20190206

2019-02-06 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। तो लीजिए शुरू करते हैं आज के पत्र। पहला पत्र हमें भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि हमें कार्यक्रम आपका पत्र मिला बेहद लाजवाब लगा। कार्यक्रम में श्रोता बंधुओं द्वारा भेजी गई प्रतिक्रियाएं सुनकर हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है। अनिल पांडेय जी ने पिछले आपका पत्र मिला कार्यक्रम में नीरज राय जी द्वारा भेजा गया पत्र शामिल किया। इसमें उन्हीं के क्षेत्र की जानकारी ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। हम नीरज जी से ऐसी आशा करते हैं कि वे लगातार नियमित तौर पर अपने क्षेत्र की जानकारियों से हमें अवगत कराते रहेंगे। आज भी मैं दो जगहों के बारे में जानकारी साझा कर रहा हूं।

(1) विदिशा :- यह भोपाल से 54 किमी. दूर बंबई - दिल्ली रेलमार्ग पर स्थित है। यह भारतीय इतिहास में उल्लेखनीय प्राचीन नगर है। यहां पर प्राचीन बौद्ध और जैन धर्मों का केंद्र, सम्राट अशोक द्वारा निर्मित अनेक बौद्ध मंदिर और बिहार है। यहां से 7 किमी. दूर उदयगिरि, हिन्दू - जैन धर्मों की प्रतीक 20 गुफाएं, महावराह की विशाल प्रतिमा, बीज मंडल, रामघाट, चरणतीर्थ स्थित है। 33 किमी. की दूरी पर बौद्ध तीर्थ ग्यारसपुर मालादेवी मंदिर और अंकवबंड स्थित है। 8 किमी. की दूरी पर नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।

(2) धार :- यहां एक छोटी पहाड़ी पर किला है जिसका निर्माण 1344 ईश्वी में सुल्तान मोहम्मद तुगलक ने अपनी दक्षिण विजय के दौरान देवगिरी जाते समय यहां ठहरने के उद्देश्य से कराया था। इस किले में देवी कालकाजी मंदिर और अबदुल्ला शाह चंगल का मकबरा है। दुर्ग के निकट हजरत मकबूल की कब्र है। धार परमार राजाओं की राजधानी भी रहा है। भोजराज की नगरी भोजशाला और लाट मंदिर प्रसिद्ध है।

दुर्गेश जी, अहम जानकारी हम तक पहुंचाने के लिए शुक्रिया।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम विश्व का आईना से बहुत सी जानकारियां सुनी और पसंद आयी। आप का पत्र मिला कार्यक्रम में श्रोताओं के पत्र और उत्तर बहुत ही संतोष जनक और सम्मान सहित दिया गया। आप का बहुत शुक्रिया।

आज मैं अपने शहर खुर्जा के बारे में लिख रहा हूँ। हमारे शहर खुर्जा में बने मिट्टी के बर्तन पूरे भारत के साथ साथ पूरे विश्व में मशहूर हैं। खुर्जा को पॉटरी नगरी के नाम से भी जाना जाता है। खुर्जा में कप, प्लेट, खिलौने, फूलदान, बिजली के काम में आने वाला इन्सुलेटर और भी बहुत सा सामान खुर्जा में ही बनता है। इन कप प्लेटों को आम बोल चाल की भाषा में लोग बाग चीनी के बर्तन कहते हैं। यह विशेष प्रकार की मिट्टी ज्यादातर चीन से ही आती है। करोड़ों रूपये का व्यापार प्रतिदिन होता है। हजारों लोगों को पॉटरी बनने से रोजगार मिला हुआ है। स्थानीय लोगों के अलावा अन्य प्रदेशों के लोग भी यहां खुर्जा में काम करते हैं, जिससे वहां अपना और अपने परिवार का लालन पोषण करते हैं। यहां चार सौ के करीब पॉटरी हैं जिसमें कप, प्लेट आदि सामान बनता है। यहां के बने हुए कप प्लेट फाइव स्टार होटलों के अलावा विदेशों में भी निर्यात होते हैं। आशा है सभी श्रोताओं को यह जानकारी पसंद आयेगी।

