डोनाल्ड ट्रम्प ने सदैव सियासत को विज्ञान से ऊपर रखा है

2020-05-19 17:42:30
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प सदैव सियासत को विज्ञान से ऊपर रखते हैं और टीके के प्रति वे भी संदेहपूर्ण रुख अपनाते हैं। यहां तक कि उन्होंने जलवायु परिवर्तन को चीन की "धोखेबाजी" कहा। राष्ट्रपति बनने के बाद उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया। हाल ही में ट्रम्प ने अमेरिका के शीर्ष वायरस विशेषज्ञ रिक ब्राइट को बर्खास्त करने का फैसला लिया। जिससे पूरे वैज्ञानिक समुदाय को झटका लगा।

रिक ब्राइट ने देश के टीका विकास संस्थान का नेतृत्व किया, पर उन्होंने ट्रम्प द्वारा प्रचारित दवा उपचारों को बढ़ावा देने से इनकार कर दिया। ट्रम्प को विश्वास है कि उनकी दवा महामारी की स्थिति को पूरी तरह से उलट देगी।

अमेरिका के वयोवृद्ध स्वास्थ्य प्रशासन के अनुसंधान के मुताबिक हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और इससे संबंधित क्लोरोक्वीन के प्रयोग से नये कोरोना वायरस रोगी के उपचार में मदद नहीं मिलेगी। और इसके प्रयोग से कुछ रोगियों की मृत्यु होने की संभावना है। रिक ब्राइट ने कांग्रेस को अपनी गवाही में कहा कि वायरस से लड़ने वाले मार्ग का सियासत नहीं, पर विज्ञान के जरिये नेतृत्व किया जाना ही चाहिये।

इससे पहले अमेरिकी सीडीसी का राष्ट्रीय प्रतिरक्षण और श्वसन संबंधी रोग केंद्र की प्रधान नैंसी मेसोन्नेर ने फरवरी में ही यह चेतावनी दी कि नये कोरोना वायरस का अमेरिका में फैलाव होने का खतरा मौजूद है। लेकिन स्टॉक मार्केट क्रैश होने के कारण ट्रम्प ने नैंसी मेसोन्नेर के खिलाफ नाराजगी जतायी। उन्हों ने नैंसी मेसोन्नेर को बर्खास्त करने की धमकी भी दी। ताकि अमेरिकी लोगों के बीच "अनावश्यक" शंका पैदा न करे।

इस पर पूर्व ओबामा सरकार के एक पदाधिकारी रोन क्लेन ने कहा कि राष्ट्रपति ने सरकार में वैज्ञानिकों को स्पष्ट संदेश भेजा है कि जो लोग सच्चाई बताने की हिम्मत करते हैं उन्हें कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका का महामारी विरोधी प्रदर्शन इतना खराब क्यों है? इसका जवाब राजनीतिक हितों के लिए विज्ञान की बलि देने की परंपरा में ही होता है।

( हूमिन )

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