20170906

2017-09-06 21:00:07
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अनिलः आपका पत्र मिला प्रोग्राम सुनने वाले सभी श्रोताओं को अनिल पांडेय का नमस्कार।

 

ललिताः सभी श्रोताओं को ललिता का भी प्यार भरा नमस्कार।

 

अनिलः दोस्तो, आज के प्रोग्राम में भी हम हमेशा की तरह श्रोताओं के ई-मेल और पत्र पढ़ेंगे। लीजिए अब पेश है प्रोग्राम का पहला पत्र, जिसे भेजा है बेहाला कोलकाता से प्रियंजीत कुमार घोषाल ने। लिखते हैं कि 26 अगस्त को कार्यक्रम सुना, कार्यक्रम बहुत अच्छा लगा। मुझे आपके द्वारा पेश प्रोग्राम बहुत अच्छे लगते हैं। इसके साथ ही गीत-संगीत और जोक्स भी पसंद आते हैं। शानदार प्रोग्राम पेश करने के लिए शुक्रिया।

घोषाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद। आशा है आप आगे भी हमें प्रतिक्रिया भेजते रहेंगे, शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है सैदापुर अमेठी, उत्तर प्रदेश से अनिल द्विवेदी ने। लिखते हैं कि कार्यक्रम अतुल्य चीन में जय प्रकाश जी के साथ भेंटवार्ता सुनने को मिली। जिसमें स्छ्वान प्रांत के बारे में विस्तार से जानने को मिला। पता चला कि बांसों के बीच रहने वाले पांडा की मुख्य भूमि भी स्छ्वान है। जय प्रकाश जी ने चीन में हुए विकास खास तौर पर गांवों के विकास पर अच्छा प्रकाश डाला है। इससे चीन में हो रहे विकास स्थानीय लोगों के अनुभव भी हमें जानने को मिले। गांव में अस्पताल, शिक्षा, बिजली, आवास, किसान सेनेटोरियम की स्थापना हुई है। इस भेंटवार्ता के लिए वेइतुंग जी के साथ जय प्रकाश जी को भी हार्दिक धन्यवाद।

चीन भारत आवाज कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की चीनी मामलों की जानकार सुश्री सोफिया चटर्जी के साथ साक्षात्कार सुनने को मिला। नौवें श्यामन ब्रिक्स सम्मेलन के परिप्रेक्ष्य में बहुत ही नपी तुली सटीक व बेबाक राय सुनने को मिली।

आर्थिक जगत प्रोग्राम में आर्थिक समाचारों के बाद ब्रिक्स का दक्षिण अफीका में पड़ रहे सकारात्मक प्रभाव पर एक उपयोगी जानकारी सुनने को मिली।

 

अनिलः अनिल द्विवेदी जी ने आगे लिखा है कि 30 अगस्त को प्रसारित विश्व का आईना कार्यक्रम में 3-5 सितंबर 2017 को आयोजित होने जा रहे श्यामन ब्रिक्स सम्मेलन की संभावनाओं और पूर्व में मिले अनुभव और सफलताओं के साथ इस बार इसके वृहद परिणाम की उम्मीद की जा रही है। चीनी नेताओं के अथक प्रयास इसके उच्चतर सफलता के प्रति विश्वास बढ़ गया है। श्यामन की भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से कार्यक्रम के आखिर में सुनने को मिला। बहुत ही मनोहारी दृश्य नजारों से भरपूर श्यामन के आर्थिक और पर्यटन के साथ होइ द्वीप और मैंग्रो फारेस्ट के विकास और प्रभाव के बारे में अच्छी जानकारी मिली। कार्यक्रम के अंत में सुनवाया गया चीनी गीत ऐसे लगा मानो श्यामन के तराइयों में गाया गया हो। चीन पहुंचने के बाद अगर श्यामन की यात्रा न की जाए, तो चीन की यात्रा अधूरी कही जायेगी।

