20180530

2018-05-30 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

पंकजः आपका पत्र मिला कार्यक्रम सुनने वाले सभी श्रोताओं को पंकज श्रीवास्तव का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

पंकजः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल करेंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज़ करते हैं। इस बार कई नए श्रोताओं ने हमें पत्र भेजा है। पहला पत्र हमारे पास आया है दरभंगा बिहार से मो. मेराज आलम का। लिखते हैं कि मैं आपकी प्रसारण सेवा के लिए बिल्कुल नया श्रोता हूँ। मुझे सीआरआई हिन्दी सेवा की जानकारी शंकर प्रसाद शंभू से मिली है और उन्होंने ही आप के प्रसारण को सुनने के लिए प्रेरित भी किया। व्हट्सएप नम्बर, वेबसाइट, रेडियो फ्रिक्वेंसी और कार्यक्रम की जानकारी सादे कागज पर लिखकर दी। मैंने 21 मई को पहली बार आपका कार्यक्रम सुना। समाचार के बाद कार्यक्रम अतुल्य चीन में रोबोट के उद्योग और चीन में रोबोट उपयोग करने की संख्या के विषयों पर चर्चा सुनी।

कार्यक्रम स्वर्णिम चीन के रंग में रेशम मार्ग के बारे में जो कहानी सुनी, वह यात्रा वृतांत की तरह लगी।

कार्यक्रम आर्थिक जगत में बांग्लादेश के चटगाँव शहर के मेयर के विचार सुनने को मिले।

वहीं 22 मई को प्रस्तुत कार्यक्रम नमस्कार चाइना में अखिल जी से एक महिला द्वारा ली गई भेंटवार्ता का अंश अच्छा लगा। किन्तु चीनी मुहावरा समझ में नहीं आया। चीनी कहानी मनोरंजक लगी। सीआरआई हिन्दी सेवा से परिचय कराने के लिए शंकर प्रसाद शंभू को धन्यवाद देते हुए अच्छी प्रस्तुति के लिए आप लोगों को भी धन्यवाद।

मो. मेराज आलम जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आशा है आप लगातार हमारे कार्यक्रम सुनते रहेंगे और हमारे साथ संपर्क बनाए रखेंगे। हम शंकर प्रसाद शंभू जी को भी धन्यवाद कहना चाहते हैं कि उन्होंने सीआरआई के प्रचार-प्रसार के लिए बहुत प्रयास किए। बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः दूसरा पत्र हमें आया है चिखलडोंगरी, विरार पश्चिम, महाराष्ट्र से सुधीर पाण्डेय का। लिखते हैं कि मैं यह ई-मेल लिखते हुए आपका 27 मई को प्रस्तुत कार्यक्रम सुन रहा हूं। आपका प्रसारण बहुत अच्छा सुनाई दे रहा है। आपने मुंबई के व्यापारी से बातचीत, चीन इण्डिया फोरम पर बातचीत सुन रहा हूँ। स्मार्ट सिटी पर चर्चा अच्छी थी। सिस्टम को बदलने में कई बरसों लगेंगे भारत में क्योंकि भारत में भृष्टाचार बहुत है। नेपाल के किडनी वाले गांव पर चर्चा सुनकर दुःख हुआ। गीत "अब आजा रे पिया" भी बहुत समय बाद सुना। श्रोताओं के पत्र में मेरी बारी का इंतजार है। संडे धमाल मस्ती का एक बार फिर इंतजार होगा।

कार्यक्रम में रोबोट पर चर्चा भी बहुत अच्छी लगी। वास्तव में चीन ने दुनिया में जो ऊंचाईयां हासिल की हैं, वह प्रशंसनीय है। यह बहुत अच्छा लगता है कि हमारा एक पड़ोसी दुनिया को एक नई दिशा दे रहा है। धन्यवाद।

सुधीर पाण्डेय जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आशा है आप आगे भी हमें संपर्क बनाए रखेंगे।

 

पंकजः हमारे तीसरे नए श्रोता हैं राज खिशोर मुखिया, जो दरभंगा, बिहार से हैं। उन्होंने लिखा है कि मैं सीआरआई का नया श्रोता हूं और सीआरआई के बारे में मुझे शंकर प्रसाद शंभू ने बताया था। 26 मई को मैंने आपकी पसंद कार्यक्रम सुना जो मुझे बहुत अच्छा लगा, खासकर फिल्मी गाने और ललिता के बारे में जो सेक्स चेंज की जानकारी दी गई थी वो भी अच्छी लगी।

राज किशोर मुखिया जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। आशा है आप लगातार हमारे कार्यक्रम सुनते रहेंगे। हम भी आशा करते हैं कि सभी श्रोता कार्यक्रम सुनकर हमें प्रतिक्रिया भेजेंगे। शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत पूर्वी चीन के चच्यांग प्रान्त में रोबोट उद्योग के बारे में कुछ जानकारी दी गई। बताया जाता है कि वर्ष 2017 में पूरे विश्व में रोबोट इस्तेमाल का कुल ख़र्च 23 अरब 20 करोड़ डॉलर रहा, जब कि पूरे चीन में कोई 1 लाख 30 हज़ार रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। अकेले चच्यांग प्रान्त में कोई 55 हज़ार रोबोट उपयोग में लाये जाते हैं, जो कि पूरे चीन में सबसे अधिक है।

कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" में शीआन शहर की प्राचीन छांगआन से लेकर आज के आधुनिक शीआन तक की विकासयात्रा की कहानी सुनी, दिलचस्प लगी।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" में पेश रिपोर्ट 'बांग्लादेश में चीनी उद्यमों का विकास' सुन कर पता चला कि चीनी सहायता से वहां के दूसरे सबसे बड़े शहर चटगांव के चहुँमुखी विकास में चीन का कितना अहम योगदान है।

 

पंकजः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" का आगाज़ गत 11 मई को भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गयी नेपाल यात्रा के निहितार्थों के साथ किया जाना अच्छा लगा। वास्तव में, भारत-नेपाल दोनों की भाषा, संस्कृति और धर्म विश्व में किसी भी अन्य देश के मुक़ाबले अधिक मेल खाते हैं और क्यों कि मोदी स्वयं एक धार्मिक प्रकृति के व्यक्ति हैं, इसलिये वहां के मंदिरों की सैर पहले करना स्वाभाविक ही था। दोनों देशों के बीच धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने सीमापार 'रामायण' बस सेवा शुरू किया जाना भी एक सराहनीय कदम है।

कार्यक्रम में आगे चीन में दस साल पहले 12 मई 2008 को सछ्वान प्रांत की वनछ्वान काउंटी में आये रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता वाले विनाशकारी भूकंप की याद में पेश रिपोर्ट सुन कर मन में सिहरन सी दौड़ गई। सीआरआर का पुराना और नियमित श्रोता होने के नाते मुझे भूकम्प की वह विनाशलीला आज भी याद है, जिसमें कोई 70 हज़ार लोग काल कवलित और 17 हज़ार लापता हो गये थे। आज की रिपोर्ट सुन कर वह वीभत्स मंज़र आँखों के सामने फिर से ताज़ा हो उठा।

आपने बिलकुल सही फ़रमाया कि भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदा के सामने मनुष्य हमेशा ही बौना नज़र आता है और क़ुदरत की शक्ति को कभी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आपदा रोकना भले ही सम्भव न हो, परन्तु उसके सुरक्षोपायों पर अधिक ध्यान दिया जाना बहुत ज़रूरी है।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" की स्थिति यूँ तो संतोषजनक है, परन्तु इसमें नये श्रोताओं की संख्या बढ़ाने के लिये प्रयास किया जाना ज़रूरी है। हर बार की तरह आज के अंक में भी श्रोताओं की तमाम प्रतिक्रियाओं को समाहित किया जाना अच्छा लगा। व्हट्सएप के ज़रिये श्रध्देय मेजर विमलेंदु वक़ील और एस.बी.शर्मा द्वारा प्रेषित सामग्री रुचिकर लगी।

 

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" में दिल्ली विश्वविद्यालय स्थित सामुदायिक रेडियो द्वारा अखिल पाराशर से लिये गये साक्षात्कार का तीसरा भाग सुना, जिसे सुन कर चीन के बारे में कुछ और नयी जानकारियां हासिल हुईं। बताया जाता है कि चीन में भारतीय फ़िल्मों के अलावा टीवी धारावाहिक भी ख़ूब लोकप्रिय हैं और स्टार प्लस पर प्रसारित धारावाहिक 'महाभारत' और आमिर ख़ान का 'सत्यमेव जयते' चीनी लोगों द्वारा योऊख़ू पर ख़ूब देखा गया। बातचीत से यह भी पता चला कि चीनी लोग आज भी रेड़ियो के शौक़ीन हैं और टैक्सी में सफ़र करते अथवा कैफ़े आदि में रेडियो चलता ही रहता है।

मुझे अखिल का यह कहना अच्छा लगा कि हम जिस देश की भाषा सीखते हैं, हमें उसकी संस्कृति से भी लगाव होना चाहिये। उन्होंने चीनी लोगों में समय की पाबंदी और चीजों के रखरखाव को अनुकरणीय बतलाया और चीनियों को भारतीयों से मीठा खाना सीखने की जो बात कही, मैं उससे पूरी तरह सहमत हूँ, क्यों कि यह सब बातें तीन साल पहले अपनी चीन यात्रा के दौरान मैं प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर चुका हूँ। हमें इस बातचीत का शेष भाग सुनने की भी बेसब्री से प्रतीक्षा रहेगी।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

पंकजः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से मॉनिटर शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में बताया गया कि वर्तमान समय में 20 मई चीन में युवाओं के लिए नया त्याहोर बन गया है, क्योंकि चीनी भाषा में 5·20 का उच्चारण "वो-आए-नी" यानी "मैं तुमसे प्रेम करती हूं" से मिलता-जुलता है, इसलिए चीनी नेटिजन 20 मई को प्रेम का त्योहार मनाते हैं। इस शुभ अवसर पर चीन के राष्ट्रपति यानि चीनी सर्वोच्च नेता शी चिनफिंग और उनकी पत्नी फंग लीयुआन की प्रेम कहानी का परिचय दिया।

अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "टी टाइम" में मैक्सिको में एक चोर द्वारा चोरी की नाकाम कोशिश और फिल्मी खबर में भोजपुरी फिल्मों के मेगा स्टार रवि किशन के साथ भोजपुरी फिल्मों की हॉट केक कही जाने वाली अंजना सिंह की रोचक जानकारी दी गई। वहीं कंपनी ने बाजार नियामक सेबी द्वारा शुरू की गई अधिनिर्णय कार्रवाई को चुनौती दी और अंडे के छिलके रोजमर्रा की जिंदगी में होगी इस्तेमाल कि ये सभी जानकारियाँ रोचक और ज्ञानवर्द्धक लगी। जोक्स और श्रोताओं की टिप्पणी बहुत लोकप्रिय है।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में सुनाया गया कि थांगखा तिब्बती संस्कृति में विशेषता प्राप्त कलात्मक रचना है, जिसमें धर्म, कला और इतिहास सभी तत्व शामिल हैं। सछ्वान प्रांत स्थित गैनत्सी तिब्बती स्वायत्त स्टेट की लूहो काउंटी के नामाखाचे संप्रदाय को थांगखा कला के विकास में विशेष स्थान प्राप्त है। यह रिपोर्ट जानकारियों से भरपूर लगी।

अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में भारतीय मीडिया इंडस्ट्री से आये दो भाई उत्सर्ग और उतकर्ष से भेंटवार्ता सुनाई गई, जो बेहद पसंद  आई।

 

पंकजः वहीं साप्ताहिक कार्यक्रम "आप की पसंद" में पेश सभी गीत पसंद आए। जानकारियों के क्रम में बताया गया कि दिल्ली से वाट्स एप यूज़र के अनुसार वाट्स एप ग्रुप वीडियो कॉलिंग फीचर लांच हुआ है, किन्तु अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

दूसरी रोचक जानकारी महाराष्ट्र के पुलिस विभाग से है, जहाँ 29 वर्षीय कॉन्स्टेवल ललिता शाल्वे अब बन जाएगी ललित और नौकरी में भी बनी रहेगी पुरुष बनकर क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर में पुरुषों के हार्मोन्स विकसित हो रहा है। वास्तव में यह रोचक और आश्चर्यजनक जानकारी बेहद पसंद आई। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि 24 मई को प्रस्तुत टी टाइम कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा। चटपटी बातों में मैक्सिको में एक बजु़र्ग का चोर से मुकाबला करना और उस चोर को पकड़ना वाकई में बहुत बहादुरी का काम है। ऐसे में उस बजु़र्ग की हिम्मत की दाद तो देनी बनती है। अग़र सभी लोग उस बज़ुर्ग की तरह से चोरों का मुकाबला करें तो चोरों के हौसले बुलंद नहीं होंगे।

 

पंकजः गुरमीत सिंह जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम संडे की मस्ती हर बार की तरह इस बार भी अच्छा लगा। संडे स्पेशल में आदित्य शेख़र से की गई बातों के कुछ अंश पेश किए गऐ, जो पसंद आए। अजीबो ग़रीब बातों में नेपाल का एक ऐसा गांव, यहां सभी लोगों के शरीर में सिर्फ एक ही किडनी है, यह सुनकर वाकई ही बहुत हैरानी हुई। उस गांव के लोगों का ग़रीबी के कारण किङनी बेच देना बहुत ग़लत लगा। क्योंकि ख़ुदा नें हमें शरीर जीने के लिऐ दिया है नां कि बेचने के लिए। मग़र हम यह भी मानते हैं कि ग़रीबी में जीना भी बहुत मुश्किल है।

अजीबो ग़रीब बातों के अगले क्रम में जर्मनी में एक ऐसी रेल गाड़ी के बारे में बताना जो कि उल्टी चलती है, यह जानकर भी बहुत अजीब सा लगा। यह सुनकर और भी हैरानी हुई कि यह गाड़ी ज़मीन से 39 फीट ऊंची हवा में चलती है, ऐसी गाड़ी में सफर करना तो यादगार होता ही। इसके आगे बिहार के भाई शंकर प्रसाद शंभू जी द्वारा भेजी गई कहानी बहुत ही पसंद आई। सच मानना इस कहानी को सुनते समय मेरी आंखों में भी आंसू आ गए थे। आपके द्वारा श्रोताओं के ख़त पढ़ने का स्टाइल भी हमें बहुत पसंद आया। एक बढ़िया प्रस्तुति के लिए आपका एक बार फिर से धन्यवाद।

गुरमीत सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि टी टाइम का नया अंक एक बार फिर रोचक लगा। सभी रिपोर्टें एक से बढ़कर एक थीं। फिर चाहे चोर का वायरल वीडियो हो या फिर अंडों के छिलके के गुणकारी रहस्य या मनोरंजन जगत में भोजपुरी फिल्मों की नई शूटिंग, इन सबके साथ विज्ञान जगत में प्लास्टिक को मोड़ने की नई विधि पर सफलता मिलने की बात हो, बेसन की गट्टे की सब्ज़ी को बनाने की विधि से श्रोताओं को अपना स्वाद बदलने में सहायता अवश्य मिलेगी।

श्रोताओं की प्रतिक्रया को कार्यक्रम में स्थान दिया जाना भी उम्दा लगा। इस बार पेश सारे जोक्स अच्छे थे। मेरी ओर से अच्छी प्रस्तुति पर हृदय तल से आभार।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बेहद शुक्रिया।

 

पंकजः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल से शिवेन्दु पाल ने। लिखते हैं कि टी टाइम कार्यक्रम बहुत अच्छा था। इस हफ्ते की सबसे अच्छी जानकारी थी अंडे के छिलके की बहुत सी व्यावहारिक जानकारी, जो मुझे बहुत अच्छी लगी.

आपके फेस बुक पेज पर चीन के बारे में अच्छी जानकारी मिलती है। बहुत सारे चीनी खाने की जानकारी मिलती है। त्योहार के बारे में जान सकते हैं।

शिवेन्दु पाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

पंकजः दोस्तों पिछले कार्यक्रम में हमने जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा द्वारा व्हट्सएप के जरिए हम तक पहुंचाने वाली जानकारी का पहला भाग सुना। अब पेश है इसका दूसरा भाग।

लोहा

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढ़ती है, लौहतत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ाता है। लोहा कई रोगों को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है। लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

स्टील

स्टील के बर्तन नुकसान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से। इसलिए नुकसान नहीं होता है। इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुकसान भी नहीं पहुँचता।

एलुमिनियम

एल्युमिनिय बॉक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ़ नुकसान ही होता है। यह आयरन और कैल्शियम दोनों को सोखता है, इसलिए इससे बने पात्र का किसी भी रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमज़ोर होती हैं। मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, दमा, वात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

मिट्टी

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते हैं। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैं मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे 100 प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

कृपया जनहित में जरूर शेयर करें।

एस बी शर्मा जी ने एक सुन्दर कविता भी भेजी है। लिखते हैं कि इस कविता के अंत में कोई कसम नहीं है, क्योंकि ये कविता इतनी अच्छी है कि आप खुद शेयर किये बिना नहीं रह पाएंगे।

लेती नहीं दवाई "माँ",

जोड़े पाई-पाई "माँ"।

दुःख थे पर्वत, राई "माँ",

हारी नहीं लड़ाई "माँ"।

इस दुनिया में सब मैले हैं,

किस दुनिया से आई "माँ"।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,

गरमागर्म रजाई "माँ"।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,

करती है तुरपाई "माँ"।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,

लेकिन बरक़त लाई "माँ"।

बाबूजी थे सख्त मगर,

माखन और मलाई "माँ"।

बाबूजी के पाँव दबा कर,

सब तीरथ हो आई "माँ"।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,

मां जी, मैया, माई, "माँ"।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,

मगर नहीं कह पाई "माँ"।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,

देती रही दुहाई "माँ"।

बाबूजी बीमार पड़े जब,

साथ-साथ मुरझाई "माँ"।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,

बड़े सब्र की जाई "माँ"।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,

रह गई एक तिहाई "माँ"।

बेटी रहे ससुराल में खुश,

सब ज़ेवर दे आई "माँ"।

"माँ" से घर, घर लगता है,

घर में घुली, समाई "माँ"।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,

पर उसकी ऊँचाई "माँ"।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,

याद हमेशा आई "माँ"।

घर के शगुन सभी "माँ" से,

है घर की शहनाई "माँ"।

सभी पराये हो जाते हैं,

होती नहीं पराई "माँ"।

अच्छा लगा तो शेयर करें।

 

पंकजः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर होगी मुलाकात। तब तक के लिए पंकज श्रीवास्तव और ललिता को दीजिए इजाज़त, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories