20190213

2019-02-13 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है खुरजा यूपी से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आप का पत्र मिला में सभी श्रोताओं के पत्र दिल से सुने और पसंद आये। कार्यक्रम में हमारे पत्र को भी शामिल किया गया, बहुत खुशी हुई।

कार्यक्रम विश्व का आइना में वसंत त्योहार के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई, जो अच्छी लगी।

वहीं कार्यक्रम टी टाइम में इतनी जानकारियां सुनने को मिली कि दिल खुश हो गया और जानकारियों से भी ज्ञान में इजाफा हुआ। नेपाल में विमान हादसा के दौरान पायलट का सिगरेट पीना, केरल में एक युवक का शादी वाले दिन फुटबॉल मैच खेलना, हिन्दू धर्म में शगुन अप शगुन वाले टोटको की जानकारी, रात में काम करने वाले पर्याप्त नींद न लेने से डी एन ए का खतरा 25% तक बढ़ जाता है आदि जानकारी सुनी। वहीं कुछ बुरा होने वाला है इस का आभास जानवरों को हो जाता है, यह भी आपने बताया। शानदार कार्यक्रम सुनवाने के लिये दिल से आभार प्रकट करते हैं।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" का आगाज़ चीनी नव-वर्ष वसन्त त्यौहार सम्बन्धी जानकारी से किया जाना सूचनाप्रद लगा। पता चला कि वसंतोत्सव का इतिहास कोई चार हज़ार साल पुराना है और इसे क्रिसमस से भी अधिक व्यापक तौर पर मनाया जाता है। चीन के ग्रामीण क्षेत्रों में इसके मनाने की तैयारियां मध्य दिसम्बर से ही शुरू हो जाती हैं। इस त्यौहार पर लोग किस क़दर ख़र्च करते हैं उसका अनुमान इस एक बात से लगाया जा सकता है कि चीन में मनाये जाने वाले तमाम त्यौहारों का एक-तिहाई महज़ वसन्त त्यौहार पर किया जाता है। कार्यक्रम में चीन के विभिन्न प्रान्तों में इस त्यौहार को मनाये जाने के अलग-अलग ढंग और समय के साथ इसमें आये परिवर्तन की चर्चा भी की गयी। यह जान कर अच्छा लगा कि आपसी विवाद के बावज़ूद लोग एक-दूसरे को बधाई देते हैं, जिससे उनमें सुलह हो जाती है। और हाँ, त्यौहार के मौके पर खाये जाने वाले पकवानों और लालटेन त्यौहार पर भी जानकारी हासिल हुई।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" में पता चला कि बीते तीन सालों में "पारिस्थितिक प्राथमिकता और हरित विकास" की अवधारणा के मुताबिक यांग्त्ज़ी नदी पर्यावरण सुधार में सकारात्मक प्रगति हासिल हुई है। यांग्त्ज़ी नदी चैनल चीन के भू-अंतरिक्ष विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और नदी का यह आर्थिक बेल्ट चीन के शांगहाई और क्वीचो सहित कुल ग्यारह शहरों या प्रांतों से गुजरती है, जहां की आबादी और आर्थिक स्थिति देश की चालीस प्रतिशत के बराबर है।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि आज के विशेष कार्यक्रम में हमने चीनी राष्ट्राध्यक्ष शी चिनफिंग के लोगों को ग़रीबी से उन्मुक्त किये जाने के रुझान पर पेश शब्द-चित्र अच्छा लगा। शी महोदय का अक़सर चीन के ग़रीब क्षेत्रों में देखा जाना इस बात का द्योतक है कि वह सर्वांगीण खुशी के रास्ते पर किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना चाहते।

साप्ताहिक "विश्व का आइना" भी ग़ौर से सुना, जिसका आगाज़ एक मादक धुन से किया गया, जो कि देर तक कानों में रस घोलती रही। कार्यक्रम सुन कर पता चला कि वसंतोत्सव की तैयारियां वर्ष के अन्तिम माह की 23वीं तिथि से ही शुरू हो जाती हैं और लोग अपने घरों को सजाने-संवारने में लग जाते हैं। यह भी जाना कि इस त्यौहार के मौके पर जगह-जगह विशेष मेले लगते हैं, जहां पर्व से जुड़ी तमाम तरह की वस्तुएं मिलती हैं।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में श्रोताओं का लगातार जुड़ाव चित्त-प्रसन्न कर देता है। गत कुछ सप्ताह से श्रोताओं द्वारा प्रेषित विभिन्न स्थानों की जानकारी भी सूचनाप्रद लगती है, परन्तु यहां मैं बहुत ही विनम्रता के साथ एक बात कहना चाहूंगा कि स्थानों की जानकारी भेजते समय हमें इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि जानकारियां प्रतिक्रियाओं से आगे न निकल जाएं। क्यों कि कार्यक्रम का पहला मक़सद प्रसारणों पर प्रतिक्रिया हासिल करना ही है। आशा है कि आप मेरी बात से सहमत होंगे।

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में चीनी नव-वर्ष वसंतोत्सव पर महती जानकारी हासिल हुई। यद्यपि, इन दिनों सीआरआई हिन्दी के तमाम कार्यक्रम त्यौहार के रंग में सराबोर हैं, फिर भी आज की बातचीत औरों से हट कर थी। यह जान कर अच्छा लगा कि चीनी मुद्रा का मूल्य बढ़ रहा है, जिसके चलते चीनियों के लिये स्वदेश से अधिक विदेश घूमना सस्ता पड़ता है। तमाम जानकारी के लिये शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना कार्यक्रम में चीन में वसंत त्यौहार के बारे में दी गई जानकारी सुनकर हमारा दिल खुश हो गया।

इसके बाद साप्ताहिक कार्यक्रम आपका पत्र मिला में हमारे पत्र को प्रथम स्थान देते हुए हमारा पत्र शामिल किया गया, जिसे सुनकर हमें बहुत खुशी हुई। इसी क्रम में आदरणीय भाई तिलक राज अरोड़ा जी ने उनके प्रसिद्ध शहर खुर्जा के बारे में बताया कि उनके शहर में मिट्टी के बर्तनों का निर्माण किया जाता है। इस व्यवसाय से तमाम लोगों को रोजगार मिल रहा है। हम परिवार के सदस्य आप से यही कहना चाहेंगे कि हमारे देश में ऐसे कई शहर हैं जहां पर आये दिन बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है। हम तो आपके सीआरआई हिंदी सेवा के माध्यम से कहना चाहेंगे कि यदि देश के हर छोटे बड़े शहर में सरकार इस तरह के छोटे उद्योग को स्थापित करे तो देश में बेरोजगारी का स्तर घट सकता है। आज भी मैं तीन शहरों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दे रहा हूं।

(1) ओरछा :- बुंदेला राजाओं का ऐतिहासिक स्थल झांसी से 19 किमी. और ग्वालियर से 130 किमी. दूर बेतवा नदी के तट पर स्थित है। यहां पर चतुर्भुज मंदिर और जहांगिरी महल, लक्ष्मी मंदिर, राम मंदिर, शीशमहल, रायप्रवीण महल आदि प्रसिद्ध है। क्रांतिवीर चंद्रशेखर आजाद की साधना स्थली भी यही रही है।

(2) शिवपुरी :- 1958 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया था। यह शिवपुरी नगर के निकट और झांसी से 57 किमी. दूर है। भव्य पिकनिक स्थलों और झील में नौका - विहार के साथ साथ वन्य पशु - पक्षी दर्शन पर्यटकों के आकर्षण के केंद्र है।

(3) बावनगजा :- यह प्रसिद्ध जैन तीर्थ - स्थल है। यहां पर 75 फीट ऊंची जैन मूर्ति स्थापित की गई है।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि पिछले टी-टाइम कार्यक्रम में नेपाल में पिछले साल हुए विमान हादसे के लिए कॉकपिट में पायलट के सिगरेट पीने को जिम्मेदार ठहराया गया। दुःख हुआ कि पायलट की लापरवाही से इतने लोगों की जान चली गयी। वहीं फेसबुक, ट्विटर आदि के बारे में चर्चा सुनी। जबकि रात के वक्त ज्यादा काम करने से डीएनए को खतरा होने का समाचार भी सुना। बेहतरीन प्रोग्राम पेश करने के लिए धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अगला पत्र भेजा है सऊदी अरब से हमारे पुराने श्रोता सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला में इस बार भी पत्रों की संख्या अधिक रही जो कि सुखद है। पूर्व की भांति दुर्गेश जी ने अपने क्षेत्र के ऐतिहासिक धरोहर से अवगत कराया। इसके साथ में तिलक जी ने भी खुर्जा में बनने वाली अनमोल वस्तुओं से सम्बंधित जानकारी हम तक पहुंचाई, जिसके लिए उन दोनों का शुक्रिया। मगर यहाँ कहना उचित समझता हूँ कि प्रस्तुत कार्यक्रम पर समीक्षा भी होनी चाहिए, ताकि सी आर आई की प्रस्तुतिकरण का तुलनात्मक बिंदु भी उजागर हो सके या उसके मूल उद्देश्य का पता चल सके। हमेशा की तरह सुरेश अग्रवाल जी ने भी इस बार कार्यक्रमों पर विस्तृत प्रतिक्रिया दी जो एक श्रोता को नैतिक ज़िम्मेदारी है। और हमारे मित्र और सी आर आई के पुराने श्रोता शहीद आजमी की वापसी देख कर मन प्रसन्न है। आशा करता हूँ कि भविष्य में उनकी चिट्ठी आती रहेगी, ताकि उनके विचारों को जानने का अवसर हमें मिलता रहेगा।

