20180509

2018-05-09 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

पंकजः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को पंकज श्रीवास्तव का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

पंकजः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल करेंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू और उनके तमाम दोस्तों का। लिखते हैं कि हमारे क्लब के सभी सदस्य हर बार आपके द्वारा पेश प्रोग्राम सुनते आ रहे हैं। साप्ताहिक प्रोग्राम "अतुल्य चीन" में सुनाया गया कि पेइचिंग के एक लम्बी गली वाली तुआंग मुन हुथूंग के अनेक घर के द्वार पर फूल सजे रहते हैं। गलियों में रह रहे यात्रियों को एक साफ सुथरा और शांत वातावरण का आनंद मिलता है। 73 वर्षीय अमेरिकी मूल की महिला कहती हैं कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यहाँ अच्छा वृद्धागार है, जहाँ वरिष्ठ नागरिकों को सेवा सुविधा दी जाती है।

दूसरी रिपोर्ट आठवीं पेइचिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव से जुड़ी हुई थी, जिसमें बताया गया कि क्रोएशिया और एस्टोनिया की संयुक्त रूप से बनायी गयी फिल्म 'स्कैरी मदर' अर्थात घबराई माँ को सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला और चीनी फिल्म 'ऑपरेशन रेड सी' को श्रेष्ठ विजुअल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चीनी फिल्म ऑपरेशन रेड सी ने वर्ष 2018 की पहली तिमाही में तीन अरब साठ करोड़ चीनी युआन की कमाई की है। इजराइल और ऑस्ट्रिया द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई फिल्म 'द टेस्टमैट' को सर्वश्रेष्ठ स्क्रीन प्ले पुरस्कार मिला। यह दोनों ही रिपोर्टें पसंद आईं।

अगला साप्ताहिक कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" में रेशम मार्ग तब और अब की अगली कड़ी में चीन के शि ज्यांग संग्रहालय के तीन रंगों वाले ऊँटों की मूर्तियाँ जो देखने में सजीव लगती हैं की चर्चा से ज्ञात हुआ कि थान राजवंश के समय मकबरों की खुदाई में मिले माल लादने वाले ऊँटों की मूर्त्तियाँ जिसके पीठ पर अंडाकार गलीचे पड़े थे और वस्तुओं से भरा थैला था।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक कार्यक्रम "आर्थिक जगत" में एक रिपोर्ट सुनाई गई, जिसका शीर्षक था 'विश्व व्यापार लगातार तीन वर्षों तक मज़बूत वृद्धि बनी रहेगी'। विश्व व्यापार संगठन के द्वारा जारी विश्व व्यापार रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 चीनी उत्पादों का व्यापारिक निर्यात विश्व के पहले स्थान पर रहा, जो पूरे विश्व का 12.8% भाग है। विश्व व्यापार संगठन के निदेशक रॉबर्टो एजेवेडो ने पिछले वर्ष की विश्व व्यापार वृद्धि पर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट बहुत आशावादी है।

वहीं कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" के विशेष सेगमेंट में भारतीय आदित्य बिरला ग्रुप के प्रमुख अर्थशास्त्री अजित राणाडे से ली गई भेंटवार्ता का मुख्य अंश सुनाया गया। भारत और चीन के बीच आर्थिक और सामाजिक संबंधों पर आधारित प्रश्नों के सटीक उत्तर के साथ ही बहुपक्षीय व्यापारिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए चीन और भारत की कोशिशों की चर्चा जैसे महत्वपूर्ण बिंदु पर उनका विचार सराहनीय रहा।

चीनी मुहावरे की कड़ी में 'लोहे के डंडे को सुई का रूप' की कहानी में एक बूढ़ी महिला के परिश्रम और लगन से प्रेरित होकर चीन के थांग राजवंश के ली पाई नाम का किशोर, जो बचपन से पढ़ाई पर ध्यान नहीं देता था, वह भी मन लगाकर पढ़ने लगा और एक प्रतिभाशाली व्यक्ति बनते हुए महान कवि बन गए। यह रिपोर्ट पसंद आई।

 

