यूएन : महामारी की स्थिति में आतंकवाद पीड़ितों को नहीं भुलाया जा सकता

2020-08-22 16:45:21
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21 अगस्त को आतंकवाद के पीड़ितों के स्मरण और श्रृद्धांजलि का अन्तरराष्ट्रीय दिवस है। उसी दिन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और संयुक्त राष्ट्र की 74वीं महासभा के अध्यक्ष मुहम्मद बंदे आदि ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये भाषण दिया। उन्होंने वादा किया कि संयुक्त राष्ट्र हमेशा आतंकवाद पीड़ितों के साथ एकजुटता से खड़ा है। उन्होंने अपील की कि दुनिया भर में महामारी के प्रकोप की स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद पीड़ितों की आवाज पहले से और ईमानदारी से सुननी चाहिये।

संयुक्त राष्ट्र ने 21 अगस्त को “कभी नहीं भूलिये - आतंकवाद के पीड़ितों की याद की कहानी ”के विषय पर उच्च स्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम का आयोजन किया। एंटोनियो गुटेरेस ने भाषण देते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी की पृष्ठभूमि में वर्ष 2020 में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। सभी देशों की सरकारों का ध्यान व संसाधन महामारी से निपटने के प्रयासों पर केंद्रित हैं, जबकि आतंकवाद पीड़ितों के लिए आपराधिक न्याय प्रक्रिया और मनोसामाजिक सेवा आदि अहम सेवाएं बाधित, विलंबित या समाप्त हो चुकी है। ऐसी स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को इन पीड़ितों पर ध्यान को आगे मजबूत करना चाहिये। साथ ही उन्होंने अपील की कि सभी देशों को सहयोग को बढ़ाने और सभी रूपों के आतंकवाद का संयुक्त रूप से विरोध करना चाहिये।

मुहम्मद बंदे ने कहा कि विश्व शांति व स्थिरता की स्थापना और रक्षा करने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र आंतकवाद को रोकने के लिये हरसंभव प्रयास करेगा। साथ ही वे पीड़ितों के रक्षा तंत्र को मजबूत करेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद-विरोधी कार्यालय के प्रभारी और संयुक्त राष्ट्र के उप महासचिव व्लादिमीर वोरोन्कोव ने समापन भाषण देते हुए कहा कि हिंसक आतंकवाद के कारण पीड़ितों की उम्मीदें, सपने टूट गए हैं। सदमा देने वाली स्मृतियों और चोट को मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपील की कि हमें उनके मानवाधिकारों की रक्षा और उनकी मांगें पूरी करने की गारंटी करनी चाहिये।

(हैया)

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