20181021

2018-10-21 21:11:46
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रिपोर्ट:   रूसी विद्वान की नज़र में चीन के 40 साल

इस वर्ष चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू किये जाने की 40वीं वर्षगांठ है। रूस के चीन मुद्दे के विशेषज्ञ, राष्ट्रीय शोध विश्वविद्यालय "अर्थशास्त्र के उच्च विद्यालय" के पूर्वी विद्या अनुसंधान विभाग के प्रधान एलेक्सी मास्लोव के विचार में पिछले 40 सालों में चीनी अर्थतंत्र और समाज में बड़ी कामयाबियां हासिल हुईं और चीन ने विश्व के विभिन्न देशों के आर्थिक विकास को भी आगे बढ़ाया। बड़े आर्थिक बदलाव होने के साथ इस देश में शिष्टाचार, ईमानदारी और देशभक्ति आदि चीनी राष्ट्रीय मूल संस्कृति में कोई परिवर्तन नहीं आया।

54 वर्षीय मास्लोव चीन से बहुत परिचित हैं, वे इतिहास विद्या के डॉक्टर और चीन-विद्या के प्रोफेसर भी हैं। लम्बे समय से वे चीनी अर्थतंत्र, राजनीति और संस्कृति आदि क्षेत्र का अनुसंधान करते आ रहे हैं। चीन में सुधार और खुलेपन की नीति लागू किये जाने के बाद से लेकर अब तक पिछले 40 सालों में विकास में प्राप्त उपलब्धियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम, चीन ने विश्व को साबित कर दिया है कि इतिहास के लम्बे समय में केवल 40 सालों के भीतर वह एक गरीब और पिछड़े देश से विश्व में दूसरा बड़ा आर्थिक समुदाय बन गया। यह दुनिया भर में अद्वितीय है। 40 सालों में चीन ने राजनीतिक स्थिरता और जातीय ऐतिहासिक मूल्य को बनाए रखने की पूर्वशर्त पर लगातार सुधार के माध्यम से देश में तेज़ सामाजिक आर्थिक विकास साकार किया। चीन की विविधतापूर्ण औद्योगिक व्यवस्था से खुद को, यहां तक कि दुनिया के विभिन्न देशों को उच्च गुणवत्ता वाली सस्ती वस्तुएं उपलब्ध करवायी। इससे आम नागरिकों के जीवन स्तर में उन्नति हुई। रूसी प्रोफेसर मास्लोव ने कहा:“चीन खुद के विकास की खोज करता है, इसके साथ ही उसने दक्षिण पूर्व एशियाई और मध्य एशियाई देशों, यहां तक कि पूरे विश्व के कई देशों को विकास का मौका प्रदान किया है। ये देश एक समान विकास के रास्ते पर आगे बढ़ते रहे हैं।”     

प्रोफेसर मास्लोव ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों के साथ ज्यादा व्यापक क्षेत्रों में सहयोग और उभय जीत को बखूबी अंजाम दिए जाने के लिए चीन ने पहली बार“बेल्ट एंड रोड”पहल पेश किया, जो विकास के लिए एक बिल्कुल नया ढांचा है, जिससे वैश्विक समान विकास के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होगा। वर्तमान में कुछ देशों ने इसका समर्थन किया और“बेल्ट एंड रोड”में गहन रूप से भाग लिया। चीन को आशा है कि दूसरे देशों के साथ साझे भाग्य वाले समुदाय की स्थापना की जाएगी, ताकि समान विकास और उभय जीत साकार हो सके। प्रोफेसर मास्वोल ने बल देते हुए कहा कि चीन अपनी राष्ट्रीय शक्ति मजबूत करने के साथ-साथ हमेशा शांतिपूर्ण विकास रास्ते पर आगे बढ़ता है। उनका कहना है:“चीन दूसरे देशों के लिए कभी खतरा नहीं बनेगा। पिछले 40 सालों में चीन ने कभी सक्रिय रूप से दूसरे देशों पर प्रतिबंध नहीं लगाया और न ही चुंगी कर बढ़ाया। चीन शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के आधार पर आर्थिक विकास का पक्षधर है।”

वर्तमान में चीन एशिया, अफ्रीका और लैटिन-अमेरिका के विकासमान देशों को पूंजी और सुयोग्य व्यक्तियों के समर्थन में सक्रिय है, जिससे इन देशों में गरीबी उन्मुलन और विकास के लिए सकारात्मक योगदान दिया है।

चीनी समाज में बदलाव और अपरिवर्तन की चर्चा करते हुए रूसी प्रोफेसर मास्लोव ने यह भी कहा कि चीनी लोग वस्त्रों और खानपान के अभाव वाले समय से गुजरे थे। लेकिन आज चीनियों का भौतिक और सांस्कृतिक जीवन बहुत रंगबिरंगा है। 20 साल पूर्व चीनी लोग ज्यादा तौर पर बाहरी दुनिया की जानकारी लेना चाहते थे, वे पश्चिमी देशों से सीखना चाहते थे। लेकिन आज, अधिक से अधिक देश चीन से सीखना चाहते हैं। 40 सालों के विकास के बाद चीनी लोग और खुले और अंतरराष्ट्रीकरण हो चुके हैं।

मास्लोव ने यह भी कहा कि तेज़ आर्थिक विकास और वस्तुओं की विविधता के युग में चीनियों की आध्यात्मिक दुनिया में जरूर परिवर्तन आया है। लेकिन चीनी राष्ट्र के सांस्कृतिक मूल में कोई बदलाव नहीं आया। उन्होंने कहा:“शिष्टाचार, ईमानदारी और देशभक्ति आदि सांस्कृतिक मूल फिर भी आज के चीन में प्रमुख मूल्य दृष्टिकोण है। बाहरी रूप में कैसा भी परिवर्तन क्यों न आ जाए, चाहे गरीब हो या अमीर हो, चाहे गांवों में हो या शहरों में हो, चीनी लोग अपनी आध्यात्मिक परंपरा कभी नहीं खोएंगे।”    

रूसी प्रोफैसर मास्लोव ने इतिहास का सिंहावलोकन करते हुए कहा कि चीन में सुधार और खुलेपन के जनरल डिज़ाइनर स्वर्गीय नेता तंग श्याओफिंग ने कहा था कि चीन सौ सालों में  आधुनिकीकरण देश बन जाएगा। उस समय पश्चिमी लोगों के विचार में एक सौ वर्ष अपर्याप्त था, कम से कम दो या तीन सौ साल चाहिए। यहां तक कि इस लक्ष्य को बहुत मुश्किल से मूर्त रूप लिया जाएगा। लेकिन तथ्यों से जाहिर है कि अब चीन विश्व के बड़े देशों की पंक्ति में खड़ा हो चुका है और शक्तिशाली देश बनने की राह में आगे बढ़ रहा है।

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