पंकजः वहीं साप्ताहिक कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुनाया गया कि चीनी उद्यान मुख्यतः प्राकृतिक दृश्यों के आधार पर कृत्रिम रूप से महल, गलियारे, भवन और मंडप आदि वास्तु बनाकर तैयार किये जाते हैं। चीनी उद्यान का लम्बा इतिहास है, जिसे चीन की प्राचीन वास्तु कला की निधि माना जाता है। छिन और हान राजवंशों के बाग-बगीचे से लेकर, वेई और जिन छह राजकालों के प्राकृतिक उद्यान, थांग और सुंग राजवंशों में सकल भू-परिदृश्य वाले उद्यान और अंत में मिंग और छिंग राजवंशों के उद्यानों में छोटे आकार में निर्मित नैसर्गिक दृश्यों वाले उद्यान तक विकसित हुए थे, जिनमें छोटे रूप में विशाल दृश्य दर्शाने की परिकल्पना प्रेरित की जा सकती है। चीन जैसी पूर्व की अनूठी संस्कृति और उद्यान निर्माण सिद्धांत और विचारधारा से पश्चिमी देशों पर भी प्रभाव डाला है।

श्रोताओं का चहेता साप्ताहिक कार्यक्रम "आप का पत्र मिला" में सर्वप्रथम सऊदी अरब के श्रोता भाई सादिक आजमी जी का पत्र पढ़ा गया। उसके बाद क्रमश: मुक्तसर पंजाब के श्रोता भाई गुरमित सिंह, केसिंगा उड़ीसा के मॉनिटर भाई सुरेश अग्रवाल का पत्र, मेरा पत्र और जमशेदपुर झारखण्ड के श्रोता भाई एस बी शर्मा का पत्र पढ़ा गया। मेरे पत्र के बाद और शर्मा जी के पत्र से पहले हिन्दी गाना सुनाया गया था।

कार्यक्रम "टी टाईम" के अंतर्गत सर्वप्रथम पुदुचेरी के उप-राज्यपाल किरण बेदी के द्वारा जारी किया गया गरीब उपभोक्ताओं के राशन पर विवादित नियमों की घोषणा उचित नहीं है। स्वच्छ भारत अभियान में योगदान दे रही है यह तो सराहनीय कार्य है, किंतु अपने क्षेत्र को साफ़ रखने के लिए गरीब जनता पर इतना कड़ा रुख अपनाना निन्दनीय प्रतीत होता है।

शांगहाई में रहने वाले जर्मनी की बहुराष्ट्रीय कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट भारतीय आशीष गोरे के साथ हुए बातचीत से जानकारी मिली कि वे 2005 में पहली बार चीन गए और 2013 से चीन में ऑटो प्रोडक्ट निर्माण और व्यापार कर रहे हैं। भारत में रहकर पहले वे चीन के प्रगति के बारे में सिर्फ समाचार पत्रों में ही पढ़ा करते थे किंतु अब वे अपने आँखो से सबकुछ देखकर अनुभव कर रहे हैं।

वे चीन के छोटे बड़े शहरों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र के किसानों से भी मिलकर वहाँ के रहन-सहन, खान-पान, रीति-रिवाज़ और संस्कृति का अनुभव कर रहे हैं। उनकी बातचीत से भारत और चीन के बीच अच्छे आत्मीयता की झलक भी सुनने को मिली।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में बताया गया कि पेइचिंग जन कला रंगमंच और पेइचिंग शिक्षा समिति ने मिलकर पेइचिंग स्कूली नाटक शिक्षा संघ की स्थापना की है, जिसका लक्ष्य पेइचिंग के सभी विद्यालयों में नाटक से जुड़ी संस्कृति और शिक्षा का प्रचार प्रसार करना है। वहीं दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि चीन की महिला अंतरिक्ष यात्री ल्यू यांग ने पेइचिंग के छांगफिंग अंतरिक्ष कृषि भवन में बच्चों के द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दिए गए, जिससे युवाओं के प्रति विज्ञान और संस्कृति का सम्मान स्पष्ट रूप से बढ़ गया है। ये दोनों रिपोर्टें बेहद पसंद आईं।

 

पंकजः शंभू जी आगे लिखते हैं कि कार्यक्रम "चीन का तिब्बत" में सुनाया गया कि प्रोफेसर जूंग यांग ने तिब्बत में पेड़ पौधों के अनुसंधान में भारी योगदान दिया। उन्होंने अपनी 53 वर्षों की जिन्दगी में सौ वर्षों का काम पूरा किया है। 25 सितम्बर 2017 में यातायात दुर्घटना में उनका निधन हो गया, यह शोकाकुल करने वाली बात है। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करें। प्रोफेसर जूंग यांग के एक छात्र जू पीन के अनुसार तिब्बती पठार पर वनस्पतियों के बीज एकत्र करने का काम बहुत कठिन है, फिर भी प्रोफेसर जूंग यांग ने तिब्बत में 16 वर्षों तक काम किया।

अगले साप्ताहिक कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फोकस" में भारतीय फिल्म निर्देशक अद्वैत चन्दन से भेंटवार्ता सुनाई गई, जिसमें पेइचिंग फिल्मोत्सव और भारतीय फिल्मोत्सव की विशेषता पर चर्चा की गई।

साप्ताहिक कार्यक्रम "आप की पसंद" में सर्वप्रथम फिल्म 'परख' के गाना से शुरू किया गया। उसके बाद हिन्दी फिल्म निर्माता सत्यजीत रे और बीसवीं शताब्दी के प्रशिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन के ख्वाहिश अधूरी रहने की जानकारी देते हुए बताया गया कि सत्यजीत रे चाहकर भी कभी अपनी फिल्म के लिए अमिताभ जी को ले नहीं सके। वहीं अगली जानकारी में बताया गया कि अमेरिका में बिना बिजली से चलने वाली वाशिंग मशीन का निर्माण किया गया है जिसे पैडल से चलाया जाता है और सिर्फ दस लीटर पानी में चमकाती है वस्त्र। हालांकि इस तरह के वाशिंग मशीन 2014 में ही तैयार की गयी थी, किन्तु विकसित रूप में अब बाजार में उतारा गया है।

वहीं "सण्डे की मस्ती" कार्यक्रम के अंतर्गत सण्डे स्पेशल में सुनाया गया कि चीन में 'सीक्रेट सुपर स्टार' और 'बजरंगी भाईजान' के बाद भारतीय फिल्म 'हिन्दी मीडियम' चीनी बाजार में एक और ऐसी फिल्म बन गई, जिसकी बॉक्स ऑफिस आय 10 करोड़ युआन से अधिक रही। वर्ष 2017 में भारतीय फिल्म 'दंगल' ने चीन में एक अरब उन्तीस करोड़ पचास लाख युआन की कमाई की थी, जो हॉलीवुड फिल्मों के अतिरिक्त विदेशी फिल्मों के चीनी बाजार में एक रिकॉर्ड बन गया।

चीनी फिल्म 'यूथ' की कहानी गत 70 और 80 दशक वाले काल की है, जिसमें सैन्य सांस्कृतिक कलात्मक प्रदर्शन मंडली में कई युवा युवतियों की कहानी सुनाई गई है। श्रोताओं की प्रतिक्रिया में कुल चार श्रोताओं की टिप्पणियाँ पढ़ी गईं, जिसमें मेरा पत्र भी शामिल था। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "टी टाइम" का नया अंक सुना, जिसमें जर्मन कम्पनी के उपाध्यक्ष आशीष गोरे जी के विचारों और अनुभवों को जानने और सुनने का अवसर मिला। उन्होंने अपना दृष्टिकोण खुले मन से रखा, जिससे स्पष्ट होता है कि भारत और चीन के परस्पर संबंधों के सुधार में कई विकल्प आज भी मौजूद हैं। चीन के विकास पर उनकी प्रतिक्रिया भी सटीक लगी। एक शब्द मुझे विशेष तौर पर प्रभावित करता है जो उन्होंने बताया, यानी चीनी जनता की कर्मठता और कार्य के प्रति समर्पण। सच है विकास की मंज़िल संयुक्त रूप से कठिन परिश्रम से ही मिलती है। जाति और भेदभाव से ऊपर उठ कर, सफाई अभियान में किरण बेदी के नए फरमान की कामयाबी की हम भी कामना करते हैं। रात में खट्टे भोजन के हानिकारक तत्थयों का उजागर किया जाना अच्छा और लाभदायक प्रतीक हुआ। अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

पंकजः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि विश्व का आईना कार्यक्रम में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में नई तकनीक के शामिल होने से उत्पादन बढ़ने की खबर, स्टाफ़ की कटौती, अलीबाबा प्रयोगशाला, डॉक्टर की नौकरी के बारे में चर्चा अच्छी लगी।

दक्षिण एशिया फोकस कार्यक्रम में अर्थशास्त्री श्री अमित रानाडे के साथ बातचीत में चीन भारत व्यापार, पर्यटन, मनोरंजन, सांस्कृतिक आदि के बारे में विस्तृत चर्चा सुनी। हम भी उम्मीद करते हैं कि आने वाले दिनों में दोनों देश के बीच संबंध अच्छे होंगे। श्री एस सिंह के साथ साक्षात्कार में भारत के प्रधानमंत्री जी के चीन सफ़र को लेकर चर्चा सुनकर अच्छा लगा। पिछले कार्यक्रम में मेरा पत्र शामिल करने के लिये धन्यवाद।

पिछले टी टाइम कार्यक्रम में शांगहाई में रहने वाले जर्मनी की बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यकर्ता श्री आशीष गोरे से बातचीत, पॉंडीचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी के नये फरमान के बारे में चर्चा सुनी। हेल्थ टिप्स में रात के खाने में खट्टी चीज़ें शामिल करने से गड़बड़ी, चुटकुलों में सेल्स मैन आदि बारे में चर्चा और श्रोता टिप्पणी में मेरा पत्र शामिल करने के लिये धन्यवाद।

प्रियंजीत कुमार घोषाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत पेइचिंग स्थित फॉरबिडेन सिटी के पश्चिम में स्थित 452 मीटर लम्बी गली तुआंग मुन हुथुंग और उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के बीच सौहाद्रपूर्ण वातावरण पर दी गयी जानकारी अच्छी लगी। तत्पश्चात गत 22 अप्रैल को सम्पन्न आठवें पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय फ़िल्मोत्सव पर पेश विस्तृत रिपोर्ट सुन कर पता चला कि विश्व के 71 देशों और क्षेत्रों की कुल 659 फिल्मों ने 8वें पेइचिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्मोत्सव के 'थ्येनथेन पुरस्कार' के विभिन्न वर्गों की प्रतिस्पर्द्धा में भाग लिया और पाँच दौर के चुनाव के बाद 15 फिल्में पुरस्कार के अंतिम दौर में पहुंचीं, जिनमें 13 विदेशी और दो चीनी फिल्में थीं। यह रिपोर्ट पसंद आई।

 

पंकजः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" कार्यक्रम में पारंपरिक चीनी उद्यान-कला पर पेश रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। चीनी उद्यानों की ख़ास बात लगी उसके प्राकृतिक दृश्यों पर आधारित कृत्रिम महल, गलियारे, भवन और मंडप, जिन्हें वास्तु को ध्यान में रख कर बनाया गया है। ऐसा लगता है कि कृत्रिम नैसर्गिक अनुकृतियों में विभिन्न ऐतिहासिक कालों में मानविकी, सांस्कृतिक चिन्तन, खास तौर पर कविता, चीनी काव्य विशेष चित्रकला की अभिव्यक्ति कर रहे हों।

ज्ञात हुआ कि यिन और चो राजवंशकाल से लेकर अब तक चीनी उद्यानों का कोई 3000 साल से ज़्यादा पुराना इतिहास रहा है और चीन विश्व में उद्यान-कला की उत्पत्ति वाले सबसे पुराने देशों में से एक है, जिसका विश्व उद्यान इतिहास में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। कार्यक्रम सुन कर विश्व की तीन उद्यान-शैलियों यूरोपीय, पश्चिम एशिया और चीनी उद्यान शैली पर अहम जानकारी हासिल हुई। मानव निर्मित, पर कुदरती लगना चीनी उद्यान शैली का मूल सिद्धांत है। इस कला में परम्परागत वास्तुकला, साहित्य, चित्रकला, सुलेख, नक्काशी, शिल्प कला आदि का समावेश होता है। इस विशेषता के चलते चीनी उद्यानों को विश्व उद्यान इतिहास में बहुत ऊंचा स्थान मिला है और उसकी अपनी विशिष्ट पहचान है।

कार्यक्रम में यांगत्सी नदी के दक्षिणी क्षेत्र के उद्यान, दक्षिण चीन के लिंग नान के उद्यान, दक्षिण-पश्चिमी चीन स्थित सछ्वान  के प्रसिद्ध उद्यान, पेइचिंग के उद्यान, शाही खानदान के रिश्तेदारों, राजा-राजकुमारों, पदाधिकारियों और धनी व्यापारियों के आराम के लिए निर्मित उद्यान, मठ और मंदिर आदि के उद्यानों पर अहम जानकारी हासिल हुई।

साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में पेश बच्चों से जुड़ी दोनों रिपोर्टें सुनीं, जो कि अच्छी लगीं। पहली रिपोर्ट में पेइचिंग जन कला रंगमंच और पेइचिंग शिक्षा कमेटी द्वारा हाल ही में रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर कर पेइचिंग स्कूली नाटक शिक्षा संघ की स्थापना किये जाने सम्बन्धी जानकारी अच्छी लगी। बताया जाता है कि संघ का लक्ष्य पेइचिंग के विश्वविद्यालयों, मिडिल और प्राइमरी स्कूलों में नाटक से जुड़ी संस्कृति और शिक्षा का प्रसार-प्रचार करना है। संघ द्वारा पहले चरण में पेइचिंग के विभिन्न क्षेत्रों और काउंटियों के कुल 27 विश्वविद्यालय, मिडिल और प्राइमरी स्कूलों को शामिल किया गया है।

इसमें दो राय नहीं कि शिक्षा के क्षेत्र में नाटक की अहम भूमिका होती है, परन्तु नाटक-शिक्षा को स्कूलों में प्रवेश दिलाने जैसी चुनौती सभी स्कूलों के समक्ष पेश आती है। इस परिप्रेक्ष्य में पेइचिंग शिक्षा कमेटी के अध्यक्ष ल्यू यूह्वेई का यह कहना बिलकुल सही लगा कि हमें अपने क्षेत्र और स्कूल की वास्तविकता के आधार पर नाटक के लिये सुयोग्य व्यक्तियों का चयन करना चाहिये, ताकि नाटक-शिक्षा, प्रबंधन और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो।

अगली रिपोर्ट में गत 24 अप्रैल को तीसरे चीनी अंतरिक्ष दिवस के मौके पर चीन की महिला अंतरिक्ष यात्री ल्यू यांग द्वारा पेइचिंग के छांगफिंग अंतरिक्ष कृषि भवन में बच्चों के साथ 'अंतरिक्ष तकनीक से ग्रामीण क्षेत्रों को और सुन्दर बनाना' नामक गतिविधि में भाग लिये जाने सम्बन्धी दी गयी जानकारी भी उम्दा लगी।

स्वाभाविक है कि उक्त गतिविधि में ल्यू यांग ने बच्चों द्वारा पूछे गये तरह-तरह के सवालों का जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का शमन किया। ल्यू यांग का यह कहना बिलकुल सही लगा कि युवा हमारे देश का भविष्य हैं, और हमारी आशा भी। यह बात केवल चीन के लिये नहीं, सभी देशों पर लागू होती है।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "टी टाइम" में घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा अक़सर रात के खाने में खट्टी चीजें खाने से मना करने के पीछे छुपे कारण की चर्चा अच्छी लगी। वास्तव में, इस तरह के भोजन में मौज़ूद अम्लीय तत्व खाने से किसी को भी गैस की समस्या हो सकती है। आयुर्वेद में वर्णित वात, पित्त और कफ आदि तीन दोषों में अच्छा संतुलन होना जरूरी होता है। इस परिप्रेक्ष्य में आयुर्वेदाचार्य डॉ. धन्वन्तरि त्यागी की सलाह भी दुरुस्त लगी।

कार्यक्रम में शांगहाई में रहने वाले और एक जर्मन अंतराष्ट्रीय ऑटोमोटिव कम्पनी में उपाध्यक्ष पद पर कार्य करने वाले भारतीय आशीष गोरे से की गयी बातचीत बहुत सार्थक लगी। उन्होंने चीन के द्रुत विकास और चीन-भारत के बीच रिश्तों पर ईमानदारी से बात की। मुझे उन द्वारा डॉक्टर कोटनिस की सेवाओं के साथ चीन-भारत के बीच सह-अस्तित्वपूर्ण सम्बन्धों का ज़िक्र किया जाना बहुत अच्छा लगा। चीनी लोगों में विदेशियों के प्रति स्वीकार्यता की भावना की चर्चा के अलावा मुझे उनका प्रांजल हिन्दी ज्ञान भी अभिभूत कर गया। सच कहूँ, तो ऐसे सधे हुये लोग कम ही मिलते हैं। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।

 

पंकजः वहीं साप्ताहिक "आपकी पसन्द" हर बार की तरह आज भी रोचक जानकारियों और मनोरंजन से भरपूर था। श्रोताओं की पसन्द पर सुनवाये गये -फ़िल्म परख, प्यार तो होना ही था, वासना, जब प्यार किसी से होता है, दीवाने और राजू बन गया जेंटिलमैन के छह फड़कते हुये गानों के साथ दी गयी तमाम जानकारी भी ज्ञानवर्ध्दक लगी।

 

ललिताः इसके साथ साप्ताहिक "संडे की मस्ती" भी हमने पूरे मनोयोग से सुना। आज के 'संडे स्पेशल' में चीन में अत्यधिक लोकप्रिय हो रही भारतीय फ़िल्मों पर पेश विशेष रिपोर्ट वाक़ई क़ाबिल-ए-ताऱीफ लगी। रिपोर्ट में फ़िल्म यद्योग से जुड़े भारतीय और चीनी निर्माता-निर्देशकों के विचार सुन कर लगा कि न केवल चीन में भारतीय फ़िल्में, बल्कि अब भारत में भी चीनी फ़िल्मों का बोलबाला होने वाला है। इस परिप्रेक्ष्य में फ़िल्म 'सीक्रेट सुपर स्टार' के निदेशक अद्वैत चन्दन, चीन में भारतीय फ़िल्में आयात करने वाली कम्पनी की कु वांग छंग और भारतीय फ़िल्म निदेशक द्वय प्रसाद शेट्टी तथा नीलमाधव पंडा के विचार सुनवाया जाना महत्वपूर्ण लगा। यह भी पता चला कि चीन और भारत के बीच फ़िल्म एवं टेलीविजन कार्यक्रम आदान-प्रदान सम्बन्धी अहम समझौता वर्ष 2014 में हस्ताक्षरित हुआ था और पिछले एक साल की अवधि में चीन, भारत से चार फ़िल्मों का आयात कर चुका है, जो कि एक रिकॉर्ड है।

कार्यक्रम में आगे चिंग-चिंग (मीराजी) की आवाज़ में 'तेरी ही बोली बोलूँगी मैं' शीर्षक हिन्दी गाना सुन कर मज़ा आ गया। और हां, कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रिया ने तो पूरा माहौल ही बदल दिया। धन्यवाद आपके प्रयासों का।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें लगातार पत्र और प्रतिक्रिया भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

पंकजः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि तीन मई को प्रस्तुत टी टाइम प्रोग्राम में अशीश बोरे के साथ की गई बातचीत पसंद आई। यह सच है कि सभी देशों के लोग एक दूसरे से मिलना चाहते हैं और एक दूसरे को समझना चाहते हैं। लेकिन बीच में सरहॅदें (सीमांऐं) आ जाती हैं। इसके अलावा अशीश जी की बातों से हमें महसूस हुआ कि चीन के लोग भारत से बहुत दिलचस्पी रखते हैं। इस के आगे यह सुनकर बहुत बढ़िया लगा कि प्रधान मंत्री जी के द्वारा चलाई गई सफाई मुहिंम को किरन बेदी जी आगे बढ़ा रहीं हैं। किरन बेदी के साथ साथ और जो भी लोग इस मुहिंम को आगे बढ़ा रहे हैं वह सभी ईनाम के हकदार हैं।

आगे रात को खट्टा भोजन लेने से शरीर को होने वाले नुकसानों के बारे में दी गई जानकारी बढ़िया लगी। इस जानकारी के लिए आपका धन्यवाद।

गुरमीत सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

पंकजः दोस्तों अब पेश है शंकर प्रसाद शंभू जी द्वारा व्हट्सएप के जरिए भेजे गए जोक्स।

पहला जोकः

कोर्ट में एक एक्सीडेंट केस पर सुनवाई चल रही थीः

जजः क्या सबूत है कि तुम कार धीमे चला रहे थे?

आरोपीः हुजुर, मैं अपनी बीवी को लेने अपने ससुराल जा रहा था।

जजः रिहा कर दो इस मासूम को।

दूसरा जोकः

पुलिसः हमें आपके घर की तलाशी लेना है, सुना है आपके घर में विस्फोटक सामग्री है।

संताः खबर तो पक्की है पर अभी वो माइके गयी है।

 

पंकजः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए पंकज श्रीवास्तव और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories