20170913

2017-09-13 21:00:05
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तो, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। इसके साथ ही व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र भी शामिल किए जाएंगे। तो लीजिए प्रोग्राम का आगाज करते हैं। पहला पत्र हमें आया है दिल्ली के द्वारका से महेश जैन का। लिखते हैं कि चाइना रेडियो इंटरनेशनल के सभी उद्घोषकों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। सभी रेडियो प्रसारण टीम को भारतीय शिक्षक दिवस पर हार्दिक अभिनन्दन। मैं दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक हूं और यही कारण है कि यह मेरे लिए एक खास दिन है। 5 सितंबर को हर साल भारत भर में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक स्कूल में हमारे मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शन के रूप में कार्य करते हैं। हमारी शिक्षा की अवधि के दौरान हमने जो कुछ सीखा है, वो सब शिक्षकों के माध्यम से ही मिल सकता है। आपके जैसे रेडियो स्टेशन मेरे लिए एक महान शिक्षक हैं, क्योंकि आप अपने देश के वर्तमान, संस्कृति, परंपरा और इतिहास के बारे में ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। मैं जानना चाहता हूं कि चीन में शिक्षक दिवस कब मनाया जाता है।

महेश जैन जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। चीन में शिक्षक दिवस 10 सितंबर को मनाया जाता है। भारतीय और चीनी शिक्षक दिवस के मौके पर हम आप सभी को फिर से एक बार शुभकामनाएं देना चाहते हैं।

 

ललिताः लीजिए अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है बाजिदपुर छंगवारा दरभंगा बिहार से शंकर प्रसाद शंभू और उनके तमाम दोस्तों ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक कार्यक्रम अतुल्य चीन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन चीन के श्यामन शहर में आयोजित होने के उपलक्ष्य पर चीनी आधुनिक अन्तराष्ट्रीय संबंध अकादमी के विश्व अर्थव्यवस्था केंद्र की पूर्व प्रमुख छंग पो लिन के विचार सुने। उन्होंने कहा कि उत्पादन क्षमता के सहयोग में ब्रिक्स देश एक दूसरे के पूरक हैं, यह कथन बिल्कुल सही है।

 

अनिलः वहीं कार्यक्रम चीन-भारत आवाज़ में भारत के इण्डिया ग्लोबल के थिंक टैंक प्रसून शर्मा से हुई बातचीत के मुख्य अंश सुनाये गये, जिसमें शर्मा जी ने श्यामन में शिखर सम्मेलन से सकारात्मक परिणाम हासिल होने की उम्मीद जताई थी। उन्होंने माना कि भारत और चीन के बीच मतभेद से ज्यादा सहयोग की संभावना है। दोनों देशों ने हाल के दिनों में सक्रिय कदम उठाकर इस बात को साबित भी किया है।

वहीं लीला भट्ट द्वारा प्रस्तुत चीनी कहानी में दो पौराणिक कथाओं में अन्तिम कहानी छी यो पर हुआंग ती की विजय बहुत अच्छी लगी।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम नमस्कार चाइना के प्रारंभ में चीनी गायिका की मधुर आवाज़ में चाइनीज सांग का मजा लेने के बाद ब्रिक्स पर आधारित प्रोग्राम में चैनल इण्डिया टीवी के मनु पवार से अखिल जी की बातचीत के मुख्य अंश सुने, जिसमें उन्होंने बताया कि ब्रिक्स वैश्विक अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है। सभी प्रश्नों का उत्तर पवार जी ने सरल शब्दों में दिया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है छपरा बिहार से मार्क्स एंड माओ श्रोता क्लब के अजय कुमार सिंह ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम चीन की झलक में अनिल पाण्डेय जी के साथ अविनाश मिश्रा जी का साक्षात्कार पेश किया गया, जो बहुत रोचक और जानकारी प्रद लगा, जिसकी मैं सराहना करता हूं। अविनाश जी वर्षों पहले से चीन रह रहे हैं। वह बहुत अनुभवी और जिज्ञासु व्यक्ति हैं। उन्होंने ब्रिक्स श्यामन शिखर सम्मेलन पर बहुत बातें कहीं, मुझे अच्छी लगी। उन्होंने बातचीत के क्रम में यह स्पष्ट किया कि चीन और भारत का विकास साथ-साथ ही होगा। यह दोनों देश एक दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों के मिलन से पूरे एशिया को ताकत मिली है, जिसमें विकासशील देशों का समूह विश्व के मानचित्र पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक नया समूह बन चुका है। विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत का आर्थिक विकास चीन के रास्ता ही संभव है। भविष्य में वह विश्व की प्रथम शक्ति साबित होगी। इसके साथ ही साथ पूरे एशिया का विकास होगा, अर्थात एशिया में एक पट्टी एक मार्ग का नारा बुलंद होगा।

