20180404

2018-04-04 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र शामिल करेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए आज के प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह का। लिखते हैं कि मैं आपको पहली बार पत्र लिख रहा हूं। मैं चार साल से सीआरआई हिन्दी के प्रोग्राम सुनता हूं। मुझे सीआरआई हिन्दी से बहुत लगाव है। मैं ई-मेल के द्वारा आपसे जुड़ना चाहता हूं। आप मेरा यह ई-मेल प्रोग्राम में शामिल कर लेते हैं, तो मुझे पता चल जाएगा कि मेरा पत्र आप को मिल गया है, ताकि मैं आगे से भी कुछ न कुछ लिखता रहूंगा। आपका आभारी रहूंगा।

गुरमीत सिंह जी, पिछले कार्यक्रम में भी हमने आपका पत्र शामिल किया था। इस बार भी हम आपका पत्र शामिल कर रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि आप अगला पत्र हमें भेजेंगे।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि पिछले विश्व का आईना प्रोग्राम में चीन में गरीबी उन्मूलन, चीन का विकास, रूस-ब्रिटेन संबंध और अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा की गयी। धन्यवाद।

वहीं दक्षिण एशिया फोकस प्रोग्राम में सबसे पहले संगीत सुनाया गया। इसके बाद पेइचिंग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के साथ चर्चा सुनाई गयी। वहीं संडे की मस्ती में अप्रैल फूल से जुड़ी बातों की चर्चा किया जाना अच्छा लगा।

 

अनिलः प्रियंजीत जी ने आगे लिखा है कि टी-टाइम प्रोग्राम में केरल के अनूप चंद्रन और गुजरात की एन ठक्कर की शादी की चर्चा बहुत अच्छी लगी। वाकई में दोनों एक-दूसरे के लिए बने हैं। जबकि फेसबुक में जानकारी के दुरुपयोग के मामले के बारे में बताया गया। वहीं खेल की खबरों में ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ, डेविड वॉर्नर को टीम से एक साल के बाहर किए जाने का समाचार दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण कहा जाएगा। लगातार शानदार कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिए अनिल जी को धन्यवाद। वैसे मैं कहना चाहता हूं कि स्पोर्ट्स के लिए अलग से कार्यक्रम बनाया जाय।

प्रियंजीत जी, हमने आपके सुझाव पर गौर करेंगे, शुक्रिया। प्रियंजीत जी, हम आपको पहले भी सूचित कर चुके हैं, कृपया अपने पत्र को हिंदी में लिखे, रोमन में नहीं। या फिर अंग्रेजी में लिखकर भेजे। क्योंकि आप जब रोमन में हिंदी लिखकर भेजते हैं, तो बहुत सारी चीजें समझ नहीं आती हैं। कष्ट के लिए खेद है।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि सीआरआई हिन्दी वेबपेज पर पोस्ट चीन स्थित भारतीय राजदूत गौतम बंबावाले द्वारा हाल में मीडिया को दिए इन्टरव्यू के हवाले से रिपोर्ट अच्छी लगी। गौतमजी का यह कहना बिलकुल सही प्रतीत होता है कि भारत चीन के उत्थान पर चिंता नहीं करता है। भारत यह नहीं मानता कि चीन प्रतिद्वंद्वी और खतरा है। भारत चीन को अपने विकास और प्रगति के रास्ते में साझेदार मानता है। राजदूत बंबावाले के संबंधित कथन पर चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ छुनयिंग का 26 मार्च को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह कहना कि चीन भारत के साथ मिलकर समान विकास को साकार करने को तैयार है। चीन और भारत का तेज़ विकास दोनों देशों के लिए ही नहीं, सारी दुनिया के लिए भी अवसर है, काफी सकारात्मक कहा जायेगा।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" का आगाज़ मधुर चीनी गीत से किये जाने के बाद पेश लेख 'चीन में सुधार और खुलेपन का प्रतिबिम्ब' सुना, जो अहम लगा। लेख में चीन द्वारा इतने कम समय में की गयी असाधारण और चहुँमुखी प्रगति की ब्यौरेवार जानकारी प्रदान की गयी थी। सचमुच, यह तो सागर में गागर जैसा था।

कार्यक्रम में आगे चीन की पांच शीर्ष सुर्खियों में -चीन लोक-गणराज्य द्वारा कुल नौ चार्टर और उनहत्तर धाराओं वाला निरीक्षण क़ानून पारित; पेइतो उपग्रह प्रणाली के ज़रिये चीन में बेहतर वीडियो कॉलिंग की शुरुआत; चीन स्थित भारतीय राजदूत ने कहा चीन के उत्थान को भारत ख़तरा नहीं मानता; चीनी मानव संसाधन मंत्रालय अपने कुशल लोगों को देगा सामाजिक कल्याण की गारण्टी और ई-जाति के लोगों का साल 2018 छामू बाघ संस्कृति उत्सव, आदि समाचार अच्छे लगे।

चीनी मुहावरों के क्रम में -अण्डे और पृथ्वी के अठारह हज़ार वर्ष बाद अलग होने की कहानी दिलचस्प लगी।

वहीं कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अन्तर्गत 'काठ का घोड़ा' शीर्षक कथा काल्पनिक, पर दिलचस्प कही जाएगी। बढ़ई और लोहार में सबसे अच्छा कारीगर कौन, और उसके बाद आकाश महल में जाकर राजकुमारी से राजकुमार का मिलना मन में अलौकिक आनन्द की अनुभूति प्रदान करता है।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" के तहत वर्ष 2018 की चीन सरकार की कार्य रिपोर्ट की चर्चा करते हुये दी गयी यह जानकारी अहम लगी कि चीन की इस वर्ष कोई एक करोड़ से अधिक लोगों को ग़रीबी से मुक्ति दिलाने की योजना है। इसके साथ ही यह महत्वपूर्ण सूचना भी दी गयी कि जहाँ वर्ष 1996 में चीन का मानव विकास सूचकांक 0.56 था, वहीं सन् 2015 में वह बढ़ कर 0.74 तक पहुंच गया है। वास्तव में, चीन को विकास के क्षेत्र में साधारण सफलता हासिल हुई है और विश्व इस सफलता के रहस्य को समझने की कोशिश कर रहा है। देखा जाये, तो इसके पीछे अनुकूलनशीलता, नवाचार, संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और सर्वोपरि प्रशासनिक दक्षता ही इस क़ामयाबी के मुख्य कारण हैं। चीन की अनवरत ग़रीबी उन्मूलन योजना तो विश्व समुदाय के समक्ष एक मिसाल है।

कार्यक्रम में आगे संयुक्त राष्ट्रसंघ किन-किन क्षेत्रों में चीन की मदद कर सकता है; व्लादिमीर पुतिन का चौथी बार रूस का राष्ट्रपति चुना जाना; रूस-ब्रिटेन बिगड़ते सम्बन्ध; आगामी 6 अप्रैल से पेइचिंग में आयोजित आठवां फ़िल्म उत्सव और हांगकांग में एक महीने चलने वाली अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म प्रदर्शनी द्वारा 850 प्रदर्शकों को आकृष्ट किये जाने की चर्चा की जितनी भी प्रशंसा की जाये, कम है।

 

अनिलः वहीं श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में पत्र-लेखक श्रोताओं के बीच लिखने की मची होड़ मुझे आह्लादित कर देती है। उम्मीद है कि यह ज़ज़्बा बरक़रार रहेगा। आज के अंक में श्रोताओं के पत्रों और प्रतिक्रियाओं को समुचित स्थान दिये जाने के अलावा व्हट्सएप्प के ज़रिये बद्रीप्रसाद वर्मा का जोक और शंकर प्रसाद शम्भू का 'कड़वा सच' बहुत प्रेरक लगा। भगवान करे श्रोताओं की यह महफ़िल यूँ ही सजती रहे।

साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में चीनी पटकथा लेखक वांग लीफिंग पर आधारित रिपोर्ट सुनी, जो अच्छी लगी। पता चला कि जुलाई 2017 में चाइना रेड़ियो इन्टरनेशनल और मंगोलियायी राष्ट्रीय सार्वजनिक रेड़ियो व टीवी स्टेशन द्वारा संयुक्त रूप से मंगोलियायी भाषा में 'जीवन का रहस्योद्घाटन' नामक एक चीनी नाटक की डबिंग की गयी थी। नाटक ने मंगोलियन राष्ट्रीय प्रसारण में जारी होने के बाद लगातार 20 दिनों तक मंगोलिया में रेटिंग की चैंपियनशिप जीती और वह मंगोलिया में एक लोकप्रिय टीवी नाटक बना। सीआरआई संवाददाता द्वारा ख़ास तौर पर 'जीवन का रहस्योद्घाटन' की पटकथा लेखक वांग लीफिंग से लिये साक्षात्कार में उन्होंने आशा जतायी कि उनके टीवी नाटक से विश्व एक रंगारंग चीन को समझ सकता है और हम अधिक से अधिक लोगों को अच्छी तरह से चीनी कहानी बता सकते हैं।

यह भी पता चला कि वास्तव में साल 2013 में वांग लीफिंग द्वारा बनाया गया टीवी नाटक 'बहू का सुन्दर युग' अफ़्रीकी देश तंजानिया में प्रसारित किया गया, तब भी यह टीवी नाटक स्थानीय लोगों में बहुत लोकप्रिय हुआ था। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने तंजानिया की यात्रा के दौरान कहा कि 'बहू का सुन्दर युग' देखकर तंजानिया की जनता ने चीनी लोगों के सामान्य जीवन को समझा है। वास्तव में, वांग लीफिंग जैसे कलाकार किसी भी देश की सांस्कृतिक धरोहर की तरह होते हैं। वह भले ही चीन की हैं, पर मुझे उनके कार्य पर गर्व है।

 

ललिताः सुरेश जी आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत तिब्बती जन-जीवन में सुधार संबंधी रिपोर्ट सुनी। चीनी दक्षिण-पश्चिमी विज्ञान और तकनीकी विश्वविद्यालय के कृषि विशेषज्ञ डॉक्टर चांग मंग द्वारा वर्ष 2012-14 की अवधि में सछ्वान प्रान्त के नावा तिब्बती जातीय प्रिफैक्चर की सुंग थांग काउन्टी में किसानों को दिये गये फल उत्पादन सम्बन्धी प्रशिक्षण की बदौलत वहां आये आर्थिक-सामाजिक परिवर्तन पर अच्छी जानकारी हासिल हुई।

 

अनिलः वहीं कार्यक्रम "टी टाइम" का आगाज़ ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे द्वारा फ़ेसबुक पर शेयर की गई नेहाल ठक्कर और अनूप चंद्रन की लव स्टोरी के वायरल होने के समाचार से किया जाना दिलचस्प लगा। यह जान कर हैरत हुई कि इनकी शादी दिसंबर में हुई थी और अब यह दोनों कैसे अकेले जीवन जी रहे हैं।

इससे भी अधिक हैरत तो इस बात को लेकर हुई कि दोनों की पहली मुलाकात 9 साल पहले मुंबई के एक कन्वेंशन में हुई। दोनों की ही नई मुंबई की एक स्ट्रीट में एक्सीडेंट हुआ और ताज्जुब की बात तो ये है कि दोनों का एक ही जैसी कार से एक्सीडेंट हुआ। इतना ही नहीं दोनों की स्पाइनल कॉर्ड में चोट आईं और दोनों को व्हीलचेयर पर रहने की सलाह दी गई।

वहीं दुबई के रहने वाले 25 वर्षीय इलेक्ट्रिशियन दानिश कोठारंबन का लॉटरी खुलने पर रातों-रात करोड़पति बनने का किस्सा तो तक़दीर का खेल कहा जायेगा।

जानकारियों के क्रम में संगीत से गायों के दुग्ध उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी होना यह साबित करता है कि संगीत का असर मानव मन-मस्तिष्क पर ही नहीं, जानवरों पर भी होता है।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि सीआरआई हिन्दी की वेबसाइट पर पोस्ट रिपोर्ट में पता चला कि पहली अप्रैल 2017 को चीनी केंद्रीय सरकार और चीनी राज्य परिषद द्वारा हपेई प्रांत में श्योंगआन नये क्षेत्र की स्थापना करने का जो निर्णय लिया गया, वह इस बात का द्योतक है कि चीन का सुधार और खुलापन नये युग में प्रवेश करने के प्रतीक के तौर पर इस शहर की स्थापना होगी। निश्चित तौर पर यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को कोर बनाने वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी द्वारा चुना गया एक अहम ऐतिहासिक सामरिक विकल्प है, जो शनजडं आर्थिक विशेष क्षेत्र और शांगहाई फूतोंग नये क्षेत्र के बाद चीन का और एक नया क्षेत्र है।

आज पहली अप्रैल को श्योंगआन स्थापना की पहली वर्षगांठ है के अवसर पर रिपोर्ट में हमने इस शहर के पिछले एक साल की उपलब्धियों को देखा, तो महसूस हुआ कि श्योंगआन में हुए भारी परिवर्तन वास्तव में, चकित करने वाले हैं। पता चला कि स्मार्ट शहर प्लस मानव उन्मुख ढांचे में श्योंगआन नागरिक सेवा केंद्र एक साल में निर्मित किया गया। सुन्दर चीन प्लस बिग डैटा केंद्र वाली हरित परियोजना का श्योंगआन में तेज़ी से विस्तार हुआ। उच्च स्तरीय निर्माण प्लस सूचना इंटेलिजेंट की विशेषता वाले पेइचिंग-श्योंगआन रेल मार्ग का निर्माण प्रगति पर है और कोई एक सौ से ज्यादा उच्चस्तरीय उद्यमों ने श्योंगआन में अपने कार्यालय स्थापित किये हैं।

रिपोर्ट पढ़ कर यह स्पष्ट हो जाता है कि पिछले एक साल में श्योंगआन में हुये विकास के मद्देनज़र भविष्य में श्योंगआन के विकास का मार्ग निश्चित तौर पर नवाचार का मार्ग होगा, जो कि स्पष्ट रूप से चीनी विशेषता होगी। सही मायने में श्योंगआन इस दौर एक ऐसा नया शहर है, जहां चीन के सुधार और खुलेपन की प्रबल प्रेरणा शक्ति विद्यमान है। इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि श्योंगआन का विकास और सफलता चीन के महान पुनरुत्थान और विश्व की नयी समावेशी और नयी समृद्धि का साक्षी बनेगा। धन्यवाद इस शानदार रिपोर्टिंग के लिये।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें प्रतिक्रिया भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा का पत्र। लिखते हैं कि विचार धारा ही आम और खास को सफल और असफल बनती है। ऐसा हमलोग सालों से जानते और सुनते आ रहे हैं। विचार धारा को आज विज़न के नाम से भी जाना जाता है। विज़न कुछ शब्दों का अर्थपूर्ण और उचित समावेश है। वे शब्द ही सफल और असफल होने की गारंटी करते हैं। ऐसी ही शब्द हर देश के विकाश और सफलता के सूत्रधार होते हैं। यही सवाल चीन के संयुक्त राष्ट्र संघ के नुमाईंदे से पूछा गया कि आखिर चीन की सफलता के पीछे क्या रहस्य है? हाल में चीन स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के समंव्यक और चीन स्थित संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के प्रतिनिधि ल्वो शीची के विचार में चीन की सफलता के पीछे तीन प्रमुख शब्द हैं। वे हैं अनुकूलनशीलता, नवाचार और नेतृत्व चीन की सफलता का रहस्य है। इन तीनों शब्दों को बहुत ही बारीकी से परिभाषित किया गया, जिसके अनुसार अनुकूलनशीलता को ले तो सामाजिक अर्थव्यवस्था और पर्यावरण स्थिति के परिवर्तन के साथ चीन लगातार अपनी विकास दिशा का बंदोबस्त करता रहा है। चीन विभिन्न चरणों में साकार किये गये विकास लक्ष्य बना सकता है और तदनुरुप नीतियां भी बनाता है। चीन में गरीबी उन्मूलन इसका एक बहुत बढ़िया उदाहरण है।

नई नई खोज करना उसका पेटेंट करना और देश की उन्नति करना चीन से हम प्रतिदिन सुनते हैं। यह सब नवाचार से संभव हो पाया है। नवाचार के क्षेत्र में चीन ने कुछ जगहों को चुनकर टेस्ट करने की योजना बनायी। उदाहरण के लिए चीन ने हाल ही में तीन शहरों में देश के अनवरत विकास कार्यक्रम के नवाचार मिसाल क्षेत्र स्थापित करने की पुष्टि की, जिसका मकसद लोगों को एक नये ढंग वाले विकास फार्मूले का प्लेटफार्म प्रदान करना है।

नेतृत्व के क्षेत्र में अनुकूलनशीलता और नवाचार को साकार करने के लिए चीन को प्रबल नेतृत्व शक्ति और लम्बे अरसे की रणनीतिक विचारधारा की आवश्यकता है। चीन का कारगर प्रशासन इससे प्रतिबिंबित होता है।

 

ललिताः एस बी शर्मा जी ने आगे लिखा है कि चीन को संसाधन के अच्छे इस्तेमाल के लिए संस्थाओं की स्थापना करने के लिए सक्षम है, विकास के ब्लू प्रिंट को सुनिश्चित कर सके। और अहम बात यह है कि स्थानीय स्थिति से मेल खाने वाली ठोस नीतियों का कारगर कार्यान्वयन किया जा सकता है। आज का चीनी नेतृत्व दुनिया सफलतम नेतृत्व नाब चूका है, जिसका प्रमाण है कि चीन की जनता वर्तमान नेतृत्व को लम्बे समय के लिए मान्यता दे दी है। वर्तमान समय ये सर्व विदित हो गया है कि वास्तव में यही तीन शब्द है, जो चीन को सफल बना रहा है।

 

अनिलः एस बी शर्मा जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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