20180801

2018-08-01 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजे गए श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। इस बार भी कई पुराने श्रोताओं के साथ नए श्रोताओं ने हमें पत्र भेजे हैं। पहला पत्र हमें आया है मुजफ्फरपुर बिहार से रजनीश कुमार का। लिखते हैं कि मैं 1995 से 2012 के बीच सी आर आई नियमित सुनते हुए पत्राचार भी किया करता था। पहले चाइना से लिफाफा भेजा जाता था, उसी में पत्र डालकर हम वापस भेजते थे। जबसे आप दिल्ली के पता पर भेजे गये पत्रों पर ध्यान देना बन्द कर दिए हो, तभी से ही सी आर आई को छोड़ चुका था। रेडियो वेरिटास एशिया के श्रोता सम्मेलन के माध्यम से शंकर प्रसाद शंभू जैसा मित्र मिला जिनसे फोन वार्ता होती रहती है। उन्होंने मुझे चार दिन पहले सी आर आई की फ्रीक्वेंसी और वह्ट्सएप्प नम्बर भेजते हुए सी आई आई परिवार में पुनः शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

इस सप्ताह के टी टाईम कार्यक्रम में एक भारतीय उदय शंकर मिश्रा से भेंटवार्ता और आकांक्षा जायसवाल द्वारा गाया गया हिन्दी गीत पसंद आया। शुक्रवार को एक कार्यक्रम में मशरूम यानि गोबरछत्ता का उत्पादन कर तिब्बत के एक गांव में कई परिवार गरीबी से छुटकारा पाते हुए अपनी पारिवारिक स्थिति सुधार चुके हैं। यह बात प्रेरणादायक लगी। आपकी पसन्द में हिन्दी गीतों के साथ ही रोचक और ज्ञानवर्द्धक जानकारी श्रोताओं के दिल जीतने का काम करती है।

रजनीश कुमार जी, पुनः हमारे सीआरआई परिवार में शामिल होने के लिए आपका स्वागत है और कार्यक्रम सुनकर हमें प्रतिक्रिया भेजने के लिए आपका धन्यवाद। आशा है कि आगे भी आप हमारे प्रसारण सुनते रहेंगे और पत्र भेजते रहेंगे, शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है अफजला लदहो, दरभंगा बिहार से पूनम कुमारी ने। लिखती हैं कि मैं आपकी बिल्कुल नयी श्रोता हूँ। पिछले सप्ताह मैं युनिवर्स यूथ क्लब के अध्यक्ष शंकर प्रसाद शंभू द्वारा आयोजित श्रोता सभा में आमंत्रित थी। श्रोता सभा में ही मैं सी आर आई के हिन्दी सेवा को जाना और अपने रेडियो पर प्रसारण को खोजा, किन्तु सी आर आई की आवाज से अपरिचित रहने के कारण खोज नहीं पायी। शंभू जी को यह समस्या पता चली तो उन्होंने मेरे घर आकर रेडियो ट्यून कर सी आर आई के प्रसारण और आवाज से अवगत कराया। फ्रीक्वेन्सी की पूर्ण जानकारी भी दी। अब प्रसारण ढूंढ़ने में कोई कठिनाई नहीं होती है।

आप का प्रसारण सुनने के बाद अवलोकन करने पर तय किया कि स्वर्णिम चीन के रंग, विश्व का आईना, आप का पत्र मिला, टी टाइम, आप की पसन्द और संडे की मस्ती नियमित सुनना है, क्योंकि इस कार्यक्रम से मनोरंजन के साथ साथ ढेर सारी ज्ञान की बातें भी सुनने को मिलती हैं।

पूनम कुमारी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आशा है आप आगे भी लगातार हमारे कार्यक्रम सुनते रहेंगी। हम शंकर प्रसाद शंभू जी को भी धन्यवाद अदा करना चाहते हैं कि आपने सीआरआई के प्रचार-प्रसार में बहुत प्रयास किया है। आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद। हम आगे भी अच्छे और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम पेश करने की कोशिश करते रहेंगे।

 

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से रंजू मुखिया ने। लिखते हैं कि अतुल्य चीन कार्यक्रम में पुराने श्रोता योगेश्वर त्यागी के साथ भेंटवार्ता पेश की गई। उनके बचपन और चीन की सभ्यता-संस्कृति पर भी बात हुई। व्यापार करने आये शुभम से भी भेंटवार्ता सुनवायी गयी जिसमें उन्होंने अपने चीन के पहले अनुभव के बारे में बताया।

दूसरे कार्यक्रम स्वर्णिम चीन के रंग में ह्वांगहो नदी के पार और दुनिया में पहले पुल के बारे में बताया गया। नदी के किनारे बसा एक सुन्दर गाँव में नेपाली राजकुमार तपस्या किया करता था। उसी रास्ते से रोज अपने पिता को खाना पहुँचाने वाली लड़की और राजकुमार दोनों के दिल में प्रेम के बीज अंकुरित हो गये। धरती फटी उसमें दोनों समा गये। यह दंत कथा मनोरंजक लगी।

नमस्कार चाइना में 10वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बारे में रिपोर्ट अच्छी लगी कि भारत चीन की उभरती अर्थ व्यवस्था पर आधारित लेख सुना।

चीनी कहानी में पिछले प्रसारित अधूरे कहानी का अगला भाग सुना जिसमें उलान पटोर की मदद करने हेतु कई चमत्कारी पात्र मिले। कहानी में रोचकता और सस्पेंस बढ़ चुका है।

जबकि आप का पत्र मिला में बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, सऊदी अरब, पंजाब और उड़ीसा के श्रोताओं के साथ मेरे पत्र को भी शामिल करने के लिए धन्यवाद।

रंजू मुखिया जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है पश्चिम बंगाल से माधव चन्द्र सागौर ने। लिखते हैं कि सप्ताहिक कार्यक्रम अतुल्य चीन में एक श्रोता बन्धु योगेश्वर त्यागी और उनके युवा भतीजे शुभम जी से भेंटवार्ता सुनाई गई। उन दोनों बन्धुओं के चीन का अनुभव और स्वच्छ विचार बहुत अच्छे लगे।

दूसरे साप्ताहिक कार्यक्रम में चीन के प्राचीन रेशम मार्ग की जानकारी देते हुए ह्वांगहो नदी के उस पार शीर्षक कहानी रोचक लगी। साथ ही पनबिजली घर और लोमड़ी की छलांग नामक स्थान की जानकारी अच्छी लगी।

वहीं साप्ताहिक कार्यक्रम नमस्कार चाइना के विशेष सेगमेण्ट में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की 10वीं वर्षगांठ पर आधारित सुन्दर लेख की प्रस्तुति करते हुए उसका पूर्ण विश्लेषण उपयोगी साबित हुआ।

चीनी लोक कथा पर आधारित चीनी कहानी में एक गुलाम की कहानी का दूसरा भाग भी मनोरंजक लगा लेकिन अभी भी पूरी कहानी समझने के लिए अगले सप्ताह फिर सुनना पड़ेगा।

चीनी भाषा शिक्षण कार्यक्रम में पिछले सप्ताह का पाठ दोहराना अच्छी बात है। इससे भूले हुए शब्द और वाक्य फिर से मस्तिष्क में समा जाते हैं।

 

अनिलः माधव चन्द्र सागौर जी ने आगे लिखा है कि विश्व का आईना कार्यक्रम में भारत के शहर इन्दौर के नगर निगम की कड़ी मेहनत रंग लायी और इस वर्ष 2018 के स्वच्छतम शहर के खिताब से सम्मानित किया गया। इन्दौर में इधर उधर कचरा फेंकने वाले और पेशाब करने वाले को 250 से 500 रुपये तक जुर्माना लगाया जाता है। इन्दौर के मेयर धन्यवाद के पात्र हैं।

वहीं आपका पत्र मिला प्रोग्राम में कुल 12 पत्रों को पढ़ा गया, जिसमें तीसरे नम्बर पर मेरा पत्र भी शामिल किया गया। इसके लिए शुक्रिया।

गुरुवार को पेश बाल-महिला स्पेशल में 14 जुलाई को चीनी बाल थिएटर में उद्घाटित आठवें चीनी बाल नाटक दिवस विषय वस्तु पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। रिपोर्ट सुनकर जाना कि 43 दिनों तक चलने वाले इस नाट्य कार्यक्रम में श्रेष्ठ नाटकों की प्रस्तुति और नाटक से जुड़ी गतिविधियां शामिल की गयी।

साप्ताहिक टी टाइम प्रोग्राम में चीनी भाषा पढ़ने वाले विद्यार्थी उदय शंकर मिश्र के साथ लिया गया इंटरव्यू अच्छा लगा। बातचीत से पता चला कि चीन और भारत दोनों देश मात्र दो साल आगे पीछे आजाद हुये। जबकि भारतीय युवती आकांक्षा द्वारा गाया गया हिन्दी गीत और दिव्या द्वारा गाया गया अंग्रेज़ी गीत भी मधुर लगा।

