20180328

2018-03-28 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल से शिवेन्दु पाल का। लिखते हैं कि मैं सीआरआई हिंदी सेवा का एक नियमित श्रोता हूं। मेरे क्षेत्र के कई श्रोता आपके प्रोग्राम सुनते हैं। आप का पत्र मिला, आप की पसंद, विश्व का आईना, टी टाइम, समाचार और अन्य सभी कार्यक्रम मुझे बहुत अच्छे लगते हैं।

13 मार्च को प्रस्तुत अतुल्य चीन कार्यक्रम में चीनी समाज और संस्कृति पर चर्चा अच्छी लगी। आप की पसंद और रोजमर्रा की चीनी भाषा कार्यक्रम भी सुन्दर लगा।

जबकि 14 मार्च को आप का पत्र मिला कार्यक्रम में मेरा पत्र शामिल करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। यह एक ऐसा प्रोग्राम है, जिसके जरिये मुझे अन्य श्रोताओं का परिचय मिलने के साथ-साथ सीआरआई हिंदी के बारे में भी बहुत जानकारी मिल जाती है। सप्ताह भर के सभी कार्यक्रमों के बारे में भी पता चल जाता है।

शिवेन्दु पाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है गोरखपुर उत्तर प्रदेश से ब्रदी प्रसाद वर्मा अंजान ने। लिखते हैं कि 12 मार्च को प्रस्तुत चीन के शाही महल के बारे में जानकारी रोचक और ज्ञानवर्धक लगी। चीनी कहानी में लीला भट्ट द्वारा सुनाई जा रही कहानी घुड़सवार मेढक खूब पसंद आ रही है।

विश्व का आईना प्रोग्राम में चीन के विदेश व्यापार पर रिपोर्ट और जापानी फिल्म कम्पनी के बारे में रिपोर्ट भी पसंद आई।

वहीं 21 मार्च को प्रस्तुत प्रोग्राम में पेइचिंग में लगी विश्व धरोहर प्रदर्शनी पर जानकारी अच्छी लगी और चीन नेपाल रेल मार्ग निर्माण के बारे में रिपोर्ट भी पसंद आई। आशा है भविष्य में भारत और चीन भी रेल मार्ग से जुड़ जाएं।

ब्रदी प्रसाद वर्मा अंजान जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। हम भी आशा करते हैं कि हमारे दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान और मजबूत होगा।

 

अनिलः अब लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि अतुल्य चीन कार्यक्रम में एनपीसी में पर्यटन के बारे में चर्चा की गयी। कार्यक्रम में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।

वहीं 22 मार्च के टी-टाइम प्रोग्राम की शुरूआत में साइंस संबंधी जानकारी सुनी। जिसमें बारिश की बूंदों से भी बिजली बनाने की बात कही गयी। एक ऐसा सोलर पैनल जो बारिश के साथ-साथ धूप में भी काम करेगा। जबकि हाली-डे इन होटल्स के मालिक की कहानी सुनी, जो एक सिनेमा हॉल के बाहर पॉपकोर्न बेचा करते थे। बाद में बिजनेस का साम्राज्य खड़ा किया। यह कहानी बहुत ही प्रेरक लगी। जबकि सलमान ख़ान के साथ एक फिल्म में काम कर चुकी पूजा डडवाल की बीमारी और खस्ता हालत के बारे में सुनकर दुःख हुआ। वहीं रोजर फेडरर को आखिर में इस साल मिली हार संबंधी खेल खबर भी अच्छी लगी। इसके साथ ही प्रोग्राम में पेश अन्य जानकारी भी शानदार थी। इसके साथ ही मेरे पत्र को शामिल करने के लिए भी आपका शुक्रिया।

जबकि कार्यक्रम संडे की मस्ती भी सुना, उसमें दी गयी जानकारी भी अच्छी लगी। शुक्रिया।

प्रियंजीत जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है मुक्तसर पंजाब से गुरमीत सिंह ने। लिखते हैं कि मैं चार साल से आपका हिंदी प्रोग्राम सुन रहा हूं। सभी कार्यक्रम अच्छे लगते हैं। आपके द्वारा पेश की जाने वाली रोचक बातें अच्छी लगती है। मैं पहली बार ख़त लिख रहा हूं इसे जरूर शामिल कीजिए। शुक्रिया।

गुरमीत जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से हमारे मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत चीन सरकार द्वारा इस साल की अपनी कार्य रिपोर्ट में पर्यटन का बार-बार उल्लेख किये जाने, पर्यटन के रोल माडल जोन की स्थापना और राजकीय दृश्य क्षेत्र की टिकट कीमत घटाने जैसे विषयों की चर्चा किया जाना अहम लगा। यह जान कर अच्छा लगा कि चीनी लोगों की इच्छा के मद्देनज़र अब चीन में कुछ दर्शनीय स्थलों ने निश्चित समय में उदार टिकट योजना पेश की है, जिसके तहत सर्दियों के मौसम में देश के सौ दर्शनीय स्थलों ने ऑफ सीजन टिकट पेश किए हैं। इसके तहत शाही महल संग्रहालय, पोताला पैलेस, हुआंग शान पहाड़ और मकाओ गुफा की टिकट में 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है।

मुझे लगता है कि दर्शनीय स्थलों की टिकट की कीमत घटाने से न सिर्फ आम लोगों को अधिक लाभ होगा, बल्कि चीनी पर्यटन उद्योग को अपडेट करने में भी मदद मिलेगी।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" के तहत चीन की 13वीं एनपीसी के पहले पूर्णाधिवेशन में 'एक पट्टी एक मार्ग' योजना के मार्ग में पड़ने वाले देशों में रोज़गार और आर्थिक विकास के अवसरों की चर्चा के साथ कुछ अहम आर्थिक समाचारों का ज़िक्र किया गया। तत्पश्चात पेश 'आर्थिक और व्यापारिक आवाजाही आगे बढ़ाने की चीन और नेपाल की समान प्रतीक्षा' शीर्षक रिपोर्ट भी अच्छी लगी।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "विश्व का आइना" में बताया गया कि वर्ष 2015 में चीन की केन्द्रीय सरकार द्वारा अपनी छठी तिब्बती कार्य बैठक में स्पष्ट रूप से तिब्बत को दक्षिण एशिया के लिए खोलने का अहम निर्णय लिया गया। इस परिप्रेक्ष्य में तिब्बत स्वायत प्रदेश के सामाजिक विज्ञान अकादमी की उप प्रधान प्येनपा राम का यह कहना बिलकुल सही लगा कि दक्षिण एशियाई रास्ते का निर्माण 'एक पट्टी एक मार्ग' पहल को दक्षिण एशियाई क्षेत्र में आगे बढ़ाने, तिब्बत के आर्थिक-सामाजिक विकास को आगे बढ़ावा देने और तिब्बत की सीमा-सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा करने के लिए बहुत अहम है।

श्रोताओं के अपने मंच साप्ताहिक "आपका पत्र मिला" में अन्य श्रोताओं के साथ मेरे पत्रों को समुचित स्थान दिया जाना, मेरे लिये बूस्टर का काम करेगा। आज के अंक में व्हट्सएप के ज़रिए भाई शंकर प्रसाद शम्भू द्वारा प्रेषित सुन्दर पंक्तियों के अलावा डॉक्टर हेमन्त कुमार द्वारा प्रेषित सत्यनारायण कथा के आरती-थाल में दो हज़ार का नोट चढ़ाने वाला किस्सा, वास्तव में क़ाबिल-ए-ताऱीफ लगा।

 

अनिलः सुरेश जी आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत तिब्बत की सुप्रसिध्द गायिका और चीन की उच्चस्तरीय राष्ट्रीय अभिनेत्री ज़ोगयोंग डोलमा पर विशेष भूमिका के साथ रिपोर्ट अच्छी लगी। यह जान कर हैरानी होती है कि ऊँचे और मधुर स्वर में तिब्बती बंधुओं का देशप्रेम गाती डोलमा लगातार 7वीं, 8वीं और 9वीं एनपीसी प्रतिनिधि के अलावा 10वीं और 11वीं सीपीपीसीसी की सदस्य बनी हैं। उनके अनुसार एनपीसी प्रतिनिधि और सीपीपीसीसी सदस्य बनने के बाद उनके ऊपर ज्यादा ज़िम्मेदारियां हैं। इसलिये उन्हें और अधिक काम करना होगा। उन्हें आशा है कि अल्पसंख्यक जाति की श्रेष्ठ संस्कृति अब अच्छी तरह विकसित हो पाएगी।

कार्यक्रम "टी टाइम" की शुरुआत वैज्ञानिकों द्वारा विकसित एक ऐसे सोलर पैनल, जो कि सूर्य की रोशनी के साथ-साथ बरसात की बूंदों से भी बिजली बनाने में सक्षम होगा, की चर्चा किया जाना ज्ञानवर्धक और उत्साहजनक लगा। पता चला कि नई तकनीक से लैस इस सोलर पैनल का विकास चीन के शोधकर्ताओं ने किया है और यह बारिश की बूंदों के दबाव के कारण होने वाले घर्षण से बिजली बनाने में समर्थ है। निश्चित तौर पर इसके लिये चीनी शोधकर्ता बधाई के पात्र हैं।

