20180502

2018-05-02 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है सऊदी अरब से सादिक आज़मी का। लिखते हैं कि कार्यक्रम की वेबसाइट पर उपलब्धिता से हमारे व्यस्त जीवन में भी सुनना सरल हो गया है। विगत दिनों सन्डे की मस्ती कार्यक्रम सुना, जिसमें बहुत सारी बातों के साथ चीन में भारतीय फिल्म जगत के बढ़ते अवसरों और उसकी लोकप्रियता पर जानकारी अच्छी लगी। मेरा मानना है कि किसी भी दो देशों के संबंध प्रगाढ़ होंगे, जब जनता के बीच रिश्तों को दृढ़ता मिलेगी। मनोरंजन और दो देशों की संस्कृति का परस्पर मिलाप का यह माध्यम बहुत सुंदर है। विगत महीनों में फिल्म "दंगल" ने चीन में जो कमाई की, उसको सशक्त उदाहरण माना जा सकता है। भविष्य में और अधिक सांस्कृतिक आदान प्रदान हों, ऐसी हम कामना करते हैं और सीआरआई इसी प्रकार रिपोर्टिंग करता रहेगा यही आशा है। धन्यवाद।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि पिछले टी टाइम कार्यक्रम में चीन में हिन्दी पढ़ा रही किरन जी से लिया गया इंटरव्यू बहुत अच्छा लगा। हमें एक दूसरे के देशों की भाषा सीखनी चाहिए, क्योंकि इससे एक दूसरे के देशों की सभ्यता के बारे में जानना आसान हो जाता है और प्रेम भी बढ़ता है। किरन जी यह बहुत बढ़िया काम कर रही हैं। हमारी शुभकामनाएं किरन जी के साथ हैं। इसके अलावा प्रोग्राम में सुनाए गऐ जोक्स भी अच्छे लगे। धन्यवाद।

गुरमीत सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" में पेश हाईनान प्रान्त के विभिन्न गांव और कस्बों में स्थानीय विशेषता वाले उद्योगों के ज़रिये आर्थिक विकास की कहानी अच्छी लगी। विशेषकर, उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित गांव साचिन, सन्ताओ क़स्बे और हाउशन गांव पर आधारित रिपोर्ट बेहद अहम लगी। कार्यक्रम में आगे उत्तर-पूर्वी पेइचिंग स्थित लिपिकला प्रशिक्षण केन्द्रों के बारे में दी गई जानकारी से पता चला कि चीन की यह परंपरागत संस्कृति लोगों के लिये क्या मायने रखती है।

ख़ास कार्यक्रम "स्वर्णिम चीन के रंग" के अन्तर्गत लेखक छि-मुछि की पुस्तक 'रेशम मार्ग तब और अब' पर आधारित प्राचीन रेशम मार्ग सम्बन्धी रिपोर्ट सुनी। आज की कड़ी में प्राचीन शहर शीआन का रेशम मार्ग से क्या सम्बन्ध था, समझ में आया। रिपोर्ट में शीआन में तब के मातृ-सत्तात्मक समाज से लेकर ईसा-पूर्व तीसरी सदी और उसके बाद के छिंग, हान, चओ, थांग आदि तमाम राजवंशों का ज़िक्र किया गया। रिसैप्शसन बाधित होने के बावज़ूद जितना समझ में आया, वह बहुत ज्ञानवर्ध्दक था।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" की शुरुआत में चीन के कुछ आर्थिक समाचार सुनाये जाने के बाद पेश 'अगले बीस वर्षों में एशिया विश्व में सबसे तेज़ आर्थिक विकास वाला क्षेत्र होगा' रिपोर्ट भी अच्छी लगी।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत गत 21 अप्रैल को औपचारिक तौर पर शुरू हुई वर्ष 2018 चीनी ओपन टेनिस कैडी चयन हेतु प्रशिक्षण शिविर पेइचिंग शाखा की गतिविधि पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि पिछले वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष चीनी ओपन टेनिस कैडी चुनाव का पैमाना एक नया रिकॉर्ड स्थापित करेगा और वर्तमान में इसमें भाग लेने वाले शहरों की संख्या आठ से बढ़ कर दस हो गई है। इसके अलावा हर शहर में फ़ाइनल के चयन में शामिल हुए बच्चों की संख्या भी 240 से बढ़कर 280 तक पहुंच गई है। यह जान कर अच्छा लगा कि पेइचिंग के बाद क्वांगचो और छनतू समेत कई शहर भी प्रशिक्षण शिविर क्रमशः इसी तरह की गतिविधि आयोजित करेंगे।

मैंने यह पहली बार जाना कि टेनिस कैडी टेनिस संस्कृति का एक विशेष भाग है और तमाम टेनिस सितारे भी बचपन में टेनिस कैडी ही थे। विषय की विस्तृत जानकारी देने के लिये शुक्रिया।

कार्यक्रम "टी टाइम" के तहत आज रोचक जानकारियों के बजाय तीन साक्षात्कारों पर आधारित कार्यक्रम पेश किया गया। पहले साक्षात्कार में कोई तीस वर्षों तक दिल्ली के नवयुग विद्यालय में पढ़ाने के बाद अब चीन के विदेशी अध्ययन विश्वविद्यालय ग्वांगतोंग में हिन्दी पढ़ाने आयीं अध्यापिका किरण वालिया से की गयी बातचीत अच्छी लगी। पता चला कि चीनी विद्यार्थियों का हिन्दी भाषा और भारत के प्रति कितना लगाव है।

इसी प्रकार चीन में हिन्दी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले पेकिंग विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर च्यांग चिंगख्वैई और दशकों तक हिन्दी रेड़ियो में काम कर चुके छन लीश्युन के श्रीमुख से प्रांजल हिन्दी में चीन में हिन्दी की विकासयात्रा की कहानी सुन कर मन उत्साह से भर गया।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत बीते साल 2017 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस या कृत्रिम बुध्दि के विकास का साल माने जाने पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि इस दरम्यान अलफ़ागो मानव जाति को पराजित कर गो का विश्व चैम्पियन बना, मानवरहित सुपरमार्केट खुला, चालकरहित कार सड़कों पर चलने लगी और इस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दैनिक जीवन की सुर्ख़ियों में छा चुका है।

सवाल उठता है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानव की जगह ले सकता है। इस पर काफी बहस चल रही है। इसके प्रभावों की चर्चा करते हुये चीन के क्वांग चो शहर के तोंग ग्वान स्थित सोंगशानहू छांगयिंग प्रेसिजन प्रौद्योगिकी कंपनी, जो कि मोबाइल फोन बेचने वाली एक उद्यमी है, के बारे में बताया गया कि पहले इस कंपनी के सामान्य कामकाज के लिए 650 कर्मचारियों की आवश्यक्ता होती थी। लेकिन अब 60 रोबोट दिन-रात 10 उत्पादन लाइनों पर मेहनत से काम करते हैं और कंपनी में सिर्फ़ 60 कर्मचारी हैं, जिनमें तीन उत्पादन लाइन की जांच और निगरानी करते हैं, शेष लोग कंप्यूटर नियंत्रण सिस्टम की देखभाल करते हैं। इस प्रकार जहां कंपनी ने मशीनों के ज़रिये 90 प्रतिशत मज़दूरों की जगह ली है, वहीं उसकी उत्पादन क्षमता में भी लगभग 250 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। यह तो एक मिसाल थी, परन्तु इस लम्बी रिपोर्ट में अन्य भी कई उदाहरण पेश किये गये, जो कि कुछ सोचने पर विवश करते हैं। मेरी राय में इसमें चिन्तित होने की कोई आवश्यकता नहीं, क्यों कि कृत्रिम बुध्दि वाले उपकरणों का विकास मनुष्य ने किया है, इसलिये वह उसका स्थान कभी नहीं ले सकेंगे। बहरहाल, एक विचारोत्तेजक प्रस्तुति के लिये हार्दिक धन्यवाद।

कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" के अन्तर्गत श्रोताओं के पत्रों की निरन्तर बढ़ती संख्या उत्साहवर्ध्दक है। आशा है कि श्रोता इस क्रम को बनाये रखेंगे। आज के अंक में व्हट्सएप्प के ज़रिये श्रोता बद्रीप्रसाद वर्मा द्वारा प्रेषित दोनों ज़ोक्स भी उम्दा लगे।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत तिब्बत की स्थानीय सरकार द्वारा 'हरे पहाड़ ही स्वर्ण पहाड़ हैं' की तर्ज़ पर प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित करने किये जा रहे अथक प्रयासों पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। बताया जाता है कि सरकार के इन प्रयासों से प्रकृति संरक्षण के अलावा सामाजिक और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने और ग़रीबी उन्मूलन में भी काफी मदद मिली है।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" के अन्तर्गत 27 और 28 अप्रैल को चीन के वूहान में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच होने वाली अनौपचारिक बैठक पर अर्थ-शास्त्री अजीत रानाडे के विचार सटीक लगे। वहीं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह का यह कहना बिलकुल सही लगा कि दोनों नेता इस बात पर अवश्य ज़ोर देंगे कि भारत-चीन के बीच फिर से डोकलाम जैसी स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने 'औपचारिक' और 'अनौपचारिक' वार्ता का अर्थ भी बख़ूबी समझाया।

 

अनिलः हां, मोदी और शी चिनफिंग की चीन के वूहान में अनौपचारिक मुलाकात बहुत सफल रही। दोनों नेताओं ने चीन के हुपेई संग्रहालय में सांस्कृतिक अवशेष प्रदर्शनी का दौरा किया, डिनर और लंच के दौरान और ईस्ट लेक के किनारे टहलते हुए चर्चा की और नाव की सवारी भी की। दोनों तरफ से प्रतिनिधि स्तरीय बैठक भी आयोजित हुई। भारतीय और चीनी समुदायों ने इस पर बड़ा ध्यान दिया। निःसंदेह दोनों देशों के नेताओं के बीच यह मुलाकात चीन-भारत सम्बन्धों के विकास के लिए लाभदायक है। इस परिप्रेक्ष्य में भारतीय आदित्य बिड़ला समूह के मुख्य अर्थशास्त्री अजीत रानडे का यह आशावाद सही जान पड़ा कि चीन और भारत के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का दायरा और विस्तृत होगा।

वहीं साप्ताहिक "आपकी पसंद" और "संडे की मस्ती" भी पहले की ही तरह लाजवाब और रुचिकर रहा। धन्यवाद फिर एक बार अच्छी प्रस्तुति के लिए।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम "आर्थिक जगत" में एक रिपोर्ट सुनाई गई, जिसका शीर्षक था 'अगले 20 वर्षों में एशिया फिर विश्व में सबसे तेज आर्थिक वृद्धि वाला क्षेत्र होगा'। इस रिपोर्ट से पता चला कि चीनी केन्द्रीय बैंक के पूर्व महानिदेशक दाई श्यांग लोंग के अनुसार पिछले 20 वर्षों में एशिया की वार्षिक वृद्धि दर 6.8% रही, क्योंकि चीन का विकास तेज और बहुत मजबूत है। एक पट्टी एक मार्ग के विकास से एशिया को नया मौका मिलेगा।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" में लीला भट्ट द्वारा प्रस्तुत चीनी लोक कथा पर आधारित कहानियों की अगली कड़ी में नई कहानी 'वीर शिगार की कहानी' के पहला भाग सुनाया गया, जिसमें सात सूरज और छ: चाँद की बात विश्वास करने योग्य नहीं है। साथ ही वीर शिगार द्वारा छ: सूरज और पाँच चाँद को मार गिराने की बात तो और ही अविश्वसनीय प्रतीत होता है। वीर शिगार द्वारा पहाड़ी पर रहने वाले परिन्दों की कल्याण हेतु दुष्ट अजगर के विनाशकारी कार्य सराहनीय है।

 

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" के स्पेशल सेगमेंट में भारतीय विदेश मंत्री का भाषण सुनाया गया, जिसमें हिन्दी भाषा सीखने वाले चीनी छात्रों को प्रोत्साहन हेतु 25 सदस्यीय टीम बनाकर भारत आने का निमंत्रण दिया गया और उन्हें भारतीय परिधान भी दिए जाएंगे।

वहीं चीनी मुहावरे की कड़ी में "सांप के दो पैर बनाना" की लोक गाथा पर आधारित घटना में मदिरा पाने हेतु चित्र बनाने की प्रतियोगिता में सबसे पहले चित्र बनाने वाले प्रतिभागी को घमंड के कारण हार की राह देखना पड़ा और निराशा ही हाथ लगी। वास्तव में घमंड से प्रतिभा का विनाश  होता है।

श्रोताओं के चहेता साप्ताहिक कार्यक्रम "आप का पत्र मिला" में सबसे पहले मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल के भाई शिवेन्दु पॉल का पत्र पढ़ा गया। उसके बाद क्रमश: जमशेदपुर झारखण्ड के श्रोता भाई एस बी शर्मा, बेहाला कलकत्ता के श्रोता भाई प्रियंजित कुमार घोषाल, मेरा पत्र, मुक्तसर पंजाब के श्रोता भाई गुरमित सिंह और केशिंगा उड़ीसा के मॉनिटर भाई सुरेश अग्रवाल का पत्र पढ़ा गया। वहीं एक हिन्दी गाना सुनाकर अंत में गोरखपुर उत्तर प्रदेश के बद्री प्रसाद अंजान जी के द्वारा भेजा गया दो जोक्स सुनाकर कार्यक्रम की समाप्ति की गई। कुल मिलाकर सभी कार्यक्रम अच्छे थे।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक कार्यक्रम "बाल महिला स्पेशल" में सुनाया गया कि आठवें पेइचिंग अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 20 अप्रैल को पहली बार बाल फिल्म विकास मंच का आयोजन किया गया, जिसमें वैश्विक पृष्ठभूमि में चीनी बाल फिल्म से जुड़े विषयों पर विचार विमर्श किया गया। चीन में हर वर्ष लगभग सौ फिल्मों का निर्माण किया जाता है, जिसमें करोड़ों चीनी युआन की पूँजी लगायी जाती है। टीवी फिल्म निर्देशक फान लीफिंग के अनुसार बाल फिल्म अभिनेता अभिनेत्री के पास बड़ी निहित शक्ति है, जिन्हें प्रशिक्षण देकर भविष्य में अभिनय कलाकार बनाते हुए अभिनय जगत के लिए फायदे की संभावनाएं बढ़ाई जा सकती है।

"टी टाईम" कार्यक्रम के अंतर्गत चीन में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने वाले एक भारतीय और दो चीनी अध्यापकों से भेंटवार्ता, श्रोताओं की टिप्पणी और जोक्स पसंद आए।

 

अनिलः वहीं कार्यक्रम "विश्व का आईना" में सुना कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस दैनिक जीवन में न्यूज का मुख्य विषय बन चुका है। अलफागो मानव जाति को हराकर गो का विश्व चैम्पियन बना और मानव रहित कार सड़कों पर चलने लगी। इस रिपोर्ट से यह जाहिर होता है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस भविष्य में मानव जाति के काम को छीनेगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों को बेरोजगार होना पड़ेगा।

शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा द्वारा व्हट्सएप के जरिए हम तक भेजा गया यह पत्र।

पहले एक कमाता था नौ खाते थे

इसलिये उसे "नौ करी" कहते थे.

बाद में एक कमाता था चार खा लेते थे

इसलिये उसे "चा करी" कहते थे.

इसके बाद जितना मिलता था वो खुद के तन के लिये ही पूरा पड़ता था

इसलिये उसे "तन खा" कहते थे.

अब तन को भी पूरा नहीं पड़ता .....

इसलिये उसे "वे तन" कहते हैं..!!

ओर आजकल के लडके--लडकियां सिर्फ

सेल फोन लेने के लिये हि जॉब करते हैं

इसलिये उसे "सेल री" कहते हैं

एकदम अपडेटेड है।

शर्मा जी, आपका बहुत बहुत शुक्रिया आपने इस पत्र के जरिए बताने की कोशिश की है कि आजकल कितना बदलाव हो चुका है और हम सेलरी क्यों कहते हैं। बहुत खूब, शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

 

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