20180704

2018-07-04 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत पिछले 16 जून को पेइचिंग स्थित कैपिटल थिएटर में मंचित चीन के मशहूर क्लासिक नाटक 'टी हाउस' के सातवें प्रदर्शन पर पेश रिपोर्ट सूचनाप्रद लगी। पता चला कि नाटक 'टी हाउस' की पटकथा चीन के मशहूर लेखक लाओ श द्वारा सन् 1956 में लिखी गयी थी और यह पेइचिंग के एक टी हाउस की कहानी पर आधारित है। यह जान कर आश्चर्य हुआ कि गत 28 मई को जब इसकी टिकटों की बिक्री शुरू हुई तो पौ फटने से पहले ही लोगों की लम्बी कतार लग चुकी थी और बहुत से लोगों को टिकट से वंचित रहना पड़ा। इस श्रेष्ठ नाटक के इतिहास के बारे में जान कर हमारी भी इसे देखने की उत्कट इच्छा उत्पन्न हुई। 'काश' इसका हिन्दी वर्ज़न उपलब्ध होता।

कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" के अंतर्गत रिसैप्शन में आयी एकाएक गड़बड़ी के कारण बात ठीक से समझ में नहीं आयी, जिसका मुझे खेद है। वैसे छेनश्वे शहर के पास से गुजरती ट्रेन का ज़िक्र करते हुये बताया गया था कि कभी ह्वेन्गसांग भी इसी मार्ग से गुज़रे थे। इसके अलावा चीन की मशहूर मायचिशान गुफ़ाओं का ज़िक्र भी किया गया। छिंगलिंग पर्वतमाला के बारे में भी बहुत कुछ बताया जा रहा था।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आर्थिक जगत" में रिपोर्ट 'ब्राज़ील में बढ़ रहा है चीनी पूंजी निवेश' सुनी, जो कि अच्छी लगी। रिपोर्ट सुन कर पता चला कि ब्राज़ीली परियोजना मंत्रालय द्वारा मई में जारी आंकड़ों के अनुसार चालू वर्ष के पिछले 4 महीनों में ब्राजील में चीनी उद्यमों के निवेश में बड़ा इजाफा हुआ है और कुल निवेश 1 अरब 34 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक जा पहुंचा है, जो कि पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुक़ाबले 36 लाख अमेरिकी डॉलर अधिक है। यह भी पता चला कि ब्राजील में चीनी निवेश संस्थाएं और उद्योग दिन-प्रतिदिन नये-नये क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं, जिनमें ऊर्जा, कृषि, मेकैनिकल उपकरण, शिक्षा और खुदरा क्षेत्र शामिल हैं।

साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" के तहत सुनवाई गयी शीआन में विगत पन्द्रह वर्षों से रहने वाले सिल्करूट एम्बेसडर, सिल्करूट इंटरनेशनल चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स सदस्य देव रातुरी से ली गयी भेंटवार्ता के कारण आज कुछ ख़ास ही बन पड़ा। उन्होंने बख़ूबी समझाया कि चीन को अवसरों की भूमि क्यों कहा जाता है। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने भारत-चीन तुलनात्मक स्थिति पर भी सटीक विचार व्यक्त किये। पहली बार पता चला कि चीन में सत्तर देशों और कोई दो हज़ार सदस्यों वाला इंटरनेशनल चेम्बर नामक कोई इदारा है, जो कि सिलकरूट के तमाम देशों के बीच समन्वय कायम करता है। देव द्वारा चीन का इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत का आईटी एवं औषधि क्षेत्र में आगे होने पर व्यक्त विचार भी बिलकुल सही जान पड़ा। यह जान कर खुशी हुई कि भारत फ़िल्मों और सॉफ्टपॉवर के मामले में चीन से कहीं आगे है।

 

अनिलः सुरेश जी आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत हाल ही में भारत स्थित चीनी राजदूत ल्वो च्याओह्वेई द्वारा फानगू थिंक टैंक द्वारा आयोजित 'हाथ मिलाकर आगे बढ़ें', 'ड्रैगन-हाथी एक साथ नाचें' शीर्षक 'नये युग में चीन-भारत संबंध' संगोष्ठी में भाग लिये जाने और उसमें अहम भाषण दिये जाने पर पेश रिपोर्ट सूचनाप्रद लगी।

