अमेरिका में कोरोना वैक्सीन के विकास पर उठा संदेह
इधर के समय में विश्व के अनेक देशों में नए कोरोना वायरस के टीके का अनुसंधान किया जा रहा है। लेकिन अमेरिका में कोरोना वैक्सीन के विकास पर संदेह उठाया जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 मई को व्हाइट हाउस में कहा कि अमेरिका ने 11 जनवरी से ही कोरोना वैक्सीन का अनुसंधान करना शुरू कर दिया था और इस साल के अंत तक टीका उपलब्ध होने की आशा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चीन ने 12 जनवरी को विश्व स्वास्थ्य संगठन को नये कोरोनोवायरस का जीन अनुक्रम साझा किया था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प के अनुसार अमेरिका ने इससे पहले ही टीके का अनुसंधान शुरू कर दिया था। इसका मतलब है कि अमेरिका को बहुत पहले ही इस वायरस की जानकारी मिल गई थी। और यह सवाल भी है कि जब अमेरिका ने बहुत पहले ही टीके का अनुसंधान करना शुरु कर दिया था, तो अमेरिकी सरकार ने देश में महामारी की रोकथाम का कदम क्यों नहीं उठाया। इस बात को लेकर अमेरिका के नेटिजनों ने आलोचना की है कि अमेरिकी राजनीतिज्ञों ने दिसंबर से मार्च माह तक समय को बर्बाद किया, यह ट्रम्प और उन राजनीतिज्ञों की गलती है।
इसके अतिरिक्त अमेरिका के चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष के अंत तक टीके का उत्पादन करने की संभावना कम है। फिलाडेल्फिया शहर के बाल बच्चे अस्पताल के वैक्सीन शिक्षा केंद्र के प्रधान पॉल ऑफिट ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित समय सारिणी बहुत जल्दी है, वैज्ञानिक अभी भी नहीं जानते कि कौन-से टीके पर काम करें।
उधर, बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के विशेषज्ञ पीटर जे होटेज़ ने कहा कि सुरक्षित और प्रभावी टीका प्रदान करने का समय संभवत: अगले वर्ष की दूसरी छमाही में है, जो एक रिकॉर्ड ही माना जाएगा। लेकिन अमेरिकी सरकार ने मेडिसन कंपनियों से टीका अनुसंधान में गति देने की मांग की, जिससे टीके की सुरक्षा पर संदेह जताया गया है।
ब्रिटिश मीडिया "गार्जियन" के एक लेख में कहा गया है कि नये कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम में अमेरिका ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग करने से इनकार किया। व्हाइट हाउस ने आगामी जून माह में आयोजित विश्व टीका शिखर सम्मेलन में भाग लेने की योजना नहीं बनायी है और इससे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के प्रयासों को विघटित किया जाएगा और नये तनाव, अनिश्चितता और असुरक्षा पैदा किये जाएंगे।
( हूमिन )