20181003

2018-10-03 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजे गए श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। इस बार भी कई पुराने श्रोताओं के साथ नए श्रोताओं ने हमें पत्र भेजे हैं। पहला खत हमें भेजा है जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा ने। लिखते हैं कि अमेरिका में नए राष्ट्रपति ने पद संभालने के बाद अपने हितों को सर्वोपरि कर दिया है और दूसरे देशों के हितों को तुच्छ समझ रखा है। अमेरिका के इस कदम से दुनिया भर अघोषित व्यापार युद्ध शुरू हो गया है। विशेषज्ञ इसे अमेरिका द्वारा पूरे विश्व पर थोपा गया व्यापार युद्ध मान रहे हैं। अमेरिका की इस दादागिरी से चीन सहित लगभग पूरी दुनिया का हर देश पीड़ित है। कमजोर देश इसे मज़बूरी में झेल रहे हैं, तो चीन जैसी महाशक्तियां इसका डटकर मुकाबला कर रही हैं और मुहतोड़ जवाब दे रही हैं। अपने हितों को बचाने की चुनौती अनायास ही पैदा हुई है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत को भी नए प्रतिबन्ध लगाने की रोज धमकी मिल रही है। अमेरिका अपने हितों को साधने के लिए चीन आदि देशों पर नए प्रतिबन्ध लगा रहा है। वस्तु और सेवा कर में भी बढ़ोतरी कर रहा है। जबकि चीन भी बराबरी का जवाबी कदम उठाकर अमेरिका को करारा जवाब दे रहा है, पर अमेरिका अपनी नीतियों में बदलाव नहीं ला रहा है। सी आर आई इस गंभीर ज्वलंत मुद्दे पर लगातार समाचार और विश्लेषण प्रस्तुत कर रहा है। समय के मुताबिक इस समस्या से निपटने के लिए उपाय भी सी आर आई के जानकार और विशेषज्ञ दे रहे हैं। विस्तृत विश्लेषण और पारदर्शी सोच के साथ सी आर आई का प्रसारण अपने श्रोताओं को नई-नई जानकारियां दे रहा है। इसके लिए सी आर आई की टीम को धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुरजा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि टी टाइम प्रोग्राम में सुनवाई गई सभी जानकारी, जोक्स, श्रोताओं की प्रतिक्रिया बेहद पसंद आयी। हमारे पत्र को भी प्रोग्राम में शामिल किया गया। बेहतरीन, रोचक और दिलचस्प, मनोरंजक प्रोग्राम सुनवाने के लिए शुक्रिया।

तिलक राज अरोड़ा जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

अनिलः लीजिए दोस्तों अब समय हो गया है अगले पत्र का, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से देव कुमार गोंड ने। लिखते हैं कि "अतुल्य चीन" प्रोग्राम में प्रस्तुत चीन के बाल वस्त्र उद्योग पर जानकारी मिली। बाल व्यवसायिक संग्रहालय कुशलता और बुनाई ने व्यापक लोकप्रियता हासिल की है। पूर्वी चीन का चच्यांग प्रान्त अपनी 8वीं वर्षगाँठ मना रहा है। विकास के सूत्र से उत्पादन शक्ति में सुधार हुआ है। साथ ही साथ लोकप्रिय भी बन रहा है। जबकि चीनी मधुर यन्त्र संगीत से हमको भी परिचय करवाया गया।

"स्वर्णिम चीन के रंग" प्रोग्राम में छीमुचि द्वारा लिखित "तब और अब" छिलियन पर्वत माला के सम्राट इयांग पी ने नदी खोद कर कई नदियों से मिला दी।

जबकि "आर्थिक जगत" प्रोग्राम में आर्थिक समाचारों में छिंग हाई विश्व अर्थव्यवस्था में वैश्विक आर्थिक संगठन के बारे में रिपोर्ट सुनी। शांगहाई शहर पहला दुनिया का स्वचालित जल बन्दरगाह है। पानी द्वारा परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जा रही है।

"नमस्कार चाइना" प्रोग्राम में सुन्दर चायनीज सांग सुना, पसंद आया। चीन के परम्परागत त्यौहार "हो यी" और "छांग अ" की कहानी भी अच्छी थी। जबकि दस सूर्य रहने पर धरती के सब जलकर राख हो जा रहा था। हो यी ने सूर्य से विनती की कि एक साथ सभी धरती पर न आएं। दिव्य लाभ पाने के लिए दवा लाने स्वर्ग की यात्रा पर निकला हो यी अपनी पत्नी छांग अ से दूर नहीं रह सका। इसलिए उसने दवा को छिपाकर रख दिया, लेकिन छांग अ ने उस दवा का सेवन कर लिया। और वह चाँद में पहुंच गयी।

देव कुमार जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बेहद शुक्रिया। उम्मीद करते हैं कि आप आने वाले दिनों में भी हमारे प्रोग्राम के लिए टिप्पणी भेजते रहेंगे, धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि हमेशा की भांति इस बार भी दिनों दिन लोकप्रिय होते कार्यक्रम टी टाइम को सुना, जो मनोरंजक के साथ ज्ञानवर्धक भी था। सबसे पहले एक सच्चाई से पर्दा उठाया गया, जो हमारे ज्ञान की कोठरी से बहार था, यानी एक ऐसी दीवार जो चीन के नानचिंग शहर में है और करीब 600 साल पुरानी है, जो 35 किलोमीटर से भी ज्यादा लंबी है। और यह सुन कर अचम्भा होता है कि चीन के नानचिंग की इस दीवार को बनाने में 35 करोड़ से भी ज्यादा ईंटों का इस्तेमाल हुआ है। कार्यक्रम में आगे हिंदी के विकास और प्रसार में योगदान देने वाले नवीन लोहनी जी के साथ चर्चा भी जानकारी समेटे थी।

जीन से बच्चों की पढ़ाई क्षमता को मापना विज्ञान के भविष्य को और प्रबलता प्रदान करेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है और यह बच्चों के कैरियर निर्धारण में भी सहायक होगा। जानकारी उपलब्ध कराने के लिए धन्यवाद।

सादिक आजमी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद।

 

अनिलः अब दोस्तों समय हो गया है एक और पत्र का, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि "बाल महिला स्पेशल" प्रोग्राम में वर्ष 2008 में भूकम्प के बाद वनछ्वान के छात्र फिर समुद्र संपूर्ण रूस बाल केंद्र वापस लौटे। वनछ्वान में आए भूकंप की 10वीं वर्षगाँठ मनाई गई। बच्चों ने समुद्र संपूर्ण रूस बाल केंद्र का दौरा किया। रूस सरकार की सहायता से बच्चों का घर बना दिया गया। रूस और चीन के बीच आपसी विश्वास और आपसी सहयोग के मैत्रीपूर्ण संबंध बने हुए हैं। दोनों देशों के युवाओं के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान से दोनों देशों के संबंधों के लिये और अधिक मजबूत आधार तैयार होगा, जो भविष्य में रूस-चीन संबंधों के लिये अहम भूमिका निभाएगा। आशा है कि रूस और चीन की युवा पीढ़ी दोनों देशों की जनता की गहन परंपरागत मित्रता का विकास कर पाएगी।

वहीं लिखते हैं कि "टी टाइम" प्रोग्राम में कैंसर जैसी घातक बीमारी के टेस्ट कराने के लिए अब लोगों को भारी पैसा खर्च नहीं करना होगा। एक कैप्सूल तैयार किया गया है जो चुटकियों में इस बात का पता लग लेगा। कैप्सूल प्रारंभिक कैंसर कोशिकाओं को खोजने में क्रांतिकारी साबित होगा। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस से कैंसर को शुरू में ही पकड़ा जा सकता है। एक वीडियो भी इन दिनों इस बारे में फेसबुक पर बहुत पसंद किया जा रहा है। इस वीडियो को 21 हजार बार "गिनीज क्लब" नामक पेज पर शेयर किया जा चुका है। इस कैप्सूल को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में तैयार किया गया है।