अजय कुमार सिंह जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन", "चीन-भारत आवाज़" और "आर्थिक जगत" में पूर्वी चीन के श्यामन शहर में आयोजित ब्रिक्स का नौवां सम्मेलन ही छाया रहा, जो कि स्वाभाविक ही था।

कार्यक्रम "अतुल्य चीन" के तहत श्यामन ब्रिक्स सम्मेलन पर चीनी विशेषज्ञों छंग तुंग इंग और छाई छुंग लिन एवं भारतीय विशेषज्ञ सुधीर गुप्त के विचारों से अवगत कराया जाना अत्यन्त महत्वपूर्ण लगा। निश्चित तौर पर उत्पादन सहयोग और पीपीपी सहयोग दो ऐसे अहम् क्षेत्र हैं, जिनके ज़रिये ब्रिक्स देश एक-दूसरे की मदद कर समान विकास की अवधारणा को आगे बढ़ा सकते हैं।

कार्यक्रम "चीन-भारत आवाज़" के अन्तर्गत भारतीय विशेषज्ञ प्रसून शर्मा से ली गयी भेंटवार्ता सुन कर श्यामन ब्रिक्स सम्मेलन के फलीतार्थों पर अहम् निष्कर्ष निकल कर सामने आया। वास्तव में सदस्य देशों के बीच ही नहीं, ब्रिक्स सहयोग विश्व अर्थ-व्यवस्था और विश्व नीति-निर्धारण को भी प्रभावित कर सकता है, इसमें दोराय नहीं।

"आर्थिक जगत" के तहत आर्थिक समाचारों के बाद पेश विशेष रिपोर्ट में भी ब्रिक्स सम्मेलन पर ही फ़ोकस किया गया। ब्रिक्स की अब तक की उपलब्धियों के मद्देनज़र यह कहना सर्वथा उचित जान पड़ा कि इसके आने वाले वर्ष स्वर्णिम वर्ष होंगे।

 

अनिलः सुरेश अग्रवाल जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना" में इण्डिया टीवी के मनु पवार से ली गयी भेंटवार्ता सुन कर पूरे सम्मेलन का निचोड़ सामने आ गया। वास्तव में ब्रिक्स का नव विकास बैंक, विश्व-बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से भी अधिक अहम भूमिका निभा रहा है और चीन-भारत जहाँ एक साथ जुटते हों, ख़ास बात निकल कर आती है, इसमें दोराय नहीं है। कार्यक्रम में आगे रिपब्लिक टीवी के पत्रकार से लिया गया साक्षात्कार भी महत्वपूर्ण लगा।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अन्तर्गत होस्ट लीला भट्ट द्वारा आज पेश 'हो ई का सूरज को मार गिराना' और 'छ्येओ ह्वन्ति की विजय' शीर्षक दोनों पौराणिक कथाएं काल्पनिक, पर रोमांचक लगीं।

 

ललिताः वहीं कार्यक्रम "विश्व का आइना" सुन कर ज्ञात हुआ कि श्यामन नौवें ब्रिक्स सम्मेलन के लिये ही नहीं, अपने सॉफ्टवेयर पार्क के लिये भी मशहूर है। कार्यक्रम में श्यामन की ख़ूबसूरती के बारे में जान कर लगा कि चीन जाकर श्यामन नहीं देखा, तो कुछ नहीं देखा।

अगली जानकारी में पतंगबाज़ी का जन्मस्थान माने जाने वाले पूर्वी चीन के शानतुंग प्रान्त स्थित वेइफांग शहर पर दी गयी जानकारी भी चित्ताकर्षक लगी। पता चला कि वेइफांग शहर दीर्घकाल से पतंगबाजी और छापे वाली चित्रकला के कारण मशहूर है। खुशी की बात है कि वेइफांग वासियों को अपने पूर्वज़ों द्वारा छोड़ी गई इस संपत्ति का लाभ उठाने का सौभाग्य मिल रहा है।

कार्यक्रम में ज़ल्द ही चीन से अमरीका के बीच समुद्री सुरंग के ज़रिये 13 हज़ार किलोमीटर लम्बी प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल-लाइन के निर्माण सम्बन्धी जानकारी भी स्तब्ध करने वाली लगी।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत चीन के अत्यन्त लोकप्रिय युवा गायन समूह टीएफ़ ब्वॉयज पर दी गयी जानकारी के साथ उसका का गया मधुर गीत भी ऊर्ज़ा से परिपूर्ण लगा। पता चला कि उक्त समूह चीनी बच्चों और युवकों में कितना लोकप्रिय है कि वहां के कुछ एक स्कूलों में एरोबिक्स या व्यायाम करते समय उनके गीतों का इस्तेमाल किया जाता है। यह जान कर अच्छा लगा कि अपने बेहतर प्रदर्शन के लिये कई पुरस्कार हासिल कर चुका यह समूह लोकोपकारी कार्यों में भी रुचि रखता है।

कार्यक्रम "टी टाइम" के अन्तर्गत चीन के श्यामन शहर में सम्पन्न नौवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर लम्बे समय से चीन में रह रहे अविनाश मिश्रा से की गयी बातचीत अच्छी लगी। मिश्रा जी का यह कहना बिलकुल सही जान पड़ा कि ब्रिक्स के पाँचों सदस्य राष्ट्रों का सकारात्मक योगदान है, इसलिये भविष्य में ब्रिक्स व्यवस्था न केवल अपने दायरे, बल्कि पूरे विश्व के लिये नये अवसर लेकर आयेगी। मुझे चीन-भारत सम्बन्धों को लेकर उनका आशावादी नज़रिया भी उत्साहवर्धक लगा।

 

ललिताः वहीं "चीन का तिब्बत" के तहत पेश रिपोर्ट सुन कर यह समझ में आया कि तिब्बती बौद्ध अनुयायियों के लिए धूपबत्ती कितनी महत्वपूर्ण है। तिब्बत के सभी मंदिरों में बौद्ध मूर्तियों के समक्ष धूपबत्ती समर्पित करने का दृश्य भारतीय मन्दिरों जैसा ही लगा। यह भी ज्ञात हुआ कि तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के नींगची क्षेत्र स्थित गातींग गांव में पारंपरिक तिब्बती धूपबत्ती उद्योग से गांववासियों का जीवन स्तर काफी उन्नत हुआ है। कार्यक्रम में आगे तिब्बत की पारम्परिक नीमू धूपबत्ती, जिसका इतिहास कोई एक हज़ार साल पुराना है और जिसे ग़ैर-भौतिक विरासत की नामसूची में शामिल किया जा चुका है, पर भी अहम जानकारी हासिल हुई।

 

