20180926

2018-09-26 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के कार्यक्रम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजे गए श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। इस बार भी कई पुराने श्रोताओं के साथ नए श्रोताओं ने हमें पत्र भेजे हैं। पहला खत हमें भेजा है जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा ने। लिखते हैं कि इस महीने की 24 सितंबर को चीन का परंपरागत त्योहार मध्य शरद त्योहार मनाया गया, जो हर साल चीनी परंपरागत पचांग के मुताबिक अगस्त महीने के पंद्रहवें दिन में पड़ता है। इस त्योहार में चीनी लोग चंद्रमा की पूजा करते हैं। इस मध्य शरद उत्सव पर चीन अपने पारंपरिक त्योहार के साथ पारिवारिक मिलन की खुशियां भी मनाता है। इस मौके पर चीन के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यह शरद फसल की कटाई का उत्सव भी कहा जाता है। इस त्योहार पर मून यानि चन्द्रमा के आकार का केक बनाकर उसे खाने की परम्परा है। इस कारण इस त्योहार को शारदीय मून केक त्योहार भी कहते हैं। खास तौर पर पूर्वी चीन के ऐतिहासिक और प्राचीन शहर यांग चो में यह उत्सव बड़े ही धूमधाम और बढ़-चढ़ कर मनाया जाता है, जिसमें चीनी लोगों का अपनी संस्कृति के प्रति आदर और समर्पण बढ़ता है। शारदीय मून केक फेस्टिवल पर विस्तृत जानकारी देने के लिए सीआरआई का आभार। उम्मीद है कि आप इसी तरह आगे भी श्रोताओं को चीनी संस्कृति से रूबरू करवाते रहेंगे। हमें चीनी लोगों को सुनने और जानने में अच्छा लगता है और चीन के प्रति ज्ञान में बढ़ोतरी भी होती है।

एसबी शर्मा जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद। हम आगे भी आपके पत्रों को अपने कार्यक्रम में शामिल करते रहेंगे, शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि पिछले टी टाइम प्रोग्राम में 14 सितंबर को मनाए गए हिंदी दिवस पर नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैंन बलदेव भाई शर्मा जी से की गई भेंट वार्ता और उनके विचार सुनाये गये, जो अच्छे लगे। इसके अलावा प्रोग्राम में पेश किए गए तीनों जोक्स मजेदार लगे। धन्यवाद।

गुरमीत सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

अनिलः लीजिए दोस्तों अब समय हो गया है अगले पत्र का, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से धीरेन बसाक ने। लिखते हैं कि पिछले नमस्कार चाइना कार्यक्रम में चीनी लोगों के गर्म पानी पीने के बारे में रिपोर्ट अच्छी लगी।

जबकि विश्व का आईना कार्यक्रम में आधुनिक रेल मार्ग के बारे में जानकर अच्छी लगी।

टी टाइम प्रोग्राम में हिन्दी दिवस के बारे में जानकारी और बातचीत अच्छी लगी। कार्यक्रम में पेश तीनों जोक्स भी अच्छे लगे।

धीरेन बसाक जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है खुर्जा उत्तर प्रदेश से तिलक राज अरोड़ा ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना प्रोग्राम के अंतर्गत बहुत जानकारी सुनने को मिली। आप का पत्र मिला प्रोग्राम में सभी श्रोताओं के विचार पसंद आते हैं। हमारा पत्र भी प्रोग्राम में शामिल किया गया। इसके लिए आपका दिल से शुक्रिया प्रकट करते हैं और उम्मीद करते हैं कि हमारे पत्र इसी तरह प्रोग्राम में शामिल करते रहेंगे।

टी टाइम प्रोग्राम में मैरी कॉम का दो घंटे में दो किलो वजन कम करना, अमेरिका के एक शहर में कुत्ते का मेयर बनना रोचक लगा। तीनों जोक्स सुनकर हम हँसते हँसते लोट पोट हो गये।

वहीं आपकी पसंद प्रोग्राम में मनोरंजक, ज्ञान-वर्धक और हैरत अंगेज जानकारी सुनने को मिली, जो पसंद आयी। प्रोग्राम में जो गीत सुनवाए गए, सभी का चयन बेहतरीन लगा। बेहतर प्रस्तुति के लिए शुक्रिया।

तिलक राज अरोड़ा जी, हमें प्रतिक्रिया भेजने के लिए आपका भी बेहद शुक्रिया।

 

अनिलः अब दोस्तों समय हो गया है एक और खत का, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि आपकी पसंद प्रोग्राम सुना, बहुत अच्छा लगा। प्रोग्राम में पेश तमाम जानकारी पसंद आयी।

