20180110

2018-01-10 21:00:00
Comment
शेयर
शेयर Close
Messenger Messenger Pinterest LinkedIn

अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तों, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल से शिवेंदु पॉल का। लिखते हैं कि चाइना रेडियो इंटरनेशनल के पूरे स्टाफ को नए साल की बधाई। मैं हिंदी सेवा का नियमित श्रोता हूं। मेरे कई दोस्त आपके प्रोग्राम सुनते हैं। आपका पत्र मिला, आपकी पसंद, विश्व का आईना, टी टाइम, समाचार और सभी कार्यक्रम मुझे अच्छे लगते हैं। आपके कार्यक्रम हमारे क्षेत्र में बहुत साफ सुनाई देते हैं।

समाचार के बाद विश्व का आईना कार्यक्रम में सुंदर वर्णन सुना। पिछले साल चीन की उपलब्धियों के बारे में जानकर अच्छा लगा।

वहीं आपका पत्र मिला कार्यक्रम भी अच्छा लगा। नए साल के अवसर पर आपको बहुत बधाई देते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से आपके साथ श्रोताओं का संपर्क मजबूत होता है। धन्यवाद।

शिवेंदु पॉल जी। हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी शुक्रिया और नए साल की आपको फिर से एक बार ढेर सारी बधाइयां। उम्मीद करते हैं कि आप आगे भी हमारे साथ संपर्क बनाए रखेंगे।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है ब्रदीप्रसाद वर्मा अंजान ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम अतुल्य चीन में चीन के गरीब परिवारों के बारे में जानकर मन दुःखी हो गया। भारत की तरह चीन में भी निर्धन और गरीब लोग हैं। यह सोचनीय बात है।

चीन-भारत आवाज कार्यक्रम में मधुकर गुप्ता के साथ भारत से चीन आने वाले छात्रों की उच्च शिक्षा पढ़ाई के बारे में बातचीत पसंद आई।

नमस्कार चाइना प्रोग्राम में चीनी लोगों द्वारा चाय पीने के तौर तरीके के बारे में जानकारी बेहद दिलचस्प लगी।

चीनी कहानी प्रोग्राम में लीला भट्ट ने आज हमें नई चीनी कहानी घुड़दौड़ प्रतियोगिता सुनाई। चीनी राजशाही की कहानी से ढेरों जानकारी हमें प्राप्त हुई। हमने एक बाल कहानी कछुआ और हाथी भेजी थी, जिसे आपने प्रस्तुत नहीं किया।

देखिए बद्री प्रसाद जी, हमें आपकी कहानी नहीं मिली। अन्यथा हम इसे ज़रूर पेश करते।

 

अनिलः ब्रदीप्रसाद ने आगे लिखा है कि आपका पत्र मिला कार्यक्रम में हमारे एक ही पत्र को शामिल किया गया। दूसरे पत्र, कविता और नव वर्ष का बधाई संदेश शामिल नहीं किया गया। आप हमारे पत्रों पर सेंसर की कैची न चलाया करें। हम तन मन धन लगा कर आपको पत्र भेजते हैं। इसका ख्याल करें।

कार्यक्रम में आपने भिलाई के श्रोता आनंद मोहन बैन के पत्र को पढ़ा, जो बेहद पसंद आया। आनंद मोहन बैन से निवेदन है कि हमारे साथ पत्राचार शुरू करें।

देखिए ब्रदीप्रसाद वर्मा जी, हम सभी श्रोताओं के पत्रों को कार्यक्रम में शामिल करना चाहते हैं। इसके बाद भी अगर आपका पत्र शामिल न हो पाया, तो हमें इसका ख़ेद है। आप लगातार पत्र भेजें, हम इन्हें जरूर शामिल करेंगे। क्योंकि आप हमारे सबसे पुराने श्रोताओं में से एक जो हैं।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि मैं आपका कार्यक्रम नियमित रूप से सुनता हूं। पिछले दक्षिण एशिया फ़ोकस प्रोग्राम में उमेश जी के साथ बातचीत में लालू, नीतिश, जयललिता और शशिकला आदि के बारे में चर्चा सुनी। जबकि टी-टाइम प्रोग्राम में इस साल मिलने वाली छुट्टियों के बारे में बताया गया। जबकि बॉबी देओल की फ़िल्म के बारे में चर्चा की गई। बहुत अच्छी लगी। वहीं कनाडा में कितनी ठंड पड़ रही है, इसका अंदाजा वहां पैंग्विन को भी ठंड से बचाने की कोशिश से लग जाता है। शानदार कार्यक्रम पेश करने के लिए धन्यवाद।

