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चीन और भारत ब्रिक्स प्रणाली में बहुपक्षीय सहयोग मजबूत करेंगे

2019-11-14 16:06:59
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ब्रिक्स देशों की 11वीं शिखर बैठक 13 से 14 नवम्बर को ब्राजील की राजधानी ब्रासीलिया में आयोजित हुई। स्थानीय समयानुसार 13 नवम्बर को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारतीय प्रधआनमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्ता की। वार्ता में शी चिनफिंग ने बताया कि दूसरे चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो में भारत के सौदा रकम की विकास दर सबसे ऊंची है। चीन भारत द्वारा चीन के प्रति निर्यात बढ़ाने का स्वागत करता है। दोनों पक्षों को द्विपीय व्यापार व निवेश के पैमाने का विस्तार करना चाहिए और ऊर्जा, चिकित्सा, टेलिकॉम तकनीक और बुनियादी संरचनाओं के निर्माण आदि क्षेत्रों में सहयोग की नयी संभावनाओं की खोज करनी चाहिए।

भारत के विद्वानों ने भी चीन-भारत आर्थिक व व्यापारिक सहयोग पर गहरी नजर रखी है। भारतीय नेहरू विश्वविद्यालय की अंतर्राष्ट्रीय संबंध अनुसंधान संस्था के प्रोफेसर स्वर्ण सिंह ने कहा कि चीन में सुधार व खुलेपन के पिछले 40 सालों में चीन ने तेज विकास हासिल किया है। इधर के सालों में भारत में चीन के निवेश में बड़ा इजाफा हुआ है। चीन से आयातित कई उत्पाद भारत के पास नहीं है। इसलिए तथाकथित अनुकूल घाटे ने वास्तव में भारत को बड़ा लाभ दिया है। उन्हें विश्वास है कि दोनों देशों की सरकारें व्यापारिक अनुकूल संतुलन का हल करने की कोशिश करेंगी। चीन और भारत के बीच संतुलित विकास दोनों देशों के भविष्य के विकास के लिए बहुत लाभदायक है।

चीन स्थित भारतीय राजदूत विक्रम मिस्री ने दूसरे चीन अंतर्राष्ट्रीय आयात एक्सपो (सीआईआईई) में दोनों देशों के उद्यमों के बीच सिलसिलेवार व्यापारिक समझौते की हस्ताक्षर रस्म में भाग लिया। उन्होंने आशा जताई कि सीआईआईई और ब्रिक्स जैसी सिलसिलेवार सहयोग प्रणालियों से दोनों के बीच विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

आर्थिक विकास से भविष्य की रचना करना वर्तमान ब्रिक्स देशों की 11वीं शिखर बैठक की मुख्य थीम है। इधर के सालों में अर्थतंत्र, वित्त, व्यापार और विकास आदि विभिन्न क्षेत्रों में यथार्थ सहयोग निरंतर गहरा हो रहा है। अहम अंतर्राष्ट्रीय मामलों में विभिन्न देशों का संपर्क निरंतर मजबूत हुआ है। हालिया अंतर्राष्ट्रीय परिस्थिति में ब्रिक्स देश कैसे बहुपक्षीयवाद को आगे बढ़ाकर ब्रिक्स सहयोग के दूसरे स्वर्णिम दशक का निर्माण कर सकते है? इस की चर्चा में भारतीय ग्लोबल थिंक टैंक केंद्र के चीनी अनुसंधान केंद्र के प्रमुख प्रसून शर्मा ने कहा कि विभिन्न देशों को आर खुलेपन के रुख से खुलेपन और सहयोग का सहनिर्माण करना चाहिए। ब्रिक्स प्रणाली में चीन और भारत आर्थिक व व्यापारिक सहयोग को मज़बूत करने, इंटरनेट तकनीक से आतंकवादी पर प्रहार करने और वैश्विक प्रशासन के नये तरीकों की समान खोज करने आदि तीन क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं।

इधर के वर्षों में ब्रिक्स देशों ने विकास में सिलसिलेवार मौके और चुनौतियों का सामना किया है। ब्रिक्स प्रणाली में दो एशियाई सदस्य देशों होने के नाते चीन और भारत को सहयोग का निरंतर विस्तार कर विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को गहरा करना चाहिए, ताकि अगले स्वर्णिम दशक की समान रचना की जा सके।

(श्याओयांग)


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