डब्ल्यूएचओः डीआरसी में इबोला का प्रकोप अब भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा है
विश्व स्वास्थ्य संगठन(डब्ल्यूएचओ) ने 12 फरवरी को जिनेवा में घोषणा की कि कांगो किंशासा में इबोला का प्रकोप अभी भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा है।
डीआरसी में डब्ल्यूएचओ की आपातकालीन समिति ने 12 फरवरी को बैठक बुलाई। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक तन देसाई ने बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, आपातकालीन समिति ने कांगो किंशासा में इबोला का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के रूप में पहचाने जाने का सुझाव दिया, और वे इस सुझाव को स्वीकार करते हैं।
तान देसाई ने कहा कि डब्ल्यूएचओ ने कांगो किंशासा में इबोला के प्रकोप पर जोखिम का मूल्यांकन कियाः डिआसी देश व क्षेत्र में एक उच्च प्रसार जोखिम है, और वैश्विक स्तर पर इसका प्रसार जोखिम कम है।
तान देसाई ने यह भी कहा कि पूर्वी कांगो किंशासा में प्रकोप के नियंत्रण में एक "बहुत सकारात्मक संकेत" दिया है, उम्मीद है कि आपात समिति की अगली बैठक में प्रकोप के अंत की घोषणा कर सकती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, अगस्त 2018 में कांगो किंशासा में इबोला के प्रकोप के बाद से 2,200 से अधिक लोग मारे गए हैं और 3,400 से अधिक संक्रमित हुए हैं। यह इतिहास का दूसरा सबसे गंभीर इबोला प्रकोप है। पिछले साल जुलाई में, डब्ल्यूएचओ ने डीआरसी में इबोला का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपादा होने की घोषणा की।
अंजली