ़कर सुनाया गया। उसमें चीन के गत 5 वर्षों में हुए विकास और सफलता पर प्रकाश डाला गया और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों को पक्के मकान में शिफ्ट करने की योजना की भी चर्चा की गई।

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि श्रोताओं के लोकप्रिय साप्ताहिक कार्यक्रम "आप का पत्र मिला" में सबसे पहले विश्व रेडियो दिवस के मौके पर अंतर्राष्ट्रीय रेडियो मेला भुवनेश्वर में मॉनिटर सुरेश अग्रवाल द्वारा पुराने श्रोताओं से लिये गये विचारों की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनायी गयी, जिसमें आनन्द मोहन बैन, रजनीश कुमार, माधव चन्द्र सागौर, आर विजय कुमार, एस बी शर्मा और प्रियंजीत कुमार घोषाल के विचार सुने, जो बेहद पसन्द लगे। 7 श्रोताओं के पत्रों को भी संक्षिप्त तौर पर शामिल किया गया।

वहीं कार्यक्रम "टी टाईम" में बताया गया कि अमेरिका के मेट्रोपोलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट ने लूट का ताबूत मिस्र को लौटाने का फैसला किया है। ईसा पूर्व की पहली शताब्दी का इस सुनहरे ताबूत को म्यूजियम ने पिछले वर्ष 28 करोड़ रुपए में खरीदा था। यह ताबूत मिस्र के देवता हरिसाफ की पूजा करने वाले प्रसिद्ध पुजारी नेगियमिंख का था।

वहीं हम बॉलीवुड के मशूहर गायक सोनू निगम के जल्द ही ठीक होने की कामना करते हैं। दूसरी ओर एक शोधकर्ता के मुताबिक कंपनी के मालिक को अपने कर्मचारियों का पूरा ध्यान रखना चाहिए। कर्मचारी खुश रहेंगे तो अधिक अच्छे से काम करेंगे।

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में आपने अंतरराष्ट्रीय रेड़ियो मेले में पधारे सीआरआई के तमाम श्रोता-मित्रों से मुझ द्वारा की गयी बातचीत की रिकॉर्डिंग सुनवा कर मेरी मेहनत को तो सार्थक किया ही, श्रोताओं में भी एक नये जोश का संचार कर दिया। आपका तहे दिल से शुक्रिया। मैं आभारी हूँ भाई सादिक़ आज़मी का कि, जिन्होंने सऊदी अरब से मेरे कार्य पर प्रशंसा की मोहर लगाई। उनके सामने तो मेरा क़द ही बौना पड़ गया। धन्यवाद।

साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में इटली में चीनी-भाषा सीखने को लेकर वहां के लोगों में व्याप्त उत्साह के बारे में जान कर खुशी हुई। बताया जाता है कि इटली में अब तक कुल बारह कंफ्यूशियस कॉलेजों की स्थापना की जा चुकी है, जहाँ स्थानीय लोगों को चीनी-भाषा सिखाने के अलावा चीनी संस्कृति का प्रसार-प्रचार भी किया जाता है। कार्यक्रम सुन कर इटली के सिसिली द्वीप के बारे में भी जानकारी हासिल हुई। निश्चित तौर पर इटली में चीनी-भाषा और उसकी संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सून आओ का योगदान अतुलनीय है।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। साल 1987 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी केंद्रीय कमेटी द्वारा लिये गये तिब्बत की बौद्धिक सहायता हेतु निर्णय से राजधानी पेइचिंग और देश के अन्य भीतरी भागों में तिब्बती मिडिल स्कूल स्थापित किये जाने सम्बन्धी रिपोर्ट अच्छी लगी और इसके साथ ही तिब्बती शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर चीन कितना ध्यान दे रहा है, इस रिपोर्ट के माध्यम से हमें पता चला। वहीं पेइचिंग में तिब्बती मिडिल स्कूल स्थापित किया गया, जोकि पैंतीस हज़ार वर्गमीटर में फ़ैला हुआ है और उक्त स्कूल के तीन ग्रेड और अठारह कक्षाओं में कुल आठ सौ विद्यार्थी पढ़ते हैं।

वहीं कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में तत्पश्चात ई-कॉमर्स विषय पर चीन-भारत के बीच सहयोग की संभावनाओं पर परिचर्चा अच्छी लगी। इस परिप्रेक्ष्य में अलीबाबा समूह द्वारा उपलब्ध कराये जाने वाले प्लेटफॉर्म की चर्चा सम्भावनाओं के नए द्वार खोलती हुई प्रतीत हुई।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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