अनिलः सुरेश जी लिखते हैं कि कार्यक्रम "दक्षिण एशिया फ़ोकस" के अन्तर्गत श्यामन में सम्पन्न नौवें ब्रिक्स सम्मेलन की उपलब्धियों पर पंकज श्रीवास्तव द्वारा पर्यावरण विज्ञान के शोधकर्त्ता मयंक मिश्र और एनडीटीवी की पत्रकार कादम्बिनी शर्मा से की गयी परिचर्चा भी महत्वपूर्ण लगी। मिश्र जी ने जलवायु कूटनीति विषय को आर्थिक विकास के साथ जोड़ कर अच्छी बात कही, जबकि कादम्बिनी जी द्वारा ब्रिक्स के आगामी दस स्वर्णिम वर्षों की चीनी राष्ट्राध्यक्ष शी चिनफिंग महोदय की अवधारणा पर सार्थक विचार व्यक्त किये गये।

 

ललिताः वहीं साप्ताहिक "आपकी पसन्द" में श्रोताओं के पसन्दीदा फ़िल्मों के गानों के साथ दी गयी तमाम जानकारी सूचनाप्रद लगी।

वहीं "सन्डे की मस्ती" के विशेष सेगमेण्ट में रिपब्लिक टीवी के सहायक सम्पादक आदित्यराज कौल से लिया गया साक्षात्कार कुछ ख़ास ही बन पड़ा। बात चाहे चीनी युवाओं में बढ़ते विदेशी भाषा सीखने के क्रेज़ की हो या कि चीन में लोकप्रिय होती बॉलीवुड फ़िल्मों की, साक्षात्कार बहुत ही सौहार्दपूर्ण लगा।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः दोस्तों अब पेश है व्हट्सएप के जरिए हम तक जानकारी पहुंचाने वाले श्रोताओं के पत्र। पहला पत्र हमें भेजा है सैदापुर अमेठी, उत्तर प्रदेश से अनिल द्विवेदी ने। उन्होंने जोक्स भेजे हैं।

1...शादी की पार्टी में कुर्सियों की कमी थी।

एक लड़की ने लड़के से बोला - क्या आप डांस करना पसंद करेंगे।

लड़के ने खुश होते हुए कहा – हाँ, हाँ क्यों नहीं।

लड़की बोली- तो फिर आपकी कुर्सी मैं ले जाती हूँ।

2...बच्चा - मम्मी गाँधी जी के सिर पर बाल क्यों नहीं थे ?

मम्मी - क्योंकि बेटा वो केवल सत्य बोलते थे।

बच्चा - अब समझ में आया कि तुम औरतों के बाल लम्बे क्यों होते हैं।

अनिल जी, बहुत बहुत धन्यवाद आपने हम तक अपने जोक्स पहुंचाए।

वहीं छपरा बिहार से मार्क्स एंड माओ श्रोता क्लब के अजय कुमार सिंह ने भी हमें कविता भेजी है। कविता के बोल इस प्रकार हैं-

निहत्थे ही सही पर छीनकर हथियार लड़ लेंगे,

लड़ाई ज़ुल्म से इक बार क्या सौ बार लड़ लेंगे,

कभी तलवार पैनी नोक से इतिहास लिखती है,

क़लम को भी बनाकर के कभी तलवार लड़ लेंगे।

फ़ना हो जायेंगे बेशक अना बेचा नहीं करते,

लड़ाई भूख से जैसे भी हो फनकार लड़ लेंगे।

गुरिल्ला बन ही जाना अब परिन्दों की है मजबूरी,

शिकारी ने किये पैदा यही आसार लड़ लेंगे।

है दिल में प्यार का सपना, सकल संसार है अपना,

अरे परिवार क्या हम छोड़कर घरबार लड़ लेंगे।

किनारा ही मिले इस बात की परवा नहीं हमको,

अगर तूफ़ाँ से टक्कर में मिले मझधार लड़ लेंगे।

लड़ाई हार जायेंगे कभी हो ही नहीं सकता,

अगर इक बार मिलकर के सभी हक़दार लड़ लेंगे।

-महेन्द्र मिहोनवी

अजय जी हमारे साथ इस कविता को शेयर करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तो, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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