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2018-12-23 21:11:58
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रिपोर्ट:बांग्लादेश में लोगों का वूशू सपना साकार

हरेक बच्चों का अपना एक सपना होता है। कुछ बांग्लादेशी बच्चों के दिलों में वूशू यानी मार्शल आर्ट्स का सपना बसा हुआ है, जिन्होंने ब्रुस ली और जैकी चेन की कूंगफ़ू वाली फिल्में देखी हैं। कुछ दिन पहले बांग्लादेशी राष्ट्रीय खेल परिषद के व्यायामशाला में 2018 दूसरा “राजदूत कप” वाला चीनी-बांग्लादेशी वूशू सम्मेलन आयोजित हुआ। उस दौरान बांग्लादेशी राष्ट्रीय सैन्य वूशू टीम, विभिन्न स्थानीय वूशू क्लब और कंफ्यूशियस कॉलेज के वूशू दल समेत कुल 25 टीमों के वूशू प्रेमियों ने शानदार वूशू का प्रदर्शन किया। चीनी बांग्लादेशी वूशू सम्मेलन से इस देश में चीनी कूंगफ़ू को पसंद करने वाले लोगों का वूशू सपना साकार हुआ।

वूशू सम्मेलन में सुप्रसिद्ध बांग्लादेशी कूंगफ़ू फिल्म स्टार, फिल्म निर्देशक मोहम्मद मासुम परवेज़ रुबेल (Md. Masum Parvez Rubel) ने भाग लिया। उन्होंने बांग्लादेशी वूशू खिलाड़ियों की अच्छी प्रस्तुति का उच्च मूल्यांकन किया और उन्हें अधिक परिश्रम के साथ अभ्यास करने का प्रोत्साहन दिया। उनका कहना है:“आपकी प्रस्तुतियों से मुझे आशा नजर आयी है। मुझे विश्वास है कि एक दिन बांग्लादेश में वूशू स्तर दक्षिण एशियाई देशों में अग्रिम पंक्ति में होगा। इस लक्ष्य को साकार करने की पूर्वशर्त आप लोगों का अथक परिश्रम और मेहनत है। वूशू के अभ्यास को अपने रोजमर्रा के जीवन में एक भाग बना लेना चाहिए। आप लोगों को वूशू वस्त्र पहनकर बहुत लगन से अभ्यास करना चाहिए। जमीन-आसमान को भी भूल जाना चाहिए। इस प्रकार आप वूशू का अच्छा अभ्यास कर सकेंगे।”


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वास्तव में बांग्लादेश में वूशू खेल के विकास का समय लम्बा नहीं है। साल 2009 में वूशू की पढ़ाई देश के मीडिल और प्राइमरी स्कूलों में शुरु हुई। 2010 में वूशू को बांग्लादेश स्पोर्ट्स कॉलेजों में पढ़ाई का विषय बनाया गया। कुछ स्कूलों में वूशू सीखने के लिए पेशेवर मैट महँगे हैं। छात्रों को कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करना पड़ता है। यहां तक कि कुछ वूशू शिक्षक का स्तर भी ऊंचा नहीं है।

डायमंड फिटनेस और एरोबिक्स केंद्र के संस्थापक दिल्दर हसन कबड्डी खिलाड़ी थे। 1991 में उसका वूशू के साथ पहला संपर्क हुआ और अब तक वूशू के साथ संबंध बना हुआ है। हसन ने 7 बार वूशू सीखने के लिए चीन की यात्रा की। वर्तमान में डायमंड केंद्र ढाका और चिटगांव में करीब 40 हज़ार छात्रों को स्वीकार किया। छात्र उन्हें दिलु गुरु कहते हैं। इस वर्ष वूशू सम्मेलन में दिलु गुरु ने अपने केंद्र के प्रतिनिधियों का नेतृत्व कर भाग लिया। हसन ने कहा:“सब लोग जानते हैं कि वूशू का स्रोत चीन से है। वूशू न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, बल्कि खुद की रक्षा करने का एक साधन भी है। इसके अलावा वूशू का अभ्यास का अभिनय लोगों को आकृष्ट करता है। इसलिए अल्प समय में वूशू बांग्लादेश में बहुत लोकप्रिय खेल इवेंट बन गया है।”