खेल की ख़बरों में अर्जेंटीना के टेनिस खिलाड़ी जुआन मार्टिन डेल पोत्रो द्वारा स्विट्जरलैंड के दिग्गज रोजर फेडरर को हराकर उनका छठी बार इंडियन वेल्स मास्टर्स खिताब जीतने का सपना तोड़ दिया जाना, निश्चित तौर पर एक बड़ा उलटफेर कहा जायेगा।

वहीं पानी पीने के सही समय और तरीकों पर दी गयी जानकारी भी उपादेय लगी। तमाम बातों के अलावा हमेशा की भांति कार्यक्रम में पेश श्रोताओं की राय और ज़ोक्स भी उम्दा लगे।

 

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत हाल ही में पेइचिंग में सम्पन्न राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा में भाग लेने आये तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के अध्यक्ष चिज़ाला से लिये गये साक्षात्कार पर आधारित रिपोर्ट अच्छी लगी। तिब्बत में आर्थिक विकास और वहां के जन-जीवन से जुड़े प्रश्नों का उन्होंने समुचित ढंग से उत्तर दिया।

यह जान कर अच्छा लगता है कि बीते चालीस सालों में तिब्बत ग़रीबी को पीछे छोड़ समृध्दि के उज्ज्वल युग में प्रवेश हो चुका है। आज तिब्बत की राजधानी ल्हासा से छंगतु तक पहुंचने में विमान से महज़ एक घंटा लगता है। जबकि पहले यह रास्ता तय करने में महीने लग जाते थे। लोगों की आय का ज़िक्र करें, तो ल्हासा शहर के उपनगर तामा नामक गांव की 1980 के दशक में औसत आय पाँच हजार युवान थी, जबकि आज यह बढ़ कर पाँच करोड़ युवान तक जा पहुंची है।

तेज़ आर्थिक विकास के चलते 12 लाख वर्ग किलोमीटर विशाल तिब्बती क्षेत्र में इंटरनेट सहित हाई तकनीक का भी द्रुत विकास हुआ है, जिसकी बदौलत तिब्बत के सबसे दूरस्थ कस्बों में भी आज मोबाइल भुगतान संभव है। तिब्बत के सभी गांवों तक इंटरनेट सेवा का विस्तार हो चुका है और 85 प्रतिशत गांव ब्रॉडबैंड के दायरे में आ गये हैं। तिब्बत में ऑनलाइन शॉपिंग आम बात हो गयी है।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं के पसन्दीदा फ़िल्म पूरब और पच्छिम, अंधा क़ानून, जॉनी मेरा नाम, पाताल भैरवी, आरती और विधाता के छह सुमधुर गाने सुन कर मज़ा आ गया।

साप्ताहिक "संडे की मस्ती" का आगाज़ 'उम्मीद है तुम्हारी संगति में ख़ुशी ही ख़ुशी हो' शीर्षक मधुर चीनी गीत से किया जाना भी रुचिकर लगा। वहीं 'विश्व की संवेदनशील कहानी' के तहत पेश हांगकांग की कहानी 'मिस्टर वन का अन्तिम दौरा' भी मर्मस्पर्शी लगा। वैसे मैं भी कार्यक्रम में पेश विश्व की संवेदनशील कहानियों का प्रशंसक रहा हूँ, परन्तु कभी-कभी मन में यह ख़्याल ज़रूर आता है कि संडे अवकाश और मौज़-मस्ती का दिन होता है, इसलिये सिर्फ़ हल्की-फ़ुल्की मनोरंजक सामग्री का ही समावेश किया जाये, तो बेहतर होता। क्यों कि कहानियां तो गम्भीर और संवेदनशील होती हैं।

सुरेश जी, हमने आपका सुझाव संबंधित उद्घोषकों को बता दिया है।

उन्होंने आगे लिखा है कि अज़ीबोग़रीब और चटपटी बातों के क्रम में चीन में 1 लाख 15 हज़ार साल पुराने हड्डियों के औज़ार मिलने और चीन में ही अपने पति से कहासुनी होने के कारण इमारत से कूद रही महिला को पुलिस वाले द्वारा बचाये जाने का समाचार विस्मयकारी लगा। धन्यवाद फिर एक बार अच्छी प्रस्तुति के लिये।

सुरेश जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम "टी टाइम" का नया अंक इस बार भी अपेक्षा के अनुरूप रोचक था। आरम्भ में विज्ञान के नए आविष्कार सोलर पैनल की नई तकनीक के विषय में बताया गया जो भविष्य की जरूरत में लाभकारी सिद्ध होगी। विशेष रूप से उस लोगों के लिये जो अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में रहते हैं, मज़े की बात यह है कि इसका आविष्कार चीन के वैज्ञानिकों ने किया है जिस देश के लिये "हिक्मत ए चीन" कहावत आम है। मैं एक श्रोता की हैसियत से उनको बधाई प्रेषित करता हूं।

कार्यक्रम "सन्डे की मस्ती" के आरम्भ में चीनी गीत सुनकर भारतीय गायिका अलीशा चिनाय जी की याद आ गई, जिनका मैं सदा प्रशंसक रहा हूं। खुशियों को दर्शाता यह चीनी गीत सच में बहुत लाजवाब लगा। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिए।

सादिक आज़मी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए अब पेश है जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा का पत्र। लिखते हैं कि चीन भारत सीमा विवाद एक बहुत ही गंभीर और पुराना मामला है। यह समस्या जटिल भी है। दोनों देशों के आम लोगों के मन में इस मसले को लेकर कड़वाहट रहती है। बावजूद इसके दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार बढ़ चूका है, पर हमें लगता है की यदि सीमा विवाद दूर हो जाता, तो दोनों देशों की मित्रता और बढ़ती और हमारे सम्बन्ध ज्यादा मजबूत होते। ख़ुशी की बात यह है कि दोनों देश इसे दूर करने के लिए पूरी कोशिश करते हैं। दोनों देशों में लोकप्रिय सरकार है और उनके शासक भी मजबूत है। वे एक कदम आगे बढ़ कर इस समस्या के समाधान के लिए कोई भी समझौता कर सकते हैं। यही अवसर जब दोनों देशों को आपसी सूझबूझ से काम लेनी चाहिए और सीमा विवाद को दूर करना चाहिए। इसी प्रेस के तहत 22 से 23 मार्च तक चीन भारत सीमा पर सलाह मशविरे तंत्र की 11वीं बैठक दिल्ली में आयोजित हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्र विभाग के महानिदेशक यी श्येन ल्यांग और भारतीय विदेश मंत्रालय के पूर्वी एशिया के अधिकारी प्रणय वर्मा ने इसकी अध्यक्षता की। दोनों पक्षों के कूटनीति और सुरक्षा विभागों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। दोनों पक्षों ने फिलहाल दोनों देशों की सीमांत क्षेत्र की स्थिति का सिंहावलोकन किया और सीमा प्रबंधन व नियंत्रण और पारस्परिक विश्वास बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने दोहराया कि वे रचनात्मक तरीके से संपर्क मजबूत कर सीमांत क्षेत्र की आवाजाही और सहयोग का विस्तार करेंगे, विश्वास निर्माण बढ़ाएंगे, सीमा सवाल का उचित निपटारा करेंगे और एक साथ सीमांत क्षेत्र की शांति बनाए रखेंगे, ताकि चीन भारत संबंधों के स्वस्थ और स्थिर विकास के लिए अच्छा माहौल तैयार किया जाए।

एस बी शर्मा जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र। यह पत्र हमें भेजा है गोरखपुर उत्तर प्रदेश से ब्रदी प्रसाद वर्मा अंजान ने। उन्होंने हमें जोक भेजे हैं।

पति से पत्नी- अगर मैं मर गई तो तुम मेरे लिए क्या करोगे?

पति- घर में सौतन लाऊंगा। मगर यदि मैं मर गया तो तुम क्या करोगी?

पत्नी- मैं घर में सुख चैन की बंशी बजाऊंगी।

अब पेश है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू का पत्र।

कड़वा सच

ये हकीकत है अपने जीवन में इस पर गौर कीजिए।

चिड़िया जब जीवित रहती है तब वो किड़े-मकोड़ों को खाती है।

और चिड़िया जब मर जाती है तब किड़े-मकोड़े उसको खा जाते है।

इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि समय और स्थिति कभी भी बदल सकते हैं। इसलिए कभी किसी का अपमान मत कीजिए। कभी किसी को कम मत आंकिए। आप शक्तिशाली हो सकते हैं पर समय आपसे भी शक्तिशाली है।

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इंसान दुनिया में तीन चीज़ों के लिए मेहनत करता है-

1-मेरा नाम ऊँचा हो...

२-मेरा लिबास अच्छा हो...

3-मेरा मकान खूबसूरत हो...

लेकिन इंसान के मरते ही भगवान उसकी तीनों चीज़े सबसे पहले बदल देता है-

१-नाम = (स्वर्गीय)

२-लिबास = (कफन)

३-मकान = (श्मशान)

शंकर प्रसाद शंभू जी, यह प्रेरक जानकारी हम तक पहुंचाने के लिए आपका शुक्रिया। और उम्मीद करते हैं कि आप लोग आने वाले समय में भी हमारे पास अपने पत्र भेजते रहेंगे, शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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