20180422

2018-04-22 21:11:45
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8वां पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 15 से 22 अप्रैल तक आयोजित हो रहा है। गत वर्ष से“दंगल”, “सीक्रेट सुपरस्टार”और“बजरंगी भाईजान”आदि भारतीय श्रेष्ठ फ़िल्में चीनी फिल्म बाजार में बहुत लोकप्रिय हुई हैं। मौजूदा पेइचिंग फिल्म महोत्सव में भारतीय फिल्म“डॉर्क विंड”का प्रदर्शन भी हुआ, जिसने चीनी दर्शकों की वाहवाही लूटी। चीनी और भारतीय फिल्म जगतों के लोग द्विपक्षीय फिल्म सहयोग के प्रति आशावान हैं। 

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भारतीय फिल्म निर्माता प्रसाद शेट्टी सीआरआई हिंदी सेवा की संवाददाता मीरा को इन्टरव्यू देते हुए

प्रसाद शेट्टी फिल्म“सीक्रेट सुपरस्टार”के संयुक्त निर्माता हैं। वे इन तीनों फिल्मों को चीन में पहुंचाने वाले प्रमुख सहयोगी भी हैं। चीन में भारतीय फिल्मों की लोकप्रियता को देककर उन्हें हैरान नहीं होती है। उनके विचार में अच्छी फिल्मों में कोई देशीय सीमा नहीं होती है। उन्होंने कहा:“मुझे लगता है कि किसी भी देश की किसी भी अच्छी फिल्म को चीनी दर्शक जरूर पसंद करेंगे। क्योंकि इन फिल्मों को बनाने के वक्त हमने केवल चीनी बाज़ार के बारे में नहीं सोचा। मेरा विचार है कि फिल्म अच्छी है, तो दर्शक अवश्य ही पसंद करते हैं।”  

फिल्म निर्माता प्रसाद शेट्टी ने इधर के वर्षों में चीन में फिल्म उद्योग के तेज़ विकास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि कुछ पहलुओं से देखा जाए, तो चीन भारत से आगे बढ़ गया है, हालांकि भारत में फिल्म का इतिहास बहुत पूराना है। लेकिन प्रसाद शेट्टी ने यह भी कहा कि वर्तमान में भारत की फिल्म व्यवस्था संपूर्ण हो गई है, चीनी फिल्म उद्योग को अभी और आगे का रास्ता तय करना है। उन्होंने कहा:“भारतीय फिल्म उद्योग बहुत विविधतापूर्ण है। बॉलीवुड केवल इस औद्योगिक चेन का एक बहुत छोटा सा भाग है। भारत के हर क्षेत्रों में खुद का फिल्म उद्योग उलपब्ध है। मुझे लगता है कि चीन भारत के साथ अधिक सहयोग ढूंढ़ सकता है। या भारत से फिल्म शूटिंग के बारे में कुछ सीख सकता है।”

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चीनी फिल्म निर्माता कू वानछङ सीआरआई हिंदी सेवा की संवाददाता मीरा को इन्टरव्यू देते हुए

चीनी फिल्म निर्माता कू वानछङ प्रसाद शेट्टी के विचारों की समर्थक हैं। वे पीकॉक माउंटेन मीडिया संस्कृति लिमिडेट कंपनी की उप महानिदेशक हैं। उनकी कंपनी “दंगल”, “सीक्रेट सुपरस्टार”और“बजरंगी भाईजान”आदि भारतीय श्रेष्ठ फ़िल्मों को चीनी बाजार में प्रवेश कराने में सक्रिय है। कू वानछङ ने कहा कि फिल्म विश्वव्यापी चीज़ है। भारत की परिपक्व फिल्म उद्योग व्यवस्था से चीन सीख सकता है। उन्हें आशा है कि दोनों देश संयुक्त शूटिंग वाली फिल्म बनाएंगे। यह दोनों देशों के फिल्म निर्माताओं की ही नहीं, दोनों देशों के दर्शकों की आशा भी है। कू वानछङ ने कहा:“चीनी फिल्म उद्योग की तुलना में भारतीय फिल्म उद्योग का इतिहास अधिक पुराना ही नहीं, फिल्म प्रणाली भी परिपक्व है। भारतीय फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं को मालूम है कि किस तरीके से अच्छी फिल्म बनायी जाती है। मुझे आशा है कि चीनी और भारतीय फिल्म जगत के लोगों के बीच अधिक आवाजाही होंगी। दोनों देशों में पैदा हुई कई अच्छी कहानियों से फिल्म के रूप में दिखाया जा सकता है। इस पूर्वशर्त पर फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक सहयोग कर सकते हैं। यह बहुत अच्छी बात है। विश्वास है कि दोनों देशों के दर्शक इसे भी पसंद करते हैं।”

फिल्म“सीक्रेट सुपरस्टार”के निर्देशक अद्वैत चंदन ने निमंत्रण पर मौजूदा 8वें पेइचिंग अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में भाग लिया। उन्होंने चीन में कुछ चीनी फिल्में देखी है। अद्वैत चंदन के विचार में चीनी और भारतीय फिल्मों में कई चीज़ें मिलती जुलती है। वे चीनी फिल्म निर्माताओं के साथ सहयोग करने की प्रतिक्षा में हैं। अद्वैत चंदन ने कहा:“पिछली बार चीन की यात्रा के दौरान मैंने दो-तीन चीनी फिल्में देखी थी। मुझे लगता है कि चीनी और भारतीय फिल्मों में कुछ चीज़ें समान हैं। इन्हें डब कर विदेशों तक पहुंचाया जाना चाहिए। अगर चीनी फिल्म भारत में रिलीज़ होगी, तो मैं बेहद खुश होंगा।”

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भारतीय फिल्म निर्देशक अद्वैत चंदन सीआरआई हिंदी सेवा की संवाददाता मीरा को इन्टरव्यू देते हुए

अद्वैत चंदन के विचार में चीनी फिल्मों को भारतीय बाजार में पहुंचाने के लिए डबिंग कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। क्योंकि दोनों देशों की अलग-अलग संस्कृति है। डबिंग की जाने वाली फिल्म आपस में सांस्कृतिक आवाजाही का पुल है। उनका कहना है:“मुझे लगता है कि डबिंग एक बहुत सार्थक कार्य है। क्योंकि यह विदेशी फिल्म और घरेलू दर्शकों का सेतु है। कुछ हॉलीवुड फिल्मों और अन्य देशों की फिल्मों को हिंदी में डबिंग की गई। इस प्रकार की फिल्म स्थानीय दर्शक अधिक तौर पर स्वीकार करते हैं।”

अद्वैत चंदन ने यह भी कहा कि जब बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग यूरोप और अमेरिका में की जा सकती है, तो चीन में क्यों नहीं की जा सकती?उन्होंने कहा:“बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग स्विट्जरलैंड और अमेरिका में की जाती है। लेकिन हमने चीन में शूटिंग करने के बारे में नहीं सोचा। मुझे लगता है कि भारतीय फिल्म निर्माताओ को शूटिंग के लिए चीन में जरूर आना चाहिए। यह तो बहुत आकर्षक बात है।”

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