20190116

2019-01-16 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है छत्तीसगढ़, भिलाई, दुर्ग से आनंद मोहन बैन ने। लिखते हैं कि बाल महिला स्पेशल कार्यक्रम सुना। मैं शिनच्यांग वापस लौटकर योगदान दूंगी। मैडिना के बारे में साल 2000 के गर्मी के दिनों में पेइचिंग से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिमी चीन के काशी शहर में स्थित काशी नंबर छह मिडिल स्कूल में मेहनत से पढ़ाई की। वह पढ़ाई के लिए लूहो स्कूल पहुंची। स्कूल में जिस ढंग से स्वागत हुआ उससे नए छात्रा को बहुत अच्छा लगा। चार साल पेइचिंग में रहकर पढ़ाई कर मेडिना फिर शिनच्यांग वापस आई। उनका यह विचार मुझे बहुत अच्छा लगा कि हर इंसान को अपने समाज के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए।

टी टाइम कार्यक्रम बहुत रोचक होता है। नोरिल्स्क जो कि रूस के साइबेरिया में पड़ता है। इस शहर को दुनिया का सबसे ठंडा शहर माना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठंड के दिनों में यहां का न्यूनतम तापमान -61 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, जबकि यहां का औसत तापमान भी माइनस 10 डिग्री सेल्सियस रहता है। वहां दो महीने तक अँधेरा रहता है। हालांकि यह जानकारी असम्पूर्ण लगी।

चीन का तिब्बत कार्यक्रम सुना। तिब्बत में कालीन बनाने की कला पर विस्तृत जानकारी हासिल हुई। कालीन, गलीचा, कंबल जैसे सामग्री का विकास प्राचीन कल से ही मौजूद है। 110 साल पहले के वित्तिचित्र आज भी मौजूद है। नेपाल से भी इसका सम्बन्ध है। भारत में हम तिब्बती लोगों को गरम कपड़ों के हस्तनिर्मित शाल के तौर पर जानते हैं। यह जानकर अच्छा लगा कि अब यह सामग्री विदेशों को निर्यात हो रही है। सुन्दर कार्यक्रम के लिए धन्यवाद।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम टी टाइम सुनकर सारे दिन की थकान और टेंशन दूर हो जाती है। यह कार्यक्रम पूरे परिवार के साथ बैठकर सुनते हैं और पसंद भी आता है। इस बार के कार्यक्रम में आई टी कंपनी के प्रबंध निदेशक विश्व राज शेट्टी से की गई चर्चा सुनवाई गई, पसंद आयी।

जानकारियों के क्रम में रूस के शहर नोरिलसक में दो महीने तक अँधेरा, अमेरिका में ग्रीन कार्ड वाली जानकारी और स्विट्जरलैंड में लाइव शो के दौरान करोड़ पति घोषित करना और हाथ के हाथ निर्णय वापिस लेना, ये सभी जानकारियां सुनकर दिल खुश हुआ और जानकारियों में इजाफा भी हुआ। बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आभार।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि आपका पत्र मिला कार्यक्रम में कुल 12 श्रोता बंधुओं के ईमेल और पत्र शामिल किये गये, जिन्हें सुनकर हमारा दिल खुश हुआ। कार्यक्रम में अनिल पांडेय जी ने हमारा पत्र शामिल किया, इसके लिए शुक्रिया। अनिल जी जैसा कि हमने आपसे कहा था कि हम हर बार अपने राज्य के बारे में कुछ न कुछ जानकारी देंगे, तो आज हम इस तरह की जानकारी आप तक पहुंचा रहे हैं।

(1) अमरकंटक - जबलपुर से 445 किमी. दूर जिले की पुष्पराजगढ़ तहसील के दक्षिण पूर्वी भाग में मेकल की पहाड़ियों में स्थित अमरकंटक भारत के पवित्र स्थलों में से एक है। यहां से नर्मदा और सोन नदी निकलती है। 24 नवीन और प्राचीन मंदिर है। प्राचीन मंदिरों को 10वीं और 11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के शासकों ने बनाया था। नर्मदा कुंड, नर्मदा माई का मंदिर, कपिलधारा प्रपात 6 किमी. तेज प्रवाह बनकर गिरना, दुग्धधारा प्रपात, यहां के दृश्यों को मनोरम बनाते हैं।

(2) चित्रकूट - जनश्रुतियों के मुताबिक ब्रह्मा, विष्णु, और महेश ने यही पर बाल - अवतार लिया। वनवास के दौरान भगवान राम यही ठहरे थे और यही से भरत राम की चरण पादुका लेकर लौटे थे। अकबर के नवरत्नों में से एक अब्दुल रहीम खानखाना की यह ऐतिहासिक भूमि है। इसके आसपास कामदगिरी, अनुसूया आश्रम, भरत कूट और हनुमान धारा आदि दर्शनीय स्थल है।

हम एक बार पुनः कार्यक्रम आपका पत्र मिला की सफल प्रस्तुति के लिए दिल से कोटि कोटि धन्यवाद और अनंत बधाईयां देते हैं।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत हाल ही में चीन की सहायता से काडमांडू में सम्पन्न इनर रिंग रोड़ जीर्णोद्धार परियोजना कार्य के पहले भाग और उस पर मिली लोगों की प्रशंसा पर पेश रिपोर्ट सुन कर एहसास हुआ कि चीन अपने पड़ोसी देश की कितनी मदद कर रहा है। यह परियोजना नेपाल के लिये कितनी महत्वपूर्ण है, यह दस वर्षीय नेपाली छात्रा खुशबू शाह और रिटार्यड वकील बहादुर बुधा छेत्री द्वारा ज़ाहिर खुशी से जाना जा सकता है।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" में पहली जनवरी से चीन द्वारा कोई सात सौ वस्तुओं पर घटायी गयी टैरिफ सम्बन्धी समाचार अहम लगा।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" में 'चीन की अन्तरिक्ष में एक और लम्बी छलांग' शीर्षक रिपोर्ट सुन कर एहसास हुआ कि अब कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा है, जहां चीन की पैठ न हो। अब चीन ने अंतरिक्ष की महाशक्ति बनना ठान ही लिया है, तो उसे कोई बाधित नहीं कर सकता। चीन द्वारा प्रक्षेपित छांग-अ नम्बर 4 डिटेक्टर का चाँद की विमुख सतह पर उतरना और वहां की पहली तस्वीर भेजना निश्चित तौर पर एक बड़ी और असाधारण उपलब्धि है, क्यों कि चंद्रमा का यह हिस्सा अब तक पूरी तरह अनदेखा था। चीन के वर्तमान अंतरिक्ष अभियान को देखते हुये यह तय लगता है कि साल 2022 तक अंतरिक्ष में वह अपना स्थायी केन्द्र अवश्य स्थापित कर लेगा। अब क्यों कि इस क्षेत्र में चीन और रूस के बीच पूरा सहयोग है, इसलिये मेरी राय में इससे अंतरिक्ष में अमरीका का दबदबा समाप्त होने की बात माना जा सकता है।

