जी-7 विदेशी मंत्रियों की बैठक में पोम्पेओ के "वुहान वायरस" का फिर से विरोध किया
25 मार्च को आयोजित जी-7 समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक में, विभिन्न देशों के विदेश मंत्रियों ने वायरस के प्रसार को रोकने के लिये मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की। लेकिन जब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने वायरस को "वुहान वायरस" कहने का प्रस्ताव पेश किया, तो अमेरिका और यूरोप असहमत थे। बैठक में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया। पूर्व अमेरिकी गणमान्य व्यक्तियों और शिक्षाविदों ने पोम्पेओ के इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति की पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक सुसैन राइस ने कहा, यह कितना संकीर्ण और दुखद है, यह प्रशासन पूरी तरह से भयानक है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा उप सहायक बेन रोदेस ने कहा कि दुनिया के किसी अन्य देश ने इस वायरस को "चीनी वायरस" या "वुहान वायरस" नहीं कहा है, और न ही ट्रम्प या पोम्पेओ के किसी भी नस्लवादी नामों का उपयोग किया। कुछ हद तक, यह कोई भूराजनीतिक रणनीति नहीं है।
नाटो में स्थित पूर्व अमेरिकी राजदूत इवो डोल्ड ने कहा, अतीत वैश्विक संकट में,अमेरिका आम तौर पर दुनिया को गठबंधन बनाने और तत्काल समस्याओं को हल करने के लिए संयुक्त कार्रवाई करने का नेतृत्व करता था। लेकिन वर्तमान संकट में, हम नस्लवादी आरोप के खेल में सहयोगियों को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका के पूर्व उप-सचिव ब्रेट मैकगॉक ने कहा, न्यूयॉर्क शहर का मुर्दाघर भरा हुआ है और अस्पताल की स्थिति बहुत गंभीर है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अमेरिका महामारी का नया केंद्र बन गया है। अमेरिकी संक्रमण और मौतों के जल्द ही चरम पर पहुंचने की संभावना है, लेकिन अभी तक जीवन रक्षक उपकरण न्यूयॉर्क में नहीं पहुंच सके हैं। लेकिन आखिर वायरस का नाम जारी करना जी-7 बैठक का एजेंडा कैसा हो सकता है?
अमेरिका में ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ राजनयिक शोधकर्ता वैली नस्र ने कहा, पोम्पेओ के "वुहान वायरस" का तर्क अप्रासंगिक है, लेकिन चीन लोकप्रियता हासिल कर रहा है।
अंजली