माधव चन्द्र सागौर जी, हमें पत्र भेजने के लिए शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि पूर्वी चीन के चच्यांग प्रांत में स्थित चिली कस्बा के पास थाईहू झील है। अतीत में चिली वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू होने से इस कस्बे के बाल कपड़े उद्योग का तेजी से विकास हुआ है। देश में सबसे बड़ा व्यावसायिक सहयोग चिली कस्बे का बाल वस्त्र उद्योग  है।

पता चला कि वर्ष 2004 में चीनी बाल अनुसंधान केंद्र और चीली कस्बे की सरकार ने संयुक्त रूप से चीनी बाल कपड़ा संग्रहालय बनाया, जो चीन में चीनी बाल वस्त्र विकास का इतिहास दिखाने वाला पहला व्यावसायिक संग्रहालय है। वर्ष 2006 में इसका विस्तार किया गया। अब इस संग्रहालय का क्षेत्रफल लगभग तीन हजार वर्गमीटर है। यह रिपोर्ट पसन्द आई।

 

अनिलः शंकर जी आगे लिखते हैं कि कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में मध्य शरद त्योहार से जुड़ी कहानी सुनायी गई, जिसमें खुल्लम पर्वत पर रहने वाले शिवांगू के पास दिव्य दवा उपलब्ध होने जिसे खाने के बाद मनुष्य को स्वर्ग में हमेशा के लिए विराजमान होने के बारे में बताया गया।

वहीं कार्यक्रम में आगे पिछले ग्यारह वर्षों से चीन के तालियान शहर में रहने वाली मधुलिका राव चौहान से भेंटवार्ता सुनायी गई, जो एक आईटी कंपनी में काम करती हैं और लेखन व सामाजिक कार्यों में भी अपना समय देती हैं। यह भेंटवार्ता पसन्द आयी।

जबकि अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "चीनी कहानी" में प्रस्तुत चीनी लोक कथाओं पर आधारित कहानियों की शृंखला 'सात बहनें' के अगली कड़ी में सुन स्यांग जाति के लोक कथा 'सफेद पंखों की पोशाक' में एक होशियार लड़की पातूमान का चरित्र का वर्णन किया गया। जिसकी माँ बचपन में ही मर जाती है और सौतेली माँ से उसे प्रताड़ित होना पडता है। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बेहद शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" की शुरुआत 24 सितम्बर को चीन में मनाये गये मध्य शरदोत्सव की जानकारी के साथ किया जाना अच्छा लगा। तमाम चीनी भाई-बहनों को उत्सव की हार्दिक बधाई। चीन में हर साल आठवें महीने के पन्द्रहवें दिन मनाये जाने वाले इस उत्सव से जुड़ी हो यी और उसकी पत्नी छांग आ की कहानी मार्मिक लगती है। जहाँ कार्यक्रम में इस बार चीन की राजधानी पेइचिंग में मध्य-शरद उत्सव पूरे जोश-ओ-खरोश के साथ पूरे शहर में ख़ास अन्दाज़ में मनाये जाने के बारे में बतलाया गया, वहीं प्राचीन शहर यांगचो में इस दिन चाँद की पूजा कर मून-केक खाने की परम्परा का उल्लेख किया जाना भी ज्ञानवर्ध्दक लगा।

कार्यक्रम में आगे गत ग्यारह वर्षों से चीन में रहने वाली लेखक, समाजसेवी और आईटी प्रोफ़ेशनल मधुलिका राव चौहान से की गयी बातचीत सुन कर एक बार फिर चीनी लोगों की ज़िन्दादिली महसूस किया।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अन्तर्गत चीनी लोक-कथाओं पर आधारित श्रृंखला 'सात बहनें' की आज की कड़ी 'सफ़ेद पंखों की पोशाक' सुनाई गई।

 

अनिलः सुरेश अग्रवाल आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" में पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। यह जानकारी भी बेहद अच्छी लगी कि विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त कर स्वदेश लौटने वाले चीनियों का औसत 51.9 प्रतिशत हो चुका है। ऐसा चीन में घरेलू आर्थिक विकास के बेहतर माहौल और चीन द्वारा वैश्विक प्रक्रिया का नेतृत्व किया जाना है। स्वदेश लौटने वाले अधिकतर लोगों के पसंदीदा शहर क्वांगचो, पेइचिंग और शांगहाई होते हैं, जहां जीवन स्तर अपेक्षतया अधिक सुविधाजनक होता है। यह बात बिलकुल सही जान पड़ी कि विदेश में पढ़े लोगों में विदेशी बाज़ार की अच्छी जानकारी होती है, जो कि चीन के लिये मददकार साबित होती है।

कार्यक्रम में आगे चीनी महिलाओं में शादी और परिवार के मामले और नज़रिये का भी ज़िक्र किया गया। देर से शादी, गर्भवती होने के लिये आईवीएफ किलिनिक्स की मदद लिये जाने के पीछे उनकी सोच को भी जाना।

जबकि श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" की महफ़िल हर बार की तरह आज भी खूब जमी। श्रोताओं के पत्रों और प्रतिक्रियाओं को समुचित स्थान दिया जाना तो प्रशंसनीय है, परन्तु प्रतिक्रियाओं पर अपनी प्रतिक्रिया देने में अकसर कंजूसी बरतती जाती है। यह बात श्रोताओं द्वारा पहले भी कई बार उठायी जा चुकी है, परन्तु न जाने वह कौन सी मज़बूरी है कि आप इस पर अमल नहीं कर सकते।

देखिए सुरेश जी, हमें तमाम श्रोताओं के पत्र मिलते हैं और अगर हम इसपर टिप्पणी करने लग जाए, तो बहुत समय जाया हो सकता है। इस वजह से हम लोग इनपर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं, क्योंकि आप लोग लगातार पत्र भेजते हैं और अधिक से अधिक हम उन्हें शामिल करवाना चाहते हैं। हां, आगे से हम कोशिश करेंगे कि आप की टिप्पणी पर कुछ प्रतिक्रिया भी दी जाए।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत सछ्वान प्रांत के वनछ्वान क्षेत्र में आये भीषण भूकंप की 10वीं बरसी के अवसर पर भूकंप प्रभावित बच्चों में व्याप्त खुशी और ग़म की भावना पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। उस समय को याद करते हुये बतलाया गया कि भूकंप के बाद बच्चों द्वारा स्वास्थ्य बहाली के लिए रूस का दौरा किया गया था और तब रूसी अध्यापक और विद्यार्थियों के साथ उनकी गहरी मित्रता हो गयी थी। अच्छी बात यह लगी कि इन दस वर्षों में उनके बीच की यह मित्रता और मज़बूत हुई है और सौभाग्य से इस बार वनछ्वान के बच्चों को फिर एक बार समुद्र संपूर्ण रूस बाल केंद्र का दौरा करने का मौका मिला है।

कार्यक्रम सुन कर यह भी जाना कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा भी गत 12 सितंबर को व्लादिवोस्तोक बाल केंद्र का दौरा किया गया, तो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन उनके साथ थे। दोनों नेताओं ने वनछ्वेन भूकंप ग्रस्त क्षेत्रों से आये चीनी बच्चों के रूस में स्वस्थ होने से जुड़ी चित्र प्रदर्शनी देखी।

कार्यक्रम "टी टाइम" में सुना कि गूगल द्वारा की गयी अपने फीचर में कुछ बदलावों संबंधी घोषणा, जिसके अन्तर्गत फ़ेसबुक की तरह ही अब गूगल द्वारा भी यूजर्स को फोटो और वीडियो के ज़रिये विभिन्न विषयों पर रुचिपूर्ण चीजें देखने और पढ़ने का मौका दिया जायेगा, अच्छी लगी।

कार्यक्रम में पेश श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं और तीनों ज़ोक्स भी शानदार एहसास करा गया।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" में चीनी जन विश्वविद्यालय सहित चीनी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विदेशी छात्रों द्वारा हाल ही में पश्चिमी चीन के सछ्वान प्रांत स्थित आबा तिब्बती और छियांग जातीय स्वायत्त प्रिफेक्चर के दौरे सम्बन्धी रिपोर्ट सुनी, जो कि सूचनाप्रद लगी। बताया जाता है कि उक्त दौरे में पन्द्रह देशों के छात्रों द्वारा आबा क्षेत्र के वेनछ्वान, मालकांग और हूंगयुवान काउन्टी का अवलोकन किया गया और आबा क्षेत्र की सूक्ष्म जानकारी हासिल की गई।

इन विदेशी छात्रों के मुताबिक तिब्बती लोग बहुत ही मेहमान-नवाज़ और मित्रवत होते हैं। उनकी बातें सुन कर मुझे भी लगा कि तिब्बत का दौरा जरूर करना चाहिये। अब देखिये, मेरी यह मुराद कब पूरी होती है। वैसे सीआरआई से ओतप्रोत ढ़ंग से जुड़ा होने के कारण तिब्बत ही नहीं, पूरा चीन मेरे हृदय में बसा हुआ है।

बिलकुल सुरेश जी, आपने बिकलुक सही कहा कि तिब्बत बहुत सी सुन्दर जगह है और उम्मीद करते हैं कि आपको आने वाले भविष्य में या आने वाले दिनों में जरूर मौका मिलेगा, तो आप तिब्बत जाए।

आगे लिखते हैं कि कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" में गुजरात विश्वविद्यालय में चीनी-भाषा का अध्ययन करने वाले रोहित से की गयी बातचीत सुनवाई गई। उनका यह कहना सही जान लगा कि चीन-भारत के बीच बढ़ते आर्थिक-सामाजिक रिश्तों के चलते चीनी-भाषा सीखने के प्रति भारतीयों का रुझान बढ़ चुका है। यह भी सही है कि भारत में शियाओमी, ओप्पो और वीवो आदि चीनी मोबाइल ब्राण्ड बहुत ही लोकप्रिय हैं। धन्यवाद एक सूचनाप्रद प्रस्तुति के लिये।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद। इसके साथ ही आपने तमाम टिप्पणी और सुझाव हम तक पहुंचाए, इसके लिए हम आपका शुक्रिया अदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आप लगातार यूंही हमारे साथ जुड़े रहेंगे।

 

अनिलः दोस्तो, अब पेश है छपरा बिहार से मार्क्स एंड माओ श्रोता क्लब के अजय कुमार सिंह द्वारा व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजी गई कविता, जिसका शीर्षक है एशिया का लोकप्रिय नारा।

एशिया का लोकप्रिय नारा

"एक पट्टी एक मार्ग" लोकप्रिय नारा है,

बाजारवाद के गर्भ से जन्मा सितारा है।

चीन का समाजवाद, एशिया निहार रही,

चिनफिंग का विचार, जनगण में आ रही,

एशिया के दो हाथी, एक रोगी हो गया,

हिमालय की जड़ी-बुटी, हाथी चंगा हो गया।

इक्कीसवीं सदी एशिया की, अमेरिका घबड़ा रहा,

छोटे-छोटे देशों में झगड़ा फैला रहा।

जब जनगण की राजसत्ता प्रथम स्थान पायेगी,

पूंगी की सत्ता, धूल में मिल जायेगी।

जनगण की खुशहाली, समाजवाद की लाली।

एशिया के कोने-कोने में फैल जाएगी,

पूंजीवादी, युद्धप्रेमी, नफरत फैला रहे,

दुनिया के चौकीदार, नाहक में फंस रहे,

सर्वहारा राजसत्ता माओ की थी कल्पना,

एशिया के जनगण का पूर्ण होगा सपना।

अजय कुमार सिंह जी, आपने बेहद ही खूबसूरत कविता हम तक पहुंचाई।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories