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2019-01-09 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है दरभंगा बिहार से बिनोद साहु ने, जो पहली बार हमें पत्र भेज रहे हैं। लिखते हैं कि मैं अंतर्राष्ट्रीय रेडियो का एक बिल्कुल नया श्रोता हूँ। वैसे मैं स्थानीय रेडियो का बहुत पुराना और शौकिया श्रोता हूँ। नव वर्ष पार्टी में पिकनिक के अंतिम चरण में शंकर प्रसाद शंभू जी ने होम थियेटर पर चाइना रेडियो इंटरनेशनल के कुछ चुने हुए प्रोग्राम सुनाये और उपस्थित लोगों से पूछा कि कैसा? आधे लोग तो नजर अंदाज कर दिया और बोले आजकल टीवी और मोबाइल के दौर में कौन रेडियो सुनता है? हाँ कुछ लोग आपके प्रोग्राम पसंद आए। शनिवार को आपकी पसन्द सुनकर मैं गदगद हो गया कि भला विदेश से भी हमारे हिन्दुस्तानी भाईयों के फरमाईस पर हिन्दी फिल्मी गीत सुनाये जाते हैं। इसके अलावा संडे की मस्ती भी मस्त करने वाला प्रोग्राम है। चीनी बॉक्स ऑफिस की विस्तृत रिपोर्ट और चीनी फिल्म के प्रोमो पसन्द आये। अजीबो गरीब बात और प्रेरक कहानी भी लाजबाब लगी। सिडनी के नव वर्ष की आतिशबाजी की दुनियाँ भर में खिल्ली उड़ाई और जोक्स सुनकर हँसी आयी।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि टी टाइम प्रोग्राम में चीन में सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ पर आनंद जी से की गई बातचीत पसंद आई। आगे जानकारियों में बताया गया कि बालीवुड के कॉमेडी के बादशाह कादर ख़ान अब हमारे बीच नहीं रहे, जिनका 31 दिसंबर की शाम को कनाडा के एक अस्पताल में 81 साल की उम्र में निधन हो गया। यह ख़बर सुनकर दुःख हुआ। इसके अलावा प्रोग्राम में पेश की गई बाकी जानकारी भी अच्छी लगी।

अनिलः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है ढोली बिहार से दीपक कुमार दास ने। लिखते हैं कि दरभंगा बिहार के श्रोता भाई शंकर प्रसाद शंभू मुझसे मिलने मेरे घर आये और उन्होंने सी आर आई के पुराने श्रोता जसीम अहमद जो मेरे ही गांव के हैं, उनसे मिलाने हेतु आग्रह किया। मैंने शंभू जी को जसीम जी से मिलाया। तीनों आदमी एक जगह बैठकर बहुत देर तक बातचीत किये। सी आर आई के साथ जुड़ी पुरानी यादों को तरो ताजा करते हुए रेडियो के दीवानेपन को एक बार फिर जागृत किया। इसका श्रेय शंकर प्रसाद शंभू जी का है। मैं माधव चन्द्र सागौर जी का भी शुक्रगुजार हूँ, जो मुझे फोन पर ही सी आर आई को पत्र लिखने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। इन दोनों श्रोताओं की प्रेरणा से ही सी आर आई से पुनः जुड़ा हूँ। जसीम अहमद ने भी वचन दिया है कि अब वे भी दुबारा सी आर आई से मैत्रीपूर्ण व्यवहार बरकरार रखते हुए पत्राचार शुरू करेंगे।

शुक्रवार को दक्षिण एशिया फोकस में प्रोफेसर स्वर्ण सिंह से बातचीत करने का अंदाज अच्छा लगा। आपकी पसन्द में हिन्दी फिल्मी गीत सुनाने के साथ साथ रोचक और ज्ञानवर्द्धक जानकारी कार्यक्रम में नए पंख लगा देते हैं। ज्ञान की आकाश गंगा में उड़ने वाला कार्यक्रम में बाजारू आईस्क्रीम से सावधान रहने और रक्त की जाँच से उम्र की पता लगने की बात काबिले तारीफ थी।

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ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना कार्यक्रम में नदी के बारे में और अमेरिका में विद्यालयों में गिरावट वाली जानकारी सुनी।

विश्व का आईना कार्यक्रम सुनने के पशचात कार्यक्रम आप का पत्र मिला में सभी श्रोताओं के पत्र उच्च कोटि के लगे। कार्यक्रम में अपना पत्र चाइना रेडियो से सुनकर बहुत खुशी प्राप्त होती है। सुंदर कार्यक्रम मधुर आवाज में सुनवाने के लिये आपका दिल से शुक्रिया।

अनिलः दोस्तों अगला पत्र भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम टी टाइम में आनंद बोगा जी से जो चर्चा की गई वह बहुत पसंद आई।