इस बार के आपका पत्र मिला कार्यक्रम में नई वेबसाइट पर कई श्रोताओं के विचार भी सुनने को मिले। सभी श्रोताओं ने इस नए परिवर्तन का पूरे उत्साह के साथ स्वागत किया। वास्तव में वेबसाइट इतनी आकर्षक हो ही गयी है। इन दिनों अपेक्षाकृत कम पत्रों के साथ आ रहे कार्यक्रम आज कई श्रोताओं के पत्र सुनने को मिले। इससे मन प्रसन्न हुआ। कार्यक्रम के अंत में मेरे द्वारा प्रेषित कहानी और श्रोताओं के साथ साझा करने के लिए तहेदिल से शुक्रिया।

अनिल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। हम भी आशा करते हैं कि अधिक से अधिक श्रोता हमें पत्र भेजेंगे। हम आप सभी के पत्रों को कार्यक्रम में शामिल करेंगे।

 

ललिताः अनिल जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक बाल महिला स्पेशल में चीनी महिला के समग्र विकास पर प्रकाश डाला गया। इसके अंतर्गत सरकार द्वारा महिलाओं के विकास और पुरुषों का समान लाने के प्रयासों पर भी जानकारी मिली। भारत और चीन में महिलाओं की स्थिति पर बिंदुवार सटीक तथ्यों पर तुलनात्मक रिपोर्ट सुनने को मिली। यहां हम कहना चाहते हैं कि भारत सरकार ने महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया है, लेकिन सामाजिक रूप से अभी भी महिलाएं काफी पीछे हैं। हालांकि भारतीय महानगरों में महिलाएं अपना स्वतंत्र जीवन जी रही हैं, लेकिन उनका भी प्रतिशत कम है। राजनीति में भारतीय महिलाएं काफी आगे आयी हैं।

टी टाइम प्रोग्राम में तमाम जानकारियों के बाद पेश श्रोताओं की प्रतिक्रियाओं में प्रेम कुमार घोसाल और सुरेश अग्रवाल के साथ मेरे पत्रों का उद्धरण सुनने को मिला।

 

अनिलः वहीं प्रोग्राम चीन का तिब्बत में तिब्बत और छिंगहाई प्रान्त के संस्कृति के आधार पर थांगका चित्र कला के बारे में बहुत अच्छी जानकारी मिली। थांगका चित्र कला को सीखने वाले छात्रों और सीखाने वाले अध्यापकों द्वारा किये जा रहे विभिन्न प्रयासों पर सारगर्भित समीक्षा सुनने को मिली। इससे थांगका चित्र कला के प्रति सरकार की गंभीरता का पता चलता है। भारी पूंजी निवेश और सांस्कृतिक केंद्र स्थापित किये गए हैं।

अनिल द्विवेदी जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।

 

ललिताः अब पेश है अगला पत्र, जिसे भेजा है केसिंगा ओड़िशा से मॉनिटर सुरेश अग्रवाल ने। लिखते हैं कि साप्ताहिक "अतुल्य चीन" के तहत जयप्रकाश के दक्षिण-पश्चिमी चीन के सछ्वान प्रान्त के दौरे पर सुनवाये गये उनके अनुभव महत्वपूर्ण लगे। विशेषकर, सछ्वान के तीखे खाने और वहां के पांडा केन्द्र पर दी गई जानकारी सूचनाप्रद लगी। वहां के एक ऐसे गाँव की कहानी, जिसके निवासियों के पास वर्ष 2004 तक रोज़गार का कोई साधन नहीं था, किन्तु सरकारी पहल और नीति के चलते अब वहां कृषि एवं कृषि आधारित पर्यटन विकसित होने के कारण लोगों का जीवन खुशहाल हो गया है, बहुत ही प्रेरक लगी।