प्रियंजीत कुमार घोषाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए दोस्तो अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने। लिखते हैं कि नये साल में हमारे क्लब के सदस्यों ने कुछ नयी कार्य योजना तैयार कर उसे समुचित ढंग से सफल करने का बीड़ा उठाया है, जिसमें दो कार्यों को प्रमुखता दी गई है – पहला- इस वर्ष के पहले तीन महीनों में श्रोता सम्पर्क अभियान चलाते हुए बिहार के दस जगहों पर श्रोता सम्पर्क बैठक करना और दूसरा अलग-अलग जगहों पर जाकर रेडियो सुनकर रिसेप्शन रिपोर्ट तैयार कर CRI को भेजना। अगले महिने हम लोग अपने क्लब का स्थापना दिवस भी मनाने वाले हैं।

आपसे निवेदन है कि बिहार के सभी श्रोताओं का पूरा पता वाट्स एप नम्बर और सम्पर्क नम्बर के साथ कार्यक्रम सारणी और श्रोता वाटिका पुस्तकें भेजने का कष्ट करेंगे, जिससे श्रोता सम्पर्क अभियान के तहत कुछ नये श्रोताओं को बाँध सके।

शंकर प्रसाद शंभू जी, आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हम इस बारे में संबंधित विभाग से आपके बारे में बात कर अवगत करा देंगे। जहां तक श्रोता वाटिका की बात है तो यह बहुत पहले बंद हो चुकी है। शायद आपको इस बात की जानकारी हो। धन्यवाद।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सऊदी अरब से सादिक आज़मी ने। लिखते हैं कि इस बार के "सण्डे की मस्ती" कार्यक्रम की बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहा था। कारण था आपके उस परिवर्तन का जिसका विगत कार्यक्रम में वादा किया गया था। कार्यक्रम का आरम्भ पूर्व की भॉति एक सुंदर चीनी गीत से हुआ जो मुझे बहुत अच्छा भी लगा। गायिका ओलान जी की आवाज़ सुनकर भारतीय गायिका अलीशा चिनाय की याद ताज़ा हो गई। इसके बाद विश्व की संवेदनशील कहानी में इंग्लैंड से ली गयी कहानी सुनवाई गई। यहां पर कहना चाहता हूं कि विश्व की संवेदनशील कहानी कार्यक्रम सण्डे की मस्ती में गंभीरता का माहौल उत्पन्न करता है, जबकि कार्यक्रम का मूल्य उद्देश्य फन और मस्ती की डबल डोज़ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करना है। अत: मेरे विचार से नये साल से इसकी जगह हॉलीवुड के रंगमंच से रिपोर्ट को संयोजित किया जाए।

अजीबोगरीब खबरों के क्रम में कई रोचक जानकारियां सुनवाई गई, जिसमें चीन में शोशे के पुल को आम जनता के लिए खोला जाना महत्वपूर्ण लगा। हर महीने के पहले सप्ताह में मीरा जी की उपस्थिति हमारे लिए एक उपहार सरीखा है।

सादिक आज़मी जी, हमने आपकी फरमाइश संबंधित उद्घोषकों को बताई है। विश्वास है कि कार्यक्रम में सुधार आएगा।

 

