20171122

2017-11-22 21:00:00
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तो, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल का। लिखते हैं कि 18 अक्टूबर के कार्यक्रम में मानसिक विकार के बारे में चर्चा की गयी। वहीं कार्यक्रम में पेश गाने भी बहुत अच्छे लगे। बेहतरीन कार्यक्रम पेश करने के लिए धन्यवाद। जबकि 19 तारिख को चीन और इज़राइल के संबंधों पर व्यापक चर्चा किया जाना अच्छा लगा। जबकि संडे की मस्ती कार्यक्रम भी दिलकश लगा।

प्रियंजीत जी, हमें पत्र भेजने और प्रतिक्रिया भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" की शुरुआत 'बाल-दिवस' की जानकारी से किया जाना सर्वथा उचित लगा। ज्ञात हुआ कि बाल-दिवस भारत ही में नहीं, विश्वभर के अनेक देशों में भिन्न-भिन्न तिथियों को मनाया जाता है।

कार्यक्रम में आगे तीन वर्ष की अवधि में पचहत्तर देशों की साइकिल से यात्रा पर निकले महाराष्ट्र के ज्ञानेश्वर येवतकर से अखिल द्वारा ली गयी भेंटवार्ता का दूसरा भाग सुन कर लगा कि ज्ञानेश्वर को कदम-कदम पर मौत का सामना करना पड़ रहा है, परन्तु उनके इरादे फ़ौलादी हैं। मैं हृदय से उनकी सफलता की कामना करता हूँ।

कार्यक्रम में चीनी वास्तुविद्या की तमाम बारीकियों पर दी गयी जानकारी भी अहम लगी।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अन्तर्गत लीला भट्ट द्वारा चीन की एकमात्र महिला साम्राज्ञी और उत्तर-पश्चिमी चीन के श्यांसी प्रान्त स्थित श्येनलिएन मक़बरे पर पेश कहानी रुचिकर लगी। इससे हमें चीन के प्राचीन इतिहास की गहराई में उतरने का मौक़ा मिला।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम "विश्व का आइना" में पेश ब्रिटेन के थॉमसन रायटर फाउंडेशन द्वारा ज़ारी हाल में अपनी वेबसाइट पर करवाये गये सर्वेक्षण के परिणाम सम्बन्धी रिपोर्ट सुन कर पता चला कि मिस्र की राजधानी काहिरा, पाकिस्तान का कराची और कांगो की राजधानी किंसाशा विश्व के सबसे असुरक्षित शहर हैं। सर्वेक्षण में काहिरा को महिलाओं के लिए सबसे ज़्यादा ख़तरनाक बतलाया गया, जबकि कराची और किंसाशा क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। दुःख की बात यह लगी कि भारत की राजधानी दिल्ली भी पीछे नहीं है और इस क्रम में वह चौथे स्थान पर है।

एक अन्य रिपोर्ट में ब्रिटिश मीडिया के हवाले से बतलाया गया कि पूर्व अमेरिकी विदेशमंत्री हिलेरी क्लिंटन संभवतः अमेरिकी कोलंबिया विश्वविद्यालय की प्रोफ़ेसर होंगी। इस परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालय हिलेरी से विचार विमर्श कर रहा है। यह जानकारी दिलचस्प लगी कि यदि हिलेरी सचमुच कोलम्बिया में पढ़ाती हैं तो वे अपनी बेटी चेल्सी क्लिंटन के साथ काम करेंगी, जो कोलम्बिया के मेलमान सार्वजनिक स्वास्थ्य अकादमी में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत हैं।

अगली रिपोर्ट में ब्रिटेन में होम डिजाइनर द्वारा तैयार यात्री विमान के पहले श्रेणी केबिन और क्रूज केबिन की तर्ज़ पर स्थानांतरित किये जा सकने वाले मिनी-हाउस के डिजाइन सम्बन्धी जानकारी भी अच्छी लगी। उक्त मिनी हाउस की तमाम विशेषताओं की चर्चाओं के साथ यह भी पता चला कि एक 18 वर्षीय ब्रिटिश युवक आईकोजिए मिनी-हाउस में रहने वाला पहला गेस्ट बना।

कार्यक्रम में आगे सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार विश्व पर्यटन उद्योग में चीन के पांच शहरों का अव्वल स्थान पर होने और कोलिन अंग्रेज़ी शब्दकोष द्वारा तय नक़ली समाचारों की परिभाषा सम्बन्धी जानकारी भी सूचनाप्रद लगी। धन्यवाद एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

 

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत गत 14 नवंबर को 'विश्व मधुमेह दिवस' के उपलक्ष्य में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जिनेवा में पूरे विश्व समुदाय से महिलाओं पर होने वाले मधुमेह के दुष्प्रभावों पर ध्यान देने और उसकी रोकथाम हेतु कारगर उपाय किये जाने सम्बन्धी अपील के बारे में पेश रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी।

ज्ञात हुआ कि 'विश्व मधुमेह दिवस' अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह संघ और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संयुक्त रूप से मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मधुमेह से जुड़ी समझ को बढ़ाना, उसकी रोकथाम और नियंत्रण को मजबूत करना है। इस साल के विश्व मधुमेह दिवस की थीम है- 'महिलाओं के स्वास्थ्य पर मधुमेह के असर पर ध्यान दें।' विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टएन लिंडमेएर के अनुसार वर्तमान में पूरी दुनिया में लगभग 20 करोड़ 50 लाख महिलाएं मधुमेह से पीड़ित हैं और उनमें आधे से ज्यादा महिलाएं पश्चिमी प्रशांत महासागर और दक्षिण-पूर्वी एशिया में रहती हैं।

 

अनिलः सुरेश जी लिखते हैं जीते जी तो कमोबेश सभी धन कमाते हैं, परन्तु मरने के बाद भी मोटी रक़म अर्जित करने वाले महान लोगों के बारे में जानकारी आज का "टी टाइम" कार्यक्रम सुन कर हासिल हुई। यह जानकारी हैरान करने वाली लगी कि गोल्फ़ किंग अर्नाल्ड पॉल्मर द्वारा अपने जीते जी तो बहुत धन कमाया ही गया, लेकिन मृत्यु के बाद उनकी एक महीने की आय लगभग 4 करोड़ डॉलर है। 

इसी प्रकार पॉप के बेताज बादशाह रहे माइकल जैक्सन, जिन्होंने दशकों तक फैंस के दिलों पर राज किया और अपने मरने के बाद भी लोगों के दिलों में बैठे हैं। उनकी मरने के बाद की कमाई इस साल 551 करोड़ रही, जो कि सलमान खान की कमाई से 2 गुना है, जान कर हैरत हुई। अपने ज़माने के जानेमाने कार्टूनिस्ट चार्ल्स शूल्ज इस साल 321 करोड़; एल्विस प्रेस्ले 180 करोड़ और एल्बर्ट आइंस्टाईन द्वारा अपनी मृत्यु के 66 साल बाद भी इस वर्ष 76 करोड़ रुपए कमाये जाने का समाचार कुछ सोचने पर विवश कर गया। वैसे आपने उपरोक्त महान लोगों की मृत्योपरांत कमाई के आंकड़े तो दिये, परन्तु यह नहीं बतलाया कि उन्हें यह कमाई कैसे हुई, इसलिये मन की तृषा शांत नहीं हुई।

शनि शिग्नापुर में चोरी न होने और वहां घरों के दरवाजे न होने का समाचार सभी जानते हैं। क्यों कि वहां के लोगों को यह वरदान शनि देव से मिला हुआ है, जो कि आज कलियुग के दौर में किसी चमत्कार जैसा लगता है। यही कारण है कि आज भी लोग ईश्वर में आस्था रखते हैं।

कार्यक्रम में आगे हंसना सेहत के लिए कितना फायदेमंद है के अलावा यह जानकारी भी दिलचस्प लगी कि हंसते समय शरीर की सिर्फ 17 मांसपेशियों का ही इस्तेमाल होता है, जबकि गुस्सा करने के लिए 43 मांसपेशियों की जरूरत होती है।