उनका यह कहना कि हालिया चीन-भारत संबंध के विकास के लिए कुछ श्रेष्ठ थिंक-टैंक की आवश्यकता है और फानगू थिंक-टैंक की प्रणाली लचीली है, जिससे विभिन्न पक्षों के संसाधनों को इकट्ठा कर चीन-भारत संबंधों के लिए योगदान किया गया है, यह सही जान पड़ा।

उन्होंने वूहान में हुई चीन-भारत शीर्ष नेताओं की अनौपचारिक भेंटवार्ता की चर्चा पर कहा कि चीन और भारत के द्विपक्षीय संबंध इतिहास में 'मील का पत्थर' साबित होंगे।

वहीं कार्यक्रम के अगले हिस्से में इधर के वर्षों में चीनी उच्च शिक्षालयों और विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा संयुक्त तौर पर शिक्षा मान उन्नत करने हेतु गठित शैक्षिक संस्थाओं पर दी गयी जानकारी भी अच्छी लगी। देखा जाये तो चार दशक पहले चीन द्वारा शुरू की गयी खुले द्वार नीति से न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार-उद्योग, बल्कि शिक्षा क्षेत्र सहित तमाम क्षेत्रों में खुलापन देखा जा सकता है। चीनी शिक्षा मंत्रालय द्वारा दिया गया यह तथ्य कि हाल में चीन ने विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर 2600 से अधिक संस्थाओं का गठन किया है, यह चौंकाने वाला है।

श्रोताओं की अपनी चौपाल साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में आज भी श्रोता-मित्रों के तमाम पत्र और प्रतिक्रियाएं सुन कर तबीयत खुश हो गयी। व्हट्सएप्प के ज़रिये जमशेदपुर से पेड़-पौधों के बारे में भेजी गई मित्र एसबी शर्मा की जानकारी भी उपयोगी लगी।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में सन् 1950 में जॉर्डन नदी के तट पर बने आइदा स्कूल, जहां फिलिस्तीनी शरणार्थियों के चौथी से नवमी कक्षा तक के कोई चार सौ बच्चे पढ़ते हैं, की शिक्षा की स्थिति पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। यह जान कर दुःख हुआ कि फिलिस्तीन और इजरायल के बीच होने वाली झड़पों से यह स्कूली बच्चे कितने प्रभावित होते हैं। खुशी की बात यह लगी कि अब इस स्कूल की पांच मंज़िला नयी इमारत बनने वाली है।

कार्यक्रम "टी टाइम" के अन्तर्गत कर्नाटक के 42 वर्षीय ऑटोरिक्शा चालक मुनेश के बारे में यह जान कर सम्मान में सर झुक गया कि वह गर्भवती महिलाओं और अन्य असहाय लोगों को मुफ़्त सेवा प्रदान करते हैं, जब कि ऑटोरिक्शा भी उनका अपना नहीं, किराये का है। उनके ज़ज़्बे को सलाम।

जानकारियों के क्रम में वीडियो गेम्स बच्चों की सेहत के लिये कितने ख़तरनाक होते हैं, इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के हवाले से दी गयी जानकारी दुरुस्त लगी।

कार्यक्रम में पेश श्रोताओं की प्रतिक्रिया और तीनों ज़ोक्स कुछ पुराने, पर रोचक लगे।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत तिब्बती पठार पर चिकन पालन के ज़रिये ग़रीबी उन्मूलन सम्बन्धी प्रयासों पर पेश रिपोर्ट सुन कर तिब्बती चिकन की विशेषता और तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के न्यिंग-ची प्रिफेक्चर में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार करने को लेकर चलाये जा रहे चिकन फार्मों पर दी गई जानकारी हासिल हुई। हालांकि शुध्द शकाहारी होने के कारण चिकन या ऐसे कारोबार से मेरा कोई सरोकार तो नहीं, परन्तु रिपोर्ट सुन कर इतना एहसास ज़रूर हुआ कि चीन सरकार द्वारा ग़रीबी उन्मूलन हेतु किये जा रहे प्रयास ज़बरदस्त हैं।

कार्यक्रम में आगे चीन सरकार द्वारा साल 2020 तक रखे गये तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के कोई साठ लाख़ लोगों को ग़रीबी से मुक्त कराने के लक्ष्य की चर्चा भी अहम लगी।

वहीं कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" के अंतर्गत मशहूर भारतीय संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित के ललित पण्डित से ली गयी भेंटवार्ता का पहला भाग सुना। पता चला कि संगीत उन्हें पाँच पीढ़ियों से विरासत में मिला और उनके पिता पण्डित प्रताप नारायण और चाचा पण्डित जसराज भी मशहूर संगीतकार थे। ललितजी ने शास्त्रीय संगीत की बारीकियों को भी बख़ूबी समझाया और यह बतलाया कि फ़िल्मों में संगीत देने के लिये गायन का अनुभव होना भी कितना ज़रूरी है।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं के पसंदीदा फ़िल्मों के छह गानों के साथ दी गयी तमाम जानकारी भी रोचक, ज्ञानवर्ध्दक और आश्चर्यजनक लगी।

वहीं रविवार को समाचारों के बाद पेश वृत्तचित्र "साहित्य प्रसारण ल्यांगच्याहो" का पहला भाग सुना, जिसके तहत पिछली सदी के साठ वाले दशक में चीनी महानायक शी चिनफिंग द्वारा महज़ दस वर्ष की उम्र में पेइचिंग से शैनशी प्रान्त स्थित येनआन शहर के ल्यांगच्याहो नामक छोटे से गांव में जाकर बिताये गये समय के संस्मरण सुनाया जाना महत्वपूर्ण लगा। वृत्तचित्र सुन कर महसूस हुआ कि शी चिनफिंग वास्तव में, जड़ों से जुड़े हुये व्यक्ति हैं और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने के बाद भी अहंकार उन्हें छू तक नहीं पाया है। उनकी रहनुमाई में चीन और पूरा विश्व बहुत तरक़्क़ी करेगा, इसमें मुझे तनिक भी संशय नहीं।

साप्ताहिक "संडे की मस्ती" में पेश भेंटवार्ता और जानकारी अच्छी थी। कार्यक्रम पर श्रोताओं की प्रतिक्रिया तो हर बार की तरह आज भी लाज़वाब रही। धन्यवाद फिर एक उम्दा प्रस्तुति के लिये।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए अब पेश है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह का पत्र। लिखते हैं कि पिछला टी-टाईम प्रोग्राम अच्छा लगा। इसमें दी गई जानकारियों में कर्नाटक के मनीष जी जो कि आटो चालक हैं और वह गर्भवती महिलायों और सैनिकों और बीमार लोगों को निशुल्क अस्पताल ले जाते हैं, यह सुनकर मन को बहुत खुशी हुई। और यह सुनकर हैरानी भी हुई कि आटो किराये पर चलाते हैं। हां, यह कहना चाहूंगा कि ऐसे लोगों पर ही तो दुनियां कायम है। वरना अकसर बीमार लोगों को आटो वाले मुफ्त में ले जाना तो दूर उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हैं और ज्यादा पैसे मांगते हैं। लेकिन मनीष जी जैसे लोगों को हमारा सलाम है। और दुआ करते हैं कि ख़ुदा उनको और हिम्मत दे और उनके जीवन में खुशियां आएं।

वहीं पश्चिम बंगाल के एक गांव में 18 फीट लंबे और 40 किलो वजनी अजगर को एक गांव के लोगों द्वारा पकड़े जाना वाकई में बहादुरी का काम लगा।

जबकि संडे की मस्ती प्रोग्राम हर बार की तरह पसंद आया। अजीबो ग़रीब और चटपटी बातों के अंक में मध्य प्रदेश के सुरेश गंगवाल जो कि चाय की दुकान चलाते हैं की बेटी आंचल गंगवाल का पायलट बनने की बात सुनकर बहुत अच्छा लगा। यह इस बात का सबूत है कि अगर इरादा पक्का हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता।

गुरमीत जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बेहद शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि आपकी पसंद कार्यक्रम में पेश किए गए गाने बहुत अच्छे लगे। जबकि टी-टाइम प्रोग्राम में कर्नाटक के मुनेष नामक एक ऑटो ड्राइवर गर्भवती महिलाओं और पीड़ित लोगों आदि को मुफ्त में अपने ऑटो में बिठाते हैं। यह खबर हमें भी प्रेरित करती है। वहीं पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के पास अजगर को पकड़े जाने का समाचार भी सुना। जबकि एमेजॉन कंपनी के सीईओ दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने, यह खबर भी जानी। वहीं आपका पत्र मिला कार्यक्रम में मेरा पत्र शामिल करने के लिए धन्यवाद।

प्रियंजीत कुमार घोषाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए दोस्तों अब पेश करते हैं अगला पत्र, जिसे भेजा है छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश से उदय भान ठाकरे, दीपक ठाकरे, नवीन ठाकरे, ग्रंथ ठाकरे, शिखा ठाकरे और चंद्रभागा ठाकरे आदि ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम बाल महिला स्पेशल में बताया गया कि 1950 में जॉर्डन नदी के तट पर बने आईदा स्कूल जहां फिलिस्तीन शरणार्थी बच्चे चौथी से 9वीं की पढ़ाई करते हैं।

वहीं टी टाइम के अंतर्गत कर्नाटक के ऑटो चालक के बारे में जाना। जानकारियों के क्रम में जलपाईगुड़ी के समीप एक गांव में फॉरेस्ट रेंजर और अजगर के बीच संघर्ष के बारे में भी सुना। दुनिया के सबसे अमीर आदमी के बारे में जाना और बच्चों के लिए वीडियो गेम स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक है और दुनिया के सात अजूबों में से एक पेरिस के एफिल टावर को आतंकी से बचाने जाने के बारे में भी जानकारी मिली।

उदय भान ठाकरे जी ने एक सुझाव भी पेश किया है। उन्होंने कहा कि आपसे अनुरोध है कि जैसा कि रेडियो जापान, रेडियो रसिया, रेडियो जर्मनी दिल्ली में स्वेटर सम्मेलन किया करते थे। उसमें सभी श्रोता भाई बहन और उद्घोषक और रेडियो के मेहमान आते थे। उसी प्रकार यदि रेडियो सीआरआई को एक बार दिल्ली में सम्मेलन बुलाना चाहिए, जिसमें हम सब उपस्थित होकर एक दूसरे से रूबरू हो सकेंगे।

उदय जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आपका सुझाव अच्छा है, अगर मौका मिला, तो हम भी भारत में श्रोता सम्मेलन का आयोजन करवाएंगे। धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि जुलाई के पहले दिन अपने पसंदीदा कार्यक्रम "संडे की मस्ती" का भरपूर आनंद लिया। आरंभ में नियमानुसार चीनी गीत सुनवाया गया। चूंकि महीने का पहला अंक था और हमेशा की भांति हमें इंतजार रहता है मीरा जी के स्वर में मधुर गीत का। इस बार संडे स्पेशल में चाइना में रह रहे पी के सिंघल जी के विचारों को ‌‌‌सुनवाया गया, जो अच्छा लगा। उन्होंने छिंगताओ शहर में रोजगार के उपलब्ध अवसरों के साथ वहां की जनता की भूमिका पर दिल खोलकर चर्चा की।

श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना अच्छा लगा। धन्यवाद स्वीकार करें अच्छी प्रस्तुति हेतु।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" ध्यानपूर्वक सुना, जिसमें चीनी संस्था सिल्क रोड चेम्बर्स ऑफ इंटरनेशनल कॉमर्स के एम्बेस्डर और भारतीय मेहमान देव से ली गयी भेंटवार्ता के मुख्य अंश सुनाये गये, जिसमें उन्होंने भारत और चीन की तुलनात्मक स्थिति पर बहुत अच्छे विचार दिये। देव जी के अनुसार आगे बढ़ने के लिए एक दूसरे को समझना पड़ेगा और दोनों की संस्कृति को अच्छी तरह जानना पड़ेगा।

 

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि भारत स्थित चीनी राजदूत ने नये युग में चीन-भारत सम्बन्ध की संगोष्ठी में भाग लिया और भाषण दिया। उन्होंने कहा कि हालिया चीन भारत सम्बन्ध के विकास के लिये कुछ श्रेष्ठ थिंक टैंक की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि फान्गू थिंक टैंक की प्रणाली बहुत लचीली है और विभिन्न पक्षों के संसाधनों को इकट्ठा करके चीन भारत सम्बन्धों के लिये योगदान दिया गया है।

वहीं श्रोताओं के चहेता साप्ताहिक कार्यक्रम "आप का पत्र मिला" में सबसे पहले जैसलमेर राजस्थान के श्रोता भाई दिनेश चौहान और हस्ती सिंह चौहान का पत्र पढ़ा गया। उसके बाद क्रमशः अन्य श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए गये। सभी श्रोताओं ने जो जानकारी आप तक पहुंचाई और इसके अलावा अंत में जमशेदपुर झारखण्ड के श्रोता भाई एस बी शर्मा द्वारा भेजा गया पेड़ सम्बन्धित संदेश ज्ञानवर्द्धक लगा। वास्तव में पेड़ बहुत लाभदायक और प्रदूषण नियंत्रण करने में भी उनकी अहम भूमिका होती है।

 

ललिताः शंभू जी लिखते हैं कि कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में बताया गया कि आइदा शरणार्थी शिविर की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी जो जोर्डन नदी के पश्चिम तट पर बेतलेहम में स्थित है और इसका कुल क्षेत्रफल 0.71 वर्ग किलोमीटर है। शिविर से बेइट जाला जाने के रास्ते पर एक स्कूल है, जहां शरणार्थी बच्चे शिक्षा ले सकते हैं। विद्यार्थी यहां से पास होने के बाद बेतलहेम के हाई स्कूल में अपनी शिक्षा जारी रख सकेंगे। इस स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी आइदा शरणार्थी शिविर और आसपास के शरणार्थी शिविर से आए हैं। हाल ही में सऊदी अरब से चंदा मिला है जिससे स्कूल का पुनर्निर्माण करते हुए स्कूल के पास एक चिकित्सा केंद्र की स्थापना भी की जाएगी। यह रिपोर्ट पसन्द आई।

साप्ताहिक कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में सुना कि तिब्बती पठार पर लोगों को चिकन पालने की आदत है और इसके मांस में और अंडे में समृद्ध पोषक मौजूद है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के न्यिंग-ची प्रिफेक्चर में गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य साकार करने के लिए तिब्बती चिकन पालन-फार्म का जोरदार विकास हुआ है। यह रिपोर्ट रेडियो में सुनकर तो अच्छा लगा, साथ ही वेबसाइट पर पढ़कर पूर्ण जानकारी मिली।

 

अनिलः उधर कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में मीरा दीदी ने सबसे पहले बॉलीवुड म्यूजिक के अंतर्गत हिन्दी गीत सुनाए, जो बेहद पसंद आए। टिप्पणीकार की समीक्षा में भारतीय संगीतकार पण्डित प्रताप नारायण के पुत्र ललित पण्डित से भेंटवार्ता सुनायी गयी जो अच्छी आयी।

वहीं रोचक और आश्चर्यजनक जानकारी में मंगल ग्रह के बारे में कुछ रोचक बातें सुनी गईं, जिसमें बताया गया कि मंगल ग्रह को लाल ग्रह भी कहा जाता है। पृथ्वी की तुलना में मंगल ग्रह का गुरुत्वाकर्षण केवल 38 प्रतिशत होता है। पृथ्वी पर के 100 किलोग्राम वजन मंगल ग्रह पर मात्र 37 किलोग्राम रह जाएगा। यह तो आश्चर्य चकित करने वाली बात प्रतीत होती है। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

शंकर जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है शंभू जी द्वारा भेजा गया यह संदेश, जो कि उन्होंने व्हट्सएप के जरिए हम तक पहुंचाया है, जिसका शीर्षक है कड़वा सच।

-एक पेड़ से लाखों माचिस की तिलियाँ बनाई जा सकती है।

पर एक माचिस की तिली से लाखों पेड़ भी जल सकते हैं।

कोई चाहे कितना भी महान क्यों ना हो जाए, पर कुदरत कभी भी किसी को महान बनने का मौका नहीं देती।

-कंठ दिया कोयल को, तो रूप छीन लिया।

रूप दिया मोर को, तो इच्छा छीन ली।

दी इच्छा इन्सान को, तो संतोष छीन लिया।

दिया संतोष संत को, तो संसार छीन लिया।

मत करना कभी भी ग़ुरूर अपने आप पर 'ऐ इंसान',

भगवान ने तेरे और मेरे जैसे कितनो को मिट्टी से बना कर, मिट्टी में मिला दिए।

शंभू जी, यह संदेश भेजने के लिए आपका बेहद शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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