अनिलः सादिक आज़मी जी ने आगे लिखा है कि "आपकी पसंद" के आनंददायक अनुभव के बाद कहना चाहता हूं कि अंजलि जी और पंकज जी की .जोड़ी से सुसज्जित यह कार्यक्रम बहुत अच्छा लगता है। एक तरफ अंजलि जी नए पुराने मधुर गीत सुनवाकर मंत्रमुग्ध करती हैं तो वहीं दूसरी ओर पंकज जी आश्चर्यजनक बातों से हमारा मन जीत लेते हैं। आज के कार्यक्रम में पंकज जी ने सेल्फ ड्राइविंग तकनीक पर बहुत बढ़िया जानकारी दी। इसकी कामयाबी भारत को विज्ञान और तकनीक और आविष्कार के विभाग में नया मुकाम दिलवाएगा प्रधान मंत्री जी के मेक इन इण्डिया नारे को भी बल मिलेगा। फ्लक्स आटो बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने ट्रक जैसे विशाल वाहन को इसमें शामिल कर लिया है। पंकज जी की भाषा शैली का मैं हमेशा प्रशंसक रहा हूं वह जिस प्रकार विषय को विस्तार देते हैं अतुलनीय होता है और बात सहज और सरल तरीके से मन में प्रवेश कर जाती है। सच में सराहनीय है और वह बधाई के पात्र हैं।

आपका पत्र मिला कार्यक्रम में नव साल के पहले सप्ताह में अन्य श्रोताओं की भॉति मुझे भी कार्यक्रम में जगह दी गई, आपका आभारी हूँ। ये सच्च है कि वर्तमान समय में मैं सऊदी अरब में हूं और मेरा प्रयास रहेगा कि लगातार आपके साथ संपर्क बनाए रखूं और पत्राचार नियमित तौर पर जारी रहे। अनिल जी विशेष रूप से नव वर्ष की शुभकामना देने हेतु आपका हृदय से आभार।

सादिक जी आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

आगे लिखते हैं कि आजकल यहां ठंड ने दिन में जैकेट और रात में ब्लैंकेट में लिपटने पर विवश कर दिया है, लेकिन प्रकृति के इस नियम से हम प्रसन्न हैं और खूब आनंद ले रहे हैं। वहां का वर्तमान मौसम कैसा है आप लोगों की दिनचर्या कैसे बीत रही है बताइयेगा।

एक अनुरोध है कि अपने मोबाइल वेबसाइट के होम पेज पर सिर्फ समाचारों को ही नहीं अपितु उस दिन के साप्ताहिक कार्यक्रम को भी अपलोड किया करें ताकि हमको रेडियो की भॉति सभी प्रोग्राम एक ही मंच पर मिल सकें।

सादिक आज़मी जी, नया साल आ चुका है और चीन में भी इन दिनों जबरदस्त ठंड पड़ रही है। राजधानी पेइचिंग सहित कई इलाकों में पारा शून्य से लगभग 10 डिग्री से नीचे जा चुका है। और हां पिछले एक दो दिन में ठंड और बढ़ चुकी है। क्योंकि तेज़ हवाओं ने लोगों को परेशान कर रखा है। लेकिन यहां आपको बता देता हूं कि घर पर हीटिंग सिस्टम मौजूद होता है। इसलिए घर पर कोई खास परेशानी नहीं होती। हां बाहर जाने पर जरूर आपको अच्छे खासे कपड़े पहनने होते हैं। आपसे अनुरोध है कि हर बार आप वहां के बारे में यानी सऊदी अरब के बारे में कुछ नया हमारे श्रोताओं को बता सकते हैं। उदाहरण के लिए वहां का जीवन, स्थिति और दिनचर्या आदि। बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि वर्ष 2018 के आगमन पर चाइना रेडियो इंटरनेशनल के महानिदेशक वांग कंगन्येन ने सीआरआई के सभी सहकर्मियों की ओर से रेडियो और इंटरनेट के ज़रिये तमाम विदेशी श्रोताओं और नेटिजनों का अभिवादन करते हुये जो शुभकामना सन्देश दिया, अच्छा लगा। वांग कंगन्येन द्वारा श्रोताओं को सीआरआई का स्नेहपूर्ण मित्र कह कर संबोधित किया जाना दिल को छू गया। इसके साथ ही उन्होंने नये साल में सीआरआई श्रोताओं और नेटिजनों को और अच्छी और श्रेष्ठ सूचना-सेवा मुहैया कराने और चीन को जानने, समझने के लिए और ज़्यादा प्लेटफ़ार्म उपलब्ध कराये जाने का भरोसा भी दिलाया। उन्होंने श्रोताओं को अहमियत देते हुये कहा कि आप लोगों के समर्थन ही से हम आगे स्थिर और मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। हमें पक्का विश्वास है कि आप सब हमारे अच्छे दोस्त हैं। आपकी हरेक कॉल, प्रत्येक टिपण्णी और हरेक पत्र में भारी प्रतीक्षा शामिल होती है। यहां मैं सीआरआई के सभी सहकर्मियों की तरफ़ से आप लोगों को हार्दिक धन्यवाद देना चाहता हूं। आपको भी हृदयतल से धन्यवाद महानिर्देशक महोदय।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत दक्षिणी चीन के क्वांगतोंग प्रांत में गऱीबी उन्मूलन हेतु चलाये जा रहे विशेष विकास कार्यों पर अहम जानकारी दी गयी।