यह भी जाना कि हंसना एक प्रकार का विज्ञान है और हंसी के विज्ञान और इससे शरीर पर होने वाले प्रभाव को 'जेलोटोलॉजी' कहा जाता है। हंसी खून के बहाव को 22 प्रतिशत तक बढ़ा देती है और तनाव होने पर रक्त प्रवाह 35 फीसदी कम हो जाता है। इस प्रकार खुलकर हंसना एक तरह के नेचुरल पेनकिलर का काम करता है। इसके अलावा सकारात्मक सोच भी मनुष्य को सदैव खुशी प्रदान करती है।

कार्यक्रम में श्रोताओं की प्रतिक्रिया के साथ-साथ पेश तीनों ज़ोक्स भी गुदगुदाने में कामयाब रहे। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

 

ललिताः वहीं साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत तिब्बत के आर्थिक निर्माण में अनिवार्य तौर पर मदद करने गये भीतरी इलाकों के कार्यकर्ताओं के समक्ष आने वाली विभिन्न मुश्किलों के बारे में पेश रिपोर्ट सूचनाप्रद लगी। बताया जाता है कि तिब्बती पठार पर ऑक्सीज़न की भारी कमी के चलते भीतरी इलाकों के मैदान से गये हान जातीय कार्यकर्ताओं को ऑक्सीज़न मशीन का प्रयोग करना पड़ता है। इस परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2016 में दक्षिणी चीन के च्यांगसू प्रांत के नानचींग शहर से ल्हासा गये 42 वर्षीय योजनाकार छीन शीनक्वांग का उदाहरण पाकर पूरी बात समझ में आ जाती है कि कैसे उन्होंने ल्हासा शहर की विकास परियोजनाओं में अपना काम शुरू किया।

कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" के अन्तर्गत भारत में बनने वाली हिन्दी फ़िल्मों के बदलते स्वरूप पर फ़िल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव से की गई परिचर्चा अच्छी लगी। फ़िल्मों पर पूछे गये प्रश्न और उनके उत्तर, दोनों ही आज के हिन्दी सिनेमा की सही तस्वीर पेश करते नज़र आये।

कार्यक्रम में आगे चीन-भारत तुलनात्मक सम्बन्धों पर समीक्षक हूमिन और सपनाजी के बीच का विचार-मंथन भी क़ाबिल-ए-ताऱीफ लगा। हूमिनजी ने ठीक ही कहा कि चीन-भारत सम्बन्ध ड्रैगन और हाथी के नहीं, बल्कि साथ खड़े दो बड़े वृक्षों अथवा दो भाइयों जैसे हैं। मुझे उनका यह कहना भी ख़ूब भाया कि चीन-भारत की तुलना अंतर के आधार पर नहीं, समानता के आधार पर की जानी चाहिये।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "आपकी पसन्द" हर बार की तरह हमने आज भी पूरे मनोयोग के साथ सुना। हमें फ़िल्मी गानों से ज़्यादा इस कार्यक्रम में दी जाने वाली जानकारियां पसन्द आती हैं, क्यों कि फ़िल्मी गाने तो भारत में चौबीसों घण्टे रेड़ियो-टीवी पर प्रसारित होते रहते हैं। बहरहाल, आज के अंक में श्रोताओं के पसन्दीदा फ़िल्म -दिल अपना और प्रीत पराई, फिर कब मिलोगी, मशाल, जलमहल, परवरिश और दोस्ताना के छह गानों के साथ दी गई यह जानकारी बहुत अच्छी लगी कि जापान में कम्पनियां धूम्रपान के लती कर्मचारियों को सज़ा देने के बजाय, धूम्रपान न करने वालों को प्रोत्साहन स्वरूप छह दिन की अतिरिक्त छुट्टियां सवेतन प्रदान करती हैं। इसके साथ ही सिगरेट के लती कर्मचारियों के कारण ब्रिटेन, अमेरिका और भारत में कंपनियों को लगने वाली चपत के बारे में भी अहम जानकारी हासिल हुई।

