20181128

2018-11-28 21:00:00
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पंकजः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को पंकज का नमस्कार।

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

पंकजः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। पहला पत्र हमें भेजा है पश्चिम चम्पारण, बिहार से राम बदन राव भैरोगंजी ने। लिखते हैं कि वैसे तो मैं बहुत पुराना श्रोता हूँ किन्तु व्यस्तता के कारण लगभग 5-6 सालों से पत्राचार बन्द कर दिया था। आज दिनांक 23 नवंबर को सी आर आई के नए मोनिटर शंकर प्रसाद शंभू दिन के 11 बजे मेरे निकटतम रेलवे स्टेशन भैरोगंज पहुँचे। मैं काफी प्रसन्नता से उनको अगुआई करके अपने घर लाया। मेरे घर इससे पहले भी कुशीनगर उत्तर प्रदेश के श्रोता भाई पारस नाथ कुशवाहा, पूर्वी चम्पारण के श्रोता भाई राम बिलाश प्रसाद और रक्सौल के श्रोता भाई बिमलेन्दु कुमार विकल भी आये थे। रेडियो से और रेडियो श्रोता मित्रों से अभी भी उतना ही प्रेम है जितना पहले था। शंभु जी ने मुझे सी आर आई के वाट्सएप्प नम्बर, ईमेल, एप्प, फ्रिकक्वेंसी और कार्यक्रम की सूची देते हुए रेडियो से पुनः पत्राचार करने के लिये प्रेरित किया। मैंने भी उन्हें श्रोता वाटिका पत्रिका और कुछ अन्य रेडियो सामग्री से सम्मानित किया।

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम टी टाइम में इस बार जो जानकारियां दी गयीं, पसंद आयीं। भारत में मलेरिया में गिरावट, फेसबुक के सी ई ओ जुकरबर्ग के बारे में और सलमान की फिल्म भारत के बारे में जो जानकारी दी गयी, बहुत पसंद आयी। यह सभी जानकारी आप के रेडियो स्टेशन से ही प्राप्त हुई। कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रिया सुनकर अच्छा लगता है।

आप का पत्र मिला कार्यक्रम की जितनी प्रंशसा की जाय उतना ही कम है। सभी श्रोताओं के पत्र सुनकर दिल खुश होता है। उत्तर भी कार्यक्रम में संतोषजनक दिए जाते हैं। कार्यक्रम में हमारा पत्र भी शामिल किया गया। सुंदर प्रस्तुति और कार्यक्रम में हमारे पत्र को शामिल करने के लिए दिल से शुक्रिया प्रकट करते हैं।

पंकजः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि आप के कार्यक्रमों को सुनने के साथ साथ आपकी वेबसाइट पर लगातार प्रतिदिन विज़िट करते रहते हैं और ताज़ा घटनाक्रम पर प्रकाशित आपके लेखों द्वारा जानकारी प्राप्त करने का क्रम भी जारी है। वर्तमान में एक दिलचस्प लेख पर नज़र पड़ी, विषय था भारत और चीन के मध्य सीमा विवाद को लेकर आयोजित 21वीं वार्ता।

सर्वप्रथम मैं हृदय भाव से इस आयोजन के सफल होने की कामना करता हूं और आशा करता हूं कि इस वार्ता से दोनों देशों के मध्य सीमा विवाद को लेकर जो भी अड़चनें हैं, उसे सुलझा लिया जाएगा जो समय की मांग भी है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी भाईचारे और विकास के नए द्वार खोलेगा ऐसा मेरा विश्वास है। आशा करता हूं कि इस आयोजित वार्ता के पल पल बदलते समीकरण से इसी प्रकार अवगत होने का अवसर प्रदान करेगा।