अरोड़ा जी, हम तक जानकारी पहुंचाने के लिए धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि "अतुल्य चीन" में चाइना मीडिया ग्रुप द्वारा हाल ही में आयोजित दक्षिण शिनच्यांग स्थित काश्गर म्युनिसिपल पेशेवर कौशल प्रशिक्षण केंद्र जहां तुर्की, मिस्र, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित छह देशों के संवाददाताओं ने दौरा किया। आतंकवादी हिंसा दूर करने के लिए पेशेवर प्रशिक्षण स्कूल तैयार किया गया। जहां पर भाषा कानूनी ज्ञान के कौशल से उग्रवादी विचारधारा खत्म की जा सकती है। इस स्कूल के छात्रों को मुफ्त में खाना और नौकरी की गारंटी दी जाती है। शिनच्यांग में आतंकवादी प्रहार की रोकथाम के लिए प्रयास जारी है। अपराधों को समाप्त करने के लिए मानवाधिकार का प्रयास सफल रहा है। हम आशा करते हैं कि बहुत जल्द ही इसकी रोकथाम होगी।

"आर्थिक जगत" के अंतर्गत चीन के कुछ आर्थिक समाचार सुने, जिसमें साल 2018 में चीन के सॉफ्टवेयर उद्योग पर जानकारी दी गई। हांगकांग औद्योगिक वाणिज्यिक क्षेत्र को उन्नत करने पर जोर दिया गया, जिससे राष्ट्रीय विकास एकीकृत हुआ। हांगकांग चीनी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स द्वारा सुधार और खुलेपन के मुद्दे को सामने लाया गया। हांगकांग चीनी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के अध्यक्ष छाई क्वान शेन बताते हैं कि सुधार और खुलेपन की नीति से न सिर्फ चीन को लाभ मिल सकता है बल्कि विश्व आर्थिक लाभ भी उठा सकता है। यह कार्यक्रम अच्छा लगा। अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में चीन के आविष्कार और खोज के बारे में जानकारी दी गई। बताया जाता है कि चीन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का इतिहास बहुत पुराना और समृद्ध रहा है। प्राचीन काल से ही विश्व के अन्य देशों और सभ्यताओं से स्वतंत्र रूप से चीनी दार्शनिकों ने विज्ञान प्रौद्योगिकी में गणित, खगोल आदि में उल्लेखनीय प्रगति करने से चीनी सभ्यता के लोगों ने कई तरह के आविष्कार किये और नई नई खोज की।

इस कार्यक्रम से हमें जानकारी मिली कि पारम्परिक चीनी औषधि, एक्यूपंक्चर और आयुर्वेदिक औषधियों का प्रचलन चीन में प्राचीन काल से ही हो रहा है। दुनिया के अनगिनत प्राचीन आविष्कारों में चीन का बड़ा योगदान रहा है, जिससे आज भी पूरी दुनिया चीन को लोहा मानती है। यह भी पता चला कि भूकम्प मापक यंत्र, कुतुबनुमा, पानी की चक्की, धूप घड़ी, कागज बनाने की कला, मुद्रण कला, रेशम आदि की खोज चीन ने ही की है।

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि यूरोपीय संघ के देशों ने प्रदूषण को कम करने के लिए एक बार प्रयोग किए जाने वाले प्लास्टिक की चीजों पर प्रतिबंध लगाने पर सहमति जताई है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कई सामान्य प्लास्टिक वस्तुओं के प्रयोग को रोकना बताया जाता है जिनमें स्ट्रॉ, कॉटन बड्स, कटलरी, गुब्बारे की स्टिक आदि शामिल हैं। इससे 22 अरब यूरो के समतुल्य लागत वाले पर्यावरण के नुकसान को रोकने में मदद मिलेगी। हमें यह पता चला कि इसे प्लास्टिक पाबन्दी लगाने का सबसे बड़ा बिल माना जा रहा है। यह भी बताया जाता है कि यूरोपीय क्षेत्र में वार्षिक 1 लाख 50 हजार टन कचरा इकट्ठा हो जाता है, जिसमें 80 हजार टन समुद्र में चला जाता है। यूरोपीय संघ के इस कदम से विश्व पार्यावरण में भी सुधार आयेगा।

अगली रिपोर्ट में सुना कि ब्रिटेन में छपने वाले नयी मुद्रा पचास पौण्ड के नोटों पर छपने वाली तस्वीर चयन हेतु सूची बनी है, जिसमें अभी तक 192 नाम शामिल हो चुके हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि मुद्रा नोटों पर पूर्व प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर के अलावा इस बार विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया जा सकता है। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

ललिताः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में ईरान की राजधानी तेहरान के दक्षिण में स्थित एक दफ्तर की इमारत में एड्स अनाथों के लिये ईरान के पंद्रह नामचीन चित्रकारों की कलाकृतियां बेच धन जुटाने की क़वायद पर पेश रिपोर्ट प्रेरक लगी। बताया जाता है कि दान हेतु कलाकृतियों की यह बिक्री ईरान की सबसे बड़ी गैरसरकारी एड्स अनाथ लोकोपकार संस्था स्पास्डी द्वारा आयोजित की गयी। यह जान कर अच्छा लगा कि उक्त संगठन द्वारा आयोजित लोकोपकार गतिविधि में ईरान के 150 एड्स परिवार शामिल हुए हैं और यह संगठन न केवल एड्स पीड़ित परिवार की महिलाओं और बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि उन्हें मनोवैज्ञानिक परामर्श भी देता है, ताकि वह समाज में अच्छी तरह घुलमिल सकें।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" के तहत आज भी पत्रों की महफ़िल ख़ूब जमी, जिसे देख कर लगता है कि पत्रों के मामले में एक प्रतिस्पर्धा सी छिड़ गयी है और नये-नये श्रोता पुरानों को पीछे छोड़ने की क़वायद में जुट गये हैं। यह एक स्वस्थ परम्परा है, जिसे देख मन उत्साहित होता है। आख़िर भविष्य तो युवा श्रोता-मित्रों का ही है। कामना है कि यही जोश और ज़ज़्बा क़ायम रहेगा।

कार्यक्रम "टी टाइम" में एक विदेशी बैंक कर्मचारी द्वारा अपनी सर्विस का आख़िरी दिन बड़े ही शान्त ढ़ंग से मनाये जाने का समाचार, जिसके तहत उसने स्पाइडर मैन की पोशाक पहन कर एक कर्मचारी को अपने हाथों से मीठा खिलाया, जानकारी काफी अनूठी लगी, परन्तु आपने उस जगह का नाम नहीं बताया, जहां की यह घटना है।

कार्यक्रम में अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी के राजदीप दासगुप्ता के हवाले से दी गई विज्ञान सम्बन्धी यह जानकारी कि प्राचीनकाल में उल्कापिंडों के अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों को लंबे समय से ज्ञात था कि पृथ्वी और सौरमण्डल की आंतरिक कक्षाओं में स्थित चट्टानों वाले अन्य ग्रहों में विघटन होकर तत्व निकलते रहते हैं, महत्वपूर्ण लगी। वैसे यह विषय खगोलशास्त्र पर आधारित घटनाओं का एक ऐसा अन्तहीन सिलसिला है, जिसका सही निष्कर्ष शायद ही कभी इन्सान के सामने आ सके।

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश सरकार के अध्यक्ष चिज़ाला के बयान, जिसमें उन्होंने चीनी विशेषता वाले समाजवादी विचार के मार्गदर्शन में हुई आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक प्रगति से देश की 70वीं जयंती और तिब्बत में जनवादी रुपांतर की 60वीं जयंती का स्वागत करने की बात कही, पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी।

पता चला कि प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय में 13 प्रतिशत वृद्धि किये जाने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे अवश्य हासिल किया जायेगा। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाएं चलाते समय किसानों और चरवाहों को अधिक रोजगार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जायेगा। उनका यह कहना भी अहम लगा कि आर्थिक विकास के दौरान स्मार्ट शिक्षा, समार्ट अस्पताल और इंटरनेट प्लस आदि उन्नत तकनीकों का भी विस्तार होगा। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दिल्ली से हमारे पुराने श्रोता शाहिद आज़मी ने। लिखते हैं कि "पेइचिंग में मना 70वें भारतीय गणतंत्र दिवस पर विदेशी अतिथियों का सत्कार समारोह" इस विषय पर आप की वेबसाइट पर एक अच्छी रिपोर्ट पढ़ने को मिली। विशेष कर भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री के सम्बोधन की जानकारी अच्छी लगी। चीन और भारत दोनों देश करीब आ रहे हैं। चाहे ब्रिक्स सम्मलेन हो या फिर एससीओ और जी-20 समिट सभी दोनों देशों के नेताओं ने बढ़िया प्रयास किया है।

अब जब मुझे सीआरआई से जुड़े हुए 26 साल हो चुके हैं तो सीआरआई हिंदी सेवा अपनी स्थापना के 60 साल मुकम्मल कर रहा है। आगामी 15 मार्च को सीआरआई हिंदी की साठवीं वर्षगांठ है। मैं ह्रदय से हिंदी सेवा के सभी कर्मियों को जोकि सेवारत हैं या फिर रिटायर हो चुके हैं बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ। इसके साथ ही उन सभी श्रोताओं को भी तहे दिल से मुबारकबाद जिन्होंने सीआरआई हिंदी के सफर में साथी की भूमिका निभाई है। इस लम्बे सफर में सीआरआई ने दो देशों के बीच एक सेतु का काम किया है। हज़ारों लाखों श्रोताओं तक चीन की जानकारी पहुंचाई है। लोगों के मन में पनप रही तरह तरह की भ्रांतियों को न सिर्फ दूर किया है बल्कि अपने क़रीब भी लाने का प्रयास किया है। विशेष कर चीन की संस्कृति, इतिहास, नए चीन के निर्माण, और चीन के तिब्बत के बारे में बेशक़ीमती जानकारी हमेशा हम तक पहुंचाई गई है। सीआरआई हिंदी की उपलब्धियों और उस की सेवा पर बात करूँ तो एक पुस्तक लिखनी पड़ सकती है। संक्षेप में कहूं तो सीआरआई की हिंदी सेवा गागर में सागर के सामान है। सीआरआई को सुन सुन कर आज मैं यहाँ दिल्ली में आल इंडिया रेडियो में बतौर संवाददाता/प्रस्तुतकर्ता पिछले 11 सालों से अधिक समय से काम कर रहा हूँ, इस बीच 600 से ज़्यादा क्षेत्रीय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेवा के लिए कार्यक्रम बनाये, रिपोर्टिंग की तथा प्रस्तुत किये हैं। सीआरआई हिंदी सेवा की 60वीं वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर कामना करता हूँ कि यह सफर लगातार जारी रहेगा और विश्व के इन दो महान देशों के बीच पुल का काम जारी रहेगा। मेरा सीआरआई हिंदी के साथ 1993 से जो सिलसिला है, वह हिंदी सेवा के साथ आगे भी बरकरार रहेगा, इसकी कामना करता हूं। आप सभी सीआरआई कर्मियों का बहुत बहुत शुक्रिया जिन्होंने मुझे इतना प्यार और सम्मान दिया।

शाहिद आज़मी जी, आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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