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19 जनवरी 2020

2020-01-19 21:11:00
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अमेरिका में सिलिकॉन वैली

अमेरिका में सिलिकॉन वैली

संडे स्पेशल: फॉर्च्यून ग्लोबल 500 में 30 प्रतिशत सीईओ भारतीय, आखिर भारत क्यों इतने सीईओ पैदा करता है?

दुनिया में सुविख्यात करी, योगा और बॉलीवुड फिल्मों के अलावा, भारत के पास एक और महत्वपूर्ण निर्यात है, वो है सीईओ, यानी कि कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी।

“हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू” के अनुसंधान के मुताबिक, फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों में 30 प्रतिशत मुख्य कार्यकारी अधिकारी भारतीय हैं, जिनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मास्टरकार्ड आदि भी शामिल हैं। इस स्थिति ने अमेरिकी पत्रिका “टाइम्स” द्वारा की गई भविष्यवाणी को साबित किया है कि भारत विश्व में सीईओ का सबसे बड़ा निर्यातक है।

क्यों ”निर्यात”कहा जाए? क्योंकि फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों में भारतीय कंपनी कम हैं। साल 2019 में फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों में केवल 7 भारत की हैं। मतलब है कि भारतीय लोगों को देश के बाहर जाकर बड़ी कंपनियों में काम करने का अवसर मिलता है।

आंकड़ों से पता चला है कि साल 2010 से 2017 तक, अमेरिका में आप्रवासियों का सबसे बड़ा स्रोत देश भारत है, जो 8.3 लाख लोगों के साथ 47 प्रतिशत की वृद्धि दर बनी रही। इस तरह ज्यादा से ज्यादा भारतीय लोग अमेरिका की बड़ी कंपनियों में उंचे स्तर पर रहे, इसमें सिलिकॉन वैली सबसे उल्लेखनीय है।

 गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई

सिलिकॉन वैली में सुप्रसिद्ध भारतीय मूल के सीईओ सुंदर पिचाई भी हैं। वह न केवल गूगल के सीईओ हैं, बल्कि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के सीईओ भी हैं। सिलिकॉन वैली में उच्च स्थान पर रहे पिचाई का जन्म भारत में हुआ है और भारत में ही पले-बढ़े हैं। उनके पिता इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और माता स्टेनोग्राफर यानी आशुलिपिक हैं। बचपन में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी, यहां तक कि उन्हें छोटे भाई के साथ लिविंग रूम में ही सोना पड़ता था।

पिचाई की ही तरह, कुछ भारतीय सीईओ की पारिवारिक पृष्ठभूमि साधारण है। बड़ी कंपनियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनने की वजह उनकी शिक्षा से अलग नहीं किया जा सकता। जानकारी के मुताबिक, कई भारतीय सीईओ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में अंडर ग्रेजुएट कोर्स पूरा किया है, फिर वे आगे अध्ययन के लिए विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों में गए और उन्होंने एमबीए की डिग्री हासिल की।

“विज्ञान के मुकुट में एक खजाना”के नाम से मशहूर आईआईटी

“विज्ञान के मुकुट में एक खजाना”के नाम से मशहूर आईआईटी

उल्लेखनीय बात यह है कि भारत में आईआईटी को“विज्ञान के मुकुट में एक खजाना”भी कहा जाता है। इस यूनिवर्सिटी में दाखिला लेना बहुत मुश्किल है, जिसमें दाखिला दर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से भी कम है। लेकिन हर साल बेशुमार भारतीय इस विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए प्रयास करते हैं। कहते हैं कि पहली श्रेणी के प्रतिभा आईआईटी जाते हैं, दूसरी श्रेणी के प्रतिभा मेसाचुसेट्स प्रौद्योगिक संस्थान में जाते हैं।

यह भी कहा जाता है कि आईआईटी प्रतिभाओं का कारखाना है। कुछ लोग इसे नरक प्रशिक्षण के लिए बूट शिविर कहते हैं, कुछ लोग प्रशंसा करते हुए इसे सबसे बड़ी कारगरता वाली यूनिवर्सिटी कहते हैं। हालांकि आईआईटी के प्रति लोगों का आकलन अलग-अलग है, लेकिन वास्तव में उसने दुनिया भर में अनगिनत सुयोग्य व्यक्तियों को भेजा है।

माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला

माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला

शैक्षिक पृष्ठभूमि के अलावा, कंपनियों के उच्च स्तर तक पहुंचने को भारतीय लोगों के अथक प्रयास से अलग नहीं किया जा सकता। वे आम तौर पर एक ही कंपनी में लम्बे समय तक काम करते हैं, न कि ज्यादा वेतन के लिए बार-बार दूसरी कंपनियों को चुनते हैं।

माइक्रोसॉफ्ट में 20 साल काम करने के बाद सत्य नडेला को मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया गया। साल 2004 में पिचाई ने गूगल में काम करना शुरू किया। 11 सालों में ही उन्होंने गूगल क्रोम को दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय इंटरनेट ब्राउज़र बनाया, अंत में वे सीईओ बने। पेप्सी की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नूयी ने साल 1994 में पेप्सी जोइन किया, 10 से अधिक सालों में उन्हें सीईओ नियुक्त किया गया......

विश्लेषण है कि भारतीय इसलिए“विश्व में टॉप कंपनियों के श्रेष्ठ सीईओ”बने, क्योंकि वे संपर्क और प्रबंधन में उत्कृष्ट हैं और उनकी मजबूत अनुकूलनशीलता को भी नकारा नहीं जा सकता।

लेकिन, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय लोग अपनी अद्भुत नेतृत्वकारी शक्ति दिखाते हैं, जाहिर है कि भारत को प्रतिभा खो जाने की स्थिति का सामना करना पड़ता है।

“द टाइम्स अफ इंडिया”की रिपोर्ट में लिखा गया है कि इतने भारतीय विश्व में सबसे मूल्यवान कंपनियों में सबसे ऊंचे स्थान पर पहुंच गए, यह खुशियां मनाने की बात है। लेकिन, इसके साथ ही हमें खुद से एक सरल सवाल पूछना चाहिए, यानी कि क्यों उन्होंने अमेरिका का रूख किया, वे अपने जन्म स्थान वापिस क्यों नहीं लौटे?

वास्तव में, इसके पीछे कम मौका होना मुख्य कारण है। बड़ी भारतीय कंपनियों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी आम तौर पर कंपनी प्रबंधन के परिवार के सदस्य हैं। इस तरह भारत के सामने एक सवाल पैदा हुआ, कि देश में कैसे वाणिज्यिक माहौल बनाया जाएगा? ताकि सत्य नडेला और सुन्दर पिचाई जैसे व्यक्तियों को प्रोत्साहन और अवसर मिल सके। इसके साथ ही, लोगों के मन में यह शंका भी पैदा हुई कि भारत क्यों अपना गूगल विकसित नहीं करता?

पेप्सी की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नूयी

पेप्सी की पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी इंद्रा नूयी

सवालों का जवाब सोचने के समय लोग भारत की ही तरह विकासशील देश के रूप में चीन के बारे में भी सोचते हैं। साल 2019 में फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों में चीनी कंपनियों की संख्या विश्व में पहले स्थान पर रही। चीन में टेंसेंट, अलीबाबा, हुआवेई और जेईडी डोट कॉट आदि विज्ञान प्रौद्योगिकी कंपनियां सामने आईं।

विश्लेषण है कि इस प्रकार की सफलता न केवल कुशल श्रमिक होने का परिणाम है, बल्कि चीन और वैश्विक आर्थिक एकीकरण ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारतीय मीडिया लाइवमिंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अगर भारत अपनी बड़ी वैज्ञानिक प्रौद्योगिक कंपनी की स्थापना करता है, तो कुशल श्रमिक और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भागीदार अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में वैश्विक मूल्य श्रृंखला में शामिल होना भारतीय सरकार का प्राथमिक कार्य होना चाहिए, न कि वर्तमान में संरक्षणवाद का रूझान अपनाना।

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