टी टाइम कार्यक्रम का शुभारम्भ विश्व पुरुष दिवस की रोचक जानकारी के साथ हुआ जो इसके इतिहास और मूल उद्देश्य को उजागर कर रहा था। इसमें कोइ सन्देह नहीं कि जब से इस धरती की उतपत्ति हुई है तब से परुषों का योगदान सर्वोपरि रहा है। कोइ भी क्षेत्र हो सबमें परुषों ने इतिहास अर्जित किया है। उनके योगदान की चर्चा लिखित रूप से की जाये तो पत्र पुस्तक का रूप ले लेगा। बस कहना चाहूंगा इस समय को याद कर जानकारी देने हेतु धन्यवाद।

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खंडवा मध्यप्रदेश से दुर्गेश नागनपुरे, कुमारी भावना, बिंदु, गोलू, कुसुमबाई और राधेश्याम नागनपुरे ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला में कुल 11 श्रोताओं के पत्र शामिल किये गये। आपने श्रोताओं के पत्रों के जवाब बहुत ही अच्छे ढंग से दिये जो कि काबिल ए तारीफ़ था।

कार्यक्रम टी टाइम में भारतीय बिज़नेसमैन आशीष बाधवानी जी के साथ जो चर्चा की गई, रोचक और लाभदायक लगी। कार्यक्रम में तीनों जानकारियों के अलावा बद्री प्रसाद वर्मा जी द्वारा भेजे गये जोक्स भी अच्छे लगे। इसके अलावा श्रोताओं की टिप्पणी सुनकर मन प्रफुल्लित हो गया।

पंकजः अगला पत्र भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि अतुल्य चीन प्रोग्राम में चीन और म्यांमार ने क्यौक फ्यू बंदरगाह के निर्माण पर समझौता किया। चीन और म्यांमार के बीच म्यांमार की राजधानी नेप्पीडाओ में क्यौक फ्यू विशेष आर्थिक क्षेत्र के डीप वॉर्टर बंदरगाह निर्माण समझौता एक महत्वपूर्ण कदम है। चीन-म्यांमार आर्थिक विकास हो रहा है और सामाजिक विकास के लिए प्रेरणा है। क्यौक फ्यू आर्थिक क्षेत्र की पी.पी.पी परियोजना म्यांमार के विकास का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। क्यौक फ्यू विशेष आर्थिक क्षेत्र म्यांमार के तीन बड़े आर्थिक क्षेत्रों में से एक है। क्यौक फ्यू विशेष आर्थिक क्षेत्र की डीप वॉर्टर परियोजना दोनों पक्षों के बीच संपन्न हुई पहली बड़ी आर्थिक सहयोग परियोजना है। इसके रणनीतिक महत्व चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे का महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो साथ साथ एक पट्टी एक मार्ग निर्माण के लिए प्रेरणा शक्ति हैं।

नमस्कार चाइना प्रोग्राम में पेइचिंग में आयोजित हो रही "चीन में सुधार और खुलेपन की 40वीं वर्षगांठ की स्मृति में प्रदर्शनी" से अवगत कराया गया। चीन के महान नेता तंग श्याओफिंग ने एक ऐतिहासिक विचार में "मन को सशक्त बनाएं, तथ्यों से सच्चाई लें और एकजुट होकर भविष्य का सामना करें।" उच्च विचार चार दशकों के सुधार और खुलेपन को जन्म दिया, जिससे चीन दुनिया की दूसरी अर्थव्यवस्था बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक, पायलट परियोजना आर्थिक पुनर्गठन से सुधार और विकास में तेज़ गति लाए, जिसे "चमत्कार" ही कहा जाता है। वर्तमान में चीन जिस तरह से अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय रक्षा में प्रगति हासिल हुई है। चीन गरीबी रेखा से बाहर लाने में सफल रहा है और चीनी लोग गरीबी देख चुके हैं। अब समृद्ध जीवन का आनंद ले रहे हैं, यह चीन सरकार की प्रेरणा शक्ति है, उसपर गर्व महसूस करना चाहिए।

ललिताः दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से देव कुमार गोंड ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना प्रोग्राम में सुना कि 1 नवम्बर से चीन ने औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस महीने का अध्यक्ष देश बन गया है। चीन सक्रिय रूप से सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष का कर्तव्य निभाएगा। विश्व की शांति और सुरक्षा के लिए नया योगदान देगा।

आपका पत्र मिला प्रोग्राम में मेरा पत्र भी शामिल किया गया। मुझे काफ़ी पसंद आया।

बाल महिला स्पेशल प्रोग्राम में सुना कि चीन में बच्चे स्पेनिश की शिक्षा में रुचि ले रहे हैं। इंटरनेट से सुविधाएं मिलती हैं और पढ़ाई और संवाद भी लोग ऑनलाइन कर सकते हैं। विज्ञान और तकनीक का विकास बहुत तेजी से हो रहा है। शिक्षा में उच्च तकनीक का प्रयोग करना चाहिये।

पंकजः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत गत 6 से 11 नवम्बर तक दक्षिणी चीन के चू हाई शहर में आयोजित 12वीं चाइना इंटरनेशनल एविएशन एंड एरोस्पेस प्रदर्शनी, जिसमें मानव रहित विमान यानी ड्रोन उत्पादन एक ज्वलंत बिंदु बना, पर पेश रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। बताया जाता है कि मानव रहित विमान व्यवस्था वर्तमान में विश्व उड्डयन उद्योग में सबसे जीवंत क्षेत्र समझा जाता है और अब चीन की मानव रहित विमान व्यवस्था विश्व की पहली पंक्ति में दाखिल हो चुकी है। इतना ही नहीं चीन ड्रोन निर्यात के क्षेत्र में भी विश्व में सबसे आगे है।

कार्यक्रम में आगे गत 8 नवम्बर को चीन और म्यांमार के बीच म्यांमार के क्यौक फ्यू विशेष आर्थिक क्षेत्र में डीप वॉटर बंदरगाह निर्माण सम्बन्धी हुये समझौते पर पेश रिपोर्ट भी अच्छी लगी।

कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" में पेश आज की कड़ी कुछ ख़ास ही लगी। रिसेप्शन में एकाएक आयी गड़बड़ी के चलते कड़ी का शीर्षक तो ठीक से समझ में नहीं आया, फिर भी जैसा सुनाई पड़ा, उसके आधार पर 'श्यांग हाई क्वान, च्या हि क्वान और यू वान क्वान दर्रे' शीर्षक प्रस्तुति सुन कर न केवल इन दर्रों बल्कि इनसे जुड़ी चीन में हान राजवंशकाल में बनी विश्व-प्रसिद्ध लम्बी दीवार के इतिहास पर भी जानकारी हासिल हुई। यह जानकर हैरत हुई कि च्या हि क्वान दर्रा, दर्रा नहीं पूरी पांच मंज़िला इमारत की तरह था। इन दीवारों पर घोड़ों के चढ़ने की बात तो और भी हैरतअंगेज़ लगी। एक अन्य दर्रे की दीवार का बीस मीटर मोटा होना भी अचंभित करता है। एक और बात ने मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया, वह यह कि दर्रे के निर्माण में कुल कितनी ईंटें लगेंगी, कारीगरों द्वारा इसका सही-सही अनुमान लगाया जाना और निर्माण पूरा होने पर केवल एक ईंट का बचना। मैं उस दौर के ऐसे गणित-निपुण महान कारीगरों को नमन करता हूँ।

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" का आगाज़ आज ग्रुप 101 के जिस फड़कते हुये चीनी गीत से किया गया, उसका संगीत शरीर में जोश उत्पन्न करने वाला था। आज के विशेष सेगमेण्ट में 'सुधार और खुलेपन से चीन ने किया चमत्कार' शीर्षक लम्बा लेख चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू किये जाने से लेकर आज तक का पूरा निचोड़ पेश करता प्रतीत हुआ। वास्तव में आज से चार दशक पहले चीन के महान नेता तंग श्याओफिंग का वह ऐतिहासिक कथन, जिसमें उन्होंने कहा था कि- 'मन को सशक्त बनाएं, तथ्यों से सच्चाई लें और एकजुट होकर भविष्य का सामना करें' से ही इस चार दशकों के सुधार और खुलेपन का जन्म हुआ और जिसके चलते आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। इसमें दोराय नहीं कि यही गति क़ायम रही, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में चीन दुनिया के उन चुनिन्दा देशों की सूची में शामिल हो जायेगा, जो द्वितीय विश्व-युद्ध के बाद कम आय वाले से उच्च आय वाले की स्थिति में तब्दील हो गये। सच कहूँ, तो मैं चीन की इस सुधार और खुलेपन की नीति से बहुत प्रभावित हूँ।

