​चीन-अमेरिका संबंध को तोड़ने वाले पोम्पेओ अमेरिका को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं

2020-09-10 20:29:33
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साल 1978 के जुलाई माह में तत्कालीन चीनी नेता के सवाल के जवाब में भूतपूर्ण अमेरिकी राष्ट्रपति कार्टर ने कहा कि चीन 1 लाख छात्रों को अमेरिका भेजे, लेकिन 2020 के सितंबर माह में अमेरिकी मौजूदा विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि आशा है कि इस साल के अंत तक अमेरिका में सभी कन्फ्यूशियस संस्थाएं बंद हो जाएंगी। साथ ही, उन्होंने धमकी भी दी कि आगामी कई हफ्तों से कई महीनों तक अमेरिका चीनी छात्रों के अमेरिका आने को सीमित रखने की नीति जारी करेगा।

पिछले 40 सालों के बाद चीन-अमेरिका का आधार माना जाने वाला सांस्कृतिक आदान-प्रदान गंभीर परिस्थिति का सामना कर रहा है। इधर के दिनों में अमेरिका में चीनी अनुसंधानकर्ताओं या छात्रों को उत्पीड़ा हुई है। सामान्य शैक्षिक आवाजाही पर बाधा पहुंचाई है। हजारों चीनी छात्रों और अनुसंधानकर्ताओं का वीजा बगैर किसी कारण के रद्द कर दिया गया है।

हाल में कोविड-19 महामारी के फैलाव, आर्थिक मंदी और जातीय घृणा के खिलाफ प्रदर्शन को मद्देनजर मौजूदा अमेरिकी सरकार बहुत चिंतित है। पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनेताओं ने चीन-अमेरिका सांस्कृतिक आवाजाही क्षेत्र में जुबानी फायरिंग की है और अमेरिका जाने वाले हरेक चीनी को जासूस बताने की पूरी कोशिश की है। उनका मकसद घरेलू गतिरोध को हटाकर आम चुनाव में विजय पाना है।

आर्थिक आवाजाही की तरह चीन और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का सार आपसी लाभ और साझी जीत है। पोम्पेओ जैसे अमेरिकी राजनेताओं की कार्यवाइयों से अमेरिका को जरूर भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

चीनी विद्यार्थियों के अमेरिका जाने पर पाबंदी लगाने से अमेरिकी विश्वविद्यालय को भारी नुकसान पहुंचेगा, साथ ही अमेरिकी वैज्ञानिक व तकनीक नवाचार को भी क्षति पहुंचेगी। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में चीनी विद्यार्थियों की संख्या अमेरिका में सभी विदेशी विद्यार्थियों का करीब एक तिहाई है। चीनी विद्यार्थी हर साल अमेरिका को करीब 15 अरब यूएस डॉलर देते हैं। साथ ही अमेरिका में एआई के सुयोग्य व्यक्तियों में भी एक तिहाई चीन से आते हैं। इससे जाहिर है कि अमेरिका में वैज्ञानिक व तकनीक प्रगति चीनी सुयोग्य व्यक्तियों से घनिष्ट संबंध है।

अमेरिका राजनेताओं की बुरी कार्यवाइयों ने गंभीर रूप से अमेरिका की प्रतिष्ठा को भी बर्बाद किया है। वास्तव में इस साल के मार्च के अंत में अमेरिकी नेता ने स्पष्ट रूप से कहा था कि अमेरिकी जनता चीनी जनता से बहुत प्यार करती है। चीनी विद्यार्थी अमेरिका के शैक्षिक कार्य के लिए अति महत्वपूर्ण है। अमेरिका चीनी विद्यार्थियों समेत चीनी नागरिकों की रक्षा करेगा। लेकिन आधे साल के बाद अमेरिकी राजनेताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा के दुरुपयोग कर चीनी विद्यार्थियों को धमकी दी। इसी स्थिति में और कितने चीनी लोग अपने बच्चों को अमेरिका में पढ़ने के लिए भेजना चाहेंगे? और कितने सुयोग्य व्यक्ति अमेरिका पर विश्वास कर अपने भाग्य को इस तरह के देश के हाथों में सौंपना चाहेंगे?

खुलेपन से प्रगति आता है, जबकि बंद होने से पिछड़ापन पैदा होता है। यह मानव जाति के ऐतिहासिक विकास का जरूरी नियम है। जब खुलेपन, समावेशी और बहुध्रुवी मूल्य विचारधारा मौजूद नहीं रहता, तो अमेरिका को जरूर गिरावट की ओर चलेगा।

(साभार---चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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