चीन पर दबाव डालने से आखिरकार किस को नुकसान पहुंचेगा

2020-09-25 15:45:30
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अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने छिपे हुए राजनीतिक उद्देश्य से तथ्यों की अनदेखी कर चीन पर बेमतलब हमला बोला। लेकिन वास्तव में इससे चीन को नुकसान पहुंचने की बजाये अमेरिका को नुकसान पहुंचेगा, क्योंकि इससे अमेरिका की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा तेजी से कमजोर हो जाएगी। देश की प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता राष्ट्रीय शक्ति, सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक शक्ति से संबंधित है। अब सैन्य आधिपत्य के अलावा, अमेरिका की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा में काफी गिरावट आयी है।

अमेरिका पूरी कोशिश से कोविड-19 महामारी की जिम्मेदारी चीन पर लाद रहा है, लेकिन तरह-तरह के सबूत दिखाते हैं कि कोरोना वायरस के अमेरिका से आने की अधिक संभावना है, यहां तक कि अमेरिका के जैव रासायनिक हथियार केंद्रों से आया है। और महत्वपूर्ण बात है कि कोरोना वायरस की रोकथाम में अमेरिका की तुलना में चीन ने ज्यादा सफलता पायी है। चीन महामारी की रोकथाम में अन्य देशों की सहायता कर रहा है, जबकि अमेरिका में पुष्ट मामलों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। डब्ल्यूएचओ महामारी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने चीन को बदनाम करने में अमेरिका का साथ नहीं दिया है, तो अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ से हटने का निर्णय लिया। इससे वैश्विक हितों को नुकसान पहुंचाया गया है।

चीन पर दबाव डालने के लिए अमेरिका ने भरसक कोशिश की, लेकिन चीन शांतिपूर्ण रवैये से इसका जवाब दे रहा है। अमेरिका के प्रतिबंध से चीन पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। पूरी दुनिया ने इससे चीन की राष्ट्रीय शक्ति देखी है। दुनिया समझती है कि अमेरिका पहले की तरह नहीं रहा, जबकि चीन भी पहले की तरह नहीं है, तो आने वाले समय में दुनिया भी पहले की तरह नहीं होगी। यह आवश्यक तर्क है।

शायद अमेरिका ने नहीं सोचा था कि उसकी कार्रवाई से दुनिया में चीन का स्थान और प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। अब दुनिया में अमेरिका की प्रतिष्ठा कमजोर हो चली है। अमेरिका हमेशा खुद को प्राथमिकता देता है, इसलिए पूरी दुनिया को मालूम है कि अमेरिका का साथी बनना खतरनाक है।

अमेरिका की तुलना में चीन न सिर्फ समानता, आपसी लाभ, सहयोग और समान जीत का पक्ष लेता है, बल्कि चीन अपने पैसे और संसाधन से संबंधित देशों के साथ सहयोग करता है। चीन बस यही चाहता है कि संबंधित देशों के साथ विकास किया जाए। और महत्वपूर्ण है कि चीन ऐसा करने में कोई अतिरिक्त राजनीतिक शर्त नहीं रखता और अन्य देशों के अंदरूनी मामलों में हस्ताक्षेप भी नहीं करता। चीन के साथ सहयोग और सुरक्षित है, इसलिए अब अधिकाधिक देश चीन के साथ सहयोग करना चाहते हैं।

(ललिता)

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