कार्यक्रम आपका पत्र मिला में श्रोता बंधुओं के ईमेल और पत्र सुनकर मन प्रफुल्लित हो गया। कार्यक्रम में आदरणीय भाई अनिल पांडेय जी ने हमारा पत्र भी शामिल किया जिसे सुनकर हमें बेहद खुशी हुई। अनिल पांडेय जी जैसा कि हमने आपसे कहा था कि हम आपको और सभी सुधी श्रोता बंधुओं को हमारे राज्य मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में समय समय पर रोचक और महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराते रहेंगे तो हम आज आपको और सभी श्रोता बंधुओ को मध्यप्रदेश के दो प्रमुख शहरों के बारे में जानकारी देना चाहेंगे। (1) भोपाल :- यह मध्यप्रदेश की ह्रदय स्थली और राजधानी है। इसका पुराना नाम भोजपाल था। इस नगर का निर्माण परमार वंशी राजा भोज ने 10वीं सदी में करवाया था। गोंड वंश के पराभव के बाद इस नगर पर सरदार दोस्त मोहम्मद खां का शासन रहा। दो प्रख्यात झीलें, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड कारखाना, आकर्षक पहाङी से घिरा यह सुन्दर नगर है। नया भोपाल (तात्या टोपे नगर) श्यामला हिल्स, अथवा लक्ष्मीनारायण गिरी (बिङला मंदिर) से रात्रि में शहर का दृश्य मनोरम लगता है।

(2) सांची :- झांसी - इटारसी रेलमार्ग पर यह एक छोटा सा स्टेशन है। यह भोपाल से 46 किमी. दूर रायसेन जिले में स्थित है। यह विख्यात बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है। सांची के तीन स्तूप अत्यंत सुंदर और प्राचीन है। यहां का बड़ा स्तूप 36.5 मीटर व्यास का है और इसकी ऊँचाई 16.4 मीटर है। इस स्तूप के तोरण द्वार पर भगवान बुद्ध के जीवन की झलकियां उत्कीर्ण है। इसके अलावा अन्य दो स्तूपों का निर्माण, जो अपेक्षाकृत नये है, सम्राट अशोक ने ईसा से 3 शताब्दी पहले करवाया था। एकमात्र सांची ऐसा स्थल है जहां बौद्ध कालीन शिल्पकला के सारे नमूने विद्यमान हैं। यहां के स्तूप, चैत्य और बिहार सभी बौद्धकला के सर्वोत्तम नमूने कहा जा सकते हैं।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि पिछले टी-टाइम प्रोग्राम में मशहूर एक्टर और लेखक कादर ख़ान के निधन के बारे में जानकर दुःख हुआ। जबकि दिल्ली के लोधी गार्डन में पेड़ों पर क्यू आर कोड लगाए जाने का समाचार अच्छा लगा। इसके साथ ही प्रोग्राम में पेश अन्य जानकारियां और जोक्स भी अच्छे लगे। वहीं विश्व का आईना कार्यक्रम में फैक्टरी से निकले कचरे से होने वाले प्रदूषण के बारे में सुना। वहीं दक्षिण एशिया फोकस में जेएनयू के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह के साथ चर्चा अच्छी लगी।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला के शुरुआत में सुरेश जी के पत्र से समां और भी जोशीला हुआ। राजेश कुमार जी की वापसी हमारे लिए प्रेरणादायक है। हम उम्मीद करते हैं भविष्य में उनके विचारों को सुनने का अवसर मिलता रहेगा। दीपक कुमार दास जी के पत्र को देखकर अपने पुराने दिन याद आ जाते हैं। जब हम भी क़लम से पत्र लिख कर डाक द्वारा आपको दिल्ली के पते पर भेजा करते थे। ख़ुशी की बात है कि उन्होंने इस परम्परा को क़ायम रखा है। मेरे विचार से वे दुगना आनंद ले रहे हैं एक तो हस्तलिखित पत्र उस पर से उसको ईमेल उनको इस दुगनी ख़ुशी की बधाई देता हूँ। देखा जाये तो सच में यह बहुत लाभकारी है। आपकी हैंड राइटिंग कभी खराब नहीं होगी।

वहीं 2019 के आगमन की पूर्व संध्या पर चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग जी के वक़्तव्य की बात करें तो इसमें कोइ संदेह नहीं की साल 2018 में, उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास को आगे बढ़ाया। नई और पुरानी गतिज ऊर्जा के बीच परिवर्तन में गति दी और उचित आर्थिक प्रचालन को बनाए रखा। उनकी कार्यप्रणाली वाक़ई उच्च कोटि की रही है जिसके लिए वह बधाई के पात्र हैं जिस तरह उन्होंने समस्त देश वाशियों के साथ विश्व के सभी लोगों को नव वर्ष की बधाई प्रेषित की। उससे इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वह किस क़दर परस्पर संबंध स्थापित करने के इच्छुक हैं। उनके ब्यान पर की वर्ष 2019 में हम धूमधाम से चीन लोक गणराज्य की स्थापना की 70वीं जयंती मनाएंगे। हम भी उतहित हैं और उन्हें एडवांस में बधाई प्रेषित हारते हैं।

ललिताः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है जोरहट असम से पृथ्वीराज पुरकायस्थ ने। लिखते हैं कि पिछले दक्षिण एशिया फोकस कार्यक्रम में चीन के रूपांतर और खुलेपन के बारे में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अध्यापक स्वर्ण सिंह के साथ साक्षात्कार ज्ञानवर्धक लगा।

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है गोरखपुर उत्तर प्रदेश से ब्रदी प्रसाद वर्मा अंजान ने। लिखते हैं कि

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ललिताः लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत वर्ष 2018 में चीन में गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम अन्तिम चरण में पहुँचने सम्बंधी रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। वास्तव में, इतनी अल्पावधि में सत्तर करोड़ लोगों को गरीबी से मुक्ति दिलाना और आगामी दो वर्षों में गरीबी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य कोई साधरण कार्य नहीं था, जिसे चीन ने कर दिखाया। वास्तव में, गरीबी उन्मूलन में चीनी अनुभव सीखने लायक हैं।

वहीं 1 जनवरी को नव-वर्ष 2019 के आगमन पर चाइना मीडिया ग्रुप यानी सीएमजी के महानिदेशक शन हाईश्योंग द्वारा रेडियो और इंटरनेट के माध्यम से सीएमजी के सभी विदेशी दर्शकों और श्रोताओं को दिया गया नए साल का बधाई संदेश अच्छा लगा। उन्होंने सीएमजी के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुये कहा कि विश्व को चीन की रिपोर्ट देना, चीन को विश्व की रिपोर्ट देना और विभिन्न देशों की जनता के बीच समझ और मैत्री को आगे बढ़ाना सीएमजी का अपरिवर्तनीय उद्देश्य ही नहीं, मिशन भी है। हमें उनका यह कहना बहुत अच्छा लगा कि 2019 चीन लोक-गणराज्य स्थापना की 70वीं वर्षगांठ है। इस मौक़े पर सीएमजी व्यापक दर्शकों और श्रोताओं को एक सच्चे, त्रि-आयामी और व्यापक नये युग का चीन दिखायेगी।

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" में मेड इन चाइना डॉक्टरों की भरमार शीर्षक जानकारी वास्तविक लगी। यह सही है कि भारत के मुक़ाबले मेडिकल और इन्जीनियर पढ़ाई का खर्च कहीं कम है और दाखिला भी आसान है। अब तो चीन रूस और यूक्रेन से भी आगे निकल गया है।

साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत चीन की सबसे लम्बी यांगत्सी नदी आर्थिक क्षेत्र में प्रदूषण की भारी समस्या से निपटने सरकार उठाये जा रहे सख्त कदमों की जानकारी अच्छी लगी। यह सही है कि द्रुत आर्थिक विकास के चलते पर्यावरण और पारिस्थितिकी को नुकसान होता है, परन्तु प्रकृति और विकास के बीच संतुलन कायम करना बहुत कठिन कार्य है।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में सुना कि 30 वर्षीय वू शूछिंग ने अपने पिता जी की सहायता से मेइशिन ग्रुप का नेतृत्व करके चीनी नागरिक उड्डयन अखिल ब्यूरो के साथ चीन में पहले संयुक्त चीनी-विदेशी पूंजी वाले पेइचिंग विमानन भोजन लिमिटेड कंपनी नाम का उद्यम की स्थापना की। गत 40 वर्षों में वू शूछिंग बारी बारी से हांगकांग और भीतरी चीन के बीच आती जाती रही हैं। उन्होंने सुधार और खुलेपन की प्रक्रिया की पुष्टि की और अर्थव्यवस्था व समाज का बड़ा बदलाव महसूस किया।

कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में बताया कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शाननान क्षेत्र में आर्थिक विकास 40 वर्ष पहले की तुलना में लगभग अस्सी गुणा बढ़ चुका है। ऊर्जा, यातायात, जल संरक्षण और सूचना आदि बुनियादी उपकरणों के निर्माण में भी उल्लेखनीय प्रगतियां प्राप्त हो गयी है। इस प्रदेश की 7 काउंटियों को गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार हो गया है। अच्छी रिपोर्ट पेश करने के लिए आपका धन्यवाद।

अनिलः अब पेश है कार्यक्रम का अंतिम पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि दक्षिण एशिया फोकस प्रोग्राम में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी के अन्तर्राष्ट्रीय अध्ययन के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह जी से टेलीफोन भेटवाता का पहला भाग सुना, जिसमें चीन के सुधार और खुलेपन के बाद के 40वीं साल गिरा और बदलाव में दुनिया के अलग-अलग आर्थिक शक्तियों के सकारात्मक प्रभाव देखने मिल रही है। साम्यवादी और मार्क्सवादी देश चीन तरक्की नहीं कर सकता है यह भ्रांति दूर की। और चीन पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है। चीन की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव एवं सोच पर विचार विमर्श किया गया जो हमें पसंद आई।

आपकी पसन्द प्रोग्राम को हमने सुना। जिसमें श्रोताओं की फरमाइश पर सुनवाये गये फिल्मी गीत इस प्रकार रहे - दिल से मिले दिल, टूटे खिलौने, खट्टा- मीठा, इम्तिहान, छोटी सी बात तथा बदलते रिश्ते के छ: सदाबहार गीतों के साथ दी गयी तमाम नई जानकारी रोचक, आश्चर्यजनक और ज्ञानवर्धक रही।

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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