माधव चन्द्र सागौर जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से शिव शंकर मंडल ने। लिखते हैं कि 23 जुलाई को प्रस्तुत अतुल्य चीन कार्यक्रम में भारतीय श्रोता योगेश्वर त्यागी के साथ भेंटवार्ता में चीन के सभ्यता और चीनी भाषा से सम्बन्धित बातचीत पसंद आयी।

स्वर्णिम चीन के रंग कार्यक्रम में ह्वांगहो नदी, कानशू प्रांत और लान्च्यो प्राचीन रेशम मार्ग की कहानी अच्छी लगी।

वहीं नमस्कार चाइना प्रोग्राम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की 10वीं वर्षगांठ और दक्षिण अफ्रीका में होने वाले शिखर सम्मेलन पर समीक्षात्मक टिप्पणी पसंद आयी।

जबकि विश्व का आईना प्रोग्राम में सबसे स्वच्छ शहर इन्दौर के बारे में रिपोर्ट और आप का पत्र मिला में विभिन्न श्रोताओं की प्रतिक्रिया से अवगत कराने के लिए धन्यवाद।

शिव शंकर मंडल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों, अब वक्त हो गया है अगले खत का, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि पिछला टी टाइम प्रोग्राम अच्छा लगा। प्रोग्राम में सबसे पहले भारतीय युवा दल के साथ चीन पहुंचे उदय शंकर मिश्रा जी जो कि चीनी भाषा का अध्ययन कर रहे हैं, उनके साथ बातचीत बहुत अच्छी लगी। इसके साथ ही अमेरिका से मुंबई आ रही एयर इंडिया की एक उड़ान में यात्रियों को ख़टमल के काटने की ख़बर सुनकर हैरानी हुई। आज हमें भी पता चला कि प्लेन में भी ऐसा होता है।

वहीं संडे की मस्ती प्रोग्राम में पेश की गई रिपोर्ट जो कि भारत और चीन के सहयोग के बारे में थी अच्छी लगी। अजीबो ग़रीब बातों में बताया गया कि दुनिया में एक ऐसी मछली है जो कि पानी के बाहर भी ज़िंदा रह सकती है। यह सुनकर वाकई हैरानी हुई। यह मछली दो से चार साल तक पानी के बाहर सूखे मैदान में ज़िंदा रह सकती है जो कि ख़ुद को कीचड़ में ढक लेती है। इस बात ने हमें सोचने पर मज़बूर कर दिया। आगे प्रोग्राम में पेश प्रेरक कहानी अमीर कौन बहुत पसंद आई। क्योंकि आजकल अमीर उसको माना जाता है जिसके पास ज्यादा धन दौलत हो मगर असल में अमीर वही होता है जो दिल का भी अमीर हो। कुल मिलाकर पूरा प्रोग्राम बहुत अच्छा लगा। एक बढ़िया प्रस्तुति के लिए आपका धन्यवाद।

गुरमीत जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। वे चीन के रेलवे नेटवर्क के बारे में जानना चाहते हैं। प्रियंजीत कुमार घोषाल जी, मैं आपको बताती हूं कि वर्ष 2017 के अंत तक चीन में रेलमार्ग की कुल लम्बाई एक लाख सताईस हजार किलोमीटर थी, जिसमें हाई स्पीड रेलवे की कुल लम्बाई पच्चीस हजार किलोमीटर है। चीन में हाई स्पीड रेलवे के निर्माण में तेज विकास हो रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2020 तक हाई स्पीड रेलवे की कुल लम्बाई तीस हजार किलोमीटर के लगभग होगी। पिछले साल तीन अरब तीन करोड़ अस्सी लाख लोगों ने रेलवे से सफर किया, जबकि रेलवे से दो अरब इकानवे करोड़ नब्बे लाख माल का परिवहन किया गया है।

 

अनिलः लीजिए दोस्तों अब समय हो गया है अगले पत्र का, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि अपने पसंदीदा कार्यक्रम आपका पत्र मिला को इस बुधवार को उत्साह के साथ सुना। लगातार नए श्रोताओं के हमारे इस परिवार में शामिल होने से मन उत्साहित है। मैं आपके माध्यम से उनका अभिनंदन करता हूं। 24 घंटे समाचारों के टीवी प्रसारण के बावजूद लोगों की रेडियो में रूचि इस बात का खुला प्रमाण है कि रेडियो की लोकप्रियता सदैव रही है और भविष्य में भी रहेगी। महज चंद मिनटों में समाचार के साथ रोचक और ज्ञानवर्धक खबरों का मिलना सुखद अहसास कराता है, जबकि टीवी के समक्ष घंटों बैठकर हमें यह सामग्री उपलब्ध नहीं हो पाती, क्योंकि विज्ञापनों के भरमार होती है। हम आशा करते हैं कि भविष्य में सीआरआई के श्रोताओं में लगातार बढ़ोतरी इसी प्रकार होती रहेगी।

जबकि कार्यक्रम "संडे की मस्ती" का नया अंक भी अच्छा था। संडे स्पेशल में शामिल विशेष रिपोर्ट से ब्रिक्स सम्मेलन पर‌ प्रोफेसर हेमंत जी के विचारों को जानने का अवसर मिला। उन्होंने विस्तार से चर्चा की ‌और कई महत्वपूर्ण बातों को उजागर किया। इसके साथ ही चीन के योगदान को दर्शाया और भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए भविष्य के लाभ में उसके योगदान की सही व्याख्या की।

वहीं सीआरआई हिन्दी के लाइव पेज पर मीरा जी ने चीनी और भारतीय चाय पर चर्चा की और सहयोगी साथी अनिल जी भी मौजूद थे, बहुत अच्छा लगा। उन्होंने चाय पर विस्तार से जानकारी उपलब्ध कराई और यह सब देखकर हमारे मुंह में भी पानी आ गया। अनिल जी से बहुत सारी बातें करने का मन था, लेकिन वह तो टेस्टी आइस चाय पीने में व्यस्त थे। मीरा जी ने मधुर गीत सुनाया तो अच्छा लगा। आशा है इसी प्रकार आगे भी नई रोचक जानकारी के साथ नई जगह से लाइव प्रसारण देखने का अवसर प्रदान करते रहेंगे।

सादिक आजमी जी, उम्मीद है कि आपसे अगली बार बात जरूर होगी। हां चाय का स्वाद तो जबरदस्त था। हमारे साथ फेसबुक पर जुड़े रहने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

ललिताः दोस्तों, अब समय हो गया है नए पत्र का, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" में सीआरआई के एक पुराने श्रोता भाई योगेश्वर त्यागी और उनके भतीजे शुभम से की गयी बातचीत सुनाई गई, जो कि कानों में मिश्री सी घोल गयी। चीन, चीनी समाज, संस्कृति और सभ्यता के प्रति उनका लगाव क़ाबिल-ए-ताऱीफ लगा। यदि सभी की सोच योगेश्वर जैसी हो जाये, तो चीन-भारत के बीच के तमाम मसले ही हल हो जायें। मुझे विचारों के अलावा उनकी वाणी की मिठास और विनम्रता प्रभावित करती है। भारत और चीन के बीच तमाम मसले और विवाद अपनी जगह हैं, परन्तु आम चीनी लोगों के भारतीयों के प्रति व्यवहार में कोई कमी नहीं है। यह बात तो तीन साल पहले मैं स्वयं भी चीन जाकर महसूस कर चुका हूँ। चीन में शुभम का पहला अनुभव भी यादगार रहा।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" के तहत आर्थिक समाचारों में चीनी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा ज़ारी आंकड़ों के हवाले से दी गई यह जानकारी कि गत छह महीने की अवधि में चीनी निवेशकों द्वारा विश्व के 151 देशों और क्षेत्रों के कुल 3617 विदेशी उद्यमों में ग़ैर-वित्तीय प्रत्यक्ष पूंजीनिवेश के तौर पर 57 अरब 18 करोड़ अमरीकी डॉलर का निवेश किया गया है, जो कि पिछले साल की इसी अवधि के मुक़ाबले कोई 18.7 प्रतिशत अधिक है, सूचनाप्रद लगी।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" के तहत जोहान्सबर्ग में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर दो विशेष लेख प्रस्तुत किये गये। पता चला कि ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित पांच देशों का यह समूह 'ब्रिक्स' पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं से ताल्लुक रखता है।

साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत चीन की पहल पर डेढ़ साल पहले औपचारिक तौर पर स्थापित एशिया इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक की अब तक की विकासयात्रा पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि एआईआईबी के सदस्यों की संख्या 57 से बढ़कर अब 86 हो चुकी है और बैंक के निवेश में भाग लेने वाली बुनियादी संरचनाओं की निर्माण परियोजनाओं की संख्या भी 26 हो चुकी है, जिसमें दस से अधिक देश शामिल हैं और ऋण की कुल राशि साढ़े चार अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में जहां श्रोताओं की निरन्तर बढ़ती संख्या देख दिल बाग़-बाग़ हो उठता है, वहीं यह भी महसूस होता है कि पत्रोत्तर का खोया वैभव पुनः लौट आया है। अब सीआरआई को भी चाहिये कि इस ज़ज़्बे को क़ायम रखने के लिए कुछ प्रयास किये जाये। मेरी राय में इसके लिये 'सप्ताह का पत्र', 'मासिक पहेली' और 'निबन्ध प्रतियोगिता' का आयोजन आदि कदम उठाये जा सकते हैं।

सुरेश जी, आपका सुझाव बहुत अच्छा है और श्रोताओं की बढ़ती संख्या हमें भी उत्साहित करती है, धन्यवाद।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत गत 14 जुलाई को चीनी बाल थिएटर में उद्घाटित आठवें चीनी बाल नाटक दिवस पर पेश रिपोर्ट दिलचस्प लगी। पता चला कि चीनी बाल नाटक दिवस आयोजन के दौरान ही पहली बार चीनी राष्ट्रीय श्रेष्ठ परंपरागत संस्कृति सप्ताह भी आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों को परंपरागत संस्कृति की सुन्दरता को महसूस कराना है। एक अन्य समाचार में श्रीलंकाई चीनी संस्कृति केन्द्र और चीनी विदेश विभाग के आदान-प्रदान केन्द्र द्वारा श्रीलंकाई बच्चों के लिये तीस वर्षों का अनुभव प्राप्त अध्यापक च्यू यू द्वारा शाही पेंटिंग प्रशिक्षण दिलवाये जाने संबंधी जानकारी भी अच्छी लगी।

साप्ताहिक "संडे की मस्ती" हर बार की तरह आज भी लाज़वाब रहा। 'संडे स्पेशल' में दक्षिण अफ़्रीका में सम्पन्न दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। ब्रिक्स के अब तक के कार्यकलाप पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में चीन और दक्षिण-पूर्वी एशियायी अनुसंधान केन्द्र के उप-प्रोफ़ेसर हेमन्त अदलखा से की गयी बातचीत एक निचोड़ पेश करने में कामयाब रही। उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ब्रिक्स समूह के पांच देशों में चीन-भारत की महती भूमिका रेखांकित की। उनका यह कहना बिलकुल सही लगा कि चीन स्वयं द्वारा हासिल उपलब्धियों का लाभ अब अन्य देशों को पहुंचा रहा है। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सुनते हैं दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू का पत्र। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "टी टाइम" में सुना कि 'बिग बॉस' से जुड़ी अब ताजा जानकारी सामने आई है। इंडिया फोरम्स वेबसाइट के मुताबिक मेकर्स ने शो की तैयारी पूरी कर ली है और यह शो 16 सितंबर से टीवी पर ऑन एयर होगा। यह जानकारी बिल्कुल ताजा लगी।

कार्यक्रम के अगले भाग में भारत के गुजरात केन्द्रीय विश्वविद्यालय में चीनी भाषा पढ़ रहे छात्र उदय शंकर मिश्रा के साथ बातचीत के मुख्य अंश सुनाये गये। इस बातचीत में उन्होंने चीन और भारत के स्वतंत्र होने का साल, चीनी भाषा चुनने का कारण, वीचैट द्वारा चीनी लोगों से मित्रता करने वाली बात और चीन भारत सम्बन्धों पर संदेश दिया, जो बेहद अच्छी लगी।

कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में बताया गया कि चीन में प्रसिद्ध मशरूम का नाम है लींगची, जो चीनी चिकित्सा पद्धति में दवा के काम आता है और शाकाहारी के लिए पौष्टिक आहार है। चीन की प्राचीन परी कथाओं में लींगची को हमेशा सौभाग्य, समृद्धि और दीर्घायु होने का प्रतीक माना गया है। तिब्बत के न्यिंग-ची शहर के लांगऔ गांव में सात गरीब परिवारों द्वारा लींगची मशरूम उगाकर एक साल में ही पूरे गांव के 47 परिवारों ने अपने जीवन में बेहतरीन सुधार कर लिया है।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि सप्ताहिक कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में टिप्पणीकार की समीक्षा में चीन के शांगहाई शहर में रहकर दो वर्षों से पीएचडी की पढ़ाई कर रही भारतीय ज्योति सिंह से भेंटवार्ता सुनायी गयी। ज्योति सिंह जी की नजर में शांगहाई विश्व में सर्वश्रेष्ठ शहर है। उनके द्वारा बताया गया चीन का अनुभव बेहद पसन्द किया गया। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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