इस बार आपकी वेबसाइट पर एक संक्षिप्त वीडियो में मुझे काफी प्रभावित किया, जिसमें चीन के राष्ट्राध्यक्ष शी चिनफिंग जी आम जनता से मिल रहे हैं। उनका इन कुरियर कर्मियों से मिलना इस बात का खुला प्रमाण है कि वह किस क़दर ज़मीनी स्तर से जुड़े हुए नेता हैं। समूचे विश्व में उनकी लोकप्रियता का राज़ क्या है और चीन इतनी बुलंदी क्यूँ पाता जा रहा है। पूरी दुनिया में अपनी गरज से राजनीतिक दिशा बदलने वाला इतना शालीन भी हो सकता है। यह छोटा वीडियो उनके व्यक्तित्व की एक लम्बी दास्तान बयान कर रहा है, जिससे दूसरों को भी सीख लेने की जरूरत है।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में रेशम मार्ग पर गण्यमान्य व्यक्तियों को चीन के शिनच्यांग वेवुर स्वायत्त प्रदेश की संस्कृति का अनुभव विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि चाइना मीडिया ग्रुप द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वे लोग पश्चिमी चीन के शिनच्यांग वेवूर स्वायत्त प्रदेश के काश्गर शहर की शुफू काउंटी के जातीय संगीत वाद्य गांव का दौरा किया। स्थानीय गायकों ने लोक गीतों से प्रतिनिधि मंडल का स्वागत किया। पाकिस्तान के एफ़एम 98 चीन-पाक दोस्ती चैनल के एंकर तसव्वर ने शुक्रिया व्यक्त करने के लिए एक गीत भी गाया।

साप्ताहिक कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में चीनी नये साल की तैयारी, पुनर्मिलन भोजन, लाल लिफाफों का चलन और मध्य रात्रि में आतीशबाजी का विश्लेषण रोचक लगा।

साप्ताहिक कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में चीन के वसंत त्यौहार की तुलना भारत के दिवाली से की गयी, किन्तु लम्बी छुट्टी, पकवान, रीति रिवाज, प्रथायें और त्यौहार मनाने के कारण आदि में दोनों देशों के त्यौहारों में कुछ भिन्नता है। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" में छी मुची द्वारा लिखी गई पुस्तक "रेशम मार्ग तब और अब" पर आधारित धारावाहिक शृंखला में पहले पिछली कड़ी "बर्फबारी में शिनच्यांग पर्वतमाला के पार" शीर्षक सुनने मिला जिसमें दो लाख बीस हजार हेक्टेयर में विस्तृत बारकूल कजात काउण्टी और शिनच्यांग पर्वत माला का वर्णन किया गया है। एक नई कड़ी में "एक लुप्त प्राचीन मार्ग" के तहत बारकुलनोर झील से आगे 150 किलोमीटर लम्बे दुरूह निर्जन घास के मैदान की जानकारी भी दी गई। इस यात्रा पर आधारित ऐतिहासिक कहानी छी मुची द्वारा लिखी गई बेहद पसन्द की गयी।

वहीं कार्यक्रम "चीनी कहानी" में चीनी लोक कथाओं पर आधारित कहानी "सूर्य की ओर अभियान" में पाई जाति की कहानी में "छोटा पीला ड्रेगन और बड़ा काला ड्रेगन" नामक कहानी सुनी, जिसमें युवा नौकरानी को गर्भवती होना और उसके बच्चे को साँप द्वारा दूध पीलाने की बात सुनकर हमें आश्चर्य हुआ।

वहीं कार्यक्रम "टी टाईम" में कई जानकारियां दी गयी, जिसमें नेपाल में पायलट द्वारा कॉकपिट में सिगरेट पीने की वजह से प्‍लेन हादसे का शिकार हो गया। पाबंदी के बावजूद भी ऐसा करना सुरक्षा नियमों के खिलाफ पूरी तरह खिलवाड़ है। जबकि नाइट शिफ्ट में काम करने से कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग, श्वास संबंधी और तंत्रिका तंत्र जुड़ी बीमारियां और डीएनए को भी नुकसान पहुंच सकता है। एक अच्छी प्रस्तुति के लिए आभार प्रकट करता हूं।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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