कार्यक्रम "चीन-भारत आवाज़" के अन्तर्गत दिल्ली विश्वविद्यालय में चीनी मामलों की विशेषज्ञ डॉ. सोफिया चटर्जी से भेंटवार्ता सुन कर सितम्बर में चीन के श्यामन शहर में आयोजित नौवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चर्चा के लिये उठाये जाने वाले सम्भावित मुद्दों और ब्रिक्स की एक दशक की उपलब्धियों पर महत्वपूर्ण विचार सुनने को मिले।

साप्ताहिक "आर्थिक जगत" में कुछ आर्थिक समाचारों की चर्चा के बाद विशेष रिपोर्ट में 'दक्षिण अफ़्रीका के विद्वानों ने ब्रिक्स देशों की भूमिका की बड़ी प्रशंसा की' शीर्षक रिपोर्ट पेश की, जिसमें अफ़्रीका में चीनी निवेश से वहां हो रहे सामाजिक-आर्थिक बदलावों को बख़ूबी महसूस कराया गया।

 

अनिलः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "नमस्कार चाइना", जो कि आज पूरी तरह 3 से 5 सितम्बर तक चीन के दक्षिणी तटीय शहर श्यामन में आयोजित नौवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर केन्द्रित था, बहुत महत्वपूर्ण लगा। यह विशेष प्रस्तुति सुन कर ब्रिक्स के गठन से लेकर उसकी आज तक की पूरी विकास-यात्रा का संक्षिप्त, परन्तु सम्पूर्ण परिचय हासिल हुआ। वास्तव में, ब्रिक्स की स्थापना के पीछे एक उद्देश्य पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देना ही नहीं, उसका ठोस विकल्प भी खड़ा करना था और जिसमें काफी हद तक सफलता भी हासिल हुई है। कार्यक्रम में आगे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पूर्वी एशिया अध्ययन मामलों के अभिषेक प्रताप सिंह के साथ ली गयी भेंटवार्ता भी अच्छी लगी। उनका यह कहना बिलकुल सही प्रतीत हुआ कि ब्रिक्स का गठन बराबरी और पारदर्शिता के आधार पर हुआ है और ग्लोबल वॉर्मिंग और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों को अपनी आवाज़ ज़ोरदार ढ़ंग से उठानी चाहिये।

कार्यक्रम "चीनी कहानी" के अंतर्गत होस्ट लीला भट्ट द्वारा पेश 'बैल और मेघबुनाई की परी' और 'हो चि और पाँच अनाज' शीर्षक दो पौराणिक कथाएं शिक्षाप्रद और रोमांचक लगीं।

 

ललिताः सुरेश जी लिखते हैं कि साप्ताहिक "विश्व का आइना" भी हमने ध्यानपूर्वक सुना। 3 से 5 सितंबर तक चीन के श्यामन शहर में आयोजित ब्रिक्स देशों की नौवीं शिखर भेंटवार्ता, जो कि दक्षिण अफ्रीका के डरबन, ब्राजिल के फ़ोर्टालीज़ा, रूस के ऊफा और भारत के गोवा के बाद चीन के श्यामन में होने जा रही है, पर पेश रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। इसमें दोराय नहीं कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की ब्रिक्स यात्रा मज़बूत और शक्तिशाली रही है।

कार्यक्रम "आपका पत्र मिला" के तहत श्रोताओं के पत्रों और प्रतिक्रियाओं के बाद व्हट्सएप्प के ज़रिये भाई अनिल द्विवेदी द्वारा प्रेषित प्रेरक कहानी दिल को छू गयी।

 

अनिलः सुरेश अग्रवाल जी आगे लिखते हैं कि साप्ताहिक "बाल-महिला स्पेशल" के तहत चीन में सरकार द्वारा महिलाओं को पुरूषों के समान दर्ज़ा देते हुये उनके विकास और प्रगति को महत्व दिये जाने पर पेश रिपोर्ट अच्छी लगी। यह जान कर अच्छा लगा कि सरकार द्वारा पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को देश के सामाजिक विकास की एक बुनियादी नीति के तौर पर स्थापित किया गया है और देश की समग्र नीति बनाते समय भी चीन सरकार ने समान भागीदारी, समान विकास और समान कल्याण के सिद्धांत के आधार पर महिलाओं की प्रगति और विकास के लिए दृढ़ राजनीतिक सुनिश्चितता और कानूनी गारंटी प्रदान की है।

जबकि कार्यक्रम "टी टाइम" की शुरुआत भारत में रेस्तरां उद्योग के चौंकाने वाले आंकड़ों के साथ किया जाना रुचिकर होने के साथ-साथ सूचनाप्रद भी लगा। यह जान कर हैरत हुई कि भारत में पांच लाख करोड़ रुपये के बाज़ार वाले रेस्तरां उद्योग का आकार बॉलीवुड से चालीस गुना बड़ा है और कृषि के बाद सबसे ज़्यादा रोज़गार यही उद्योग हमें उपलब्ध कराता है। कार्यक्रम में आगे यह जान कर भी आश्चर्य हुआ कि भारत के गुजरात प्रदेश स्थित गीर के जंगलों में रहने वाले आदिवासियों का सम्बन्ध अफ़्रीक़ी आदिवासियों से है। वहीं तकनीकी टिप्स में क्रोम ब्राउज़र संचालन सम्बन्धी जानकारी भी अहम लगी।

मुझे खेद है कि मनोरंजन खण्ड में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बनी जिस फ़िल्म का ज़िक्र किया गया, उच्चारण और रिसैप्शन सम्बन्धी कठिनाई के कारण उसका नाम समझ में नहीं आया। हाँ, सोनी एन्टरटेन्मेंट चैनल पर दिखाये जाने वाले धारावाहिक पर उठे विवाद सम्बन्धी जानकारी भी अच्छी लगी।

 

ललिताः सुरेश जी ने आगे लिखा है कि साप्ताहिक "चीन का तिब्बत" के तहत चीन की तिब्बती जातीय संस्कृति का सार समझी जाने वाली थांगका चित्रकला पर पेश रिपोर्ट महत्वपूर्ण लगी। रिपोर्ट सुन कर पता चला कि एक थांगका चित्रित करने में कई महीने और यहां तक कई साल का समय लग सकता है और बहुत अच्छे समझे जाने वाले थांगका चित्र की क़ीमत हज़ारों युआन हो सकती है। "आपकी पसन्द" हर बार की तरह आज भी लज़ीज़ रहा।

सुरेश अग्रवाल जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।

 

अनिलः लीजिए अब पेश है कार्यक्रम का अगला पत्र, जिसे भेजा है दरभंगा बिहार से युनिवर्स यूथ क्लब के शंकर प्रसाद शंभू ने। उन्होंने लिखा है कि हमारे क्लब के सभी सदस्य हर बार आपके द्वारा पेश प्रोग्राम सुनते हैं, जिसमें नमस्कार चाइना, टी टाईम, दक्षिण एशिया फोकस, आपकी पसन्द और आापका पत्र मिला बेहद लोकप्रिय हैं।

कार्यक्रम अतुल्य चीन में वेइतुंग भाई द्वारा प्रसारित भेंटवार्ता में स्छ्वान प्रान्त जो पाण्डा के लिए मशहूर है, वहाँ के पर्यटन स्थल और संस्कृति की झलक प्रस्तुत करने के लिए धन्यवाद। अतुल्य चीन कार्यक्रम से जाना कि चीन में स्छ्वान प्रान्त में सबसे अधिक 183 के करीब पाण्डा हैं, जो लाल और काले भूरे रंग के हैं। पाण्डा का मुख्य खाना बांस होता है।

इसके बाद चीन भारत आवाज कार्यक्रम में सोफिया चटर्जी से भेंटवार्ता सुनायी गयी और चटर्जी ने कहा कि ब्रिक्स एक साधन है, जिसमें विचारों का आदान प्रदान किया जाता है। विकासशील और विकसित देशों को असमानता दूर करने के लिये ठोस उपाय करने की जरूरत है। निवेश का विस्तार कर विकास की योजना बनाते हुए उन्हें लगातार जारी रखना चाहिए।

 

ललिताः शंभू जी ने आगे लिखा है कि सप्ताहिक कार्यक्रम विश्व का आईना  में 3-5 सितम्बर को आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अफ्रीका दौरे और वहां के नवोदित बाजार और औद्योगिक विकास के बारे में चर्चा अच्छी थी।

आपका पत्र मिला में सर्वप्रथम नई वेवसाईट पर श्रोताओं की टिप्पणी पढ़ी गई, जिसमें जमशेदपुर के एस बी शर्मा, उत्तर प्रदेश के अनिल द्विवेदी, सादिक आजमी और केशिंगा उड़ीसा के भाई सुरेश अग्रवाल के पत्र शामिल किए गए। रेडियो प्रसारण के बारे में प्रतिक्रिया वाले पत्र की शुरुआत कोलकाता के प्रियंजीत घोसाल से करते हुए शादिक आजमी, अनिल द्विवेदी, छत्तीसगढ़ श्रोता संघ, सुरेश अग्रवाल और अनामदर्शी मसीह का पत्र मधुर आवाज में पढ़ा गया। अन्त में व्हट्एप के जरिए भेजी गयी अनिल द्ववेदी की प्रेरक कहानी की प्रस्तुति भी शानदार लगी।

 

अनिलः शंभू जी ने आगे लिखा है कि कार्यक्रम आप की पसन्द में सुना कि अमेरिका की एक 19 साल की लड़की रोजा डॅामनिक एक सप्ताह में ही करोड़पति बन गई, वह भी बिना मेहनत के। क्योंकि उसने लाटरी का टिकट खरीदा था, इसलिए वह करोड़पति बनी। इसके साथ ही चीन में एक विश्वविद्यालय के छात्रों ने मिलकर 30 टन तरबूज़ चन्द मिनटों में एक जगह से दूसरे जगह पर उगा कर दिया। वहीं हरियाणा के जिन्द जिला के एक गाँव जलालपुरा कलां में जन्मे चार वर्ष के लड़का लवीश ने अपने पहले का नाम संदीप बताते हुए 12 वर्ष की आयु में बिजली के करेंट से मरने की बात कही और पूर्व की अपनी माता का नाम कमला बताते हुए घर का रास्ता दिखाया। यह पुनर्जन्म की बात हैरत अंगेज करने वाली है। यह सुनकर हम लोग दंग रह गए। हिन्दी फिल्मी गीतों में फिल्म यस, खामोशी, चलते-चलते, सरगम और लोक-परलोक के गानों का भी मजा लिया। हमारे क्लब के सदस्यों की फरमाईश पूरी करने के लिये धन्यवाद।

वहीं सण्डे की मस्ती में संडे स्पेशल में गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारेसकर से ली गई वार्ता सुनी। उनका मानना है कि श्यामन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन मील का पत्थर होगा।

शंकर प्रसाद शंभू जी, हमें पत्र भेजने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया और उम्मीद करते हैं कि आप और आपके दोस्त लगातार इसी तरह हमारे प्रोग्राम पर टिप्पणी भेजते रहेंगे, शुक्रिया।

 

अनिलः दोस्तो, इसी के साथ आपका पत्र मिला प्रोग्राम यही संपन्न होता है। अगर आपके पास कोई सुझाव या टिप्पणी हो तो हमें जरूर भेजें, हमें आपके खतों का इंतजार रहेगा। इसी उम्मीद के साथ कि अगले हफ्ते इसी दिन इसी वक्त आपसे फिर मुलाकात होगी। तब तक के लिए अनिल पांडेय और ललिता को दीजिए इजाजत, नमस्कार।

 

ललिताः बाय-बाय।

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