पंकजः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" में पहली नवम्बर से चीन द्वारा औपचारिक रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के इस महीने का अध्यक्ष देश बनने का महत्वपूर्ण समाचार सुनाया गया, तो बांछें खिल उठीं, क्यों कि आम तौर पर सुरक्षा परिषद पर पश्चिमी देशों का ही कब्ज़ा होता है। संयुक्त राष्ट्र संघ स्थित स्थायी चीनी प्रतिनिधि मा चाओश्वू द्वारा संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की न्यूज़ ब्रीफिंग में सुनाया गया यह सन्देश किसी खुशी के पैग़ाम जैसा है।

कार्यक्रम में आगे चीन के आनहुई प्रान्त की सुनयांग काउन्टी स्थित श्याओकांग गांव में चालीस साल पहले शुरू किये गये सुधार कार्यों पर की गई चर्चा सुन कर पता चला कि तब कैसे किसान अपनी कृषि-भूमि किराये पर दे दिया करते थे और आज उनकी ज़िंदगी में कितनी खुशहाली आ गई है। आज प्रत्येक ग्रामवासी के मकान के दरवाज़े पर क्यूआर कोड लगा हुआ है।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में आज कई खुशियां अनायास ही एकसाथ हमें मिलीं। जहां जुबैल सऊदी अरब से भाई सादिक़ आज़मी द्वारा वहां पेट्रोल पम्पों का पूरी तरह डिजिटलीकरण होने सम्बन्धी जानकारी प्रदान की गयी, वहीं लम्बे समय गुमनामी की दुनिया में रहने के बाद स्वनामधन्य श्रोता भाई श्रध्देय दीपक कुमार दास का रेडियो की दुनिया में फिर से अभ्युदय होना हमें गहरी खुशी प्रदान कर गया। पिछले कुछ अंकों से श्रध्देय भाई बद्री प्रसाद वर्मा का स्वर भी पत्रों के मंच पर बुलन्द है। ये तमाम श्रोता हमारे प्रेरणा-पुंज हैं।

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत इण्टरनेट के द्रुत विकास के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उसके सकारात्मक प्रभावों पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि कैसे पेइचिंग स्थित एक शिक्षण कम्पनी पेइचिंग सहित चीन के पांच शहरों में दो से बारह वर्ष आयुवर्ग के बच्चों के लिये ऑनलाइन स्पैनिश भाषा की कक्षाएं चला रही है। यह बात भी अहम लगी कि ऑफलाइन शिक्षा के बजाय ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली कहीं सस्ती है। इसके ज़रिये न केवल अध्यापक और विद्यार्थी के बीच संवाद क़ायम हो सकता है, बल्कि किसी महत्वपूर्ण विषय की चर्चा में कक्षा के अन्य विद्यार्थी भी अपनी राय दे सकते हैं। इससे समय और धन दोनों की काफी बचत होती है। यह जान कर और भी अच्छा लगा कि निकट भविष्य में स्वचालित ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली भी आरम्भ की जा सकती है।

वहीं साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में तिब्बती पठार पर लम्बे समय से गूँज रहे एक गीत कि 'सूर्य और चंद्रमा एक मां की बेटियां हैं' का ज़िक्र करते हुये उसकी तुलना हान और तिब्बती जाति भी एक मां की बेटियां होने की तरह करना अच्छा लगा, क्योंकि उन दोनों की मां एक है चीनी राष्ट्र। देखा जाये, तो प्राचीनकाल से ही तिब्बती पठार एक बहुजातीय क्षेत्र रहा है, जिसमें तिब्बती जाति के अलावा हान, ह्वेई, मेनबा, लोबा और नाशी आदि अनेक जातियां समाहित हैं और तिब्बती जनता ने अपनी मातृभूमि के एकीकरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान किया है। धन्यवाद अच्छी प्रस्तुति के लिए।

पंकजः लीजिए दोस्तों अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में बताया गया कि चीन और म्यांमार के बीच क्यौक फ्यू बंदरगाह के निर्माण समझौता पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस परियोजना से स्थानीय रोज़गार के मौके बढेंगे, परिवहन उद्योग के विकास को बढ़ावा मिलेगा और व्यावहारिक चेन बनेगी। यह समग्र चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे के विकास के लिए लाभदायक होगा।

अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "आर्थिक जगत" में सुना कि उत्तर-पूर्वी चीन में खुलेपन के अग्रणी शहर ता लियान चीन में खुलेपन की एक खिड़की बन गई है। वर्ष 1984 में चीन का पहला आर्थिक और तकनीकी विकास क्षेत्र ता लियान उत्तर-पूर्वी चीन के व्यापक पुनरुत्थान का नेतृत्व करने के लिए एक महत्वपूर्ण इंजन बन गया है। हमें यह भी पता चला कि जर्मनी की जीआरओबी मशीन टूल्स कंपनी हाल ही में ता लियान शहर में चीन मुख्यालय बेस की स्थापना करने वाली है। जर्मनी की उन्नत मशीन उपकरण प्रौद्योगिकी चीन में लाया गया है। अब ता लियान शहर और भी प्रगति और विकास करते हुए अपने राष्ट्र को भी विकसित करने में सहयोगी बनेगा।

कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में पेंटर संजू चौहान से भेंटवार्ता सुनायी गई, जो नाइफ पेंटिग करती है। इस भेंटवार्ता में चौहान जी ने भारत में बुजुर्ग लोगों के जीवन और चीन में बुजुर्गों के जीवन में अन्तर को वर्णन किया है और चीनी लोगों में भारतीय लोगों के प्रति अवधारणाओं का वर्णन भी किया है।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" में चीन की च्वान जाति में प्रचलित लोक कथा 'सूर्य की ओर अभियान' नामक कहानी सुनी, जिसमें लोगों द्वारा अंधेरे से छुटकारा पाने के लिए सूर्य को खोजने की योजना बनाई गयी। 60 वर्षीय बूढ़े की हिम्मत की दाद देना चाहिये, जो सबसे पहले सूर्य की खोज में निकलने को तैयार हुए। 20 वर्षीय गर्भवती महिला सूर्य की खोज में निकल पड़ी। इससे स्पष्ट होता है कि पुराने जमाने में भी महिला पुरुषों से पीछे नहीं रहा करती थी। यह लोक कथा रोचक और मनोरंजक लगी।

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि डिजिटल युग में बूढ़े लोगों की सुविधा के लिए कई देशों ने योजना बनायी है। पेरिस में बुजुर्गों के लिए कार सेवा शुरू की गई है, तो जापान में डोकोमो कंपनी ने स्मार्ट मोबाइल फोन की कक्षा शुरू की है। साथ ही जापान में बूढ़े लोगों के लिए सॉफ्ट व्यंजन भी तैयार किया जाता है। थाइलैंड में बूढ़े लोगों के लिए स्कूल खोला गया है, तो अमेरिका में बुजुर्गों के लिए स्मार्ट फोन पर खास सुविधाएँ दी गई हैं।

साप्ताहिक कार्यक्रम "आप की पसंद" में कुल 7 मधुर और मनोरंजक गाने सुनाये गये, जो पसन्द आए। इस कार्यक्रम में रोचक और आश्चर्यजनक जानकारी भी बताई गई। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

पंकजः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए पंकज और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

ललिताः बाय-बाय।

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