अगली जानकारी में बतलाया गया कि वैज्ञानिकों द्वारा गाबा नामक एक ऐसे रसायन की खोज़ कर ली गई है, जिसके ज़रिए मस्तिष्क में चल रही गतिविधियों को नियन्त्रित किया जा सकेगा और आगे चल कर मानसिक विकृतियों और पागलपन तक को दूर करना सम्भव होगा। इस परिप्रेक्ष्य में मस्तिष्क के उस हिस्से का भी ज़िक्र किया गया, जिसे हिपोकैम्पस क्षेत्र कहा जाता है। विज्ञान जैसे जटिल विषय की जानकारी इतने सरल ढंग से देने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

 

ललिताः और इस के साथ साप्ताहिक "संडे की मस्ती" का आग़ाज़ 'सबसे सुन्दर है मेहनती महिला' शीर्षक चीनी गीत का हिन्दी भावार्थ समझाते हुये किया जाना बहुत आनंददायक लगा। संडे स्पेशल में चीन-इजरायल राजनयिक सम्बन्धों की वर्षगांठ के अवसर पर सीआरआई और इजरायली टीवी चैनल-2 द्वारा संयुक्त रूप से हिब्रू भाषा में निर्मित फ़िल्म 'चीन में निर्मित' के इजरायल में प्रदर्शन पर पेश विशेष रिपोर्ट अच्छी लगी, क्यों कि चीन निर्मित वस्तुओं का डंका इजरायल में ही नहीं, आज पूरे विश्व में बज रहा है। मैं तो कहूंगा कि इस फ़िल्म को विश्व की तमाम भाषाओं में डब कर के दिखाया जाना चाहिये। धन्यवाद फिर एक अच्छी प्रस्तुति के लिये।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें निरंतर पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है छत्तीसगढ़, भिलाई, दुर्ग से आनंद मोहन ने। लिखते हैं कि चीनी और भारतीय युवाओं का सत्कार समारोह 17 नवम्बर की शाम को दिल्ली स्थित चीनी दूतावास में आयोजित हुआ। चीनी राजदूत लुओ चाओहुई, चीनी युवा लीग की केंद्रीय समिति के सचिवालय की सचिव यी तोंगमई, भारतीय युवा मामला और खेल मंत्रालय के स्थाई मामलों के सचिव अमरेन्द्र कुमार दुबे, भारत की यात्रा कर रहे चीनी युवा प्रतिनिधि और भारतीय युवा प्रतिनिधि समेत 400 से अधिक लोग सत्कार समारोह में उपस्थित हुए। इस प्रकार के कार्यक्रम से दोनों देशों की युवाओं में आपसी सहयोग में बढ़ोतरी होगी।

हम आपको इस प्रकार के तथ्य को इंटरनेट के माध्यम से हमें जानकारी देने के लिए बधाई देते हैं। चीन के बारे में हर दिन नयी जानकारी रेडियो के माध्यम से और वेबसाइट के जरिए प्रस्तुत करने के लिए चाइना रेडियो इंटरनेशनल के हर मित्र को परिवार बंधु शॉर्टवेव क्लब की ओर से हार्दिक अभिनन्दन।

आनंद मोहन जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया और उम्मीद करते हैं कि आप आने वाले समय में भी इसी तरह हमारे साथ जुड़े रहेंगे।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश हैं व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र। पहला पत्र हमें भेजा है भिंड मध्य प्रदेश से बुद्ध रेडियो लिसनर्स क्लब के अनामदर्शी मसीह ने। उन्होंने एक प्रेरक प्रसंग भेजा है।

