महामारी के प्रकोप के सामने अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने "सभी के लिए समानता" को भी छोड़ दिया

2020-05-23 20:46:33
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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने 21 मई को सोशल मीडिया में अमेरिका को यह चेतावनी दी कि महामारी के दौरान बच्चों को निष्कासित नहीं किया जाना चाहिए, खासकर उन बिना साथियों के बच्चों को। महामारी की स्थितियों में अमेरिकी समाज में मानवाधिकार की स्थिति बहुत बिगड़ गयी है।

मार्च माह से अमेरिकी सरकार ने नये कोरोना वायरस महामारी के खतरे के बावजूद एक हजार से अधिक बिना साथियों के बच्चों को मेक्सिको, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और होंडुरास के लिए प्रत्यावर्तन किया। कुछ बच्चों को सीमा पर ठहरना पड़ा और उनमें कुछ की हालत नाजुक है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष ने अपने वक्तव्य में कहा कि अमेरिका ने ऐसा कर इन बच्चों को "सुरक्षा की कमी के गंभीर खतरे" में रखा जाएगा।

इस साल महामारी से अमेरिकी राजनीतिज्ञों का घमंड, स्वार्थ, ठंडा-खून और क्रूरता देखा गया है। इनकी आंखों में न केवल ये बच्चे, बल्कि वृद्धाश्रम में रहने वाले बूढ़े आदमियों को भी बोझ समझा गया है और उन्हें "कचरा" के भांति निपटाया जाता है। अमेरिका के कुछ स्टेटों ने वृद्धाश्रम संस्थाओं को नये कोरोना वायरस के रोगियों के लिए बिस्तर तैयार करने का आदेश दिया। और यहां तक कि टेक्सास के उप राज्यपाल डैन पैट्रिक ने मार्च माह में पत्रिका में लेख जारी कर बुजुर्गों को स्वेच्छा से "बलिदान" करने का आहवान किया।

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार अब अमेरिका में नये कोरोना वायरस से संक्रमित रोगियों में से 11 प्रतिशत वृद्धाश्रम संस्थाओं से आये हैं। एक तिहाई भाग के मृतक भी वृद्धाश्रम संस्थाओं से संबंधित हैं। न्यूयार्क के संसद सदस्य रोन किम ने कहा कि सरकार समाज में कमजोर समूह का संरक्षण करने में असमर्थ है। वायरस किसी भी नस्ल, नागरिकता या अमीर और गरीब का फर्क नहीं करता है। लेकिन अमेरिकी सरकार ने महामारी की रोकथाम में उन सबसे कमजोर समूहों को छोड़ दिया जिनमें बुजुर्ग, बाल बच्चे, गरीब और अल्प जातीय लोग शामिल हैं।

जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ आदि संस्थाओं की जांच के अनुसार अमेरिका में महामारी के पुष्ट मामलों में 52 प्रतिशत और मृतकों में 58 प्रतिशत अफ्रीकी मूल के लोग हैं। लेकिन अमेरिकी जनसंख्या में अफ्रीकी मूल का भाग केवल 13.4 प्रतिशत है। सीएनएन की रिपोर्ट है कि श्वेतों की तुलना में अश्वेतों की जीवन स्थिति, वातावरण और स्वास्थ्य अधिक खराब है। इसलिए उन्हें नये कोरोना वायरस संक्रमण के सामने अधिक कमजोर भी हैं। और यह भी मौजूद है कि महामारी की स्थिति में अल्प संख्यक जातीयों और गरीब लोगों की बेराजगारी दर भी अधिक रही है। अमेरिकी श्रमिक मंत्रालय के आंकड़े हैं कि अप्रैल में अमेरिका में अफ्रीकी मूल की बेरोजगारी दर 6.7 प्रतिशत से 16.7 प्रतिशत तक बढ़ गयी है।

वास्तव में बाल बच्चों, गरीब लोगों और अश्वेतों की बिगाड़ती स्थितियों का बीते दर्जनों सालों में अमेरिका में असमानता का परीणाम है। और इधर के वर्षों में अमेरिका में इन कमजोर समूह की स्थिति और अधिक बिगड़ने लगी है। अमेरिका की "स्वतंत्रता की घोषणा" में यह निर्धारित है कि हरेक व्यक्ति की समानता कायम होनी चाहिये। लेकिन 20 मई को "टाइम्स वीकली" ने निष्कर्ष निकाला है कि नये कोरोना निमोनिया महामारी के सामने अमेरिकी लोकतंत्र की विफलता जाहिर हुई।

( हूमिन )

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