वहीं "चीन-भारत आवाज़" के अन्तर्गत ब्रिक्स फोरम में भाग लेने भारतीय अधिकारी मधुकर गुप्ता के साथ ली गई भेंटवार्ता सुन कर भारत में ब्रेन-ड्रेन की समस्या और ब्रिक्स के आगामी दस सालों में संभावनाओं पर अहम जानकारी हासिल हुई।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" की शुरुआत में कुछ आर्थिक समाचारों की प्रस्तुति के बाद पेश रिपोर्ट में सृजन से विकास की ओर आगे बढ़ने की चीनी रणनीति पर भी अहम चर्चा सुनने को मिली।

कार्यक्रम "नमस्कार चाइना" में पेश ख़ास रिपोर्ट 'भारतीय मीडिया की नज़र में चीन-भारत मीडिया' सुनी, जो कि बहुत अच्छी लगी। कार्यक्रम में आगे चीन की चार हज़ार साल पुरानी चाय संस्कृति पर पेश विस्तृत रिपोर्ट भी सूचनाप्रद लगी। चीन की सात बुनियादी चीज़ों में शुमार चाय एक पेय नहीं, बल्कि उसमें चीन की समृध्द प्राचीन संस्कृति की झलक मिलती है। यह जान कर अच्छा लगा कि चीन में चाय का सम्बंध बौध्द-धर्म से भी जुड़ा हुआ है और विभिन्न क़िस्म के चायों में 'कुंगफ़ू' भी मौजूद है। कार्यक्रम में चीन के विशेष चायघरों, भिन्न-भिन्न तरह के चाय और उसके पीने और परोसने के तरीक़ों पर भी जानकारी हासिल हुई। नव-वर्ष की शुरुआत में इतनी सारगर्भित प्रस्तुति के लिये धन्यवाद।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अन्तर्गत लीला भट्ट द्वारा बुध्दिमानी पर आधारित पेश 'श्येनछी की घुड़दौड़ प्रतियोगिता' और 'छूलोंग और चाओ रानी माँ' शीर्षक दोनों कहानियां रुचिकर और ज्ञानवर्द्धक लगीं।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन और सम्मेलन संघ यानी आईसीसीए के हवाले से दी गयी यह जानकारी अच्छी लगी कि वर्ष 2016 में चीन द्वारा आईसीसीए के कुल 410 अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया गया, यह संख्या विश्व के सांतवें स्थान पर रही। जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन जापान के साथ पहले स्थान पर रहा।

कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" के मंच पर आज नव-वर्ष की शुभकामनाओं के साथ कुछ पुराने श्रोता-मित्रों का पुनः अभ्युदय हुआ और मंच की शोभा बढ़ी। श्रोताओं के विचार और प्रतिक्रियाओं का भी पूरा सम्मान दिया गया। व्हट्सएप्प के ज़रिये भाई शंकर प्रसाद शम्भू द्वारा प्रेषित ज़ोक्स में दो नम्बर जोक उम्दा लगा।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" में पेश चीन के क्वांगचो के एक मातृत्व अस्पताल में काम करने वाली ईरान की डॉक्टर हामिनी की कहानी प्रेरक लगी। चीनी, अंग्रेज़ी और फ़ारसी भाषाएं जानने वाली और एक चीनी पुरुष से शादी कर चीन में रहने वाली डॉक्टर हामिनी स्वभाव से उदार लगीं, अन्यथा आज के इस भौतिकतावादी युग में कौन ऐसा डॉक्टर होगा, जो अपने मरीज़ों को पैसे उधार देता हो। मैं सेवाभाव के उनके ज़ज़्बे को सलाम करता हूँ।

