20190220

2019-02-20 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, अंतरराष्ट्रीय रेडियो मेला 13 और 14 फरवरी को ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोजित हुआ। हमारे तमाम श्रोता जिसमें सुरेश अग्रवाल, शंकर प्रसाद शंभू, आनंद मोहन बैन, एस बी शर्मा, माधव चंद्र सागौर, आर एस विजय कुमार, प्रियंजीत कुमार घोषाल, रजनीश कुमार, उदयभान ठाकरे, सिद्धार्थ भट्टाचार्य आदि ने इसमें हिस्सा लिया। मेले में हमारे मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने मेले में पहुंचे सीआरआई के कुछ पुराने श्रोताओं से बातचीत की। आज के कार्यक्रम में सबसे पहले आप सुनेंगे सुरेश अग्रवाल द्वारा भेजा गया यह ओडियो टेप, जिसमें तमाम श्रोताओं के साथ बातचीत की गई है।

अनिलः सबसे पहले सुरेश अग्रवाल जी का हम धन्यवाद देना चाहते हैं कि उन्होंने विश्व रेडियो दिवस के मौके पर भुवनेश्वर पहुंचे पुराने श्रोताओं से हमारी मुलाकात करवाई।

सुरेश जी ने बातचीत के क्रम में सबसे पहले बात की भिलाई, दुर्ग, छत्तीसगढ़ के श्रोता आनंद मोहन बैन के साथ, जो कि सीआरआई के साथ लगातार जुड़े हुए रहते हैं। आनंद मोहन जी आपने बताया कि हम यानी सीआरआई अपने कार्यक्रमों की फ्रीक्वेंसी नहीं बताते हैं। जबकि अन्य प्रसारणों में बार-बार ऐसा किया जाता है। आपकी यह शिकायत और सुझाव अच्छा है। मैं आपके सुझाव को संबंधित विभाग तक पहुंचाऊंगा। धन्यवाद इस ओर हमारा ध्यान दिलाने के लिए।

इसके साथ ही सुरेश जी ने बात की मुजफ्फरपुर बिहार के रजनीश कुमार के साथ। रजनीश कहते हैं कि शाम की सभा में फ्रीक्वेंसी बहुत खराब होती है। आवाज साफ नहीं सुनाई देती। इसलिए फ्रीक्वेंसी में सुधार किया जाय।

पश्चिम बंगाल से माधव चंद्र सागौर कहते हैं टी-टाइम और संडे की मस्ती आदि प्रोग्राम में पत्र देर से शामिल किए जाते हैं। वहीं अन्य श्रोताओं के हवाले से माधव कहते हैं कि उनके पत्र शामिल नहीं किए जाते।

आंध्र प्रदेश, विशाखापट्टनम के आर. विजय कुमार ने कहा कि वे समय की कमी के कारण प्रोग्राम में टिप्पणी नहीं भेज पाते हैं।

जबकि पश्चिम बंगाल से ही प्रियंजीत कुमार घोषाल कहते हैं कि आजकल क्विज प्रतियोगता नियमित तौर पर नहीं होती है, जिसे नियमित तौर पर शुरू किया जाना चाहिए। इसके साथ ही खेलकूद के बारे में कार्यक्रम शामिल किया जाय, जबकि श्रोता सम्मेलन का आयोजन भी होना चाहिए।

वहीं जमशेदपुर, झारखंड से हमारे पुराने श्रोता एस. बी. शर्मा कहते हैं कि समय के साथ सीआरआई में बदलाव आया है।

हम आप सभी श्रोताओं का धन्यवाद अदा करना चाहते हैं कि आपने विश्व रेडियो दिवस के मौके पर हमारे मॉनिटर सुरेश अग्रवाल जी के जरिए हम तक यह संदेश पहुंचाया। आपकी शिकायत, आप के सुझाव, आप की बात हम और अन्य श्रोताओं तक पहुंच चुकी है। आपकी चिंता और परेशानियों पर ध्यान दिया जाएगा।

अनिलः दोस्तों समय की कमी की चलते आज हम श्रोताओं की टिप्पणी संक्षेप में शामिल करेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि 12 फरवरी को मैं उड़ीसा के प्रमुख दर्शनीय और तीर्थ स्थल पुरी दिन के 11 बजे पहुँचा और स्नान ध्यान के लिये तैयार हो ही रहा था कि चीन से अखिल जी का फोन कॉल आया और वे अंतर्राष्ट्रीय रेडियो मेला से सम्बन्धित बातचीत करने लगे।

साप्ताहिक कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" के विशेष सेगमेंट में केसिंगा उड़ीसा से मॉनिटर भाई सुरेश अग्रवाल, दिल्ली के अमीर अहमद और मुझसे की गयी फोनवार्ता सुनायी गयी। यह वार्ता सुनकर प्रसन्नता हुई क्योंकि सी आर आई से अपनी आवाज में मैंने पहली बार कोई कार्यक्रम सुना। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आप का पत्र में सभी श्रोताओं के विचार सुने और पसंद आये। हमारे शहर खुर्जा की जानकारी खंडवा के श्रोता भाई दुर्गेश नागनपुरे और सऊदी अरब के श्रोता भाई सादिक आजमी को पसंद आयी, बहुत शुक्रिया।

कार्यक्रम आपकी पसंद में जानकारी और फिल्मी गीत सुनवाये गये और पसंद आये। हमारी पसंद पर भी एक गीत सुनवाया गया। कार्यक्रम की सुंदर प्रस्तुति के लिये शुक्रिया।

अनिलः अगला पत्र हमें भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि सौभाग्य से कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" आज 13 तारीख को प्रसारित हो रहा है जो कि समूचे विश्व में वर्ल्ड रेडियो डे के तौर पर मनाया जाता है। सदैव की भांति इस मर्तबा भी हमारे प्रिय और वरिष्ठता श्रोता भाई सुरेश अग्रवाल जी की प्रतिक्रिया सबसे अधिक विस्तृत तौर पर थी, जिस प्रकार से वह कार्यक्रमों पर समीक्षा करते हैं शायद ही कोई दूसरा श्रोता करता होगा। कम से कम मेरे विचार से उनका कोई सानी नहीं है। आपके माध्यम से उनकी कर्मठता को सलाम प्रेषित करता हूं। निसंदेह वह एक जागरूक और निष्पक्ष श्रोता है।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में चीन के आर्थिक विकास की बढ़ती दर और भारत की भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने की समीक्षा दिलचस्प लगी। एकत्रित आंकड़ों के आधार पर अनुमानों का आकलन सटीक था।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि पिछले टी-टाइम प्रोग्राम में सिगरेट की लत छोड़ने के लिए ई-सिगरेट का कारगर इस्तेमाल वाली जानकारी अच्छी लगी। सऊदी अरब में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शामिल करने पर खुशी हुई। शानदार प्रोग्राम पेश करने के लिए धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर द्वारा भेजा गया पत्र। लिखते हैं कि कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में बताया गया कि फिलीपींस की राजधानी मनीला में स्थित इनट्रामुरोस एक दर्शनीय स्थल है, जो 16वीं शताब्दी में स्पेनिश उपनिवेशकों द्वारा स्थापित किया गया था। इस जगह पर बाल शिक्षा केंद्र है जहां लोग आकर चीनी भाषा सीखते हैं। साल 2019 के वसंत त्योहार के दौरान चीनी पर्यटकों को यहां स्नेहपूर्ण शुभाकामनाएं मिली। स्कूल में गरीब परिवारों के फिलिपिनों बच्चे पढ़ने आते हैं।

ललिताः लीजिए पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में चीन के दसवें पंचेन लामा के निर्वाण की तीसवीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित विशेष गतिविधियों के बारे में पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। पता चला कि राष्ट्रीय एकीकरण, जातीय एकता और धार्मिक अनुयायियों के हितों की रक्षा में उनका अहम योगदान रहा। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अंतिम पत्र, जिसे भेजा है गोरखपुर उत्तर प्रदेश से ब्रदी प्रसाद वर्मा अंजान ने। लिखते हैं

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अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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