बांग्लादेश में वूशू की लोकप्रियता का प्रसार और तेज़ विकास को इस देश में चीनी दूतावास की सक्रियता से अलग नहीं किया जा सकता। नवम्बर 2017 में चीन की पूंजी से बांग्लादेशी वूशू सोसाइटी ने पहला“राजदूत कप”शीर्षक चीनी और बांग्लादेशी वूशू प्रतियोगिता का आयोजन किया। जुलाई 2018 में चीनी वूशू सोसाइटी ने बांग्लादेशी राष्ट्रीय वूशू टीम के खिलाड़ियों को दो महीने तक पढ़ाने के लिए अपने श्रेष्ठ वूशू कोच छन च्येन और माओ मोंगश्वान को भेजा। जनवरी 2019 में चीनी वूशू सोसाइटी द्वारा चंदे के रूप में प्रदत्त 5 लाख मूल्य वाले ट्रेनिंग उपकरणों को बांग्लादेश में पहुंचाया जाएगा। इन कदमों से इस देश के युवाओं को वूशू सीखने की प्रेरणा मिली। ट्रेनिंग उपकरणों के माध्मय से बांग्लादेश में वूशू प्रशिक्षण की स्थिति में सुधार होगा और ट्रेनिंग की कारगरता उन्नत होगी।

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दूसरे “राजदूत कप”चीनी और बांग्लादेशी वूशू सम्मेलन में न केवल 10 वर्ष से कम उम्र वाले नन्हें खिलाड़ियों को देखने को मिले, बल्कि कुछ श्रेष्ठ वूशू महिला खिलाड़ी भी सामने आईं। वूशू अभ्यास के अभिनय से दर्शकों को उनकी शक्ति और सुन्दर छवि महसूस हुई। बांग्लादेशी “मुफ्त मुकाबला” कोच मोहम्मद अब्दुल कादर ने कहा:“पारंपरिक वूशू की तुलना में बांग्लादेशी युवाओं को ज्यादा तौर पर मुफ्त मुकाबला सीखना चाहते हैं। क्योंकि इसे सीखने के लिए लोग शीघ्र ही दाखिला पा सकते हैं और इसकी तकनीक बहुत उपयोगी है। वर्तमान में कई लड़कियां वूशू सीखना पसंद करती हैं। वे शारीरिक स्वास्थ्य और खुद की रक्षा के लिए मुफ्त मुकाबला सीखती हैं।”

बांग्लादेश स्थित चीनी राजदूत चांग त्सो ने वूशू प्रदर्शन देखकर कहा कि वूशू चीनी और बांग्लादेशी जनता के लिए समान रुचि वाली चीज़ बन गयी है। इस पर वे बहुत खुश हैं। सम्मेलन में भागीदारी ये युवा खिलाड़ी देश के भविष्य विकास की आशा ही नहीं, स्तंभ भी है। वे चीन और बांग्लादेश के बीच मानविकी आदान-प्रदान और भाई-चारे संबंध का आधारभूत पत्थर है। उन्हें आशा है कि वूशू के माध्यम से दोनों देशों की जनता के बीच आपसी समझ और संपर्क बढ़ेगा। युवा खिलाड़ी अपनी मेहनत और पसीने से जीत हासिल कर देश के लिए योगदान देंगे।

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मौजूदा वूशू सम्मेलन के आयोजक पक्ष के रूप में बांग्लादेशी वूशू सोसाइटी के उपाध्यक्ष मोहम्मद कलम हुसैन बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने चीन सरकार और चीनी दूतावास द्वारा बांग्लादेशी वूशू कार्य के विकास के लिए दी गई सहायता और किए गए समर्थन के प्रति आभार जताया। उनका कहना है:“बांग्लादेश के वूशू अभ्यास के स्तर को उन्नत करने के लिए चीनी दूतावास ने बड़ा समर्थन किया। उसने बांग्लादेशी वूशू सोसाइटी को बड़ी मात्रा में प्रशिक्षण उपकरण दिए और अनुभवी वूशू कोच भेजे। लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हम अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे। हमें आशा है कि भविष्य में चाइनीस कूंफ़ू बांग्लादेश के कोने-कोने तक फैल सकेगा।”


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