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2018-11-25 21:11:00
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रिपोर्ट: फिल्म ईरान में बड़ा आध्यात्मिक उद्योग है- चीनी फिल्म निर्देशक

16 से 23 नवम्बर तक 48वां रोड अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव ईरान की राजधानी तेहरान में आयोजित हुआ, यह ईरान में आयोजित वैज्ञानिक शैक्षिक विषय वाली फिल्मों से संबंधित महोत्सव हैं। चीनी फिल्म निर्देशक फ़ांग कांगल्यांग ने निमंत्रण पर जज के रूप में भाग लिया। संवाददाता को दिए एक इन्टरव्यू में उन्होंने कहा कि फिल्म ईरान में एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक उद्योग है, जो आम ईरानी नागरिकों में आध्यात्मिक एकजुटता की भूमिका निभाती है।

चीनी फिल्म निर्देशक फ़ांग कांगल्यांग द्वारा रची गई बाल विषय वाली《स्कूल जाने के रास्ते पर》शीर्षक फिल्म, जिसका अंग्रेज़ी नाम है“ए यूनिक स्कुलिंग”की शूटिंग 2004 में हुई, जिसने 20वें ईरानी इस्फ़हान अंतरराष्ट्रीय चिल्ड्रन फिल्म महोत्सव में भाग लिया और एशियाई भाग की प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला है। फ़ांग कांगल्यांग को सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्देशक के रूप में स्वर्ण तितली पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन उस समय वह खुद पुरस्कार लेने ईरान नहीं गए। इस बार जज होने के नाते वे पहली बार ईरान आए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान आने के बाद इस देश की फिल्म के प्रति उनका अंतर्ज्ञान बढ़ गया है। उन्हें पता चला कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ईरानी फिल्म की प्रसिद्धता इस देश में उच्च गुणवत्ता वाले दर्शकों से अलग नहीं किया जा सकता। उनका कहना है: “पहले मुझे पता नहीं था कि ईरानी फिल्म क्यों इतनी प्रसिद्ध है। यहां आने के बाद मुझे इस देश की फिल्मों के बारे में अधिक जानकारी हुई। मुझे लगता है कि ईरानी लोगों की कुल गुणवत्ता अच्छी है और उनका सांस्कृतिक और कलात्मक स्वाध्याय बढ़िया है।”

इधर के सालों में“चिल्ड्रन ऑफ़ हैवन”और“टेस्ट ऑफ़ चेरी”आदि ईरानी फिल्मों ने चीनी दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ी है। कम खर्चे से उच्च गुणवत्ता वाली ईरानी फिल्मों ने चीनी फिल्म जगत में अपनी जगह बनायी है। मौजूदा 48वें रोड अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिल्म निर्देशक फ़ांग कांगल्यांग ने कई ईरानी फिल्में देखीं। उनके विचार में ईरानी फिल्मों में जीवन में छोटी-छोटी चीज़ों को फिल्म स्क्रीन में शामिल किया जाता है, यह ईरानी फिल्मों की कलात्मक विशेषता है, जो कि दर्शकों को स्नेहपूर्ण लगता है। उन्होंने कहा:“ईरानी फिल्म की खास शैली है। पहला है यथार्थवाद। यानी कि फिल्मों में वास्तविक सामाजिक जीवन का वर्णन किया जाता है। दूसरा है फिल्मों में दयालु चीज़ों को अभिव्यक्त किया जाता है। मुझे लगता है कि यह ईरानियों के धार्मिक विश्वास से संबंधित है। तीसरा, ईरानी फिल्मों में छोटी-छोटी बातों का वर्णन किया जाता है, जो जीवन से संबंधित है। इस तरह उनकी फिल्में देखते समय दर्शक बहुत आसानी से स्वीकार कर सकते हैं। उनकी फिल्मों में जीवन की छोटी-छोटी चीज़ों में दिलचस्प बातें दिखायी जाती हैं।”   

इधर के सालों में ईरानी फिल्मों ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म मंच में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। 2 फरवरी 2018 को 89वें ऑस्कर पुरस्कार समारोह में ईरानी फिल्म“द सेल्समैन (The Salesman)”को सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा वाली फिल्म का पुरस्कार मिला। इस फिल्म के निर्देशक असगर फरहादी को दूसरी बार यह पुरस्कार मिला है। 2012 में उनकी फिल्म“एक सेपरेशन”को भी यह पुरस्कार मिला। ऑस्कर पुरस्कार के अलावा, ईरानी फिल्में कभी कभार कान्न, बर्लिन, विनेस तीनों बड़े अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में भाग लेती हैं और कभी-कभी पुरस्कार प्राप्त करती हैं।

अंतरराष्ट्रीय फिल्म जगत में ईरानी फिल्मों की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए चीनी फिल्म निर्देशक फ़ान कांगल्यांग ने कहा कि पश्चिमी फिल्म महोत्सवों में ईरानी फिल्मों के प्रति रुचि बढ़ गई है, इसके साथ ही ईरानी संस्कृति और विश्वास यूरोपीय अमेरिकी दर्शकों से मिलते जुलते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म के विकास की दृष्टि से देखा जाए, पश्चिमी फिल्म महोत्सवों में सांस्कृतिक रुचि मौजूद है। गत शताब्दी के 60 वाले दशक में पश्चिमी लोगों को जापानी फिल्मों के प्रति रुचि थी, 80 से 90 के दशक में उन्हें चीनी फिल्मों के प्रति दिलचस्पी हुई। अब धीर-धीरे ईरानी और दक्षिण कोरियाई फिल्मों के प्रति रुचि बढ़ रही है।

क्या ईरानी फिल्म भारतीय बॉलिवुड फिल्म का नमूना सीखकर विश्व में प्रवेश करेगी या नहीं? इस की चर्चा करते हुए चीनी फिल्म निर्देशक फ़ांग कांगल्यांग ने कहा कि बॉलिवुड फिल्में अमेरिकी हॉलिवुड फिल्म की नकल करती है। ईरानी फिल्म उद्योग के पास विदेशों में प्रवेश करने के लिए पर्याप्त आर्थिक आधार नहीं है। लेकिन विश्व में ईरानी फिल्मों का कलात्मक मूल्य और आध्यात्मिक प्रभाव मशहूर है, जो वर्तमान में कलात्मक मूल्य पर ध्यान देने के बजाय वाणिज्यिक मूल्य और बॉक्स ऑफिस पर अधिक नज़र डालने वाली चीनी फिल्मों की तुलना में बड़ा फर्क मौजूद है। चीनी फिल्म निर्देशक फ़ांग कांगल्यांग ने कहा:“मुझे लगता है कि ईरानी फिल्में चीनी फिल्मों से बिलकुल अलग है। ईरानी फिल्मों में कम पूंजी निवेश किया जाता है और दर्शकों का बॉक्स ऑफिस भी कम है। इसकी वजह देश का कमजोर आर्थिक आधार है। लेकिन ईरानी फिल्मों की बड़ी आध्यात्मिक विशेषता है, जिन्हें देखकर आम ईरानी नागरिकों को आध्यात्मिक एकजुटता प्राप्त हुई है। लेकिन चीनी फिल्मों पर नज़र डालें, अब हमारे देश में कभी कभार एक अरब युवान, 1 अरब युवान या 3 अरब युवान वाली फिल्में बनाते हैं। फिल्म बनाने के विभिन्न क्षेत्रों में हॉलिवुड के बराबर है, इस में निवेश की हुई पूंजी ज्यादा है और बॉक्स ऑफिस भी अच्छा है, लेकिन चीनी फिल्मों में आध्यात्मिक तत्व कम है। ईरानी फिल्मों में आर्थिक कमजोरी के बजाए आध्यात्मिक भावना बड़ी है। इस तरह हमें ईरानी फिल्मों से सीखना चाहिए।”


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