वहीं टी-टाइम कार्यक्रम में हिंदी दिवस मनाए जाने के बारे में खबर और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष के साथ चर्चा की गयी। साथ ही यह भी बताया गया कि अमेरिका में पिछले साल पचास हजार से अधिक भारतीयों को अमेरिका की नागरिकता हासिल हुई। इसके अलावा आपकी ओर से पेश अन्य कार्यक्रम भी अच्छे लगे। धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत चीन-अफ़्रीका सहयोग मंच की स्थापना के अठारह वर्षों में व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय वृध्दि का ज़िक्र करते हुऐ पूर्वी अफ़्रीका स्थित केन्या में पूरी तरह चीनी सहायता से मुम्बासा से नैरोबी के बीच बिछायी गयी रेल-लाइन पर जानकारी प्रदान की गई। पता चला कि इस रेलमार्ग के बनने पर न केवल मुम्बासा-नैरोबी के बीच का सफ़र दस घण्टे से सिकुड़ कर चार घण्टे का रह गया, बल्कि इससे युवाओं के लिये रोज़गार के बेहतर अवसर उपलब्ध होने के साथ-साथ कृषि-विकास को भी बढ़ावा मिला है।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" से पता चला कि चीन-नेपाल दोनों की संयुक्त पूंजी वाली हिमालय एयरलाइन्स कम्पनी दोनों देशों के बीच सहयोग की एक मिसाल है।

साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" में चीनी लोग गर्म पानी पीने के शौक़ीन क्यों होते हैं, यह रहस्य उजागर करने का शुक्रिया। निश्चित तौर पर इसके पीछे जो वैज्ञानिक तर्क दिया जाता है, वह सही है। चिकित्सक भी यह मानते हैं कि गर्म पानी में वसा या चिकनाई को नियंत्रित करने की अद्भुत क्षमता होती है, जिससे मोटापे पर भी क़ाबू पाना सम्भव है। इससे पाचनतंत्र पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है और इससे महिलाओं की माहवारी भी सुचारू बनती है। एक बात और यह कि गर्म पानी का सेवन कब्ज़ होने से भी बचाता है।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत चीन और केन्या के बीच सहयोग की मिसाल बने मोम्बासा-नैरोबी रेल मार्ग पर पेश विशेष रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। बताया जाता है कि यह केन्या के सौ साल पुराने रेल ढांचे में चीन द्वारा किया गया अहम बदलाव है, तभी तो स्थानीय लोग इसे सदी रेल मार्ग मान रहे हैं।

जबकि कार्यक्रम "टी टाइम" के अन्तर्गत भारत में प्रति वर्ष 14 सितम्बर को मनाये जाने वाले हिंदी दिवस और 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस पर विभिन्न विद्वानों के विचारों से अवगत कराया जाना अच्छा लगा। वास्तव में, इस तरह के आयोजन एक रस्म-अदायगी भर होते हैं और यह हिंदी की दशा और दिशा तय नहीं करते। मेरी राय में हिंदी को बढ़ावा देने में ऐसे आयोजनों से ज़्यादा योगदान तो हिंदी सिनेमा और टीवी चैनलों का रहा है। वैसे हिंदी एक सशक्त भाषा है और इसके अस्तित्व को कोई ख़तरा नहीं है। यह बात अलग है कि भारत का अभिजात वर्ग हिंदी को हेय दृष्टि से देखता है, परन्तु हिंदी के बिना गुज़ारा उसका भी नहीं होता। वैश्विकरण के दौर में हिंदी का महत्व और बढ़ चुका है। इस परिप्रेक्ष्य में चीन और भारत को ही लें, तो दोनों देशों के बीच सुदृढ़ होते आर्थिक-व्यापारिक सम्बन्धों और आवाजाही में बढ़ोत्तरी के चलते आज द्विभाषियों की इतनी मांग है, जो कि पूरी नहीं हो पा रही है। जहाँ तक बात भारत में इसके सम्पर्क और स्वाभिमान की भाषा बन पाने की है, तो यह कहा जा सकता है कि देश के एक छोर से दूसरे छोर तक कमोबेश हिंदी से तो काम चल सकता है, अंग्रेज़ी से नहीं। रही बात स्वाभिमान की, तो यह तो स्वयं पर निर्भर करता है कि आप स्वभाषा को किस तौर पर देखते हैं। सच कहूं, तो मुझे तो अपने हिंदीभाषी होने पर गर्व है।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" की महफ़िल हर बार की तरह आज भी खूब जमी। कार्यक्रम में श्रोताओं की तमाम प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण होती हैं, परन्तु कुछ मौलिकता की कमी महसूस होती है। हाँ, ज़ुबैल सउदी अरब से भाई सादिक़ आज़मी की टिप्पणियां बेबाक़ और धारदार होती हैं, इसमें दोराय नहीं।

साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत चीन के क्वांगशी ज्वान जातीय स्वायत्त प्रदेश के नाननिंग शहर में स्थित चौथे जन अस्पताल में एड्स विभाग की मुख्य नर्स तू लीछून पर पेश रिपोर्ट सुन कर मन गदगद हो उठा। बताया जाता है कि अपने सेवाभाव के चलते उन्होंने अपने सामान्य कार्य में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और उनकी सेवाओं से प्रभावित होकर स्वयं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने उनसे दो बार भेंट की है। कार्यक्रम सुन कर तू लीछून के हवाले से पता चला कि महासचिव शी चिनफिंग राष्ट्रीय एकता और एड्स की रोकथाम पर कितना ध्यान देते हैं।

वहीं साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत उत्तर-पश्चिमी चीन के कांसू प्रांत के कान्नान तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर में स्थित राष्ट्रीय वातावरण संरक्षण क्षेत्र और गत कुछ वर्षों से यहां कचरा-रहित प्रदर्शन क्षेत्र के निर्माण से लोगों के जीवन में आयी खुशहाली और सम्पन्नता पर पेश रिपोर्ट सूचनाप्रद लगी।

 

अनिलः सुरेश अग्रवाल आगे लिखते हैं कि कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" के अन्तर्गत भारत से चीन-यात्रा पर गये युवा दल के चार विद्यार्थियों के साथ बातचीत अच्छी लगी। इस तरह का आदान-प्रदान निश्चित तौर पर दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा।

वहीं साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं की पसन्द पर सुनवाये गये छह सदाबहार गानों के साथ दी गई तमाम जानकारी भी उपयोगी और ज्ञानवर्ध्दक लगी। उंगलियों अथवा गर्दन आदि के चटखाने पर आवाज़ क्यों निकलती है, इस विषय पर दी गयी विज्ञानपरक जानकारी अच्छी थी।

जबकि साप्ताहिक "संडे की मस्ती" में 16 से 20 सितम्बर तक मिस्र की राजधानी काहिरा में आयोजित चीनी फ़िल्म प्रदर्शनी पर जानकारी हासिल हुई। मुझे प्रदर्शनी में दिखायी गयी पाँचों चीनी फ़िल्मों में चीन और फ़्रांस की संयुक्त कृति "उल्फ डोडेन" की चर्चा सबसे अच्छी लगी। यदि हिन्दी सब-टाइटल्स के साथ कभी देखने का मौक़ा मिला, तो मैं यह फ़िल्म अवश्य देखना चाहूँगा।

जबकि अज़ीबोग़रीब और चटपटी बातों के क्रम में मलेशिया के क्लैंग नामक गाँव में 18 वर्षीय मुस्लिम लड़की द्वारा बुर्का पहन कर फुटबॉल के अज़ीबोग़रीब करतब दिखाने का किस्सा दिलचस्प कहा जाएगा।

 

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम आपका पत्र मिला में श्रोता मित्रों की तीखी मीठी प्रतिक्रिया का आनंद उठाया। पहले पत्र की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, जिसे लिखा था भाई सुरेश अग्रवाल जी ने। संक्षिप्त में कहूं तो वह पत्र नहीं साप्ताहिक पत्रिका थी। हर विषय हर रिपोर्ट पर बारीकी से समीक्षा की गई थी। आजकल आपकी वेबसाइट पर खूब विज़िट करता हूँ और पल बदलते समीकरण से अवगत हो रहा हूँ। साथ में दोस्तों को भी वेबसाइट पर विज़िट का न्योता दे रहा हूँ और वह भी लाभान्वित हो रहे हैं।

अपने पसंदीदा कार्यक्रम संडे की मस्ती का पुनः खूब आनंद लिया। मिस्र में आयोजित फिल्म प्रदर्शनी पर विस्तृत रिपोर्ट से हमारा ज्ञानवर्धन किया जो बहुत उम्दा लगा। इस प्रकार के होते आयोजन पर आपने पैनी नजर बनाई और चीनी फिल्म जगत के सूरतेहाल से रूबरू करवाया, धन्यवाद।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सुनते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है ब्रदी प्रसाद वर्मा यानी अंजान ने। लिखते हैं

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ललिताः लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुना कि हाल में चीन और अफ्रीका के विभिन्न व्यापारिक सहयोग तीव्रता के साथ आगे बढ़ रहा है और बड़ी उपलब्धियाँ प्राप्त हुई हैं। इससे अफ्रीकी जनता को बहुत लाभ पहुँच रहा है। वर्ष 2015 में दक्षिण अफ्रीका में हुए चीन-अफ्रीका सम्मेलन में दस मुख्य योजनाओं की घोषणा में से अधिकतर आर्थिक और व्यापारिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित थी, जिसका असर द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में लंबी छलांग के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि पूर्वी अफ्रीका के बड़े घास के मैदान में चीन और केनिया के सहयोग से निर्मित आधुनिक मापदंड वाले मोम्बासा-केनिया रेल मार्ग ने राजधानी नैरोबी और पूर्वी अफ्रीका के सब से बड़े बंदरगाह मोम्बासा को जोड़ा है। जो स्थानीय लोगों की आवाजाही को सुविधा दी है। यात्री अब चीनी रेल गाड़ी की श्रेष्ठ सेवा, तेज़ और सुरक्षित अनुभव का अहसास कर सकते हैं। मोम्बासा-नैरोबी रेल मार्ग ने केनिया के विकास के साथ साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी दिये हैं।

 

अनिलः शंकर प्रसाद शंभू जी आगे लिखते हैं कि अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "चीनी कहानी" में चीनी लोक कथाओं पर आधारित कहानियों की शृंखला 'सात बहनें' के अगली कड़ी में हान जाति की लोक कथा 'चावल' नामक कहानी में मिनिया दासी को रानी की धमकी और पड़तारित करने का फल उन्हें मिला। चावल को धान की हड्डी समझकर फेंकने की बात रानी की मूर्खता का परिचय है।

साप्ताहिक कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में तिब्बत के कान्नान क्षेत्र के आम जानकारियों के बारे में बताया गया कि कन्नान चीन के दस प्रिफेक्चरों में से एक है, जो कांसू प्रांत के दक्षिण में स्थित है और इस क्षेत्र को तिब्बती जाति और हान जाति के बीच सांस्कृतिक एकीकरण का क्षेत्र कहा जाता है। वहाँ तिब्बती के साथ हान, ह्वे और मंगोलियाई सहित 24 जातियाँ रहती हैं। कन्नान क्षेत्र असाधारण प्राकृतिक दृश्यों से चीन के प्रशिद्ध पर्यटन गणतव्य बताया जाता है।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में चीन की यात्रा करने आए तीन भारतीय छात्रों के साथ भेंटवार्ता भी अच्छी लगी।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

 

ललिताः दोस्तों लीजिए अब शामिल करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से देव कुमार ने। लिखते हैं कि आर्थिक जगत प्रोग्राम में सुना कि "एक पट्टी एक मार्ग" प्रस्ताव से नेपाली नागरिक उड्डयन में लाभ मिला है। वर्तमान में हिमालय एयरलाइंस की काठमांडू से कतर की राजधानी दोहा, मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर, सऊदी अरब के बंदरगाह शहर दम्मम और संयुक्त अरब अमीरात के शहर दुबई तक आने वाली चार उड़ानें उपलब्ध हैं। हवाई मार्ग नेपाल के विदेशी श्रमिकों के लिए सबसे व्यस्त मार्ग हैं।

नमस्कार चाइना प्रोग्राम में चीन में दूसरे इंडोलॉजी सम्मेलन में भारतीय महिला से ली गई भेटवार्ता पसंद आई।

आप की पसन्द में विज्ञान की नई जानकारी दी गई। जिसके तहत अंगुली चटकाने पर क्यों आवाज़ निकलती है, उसपर चर्चा हुई। अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।

देव कुमार जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी धन्यवाद।

 

अनिलः अब पेश करते हैं कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि अतुल्य चीन प्रोग्राम में सुना कि मोम्बासा-नैरोबी रेल मार्ग को केनिया की सदी परियोजनाओं में से एक माना जाता है। केनिया की आजादी के बाद सब से बड़ी बुनियादी संरचनाओं की निर्माण परियोजना यह रही है। सिर्फ 3 साल के निर्माण के दौरान 2017 के मई माह में रेल मार्ग का निर्माण पूरा हुआ। चीन और केनिया के सहयोग से निर्मित मोम्बासा से नैरोबी तक जाने वाले रेल मार्ग से स्थानीय लोगों को बहुत लाभ मिला है।

नमस्कार चाइना में सुना कि चीनी लोग गरम पानी पीने का शौक रखते हैं, जिसके लिए होटलों, रेस्टोरेंट, काफ़ी हाउस और घरों में भी गरम पानी उपलब्ध रहता है, लेकिन मांगने पर ठण्डा पानी मिल जाता है। चीनी लोग गरम पानी क्यों पीते हैं उसका कारण है गरम पानी पीने से पाचन ठीक रहता है।

आप का पत्र मिला में सभी श्रोताओं मित्र के साथ मेरा पत्र भी शामिल करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ।

माधव चन्द्र सागौर जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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