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" में मोजाम्बिक और कांगो के शरणार्थी शिविरों पर होने वाले खर्च की जानकारी के अलावा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में से एक होने के नाते चीन द्वारा शरणार्थियों के लिये दिये जाने वाले अंशदान की चर्चा अच्छी लगी।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह से ली गयी भेंटवार्ता का दूसरा भाग अच्छा लगा, जिसमें उन्होंने ख़ासकर, अफ़्रीक़ी देशों के साथ चीनी सहयोग पर अपनी राय व्यक्त की। यह बात बिलकुल सही लगी कि चीन द्वारा अफ़्रीका के बुनियादी ढ़ांचे में सहयोग से वहां की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार आया है, जिससे वहां के लोग चीन को मित्रवत समझने लगे हैं। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला हमेशा की भांति इस बार भी उत्सुकता के साथ सुना, जिसे प्रस्तुत किया हमारे चहेते अनिल जी और ललिता जी ने। सबसे पहले अंतरराष्ट्रीय श्रोता मंच पर पदार्पण करने वाले मित्र विनोद कुमार जी को बधाई प्रेषित करता हूं। आशा करता हूं कि भविष्य में वह अंतरराष्ट्रीय प्रसारण से लाभान्वित होते रहेंगे और सी आर आई से पत्राचार जारी रखेंगे। बद्री प्रसाद जी एक वरिष्ठ और अनुभवी श्रोता हैं और इस बार कुछ अधिक क्रोधित नज़र आए। हालांकि कुछ बातें उन्होंने ऐसी कही जिसका मैं समर्थन करता हूं। मगर चंद एक कटाक्षपूर्ण बिंदु मेरे विचार से अनुचित थे। खैर यह उनकी निजी राय थी, जिसको उन्होंने दिल खोलकर प्रेषित किया। आशा करता हूं कि भविष्य में उनके विचार जानने का अवसर यूंही मिलता रहेगा।

पुनः अपने पसंदीदा कार्यक्रम टी टाइम का आनंद लेने के बाद आपकी सेवा में उपस्तिथ हूँ। यहाँ का मौसम बहुत ठंडा हो चूका है और सर्दी के इस मौसम में कॉफी की चस्कियों के साथ कार्यक्रम का आनंद ले रहा हूँ। रोचक जानकारी नूरलिस के अंधरे को लेकर अचंभित करने वाली थी। हमको याद है कि करीब 27 साल पहले इसी जनवरी महीने में हमारे गांव में 14 दिन तक सूर्य नहीं निकला था, यानि घना कोहरा छाया रहा था। हालत इतनी दयनीय होगी कि लफ़्ज़ों में ब्यान करना मुश्किल है। अब अगर 2 महीने तक सूर्य न निकले तो वहां की दशा क्या होगी, इसका अंदाजा हम लगा सकते हैं।

ललिताः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि श्रोताओं के पसन्दीदा साप्ताहिक कार्यक्रम "आप का पत्र मिला" में सबसे पहले मेरे ही जिला दरभंगा बिहार के नये श्रोता बिनोद साहु का पत्र पढ़ा गया। उसके बाद क्रमशः गुरमित सिंह, दीपक कुमार दास, तिलक राज अरोड़ा, दुर्गेश नागनपुरे, प्रियंजीत कुमार घोषाल, सादिक़ आजमी, पृथ्वी राज पुरकायस्त, बद्री प्रसाद वर्मा अंजान, मॉनिटर भाई सुरेश अग्रवाल, मेरा पत्र और माधव चन्द्र सागौड़ आदि के कुल 12 पत्रों को पढ़ा गया। आज पत्रों की संख्या संतोष जनक रहा। हम लोग कामना करते हैं कि इसी तरह सी आर आई के श्रोताओं की संख्या के साथ ही रेडियो सुनकर पत्र लिखने वाले श्रोताओं की संख्या भी बढ़ती रहे।

साप्ताहिक कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में सुना कि तिब्बती पठार के उत्तर में स्थित गलमू क्षेत्र में पुरातत्व वैज्ञानिकों की खोज से यह पता चला कि हजारों वर्ष पहले ही यहाँ के लोगों ने गलीचा बनाना शुरू किया था। वहीं सातवीं शताब्दी में थांग राजवंश काल से ही चीन में कालीन बुनाई करने का उद्योग प्रचलित होने लगा था। उस समय तिब्बती पठार और चीन के भीतरी इलाकों के बीच सक्रिय आदान प्रदान का कालीन भी एक भाग बना था। इस रिपोर्ट से तिब्बत में कालीन उद्योग के ऐतिहासिक कहानी स्पष्ट रूप से समझ में आ गयी। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है ढोली सकरा मुजफ्फरपुर बिहार से दीपक कुमार दास ने। लिखते हैं

20190116

ललिताः लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि "आर्थिक जगत" प्रोग्राम में सुना कि "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव से पुर्तगाल को विकास का मौका मिला है। 5 दिसंबर 2018 को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और पुर्तगाल के प्रधानमंत्री एंटोनियो कोस्टा ने द्विपक्षीय सहयोगी दस्तावेज़ों में हस्ताक्षर किए। "एक पट्टी एक मार्ग" निर्माण को आगे बढ़ाने में चीन और पुर्तगाल बड़ी कोशिश कर रहे हैं।

कार्यक्रम "विश्व का आईना" में जलवायु परिवर्तन को निपटारा करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा पोस्ट-कार्ड बनाया गया स्विजरलैंड में, जिसका कुल क्षेत्रफल 25 वर्ग किलोमीटर है और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड में नाम दर्ज किया गया है, जिसमें से 29 पोस्टकार्ड चीन के हांगकांग से आए हैं। युवा लोग जलवायु परिवर्तन को सुधार का कर्तव्य निभाते हैं। हर एक कार्ड में अपना अपना वचन लिखा है। बुनियादी संरचना को सुनिश्चित करना और एक सुंदर पृथ्वी का एक सुंदर नागरिक हम होंगे।

अनिलः माधव चन्द्र सागौर जी ने आगे लिखा है कि "पश्चिम बंगाल के पवित्र तीर्थ भूमि सागर द्वीप गंगासागर" है। सब तीर्थ बार बार गंगासागर एक बार यह कथन रास्ते के दुर्गमता के लिए नहीं कहा जाता। तमाम तीर्थों में बार-बार स्नान कर जो पुण्य अर्जित होता है गंगा सागर में एक बार स्नान करने से ही वह पूर्ण अर्जित हो जाता है। प्रति वर्ष पौष मकर संक्रांति में मेला और स्नान पर्व होता है। श्रद्धालु देश के चारों तरफ से आते हैं विदेश से भी आते हैं। कोलकाता यानी सियालदह स्टेशन से 108 किलोमीटर दूर ट्रेन द्वारा नामखाना स्टेशन जाकर वहां से स्टीमार द्वारा 16 किलोमीटर पानी में यात्रा तय करने के बाद चेमागुड़ी पहुंचता हैं। वहां से सड़क मार्ग से फिर 25 किलोमीटर के बाद पहुंचते हैं कपिल मुनि मंदिर। वर्तमान में गंगा सागर एक 1.22 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है। प्रथम गंगा सागर मंदिर की स्थापना 437 ई.सा. पूर्व सत्यभामा के द्वारा मंदिर प्रतिष्ठा के तौर पर हुई। 19 फरवरी 1938 समाज दर्पण पत्रिका के मुताबिक उसी मेला में 2 लाख श्रद्धालु पहुंचे थे। सागर द्वीप गंगासागर के लिए पृथ्वी मशहूर है। महर्षि कपिल जिनका जन्म राजस्थान के कोलायत में हुआ था उन्होंने इसी जगह में बैठकर "संख्या दर्शन" की रचना की है। राजा यदूराम साधु संतों को 10 कट्ठा जमीन दान यहीं पर किए थे। असली कपिल देव की मूर्ति सागर में विलीन हो गयी है या डूब कियी है, ऐसा लगता है। अंतिम छठा मंदिर 1974 में तैयार हुआ। इस मंदिर में श्री कपिल देव, सगर राजा, भगीरथ, जक्षाश्व, इंद्र और अन्य विशालाक्षी की मूर्तियां मौजूद हैं। रामायण के पहले यह तीर्थ की उत्पत्ति मानी जाती है। महाकाव्य रामायण में गंगासागर तीर्थ का उल्लेख मिलता है। महाभारत में भी इसका उल्लेख प्रमुख तौर पर होता है। मरीचि का पुत्र कश्यप था और कश्यप का पुत्र मनु, मनु से ईक्खाकु बंश का उद्भव हुआ। इस वंश की राजधानी थी अयोध्या। इस वंश का 13वीं राजा थे भरत, जिनका नाम से भारत या भारतवर्ष हुआ है।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories