20180613

2018-06-13 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है बकानी खुर्द, झालावाङ राजस्थान से राजेश कुमार मेहरा का। लिखते हैं कि 31 मई का टी टाइम कार्यक्रम की शुरू में तकनीक संबंधी खबर में एप्पल के लांच होने वाले स्मार्टफोन के बारे में जानकारी और वायरलेस एसेसरी निर्माता कम्पनी रेपू के नये गेमिंग कीबोर्ड के लांच होने के बारे में अच्छा लगा। फिल्मी जानकारी में सलमान खान और प्रियंका चौपड़ा की आने वाली फिल्म भारत के बारे में भी जानकारी अच्छी थी। डार्क चाकलेट खाने से टेन्शन दूर होने की खबर रोचक रही। हेल्थ खबर में टायलेट करते समय रखी जाने वाली सावधानियां बहुत महत्वपूर्ण कही जाएंगी।

वहीं 7 जून का टी टाइम कार्यक्रम में कैलाश मानसरोवर से जुड़े प्रोजेक्ट वैज्ञानिक डा. राजन कोट्टू से की गई बातचीत बहुत खास रही। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं के ईमेल और शामिल जोकस भी अच्छे लगे। बेहतर पेशकश के लिए धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल से शिवेन्दु पाल ने। लिखते हैं कि सीआरआई हिंदी सेवा ने शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के बारे में बहुत सारी जानकारी दी है। फेसबुक और वेबसाइट पर सीधा प्रसारण किया। इस लिए मैं हिंदी सेवा को बहुत सारी बधाई देता हूं। अब तक चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन तीन बार आयोजित हो चुके हैं, दो बार शांगहाई में, जबकि एक बार पेइचिंग में। इस साल 18वीं एससीओ शिखर सम्मेलन छिंगताओ में आयोजित हुआ। और इस बार भारत और पाकिस्तान नये सदस्य के रूप में शामिल हुए हैं।

6 जून का आपका पत्र मिला कार्यक्रम बहुत अच्छा था। मेरे पत्र शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

वहीं टी टाइम कार्यक्रम भी बहुत अच्छा लगा। बहुत सारी अच्छी और रोमांचक जानकारी सुनने को मिली।

इस हफ्ते के आप की पसंद, सन्डे की मस्ती, नमस्कार चाइना, विश्व का आईना, चीन का तिब्बत और अन्य कार्यक्रम भी बहुत अच्छे थे।

शिवेन्दु पाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः अब लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि छह जून का विश्व का आईना कार्यक्रम सुना। चीन के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए ट्रिब्यून पेपर के एसोसिएट एडिटर के प्रसाद के साथ बातचीत अच्छी लगी। वहीं आपका पत्र मिला कार्यक्रम में मेरे पत्र को शामिल करने के लिए शुक्रिया। जबकि बाल महिला स्पेशल, संडे की मस्ती आदि कार्यक्रम भी अच्छे लगते हैं। वहीं टी-टाइम कार्यक्रम में वैज्ञानिक राजन कोटू के साथ वार्ता शानदार लगी।

उधर दक्षिण एशिया फोकस कार्यक्रम में एससीओ सम्मेलन को लेकर भेंटवार्ता पसंद आयी। इसके साथ ही आपकी पसंद कार्यक्रम में पेश गाने और जानकारी भी बहुत अच्छी लगी।

घोषाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बेहद शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि पिछले टी टाइम प्रोग्राम सुना, बढ़िया लगा। प्रोग्राम में कैलाश मान सरोवर प्रोजेकट के बारे में राजन कोटू से की गई चर्चा अच्छी लगी। यह जानकर बहुत ख़ुशी हुई कि इस के लिए भारत और चीन मिलकर काम कर रहे हैं।

आपकी पसंद कार्यक्रम में सुनाए गए सभी गीत अच्छे लगे और दी गई जानकारीयां हैरान करने वाली थी। मैक्सिको की एक 70 साल की औरत का प्रेगनेंट हो जाना वाकई अजीब सा लगा।

संडे की मस्ती कार्यक्रम में एससीओ के पहले मीडिया शिखर सम्मेलन के बारे में रिपोर्ट अच्छी लगी, जिसमें भारत के चार सदस्यों से गठित भारती मीडिया प्रतिनिधि मंडल ने भाग लिया।

आगे अजीबो ग़रीब और चटपटी बातों के अंक में पाकिस्तान के तरबूज काटने वाले मुहम्मद उवेज़ की तस्वीर इंटरनेट पर वाइरल होना और एक अंकल का सोशल मीडिया पर छा जाना जो कि गोविंदा की तरह डांस कर रहा है, यह जानकारी भी अच्छी लगी। बेहतर प्रोग्राम पेश करने के लिए आपका फिर से धन्यवाद।

गुरमीत सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः अब दोस्तो लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि वर्तमान समय में मैं सऊदी के जुबैल शहर में कार्यरत हूं और सीआरआई का हिंदी प्रसारण मोबाइल ऐप के माध्यम से सुनता हूं। कार्यक्रम संडे की मस्ती सुनने का अवसर मिला, जिसकी शुरुआत में चीन की मशहूर गायिका स्वर्गीय तंग ली चुंग की आवाज में मधुर गीत सुनने का अवसर मिला। संडे स्पेशल में भारत के मशहूर व्यापारी पूरन एल से लिया गया साक्षात्कार सुनवाया गया, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव दिल खोलकर साझा किए। पिछले सालों से चीन जापान चीन और भारत में आपसी संबंधों में सुधार के अनगिनत प्रयास किए गए हैं, जिसके सकारात्मक बिंदु सामने आ चुके हैं, चाहे वह मनोरंजन के क्षेत्र में हो या फिर व्यापार के। पहल की जो आशा की जाती है, उसको लेकर बहुत अच्छा काम किया गया है। चीन और भारत के संबंध आगामी दिनों में और मधुर होंगे और दोनों देश मिलकर एशिया महाद्वीप पर तरक्की खुशहाली के नए आयाम तय करेंगे।

कार्यक्रम आपका पत्र मिला में श्रोताओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि सीआरआई का हिंदी प्रसारण श्रोताओं में दिन प्रतिदिन लोकप्रिय होता जा रहा है। चाहे संडे की मस्ती हो, टी टाइम हो, अतुल्य चीन, दक्षिण एशिया फोकस, चीन का तिब्बत, बाल महिला स्पेशल आदि सभी कार्यक्रम अत्यंत रोचक और ज्ञानवर्धक होते हैं।

आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत पेश चीन में सुधार और खुलेपन की चालीसवीं वर्षगाँठ के अवसर पर आर्थिक विकास की मिसाल बने दक्षिणी चीन के शनजन की कहानी दिलचस्प लगी। वास्तव में, शनजन चीन की खुलेद्वार नीति की खिड़की ही नहीं, उसका साक्षी भी है। जान कर आश्चर्य होता है कि कैसे महज़ चार दशक की अल्पावधि में शनजन एक छोटे से मछुआरे गाँव से अंतरराष्ट्रीय मेट्रो सिटी में तब्दील हो गया।

कार्यक्रम "आर्थिक जगत" के अन्तर्गत प्रारम्भ में कुछ महत्वपूर्ण आर्थिक समाचारों का ज़िक्र किया गया, जिनमें चीन के बेल्ट एण्ड रोड़ से श्रीलंका को होने वाले लाभ पर कोलम्बो में श्रीलंकाई मंत्री समर विक्रमसिंहे द्वारा दिये गये बयान पर अहम जानकारी हासिल हुई।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" का आगाज़ मधुर चीनी गाने से किये जाने के बाद विशेष सेगमेण्ट में चीन में लम्बे समय से रहने वाले फ़िक़्क़ी के कार्यकारी निदेशक से ली गई विशेष भेंटवार्ता महत्वपूर्ण लगी। महज़ तेरह साल की उम्र में पहली बार चीन जाने वाले अतुल जी विगत चालीस वर्षों से लागू चीन में सुधार और खुलेपन की नीति के साक्षी रहे हैं और उन्होंने उसी के अनुरूप अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने छिंगताओ में आयोजित शांगहाई शिखर सम्मेलन के आयोजन और उसमें भारत के प्रवेश से पड़ने वाले प्रभावों पर भी सटीक विचार प्रकट किये।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में भी हर बार की तरह श्रोताओं के पत्रों और प्रतिक्रियाओं को पूरी तरज़ीह दी गई। व्हट्सएप्प के ज़रिये भाई शंकर प्रसाद शम्भू द्वारा प्रेषित ज़ोक्स भी गुदगुदाने में कामयाब रहे।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत इटली के बोलोग्ना में आयोजित बाल पुस्तक मेले पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि मेले में पुस्तक प्रदर्शनी और कॉपीराइट व्यापार के अलावा चीनी प्रतिनिधि मंडल, जिसने पहली बार मुख्य अतिथि देश के रूप में इस पुस्तक मेले में भाग लिया था, द्वारा अनेक अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन सहयोग कार्यक्रमों के प्रसार-प्रचार सम्बन्धी गतिविधियों का आयोजन किया। निश्चित तौर पर ऐसे बाल पुस्तक मेले देसी-विदेशी सांस्कृतिक मेलजोल में सकारात्मक भूमिका निभाते हैं।

और कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में दक्षिणी चीन में रहने वाली एक अल्पसंख्यक जाति थूच्या, जिसका देश के आर्थिक विकास में अहम योगदान है और जिसके जवान देश के दूसरे तमाम हिस्सों में जाकर काम करते हैं, के बारे में पेश रिपोर्ट अच्छी लगी।

 

अनिलः वहीं 9 जून को प्रस्तुत समाचारों में छिंगताओ में आयोजित शांगहाई सहयोग संगठन का अठारहवां शिखर सम्मेलन छाया रहा। इसके बीच में छिंगताओ स्थित मीडिया सेन्टर से अखिल द्वारा भेजा गया डिस्पैच भी अच्छा था, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री के छिंगताओ आगमन और दो माह के अरसे में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और नरेन्द्र मोदी के बीच दूसरी बार मिलने की महत्वपूर्ण जानकारी दी। समाचारों के बाद हमने अपने हरदिलअज़ीज़ साप्ताहिक कार्यक्रम "आपकी पसन्द" का भी पूरा मज़ा लिया। श्रोताओं के पसंदीदा फ़िल्म -झील के उस पार, अभय, दिल चाहता है, आशिक़ी, दीवाना और करण-अर्जुन के छह गीतों के अलावा आप द्वारा अपनी ओर से सुनवाया गया 'ज़िन्दगी ये सफ़र में है' गाना भी लाज़वाब लगा।

साप्ताहिक "संडे की मस्ती" का आगाज़ मशहूर चीनी गायिका क्वेंचियेन तांग द्वारा गाये 'सुन्दरी शिशे' शीर्षक मधुर गीत से किया जाना अच्छा लगा। संडे स्पेशल में 1 जून को पेइचिंग में छिंगताओ एससीओ शिखर सम्मेलन से पूर्व आयोजित प्रथम मीडिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाली प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया की उप-कार्यकारी सम्पादक प्रियंका टिक्कू से ली गयी बातचीत के मुख्य अंश सुन कर इस आयोजन के महत्व पर अहम जानकारी हासिल हुई। प्रियंका का यह कहना बिलकुल सही लगा कि शांगहाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से आतंकवाद के मुद्दे पर भारत को सदस्य देशों से समर्थन की अपेक्षा रहेगी।

आज के पत्र के अन्त में मैं आपको एक ऐसी जानकारी देना चाहता हूँ, जिसे सुन कर आप भी खुश हो जायेंगे। आज जैसे ही रेड़ियो सुन कर मैं आपको अपनी त्वरित रिपोर्ट लिखने बैठा मुझे रामदेवड़ा, जैसलमेर, राजस्थान से दिनेश चौहान नामक एक ऐसे श्रोता-मित्र का फ़ोन आया, जो नेत्रहीन होते हुये भी पढ़ाई करते हैं और सीआरआई हिन्दी के दीवाने हैं। उन्होंने कहीं से मेरा फ़ोन नम्बर हासिल कर मुझ से बातचीत की और इस बातचीत का ज़िक्र आपसे करने को कहा। वह सीआरआई के तमाम कार्यक्रम सुनते हैं, पर दृष्टिबाधित होने के कारण औरों से लिखवाते हैं। उनकी शिकायत है कि उनके पत्रों को शामिल नहीं किया जाता। बहरहाल, उनकी फ़रमाइश पर "आपकी पसन्द" में कोई गाना अवश्य सुनवा दीजियेगा, ताकि उन्हें खुशी हो। मैं पूरी कोशिश करूंगा कि आगे भी उनसे मिलने वाली हर सूचना आप तक अविलम्ब पहुंचाता रहूँ। धन्यवाद।

सुरेश जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। दिनेश चौहान जी को भी हम बेहद शुक्रिया अदा करते हैं।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "अतुल्य चीन" में सुनाया गया कि मात्र 40 वर्ष में ही चीन का शनजन एक छोटे से मछुआरे गाँव से अंतरराष्ट्रीय मेट्रो सिटी में बदल गया। हांगकांग से बिल्कुल सटा हुआ यह गाँव चीन के आधुनिक विकास की झलक पेश करता है। दक्षिण चीन के शनजन की यह कहानी चीन में सुधार और खुलेपन की चालीसवीं वर्षगाँठ के अवसर पर आर्थिक विकास की एक बहुत बढ़िया उदाहरण है।

 

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि पहली जून को पेइचिंग में शांगहाई सहयोग संगठन यानी एससीओ का पहला मीडिया शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जहाँ एससीओ सदस्य देशों के प्रेस विभागों के प्रमुखों ने 110 से अधिक मुख्यधारा के मीडिया अधिकारियों के साथ मीडिया सहयोग पर चर्चा की। इस सम्मेलन में 4 सदस्यों का एक भारतीय मीडिया प्रतिनिधि मंडल भी आया था, जिसमें पीटीआई, द इंडियन एक्स्प्रेस, द ट्रिब्यून और द टाईम्स ऑफ इंडिया के अधिकारी स्तर के मीडिया प्रतिनिधि शामिल थे। वहीं ट्रिब्यून के सह सम्पादक श्री के बी प्रसाद ने सीआरआई के साथ बातचीत अच्छी लगी।

श्रोताओं के चहेता साप्ताहिक "आप का पत्र मिला" में सबसे पहले श्रोता भाई सिद्धार्थ कुमार के पत्र को पढ़ा गया। उसके बाद क्रमश: छत्तीसगढ़ के श्रोता भाई आनन्द मोहन बैन, मध्य प्रदेश के श्रोता भाई उदय भान ठाकरे, कलकत्ता के श्रोता भाई प्रियंजीत कुमार, सऊदी अरब के सादिक आजमी, पंजाब के गुरमीत सिंह, उड़ीसा के मॉनिटर भाई सुरेश अग्रवाल, मेरे पत्र और पश्चिम बंगाल के श्रोता भाई शिवेन्दु पॉल का पत्र पढ़ा गया और अंत में मेरे द्वारा भेजा गया जोक्स सुनाया गया। बिहार की संवेदनशील कहानी पसंद करने वाले सभी श्रोताओं को हार्दिक धन्यवाद।

 

ललिताः शंभू जी लिखते हैं कि कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में सुनाया गया कि वर्ष 2018 के इटली बोलोग्ना बाल पुस्तक मेले में पुस्तकों की प्रदर्शनी और कॉपीराइट के व्यापार के अलावा चीनी प्रतिनिधि मंडल ने पहली बार मुख्य अतिथि देश के रूप में इस पुस्तक मेले में भाग लिया था और अंतर्राष्ट्रीय प्रकाशन सहयोग कार्यक्रम का प्रसार-प्रचार गतिविधियों का आयोजन किया। बोलोग्ना बाल पुस्तक मेले की चर्चा से हमें यह भी ज्ञात हुआ कि बाल पुस्तकों का प्रकाशन कॉपीराइट के सरल आयात-निर्यात से आज के देशी-विदेशी सहयोग तक पहुंच गया है।

कार्यक्रम "टी टाईम", "चीन का तिब्बत", "दक्षिण एशिया फोकस", "आप की पसंद" और "संडे की मस्ती" भी अच्छे लगे। अच्छे कार्यक्रम पेश करने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है शंभू जी द्वारा व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजा गया यह संदेश।

*महत्वपूर्ण बदलाव*

1. पहले शादियों में घर की औरतें खाना बनाती थीं और नाचने वाली बाहर से आती थीं, किन्तु अब खाना बनाने वाले बाहर से आते हैं और घर की औरतें नाचती हैं।

2. पहले लोग घर के दरवाजे पर एक आदमी तैनात करते थे ताकि कोई कुत्ता घर में न घुस जाये, किन्तु आजकल घर के दरवाजे पर कुत्ता तैनात करते हैं ताकि कोई आदमी घर में न घुस जाए।

3. पहले आदमी खाना घर में खाता था और लैट्रीन घर के बाहर करने जाता था, किन्तु अब खाना बाहर खाता है और लैट्रीन घर में करता है।

4. पहले आदमी साइकिल चलाता था और गरीब समझा जाता था, किन्तु अब आदमी कार से ज़िम जाता है साइकिल चलाने के लिए।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

 

 

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