ब्रह्म की उपासना

कंफ्यूशियस के शिष्य रोज-रोज यह आग्रह किया करते थे की किसी ब्रह्मज्ञानी के दर्शन कराके लाइये। रोज तो वे टाल देते, पर एक दिन तैयार हो गये। शिष्यों को लेकर वे एक गुफा में पहुचे जहाँ एक साधु भजन कर रहे थे। उन लोगों ने ब्रह्मज्ञान की कुछ बातें बताने का आग्रह किया। साधु बहुत नाराज हुआ, क्रोध में बोला- भाग जाओ धूर्तो! व्यर्थ हैरान मत करो। मुझे अपना भजन करने दो। वे उलटे पैर लौटे। अब मण्डली एक किसान के घर पहुंची। पूछा-आपको लोग ब्रह्मज्ञानी बताते हैं, कुछ बताइये। किसान ने कहा- यह बैल ही मेरा ब्रह्म है। मैं इसे पूरा चारा दान देता हूँ और यह मेरे कुटुंब का पूरा पेट भरता है। हम दोनों ही एक दूसरे से खुश हैं।

उससे आगे कंफ्यूशियस अपनी शिष्य मंडली को एक बुढ़िया के यहाँ ले गए, जो चरखा कात रही थी। साथ ही पास में खेल रहे बाल बच्चो में से किसी को समझती, किसी को हँसाती, किसी को धमकाती हुई मगन थी। बुढ़िया से वही प्रश्न किया, तो उसने कहा- देखते नहीं, मेरे चारो ओर ब्रह्म ही ब्रह्म खेल रहे हैं। वह मुझसे लिपटा है और में उससे। इतनी यात्रा के बाद शिष्य मंडली समेत कंफ्यूशियस वापस लौट आये और उन्होंने समझाया- स्वयं प्रसन्न रहना, दूसरों को प्रसन्न करना और ताल मेल बिठाकर रखना- यही है ब्रह्म और यही है उसकी उपासना।

अनामदर्शी जी, हमें यह प्रेरक प्रसंग भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया और उम्मीद करते हैं कि अन्य श्रोता भी हमें व्हट्सएप के जरिए अधिक से अधिक इस तरह की जानकारियां भेजा करेंगे।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है जमशेदपुर झारखण्ड से एस बी शर्मा का पत्र। लिखते हैं कि पानी बचाया जा सकता है, लेकिन बनाया नहीं जा सका। दादा जी ने नदी में पानी देखा। पिता जी ने कुएं में। हमने नल में देखा। बच्चों ने बोतल में। अब उनके बच्चे कहाँ देखेंगे.....? जरूर विचार करें और पानी को व्यर्थ न करें।

एस बी शर्मा जी, आपने बिलकुल सही कहा। पानी मूल्यवान संसाधन है और हमारे लिए जरूरी है। हम सब को पानी बचाना चाहिए। एस बी शर्मा जी, इतनी अहम जानकारी हम तक पहुंचाने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है छत्तीसगढ़, भिलाई, दुर्ग से आनंद मोहन बैन ने। उन्होंने एक कविता भेजी है।

कविता अटलबिहारी वाजपेयी, जो कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री हैं, उन्होंने लिखी थी।

जब मन में हो मौज बहारों की

चमकाएँ चमक सितारों की,

जब ख़ुशियों के शुभ घेरे हों

तन्हाई में भी मेले हों,

आनंद की आभा होती है

उस रोज़ 'दिवाली' होती है।

जब प्रेम के दीपक जलते हों

सपने जब सच में बदलते हों,

मन में हो मधुरता भावों की

जब लहके फ़सलें चावों की,

उत्साह की आभा होती है

उस रोज़ दिवाली होती है।

जब प्रेम से मीत बुलाते हों

दुश्मन भी गले लगाते हों,

जब कहीं किसी से वैर न हो

सब अपने हों, कोई ग़ैर न हो,

अपनत्व की आभा होती है

उस रोज़ दिवाली होती है।

जब तन-मन-जीवन सज जाएं

सद्-भाव के बाजे बज जाएं,

महकाए ख़ुशबू ख़ुशियों की

   मुस्काएं चंदनिया सुधियों की,

   तृप्ति की आभा होती है

    उस रोज़ 'दिवाली' होती है।

अटल जी ने वाकई में बेहतरीन कविता लिखी थी और आनंद मोहन जी, हम तक अटल जी की इस कविता को पहुंचाने के लिए आपका शुक्रिया और अन्य श्रोताओं के साथ भी हमने इसे साझा किया, बहुत खुशी हुई। धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तो, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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