08 सितम्बर 2019

2019-09-08 21:11:00
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पारिवारिक पत्र की भांति है《सन् 2000 के बाद जन्म》फिल्म

पहली सितम्बर को चीन के विभिन्न स्कूलों में नया सत्र शुरू होता है। इस बार भी हुआ और इसी दिन 《सन् 2000 के बाद जन्म》नामक फिल्म पेइचिंग में रिलिज़ हुई। यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसे बनाने में 12 साल लग गये। इस फिल्म में दो बच्चों के 12 साल में बढ़े होने की प्रक्रिया का बखूबी चित्रण किया गया, इसे देखकर दर्शक गुज़रे जमाने की शिक्षा से बच्चों के तन-मन के परिवर्तन को महसूस कर सकते हैं।

फिल्म 《सन् 2000 के बाद जन्म》का पोस्टर

फिल्म 《सन् 2000 के बाद जन्म》का पोस्टर

अभी आपने《सन् 2000 के बाद जन्म》फिल्म के प्रोमो का एक अंश सुना। पेइचिंग नार्मल विश्वविद्यालय के डॉक्यूमेंट्री फिल्म केंद्र द्वारा निर्मित यह फिल्म 3 सितम्बर को पूरे देश भर में रिलिज़ हुई। साल 2006 में इस फिल्म की शूटिंग शुरु हुई, और इस फिल्म में समानांतर संग्रथित चित्रों से सन् 2000 के बाद जन्मे मुख्य पात्र छी ईयांग और वांग सरोउ के बढ़े होने की कहानी सुनाई गई। इसी दौरान उनकी बढ़ती मुसिबतें और महत्वपूर्ण क्षण आदि को सही और सच्चे रूप से रिकोर्ड किया गया। फिल्म में लड़का छी ईयांग बचपन से ही हीरो बनना चाहता है और “बच्चों का राजा” के नाम से आसपास मशहूर है। बढ़ने के दौरान उसने अमेरिकी फूटबॉल खेल में अपनी दिशा पक्की की। वहीं, लड़की वांग सरोउ पढ़ाई के लिए अकेले ही विदेश चली गई, और वहां उसे मुसिबतों का सामना करना पड़ा.....

इस फिल्म की प्रीमियर में उपस्थित मैडम चांग ने कहा कि इस फिल्म को देखने के बाद उन्हें बच्चों के बढ़ने के दौरान “व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार शिक्षा देने” और ”आपसी सीख” के महत्व को महसूस किया है। मैडम चांग ने कहा:

”इस फिल्म से बच्चों के प्रति मेरी समझ बढ़ी है। उनके पलने-बढ़ने के दौरान शिक्षा की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रहती है। मैं अपने बच्चों को कैसी शिक्षा देती हूं, इस पर अंतर्दर्शन करती हूं। शायद मैं केवल बच्चों के आज पर ध्यान देती हूँ, उनके कल पर ज्यादा ध्यान नहीं देती। चाहे बच्चे के स्वभाव के अनुकूल शिक्षा दी जाए, या वर्तमान देश में परीक्षा पास करने के लिए शिक्षा वाले नमूने से उसका परीक्षण किया जाए, मुझे लगता है कि बच्चों के अनुकूल वाला तरीका शिक्षा का सबसे अच्छा तरीका है।”

फिल्म《सन् 2000 के बाद जन्म》में परीक्षा पास करने वाली शिक्षा और गुणवत्ता की शिक्षा, किशोरावस्था और माता-पिता-बच्चे का संबंध आदि विषय दिखाए गए, जिस पर दर्शकों ने खूब चर्चाएं कीं। छन लेइ नाम की एक अभिभावक ने कहा कि हर एक बच्चा अद्वितीय है, जिसके पास अपने विकास की एक लय होती है। उनका कहना है:

”भगवान ने हर एक इंसान को अलग-अलग प्रतिभा दी है। मेरा विचार है कि हर एक बच्चे के विकास की लय अलग-अलग है। उसे समय दिया जाए और मौका भी। एक के बाद एक कदम आगे बढ़ाये। बाद में वह खुद का विकास कर लेगा।”


फिल्म 《सन् 2000 के बाद जन्म》का पोस्टर

फिल्म 《सन् 2000 के बाद जन्म》का पोस्टर

पेइचिंग नार्मल विश्वविद्लय के कला और मीडिया कॉलेज की शिक्षक, फिल्म《सन् 2000 के बाद जन्म》की कार्यकारी निदेशक य्वी मिन ने कहा कि फिल्म दल ने 12 साल में एक पीढ़ी के लोगों के विकास को कैमरे में कैद किया है। ऐसा कहा जा सकता है कि यह फिल्म चीनी युवा माता-पिता को दिये गये एक पारिवापिक पत्र की भांति है, बच्चे के पलने-बढ़ने की डायरी की तरह है और एक आइना भी है। माता-पिता इस फिल्म में खुद को और अपने बच्चों के भविष्य को देख सकते हैं। फिल्म निदेशक य्वी मिन का कहना है:

”हमने बच्चों के विकास के 12 सालों पर ध्यान दिया। इसी दौरान पता चला कि हर एक परिवार और हर एक बच्चे में बहुत फ़र्क होता है। हर एक बच्चे का जीवन दूसरों से अलग है, किसी एक के विकास की नकल नहीं की जा सकती। इस फिल्म में हम यह बताने चाहते हैं कि क्या आप वाकई सही माइने में अपने बच्चों को समझते हैं?कौन-सा रास्ता और तरीका आपके बच्चों के लिए अनुकूल है?बच्चों के साथ कैसे जुड़ा जाए? बच्चों के किशोरावस्था में उनके साथ कैसे संपर्क किया जाए?बच्चों को सहायता की जब जरूरत हो तो हम कैसे उन्हें प्यार दें और उनका समर्थन करें?बच्चों की सफलता आखिरकार क्या है?आदि”

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