कार्यक्रम "टी टाइम" हर बार की तरह आज भी लाज़वाब रहा। इस साल नव-वर्ष के मौके पर हजारों लोगों द्वारा लिये जाने वाले संकल्प और उनके पूरा होने, न होने पर दी गयी जानकारी अच्छी लगी। इस परिप्रेक्ष्य में यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल द्वारा कोई तीन हज़ार लोगों पर न्यू ईयर रेजोल्यूशन से संबंधित किये गये अध्ययन का निष्कर्ष कुछ सोचने पर मज़बूर करता है, क्यों कि अध्ययन में शामिल 52 फीसदी लोगों को संकल्प लेते वक्त खुद पर विश्वास था कि वे इसे अवश्य पूरा करेंगे, बावजूद इसके इनमें से 88 फीसदी लोग अपने रेजोल्यूशंस को पूरा नहीं कर पाए।

यह भी पता चला कि 22 फीसदी पुरुष खुद के द्वारा तय किए गए लक्ष्यों में सफल होते हैं, जबकि सिर्फ 10 प्रतिशत महिलाएं ही इसमें खरी उतरती हैं। वास्तव में, जैसे-जैसे साल बीतता है, वैसे-वैसे हम अपने संकल्पों को भूलते जाते हैं। भूल जाने के कई बहाने भी हम बनाते हैं। तमाम तरह के स्पष्टीकरण देते हैं। परन्तु इस ओर कोई ध्यान नहीं करता कि आखिर हम संकल्पों को पूरा क्यों नहीं कर पाते ?

जबकि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के दक्षिण-पूर्व में स्थित मेडोक काउन्टी में रहने वाले लोग ग़रीबी और पिछड़ेपन का शिकार थे। यातायात की स्थिति भी बहुत ही ख़राब थी। इस पर स्थानीय सरकार द्वारा ग़रीबी उन्मूलन और लोगों को पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों में स्थानांतरित करने हेतु उठाये गये कदमों पर पेश रिपोर्ट सूचनाप्रद लगी।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं के पसन्दीदा फ़िल्मों के छह गानों के साथ आज के अंक में दी गयी दोनों जानकारियां पाकर सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

साप्ताहिक "संडे की मस्ती" की शुरुआत मंगोलियाई जाति की मशहूर गायिका द्वारा गाये 'घोड़े को पकड़ने वाला डंडा' शीर्षक गीत से किया जाना रुचिकर लगा। अज़ीबोग़रीब और चटपटी बातों के क्रम में चीन के एक शहर में एक घर का पाइप लीक होने से वह कैसे बना 'पाइप वंडरलैंड', जानकारी वाकई अनूठी लगी।

कार्यक्रम के बीच मीराजी की उपस्थिति इसे खुशगवार बना गई। उनका आज गाया गीत और कार्यक्रम में आकर आगे भी इसी प्रकार गाते रहने की बात हमारे लिये किसी खुशी के पैग़ाम से कम नहीं है। एक अच्छी प्रस्तुति के लिये आभार।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब आपको हम सुनाते हैं व्हट्सएप के जरिए हम तक पहुंचाने वाले श्रोताओं के जोक्स। पहला जोक है, जिसे भेजा है गोरखपुर उत्तर प्रदेश से ब्रदीप्रसाद वर्मा अंजान ने।

पति पत्नी से- तुम मुझे कितनी प्यार करती हो?

पत्नी- जितना तुम मुझसे करते हो।

 

दूसरा जोक हमें भेजा है दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू ने।

संताः आज मैंने 'पानी' को 'उल्लू' बनाया।

बंताः पानी को उल्लू? वो कैसे?

संताः सुबह मैंने पानी गरम किया,

और फिर नहाया ही नहीं...

 

अनिलः दोस्तों, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

शेयर

सबसे लोकप्रिय

Related stories